ओओओओःह्ह्ह.. भाभी चुदाई की कहानी

यह उस समय की बात है जब मैं 20 साल का था. बरे भाई की शादी सिर्फ़ एक साल ही हुआ था. हम दो भाई और एक बहन है जिसकी शादी पहले ही हो गयी है. मेरे माता पिता बहुत ही धार्मिक बिचार के है और हमेशा धर्म करम मे लगे रहते है. मेरे बारे भाई का रेडीमेड कपरो का कारोबार है और अक्सर वो अपने काम के सिलसिले मे दूसरे सहर मे टूर पर जाते रहते हैं. मैं तब लॉ पढ़ रहा था. मेरी भाभी मुझको बहुत चाहती थी, क्यूंकी एक मैं ही तो था जिससे कि भाभी बातचीत कर सकती थी खास कर जब भैया बिज़्नेस के काम से ऑफीस या टूर पर बाहर जाते थी. मेरी भाभी बहुत प्यार से हुमारा ख्याल रखती थे और कभी एह अहसास नही होने देती कि मैं घर पर अकेला हूँ. वो मुझे प्यार से लाला कह लार पुकरती थे और मई हुमेशा उनके पास पास रहना पसंद करता था. वो बहुत ही सुंदर थी, एकदम गोरी चित्ति लंब लुम्बे काले बाल करीब 5’3” और फिगर 36-24-38 था. मई उनकी चुची पर फिदा था और हुमेशा उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहता था.

जब-भी काम करते वक़्त उनका आँचल उनकी छाती पर से फिसल कर नीचे गिरता था या वो नीचे झुकती, मैं उनकी चूंची की एक झलक पाने के कोशिश करता था. भाभी को इस-बात का पता था और वो जानबूझ कर मुझे अपनी चूंची का जलवा दिखा देती थी. एह बात तब हुआ जब मेरे भैया काम के सिलसिले मे शादी के बाद पहली बार बाहर गये. मा और बाबूजी पहले से ही तीर्थ यात्रा पर हरिद्वार गये हुए थे और करीब एक महीने बाद लौटने वाले थे. भाभी पर ही घर सम्हालने की ज़िम्मेदारी थे. भाई मुझे घर पर रख कर पढ़ाई करने की सलाह दिए थे, क्यूंकी एग्ज़ॅमिनेशन नज़दीक था और साथ ही मे भाभी को भी अकेलापन महसूस ना हो. अगले दिन सुबह के 10 बजे की बस से भैया चले गये. हम दोनो भैया को बस स्टॅंड तक बीदा करने गये हुए थे.भाभी उस्दीन बहुत ही खुस थी.

जब हुमलोग घर पहुँचे तो उन्होने मुझे अपने कमरे मे बुलाया और कहा कि उन्हे अकेले सोने की आदत नही है और जबतक भैया वापस नही आती, मैं उनके कमरे मे ही सोया करूँ. उन्होने मुझसे अपनी किताब वगेरा वहीं ले कर पढ़ने को कहा. मैं तो ख़ुसी से झूम उठा और फ्टाफ़ट अपनी टेबल और कुछ किताबे उनके कमरे मे पहुँचा दिया. भाभी ने खाना पकाया और हम दोनो साथ साथ खाना खाया. आज वो मुझपर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थी और बार बार किसी ना किसी बहाने से अपनी चूंची का जलवा हमे दिखा रही थी. खाने के बाद भाभी ने हमे फल खाने को दिया. फल देते वक़्त उन्होने मेरा हाथ मसल दिया और बारे ही मादक अदा से मुस्कुरा दिया. मैं शर्मा गया क्यूंकी एह मुस्कान कुछ अलग किस्म की थी और उसमे शरारत झलक रही थी. खाने के बाद मैं तो पढ़ने बैठ गया और वो अपने कपरे चेंज करने लगी. गर्मी के दिन थे और गर्मी कुछ ज़यादा ही था. मैं अपना शर्ट और बनियान उतार कर केबल पॅंट पहन कर पढ़ने बैठ गया. मेरी टेबल के उपर दीवार पर एक शीशा टंगा था और भाभी को मैं उस शीशे मे देख रहा था. वो मेरी तरफ देख रही थी और अपना कपड़ा उतार रही थे. वो सोच भी नही सकती थे कि मैं उनको शीशे के अंदर से देख रहा था. उन्होने अपना ब्लाउस खोल कर उतार दिया. है क्या मदमस्त चूंची थी. मैं पहली बार लेस वाली ब्रा मे बँधे उनके चुची को देख रहा था. उनकी चूंची काफ़ी बरी बरी थी और वो ब्रा मे समा नही रही थी. आधी चूंची ब्रा के उपर से झलक रही थी.कापरे उतार कर वो बिस्तेर पर चिट लेट गयी और अपने सिने को एक झीनी से चुननी ढक लिया. एक पल के लिए उनके पास जा कर उनकी चूंची को देखु, फिर सोचा एह ठीक नही होगा और मैं पढ़ने लग गया. लेटते ही वो सो गयी और कुछ ही देर मे उनका दुपपत्ता उनके छाती से सरक गया और साँसों से साथ उठती बैठती उनकी मस्त रसीली चूंची साफ साफ दिख रहा था. रात के बारह बज चुके थे. मैं पढ़ाई बंद किया और बत्ती बुझाने ही वाला था कि भाभी की सुरीली आवाज़ मेरे कानो मे परी, “लाला इन्हा आओ ना.” मैं उनकी तरफ बढ़ा, अब उन्होने अपनी चूंची को फिरसे दुपपत्ते से ढँक लिया था. मैने पूछा, “क्या है भाभी?’ उन्होने कहा, “लाला ज़रा मेरे पास ही लेट जाओ ना, थोरी देर बात करेंगे फिर तुम अपने बिस्तेर पर जा कर सो जाना.”

