सेक्स चैट से चूत चुदाई जयपुर में

होटल के कमरे में सेक्स, चुदाई
और हम होटल आ गए।

दिल में अजीब एहसास था… एक तो चुदाई के लिए मेरी चूत मचल रही थी और ऊपर से लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं नंगी ही होटल में आई हूँ।

खैर हम अपने कमरे में आ गये।

वो बोला- कुछ खाना है तुम्हें?
मैं- नहीं तुम खा लो!

वो बोला- मेरा तो कुछ और ही खाने का मन है!
और अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया।

उसके हाथ में एक अलग ही जादू था, उसके स्पर्श करते ही नाभि के पास एक अजीब सी गुदगुदाहट हुई और ऐसा लगा जैसे मेरी योनि में जाकर खत्म हो गई।

वो बोला- कितने समय रूकोगी?
कहते हुए मुझे बाँहों में भर लिया।

मैंने कहा- मुझे शाम तक जाना है।

यह सुनते ही उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और होंठों को जोर-जोर से चूसने लगा।
मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी।
वो कभी होंठों को हल्का सा काट लेता था।

वो मुझे लगातार चूमे जा रहा था, कभी होंठ, कभी वक्ष तो कभी गर्दन पर चुम्बन लेते हुए प्यार से मेरी नाभि को सहला रहा था और मैं उसके इस कामुक स्पर्श से मदहोश हुए जा रही थी।

उसने मेरे टॉप के अन्दर हाथ डाल कर मेरी चूचियाँ दबानी शुरू की।
गजब का अहसास था वो…!!

फिर उसने मेरे टॉप से हाथ निकाल कर मेरी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया।
मैं भी उसकी शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उसके सीने को सहला रही थी।

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वो सहलाते हुए मेरी जांघों से मेरी चूत की तरफ बढ़ गया।
उस एहसास से मेरी मक्खन जैसी चिकनी चूत ने अपना कामरस छोड़ दिया था।

मैं पूरी मदहोश हो चुकी थी, मेरी गीली चूत लन्ड को निगलने के लिए बेताब थी।
मैंने कहा- राहुल, आज मुझे इतना चोदो कि मुझे ये चुदाई हमेशा याद रहे।

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यह सुनते ही उसने मेरा टॉप और स्कर्ट उतार दी।
अब मैं सिर्फ ब्रा पेन्टी में थी।

वो मेरी नंगी पीठ पर चुम्बन करने लगा और हाथों से मेरे पेट, नाभि, मम्मों को सहलाने और दबाने लगा, मेरी ब्रा का स्ट्रेप कंधों से नीचे कर दिया और चुम्बन करने लगा।

फिर उसने मुझे अपनी बाँहों में उठाकर बेड पर लिटा दिया।

वो अपनी शर्ट उतारने लगा और मैंने उसकी जीन्स और अंडरवियर खींच कर नीचे कर दी और उसका 7 इंच का लंड तना हुआ बाहर आ गया जिसे देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया और मैंने उसको पलट कर बिस्तर पर गिरा दिया।

मैं उसके पेट को चूमते हुए उसके आँडों को चूमने लगी, फिर लण्ड पर जीभ फेरते हुये सुपारे को मुँह में भर लिया।
मेरी 5 मिनट की लंड चुसाई में वो दो बार झड़ गया।

फिर उसने मुझे नीचे पटका और मेरी ब्रा को उतार फेंका। ब्रा अलग होते ही मेरे मुस्म्मियों जैसे मम्मे उसके सामने थे, जिन पर छोटE छोटे भूरे से रंग के निप्पल थे।

वो अपनी जीभ निकाल कर मेरी फूली-फूली मुस्म्मियों पर टूट पड़ा और चूसने लगा। वो उन रस भरे काम-फलों को हल्के से दांतों से काट रहा था।

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अब मेरी चूत में खुजली होने लगी थी, मैं बार-बार अपने हाथ से चूत को सहला रही थी।
राहुल- उम्म.. उम्म्म आह उम्मह…!

मैं- सीय.. आह उम्मह.. उम्म्म अम्म…!
वो मेरी चूचियों को पूरा अपने मुँह में लेना चाहता था पर कर नहीं पा रहा था।

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