सील बंद गांद की पहली चुदाई की कहानी

लास्ट पार्ट में आपने पढ़ा मेरी जेठानी बच्चो को लेकर ऑफीस गयी थी. तब मेरे और उनके भाई के बीच रोमॅन्स हुआ, और हम सेक्स कर रहे थे. फिर मैने उनके भाई को सेक्स के दौरान बताया की मुझे और शीला दीदी को उनका लंड रोज़ चाहिए था. अब आयेज.

रूपाली (विजय के कान के करीब जेया कर एअर बीते करके): जब तक आप यही हो, तब तक मुझे और शीला दीदी को छोड़ते रहना.

विजय ( शॉकिंग फेस): शीला दीदी को क्यूँ? तुम पागल हो क्या?

रूपाली ( चुड़वते हुए): भोले मत बनो आप. कल रात दीदी की चीखें सुनी है. आपने बहुत आचे से छोड़ा है दीदी को. उनका तो पूरा चेहरा खिला दिया अपने. मॉर्निंग में दीदी से बात हुई मेरी. हम दोनो यहा आचे से एंजाय करे, इसलिए वो बच्चो को लेकर चली गयी.

विजय: श मी गोद. तो ये आप दोनो की प्लॅनिंग थी? कब से आप मुझसे छुड़वाना चाहती थी?

रूपाली: मेरा तो आप से कोई प्लॅनिंग नही था. पर दीदी को क्या हुआ आपसे छुड़वा लिया. उनसे मुझे थोड़ी जलन हो रही थी. ऐसा तगड़ा मर्द मेरी चुदाई ना करे ऐसा मैं होने नही देती. और आज रात दीदी ने आपके लिए एक सर्प्राइज़ प्लान किया है.

विजय ( एग्ज़ाइटेड हो कर मेरी तबाद-तोड़ चुदाई करते हुए): वाउ तुम दोनो तो कमाल की हो. मुझे तो पता नही था इंडिया आ कर 2-2 सेक्सी विमन मिलेंगी. तुम दोनो की अब मैं आचे से लूँगा.

अब विजय ने मुझे घोड़ी बना दिया, और पीछे से छूट में लंड डाल दिया. वो मेरे बाल पकड़ कर रफ्ली चुदाई करने लगे. मेरी तो आ निकल गयी. पुर रूम में मेरी चीखें गूँज रही थी. क्या चुदाई करते थे वो.

विजय ने मुझे डॉगी स्टाइल में भी छोड़ा. मैं 2-3 बार तो झाड़ गयी. क्या स्टॅमिना था वो बंदे में. मैं सोच रही थी शीला दीदी इसीलिए इतने मज़े से छुड़वा रही थी. ऐसा मर्द मिले तो सागा भाई हो तो भी क्या फराक पड़ता है.

अब विजय ने कुछ ऐसा किया की मैने कभी किसी से एक्सपेक्ट ही नही किया था. उन्होने मुझे बेड पर सीधा लिटाया, और छूट में लंड डाला. फिर गोदी में उठा लिया. मेरे दोनो हाथ उनके गले में थे, और पैर कमर पर सपोर्ट कर रहे थे. मुझे तो कुछ समझ में नही आया ये क्या हो रहा था.

विजय का लंड अभी भी मेरी छूट में था. अब वो मुझे गोदी में उठा कर खड़े-खड़े चुदाई करने लगे. पूरा लंड छूट में उतार रहा था. मेरी छूट में दर्द हो रहा था. पर ये शैतान तक नही रहा था. थोड़ी देर बाद मुझे नीचे उतरा, मैं बहुत बुरी तरह तक गयी थी.

रूपाली: आप क्या हो यार? इतनी चुदाई कैसे कर लेते हो. मैं चार बार झाड़ चुकी हू. मेरी छूट में सूजन आ गयी.