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पहले तो मैं हिचकिचाया लर्किन फिर मान गया. मैं लूँगी पहन कर सोता था और अब मुझको पॅंट पहन कर सोने मे दिक्कत हो रही थी. वो मेरी परेशानी ताड़ गयी और बोली, “कोई बात नही, तुम अपनी पॅंट उतार दो और रोज जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ. शरमाओ मत. आओ ना.” मुझे अपने कान पर यकीन नही हो रहा था. लूँगी पहन कर मैं ने लाइट बंद कर दी और नाइट लॅंप जला कर मैं बिस्तेर पर उनके पास लेट गया. जिस बदन को महीनो से निहारता था आज मैं उसी के पास लेटा हुआ था. भाभी का अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. मैं ऐसे लेटा था कि उनकी चूंची बिल्कुल नंगी मालूम दे रहा था, क्योंकि थोरा सा हिस्सा ही ब्रा मे छुपा था. क्या हसीन नज़ारा था. तब भाभी बोली, “इतने महीने से अकेले नही सोई हूँ और अब आदत नही है अकेले सोने की.” मैं बोला, “मैं भी कभी किसी के साथ नही सोया.” वो ज़ोर से खिलखिलाई और बोले, “अनुभव ले लेना चाहिए जब भी मौका मिले, बाद मे काम आएगा.” उन्होने मेरा हाथ पकर कर धीरे से खींच कर अपने उभरे हुए चूंची पर रख दिया और मैं कुछ नही बोल पाया लेकिन अपना हाथ उनके चूंची पर रखा रहने दिया. मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है, ज़रा सहलाओ ना.” मैने ब्रा के उपर से ही उनकी चूंची को सहलाना शुरू किया. भाभी ने मेरा ब्रा के कप मे घुसा कर सहलाने को कहा और मेरा हाथ ब्रा के अंदर कर दिया. मैने अपना पूरा हाथ अंदर घुसा कर ज़ोर ज़ोर से उनकी चूंची को रगरना शुरू कर दिया. मेरी हथेली की रगर पा कर भाभी के निपल कड़े हो गये. मुलायम माँस के स्पर्श से मुझे बहुत अक्च्छा लग रहा था लेकिन ब्रा के अंदर करके मसल्ने मे मुझे दिक्कत हो रही थी. अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा कर बोली, “लाला यह ब्रा का हूक्क खोल दो और ठीक से सहलाओ.” मैने काँपते हुए हाथों से भाभी की ब्रा की हूक्क खोल दिया और उन्होने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल दिया. मेरे दोनो हाथो को अपने नंगी छाती पर ले जा कर वो बोली, “थोरा कस कर दबओ ना.” मैं भी काफ़ी उत्तेजित हो गया और जोश मे आकर उनकी रसीली चूंची से जम कर खेलने लगा.

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