विजय: रूपाली तेरी जैसी औरत मिल जाए तो दिन-रात छोड़ता राहु. मैने लाइफ में कभी तेरी जैसी को नही छोड़ा. बहुत सेक्सी चीज़ हो तुम. मज़ा आ गया तेरी छूट को लेकर. और अब तो तुम्हारी गांद भी फाड़ना बाकी है.

रूपाली ( डरते हुए): नही प्लीज़, आपका बहुत बड़ा है, दर्द होगा.

विजय: धीरे से करूँगा प्रॉमिस. अब मैं तुम्हारी बड़े प्यार से गांद मारूँगा.

विजय ने मुझे आचे से कन्विन्स किया की मैं माना नही कर पाई. मैने भी उनको टाइट हग कर लिया. अब हम दोनो किस करने लगे, और विजय मेरे पीछे आ गये. फिर वो मेरे दोनो बूब्स को दबाने लगे. मैं मदहोश होने लगी. मैं छूट में होने वाला दर्द भूल गयी.

अब विजय ने मुझे नीचे झुका दिया, और मेरी गांद उपर करके मेरी छूट चाटने लगे. मुझे वो बहुत अछा फील दे रहे थे. अब धीरे-धीरे वो छूट से लेकर गांद के च्छेद को चाटने लगे. मैं अपनी गांद छुड़वाने बहुत एग्ज़ाइटेड थी. अब उन्होने गांद में 2 उंगली डाली और अंदर-बाहर करने लगे.

मेरी तो आ निकल रही थी. थोड़ी देर बाद मुझसे लंड चुस्वाया और पूरा टाइट कर दिया. उसके बाद फिरसे मुझे घोड़ी बना दिया. अब उन्होने मेरी गांद पर लंड रखा. मैं थोड़ी दररी हुई थी, क्यूंकी पहली बार इतना मोटा लंड गांद में लेने वाली थी.

विजय ने 2-3 बार पुश किया, और तोड़ा लंड गांद फाड़ता हुआ अंदर चला गया. मेरे दोनो पैर काँप गये. बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था. मेरी आँखों से आँसू निकल गये, पर मैने सोच लिया था की ऐसा लंड लाइफ में कभी मिले ना मिले, तो जो भी हो जाए मुझे विजय से सब कुछ करवाना था.

विजय ने बड़े प्यार से लंड अंदर-बाहर करना स्टार्ट किया. 20-25 धक्को के बाद मुझे अछा लगने लगा. अब विजय ने पुर जोश में पूरा लंड गांद में उतार दिया. मेरी तो इतनी ज़ोर की चीखें पुर रूम में गूँज उठी.

विजय तोड़ा टाइम होल्ड किया और मैं रिलॅक्स हुई, तो वो गांद की चुदाई करने लगे. फिर मुझे भी मज़ा आने लगा. मैं भी पीछे के साइड धक्के मार रही थी. मेरे पर अब विजय के लंड का नशा हो रहा था.

रूपाली: और ज़ोर से छोड़ो मुझे. मेरी गांद फाड़ डालो. आप ही असली मर्द हो. मैं तो आप से आपकी रंडी बन कर चूड़ना चाहती हू. ई लोवे युवर फक्किंग स्किल. छोड़ो मुझे.

मेरी बातें सुन कर विजय ने मेरे बाल पकड़ लिए, और मेरी गांद में लंड पेलना शुरू कर दिया. 15-20 मिनिट के बाद लंड गांद में से निकाला, और छूट में डाल दिया. मेरी छूट तो गांद की चुदाई से ही गीली हो गयी थी, तो लंड एक झटके में चला गया. 10 मिनिट मुझे मिशनरी पोज़िशन में छोड़ने लगे.

फिर विजय ने मुझे कहा उनका निकालने वाला था, तो मैं नीचे घुटनो के बाल बैठ गयी. मैने उनका लंड चूसने लगी, और आचे से हिलने लगी. मैं उनकी आँखों में आइ कॉंटॅक्ट बना रही थी. मेरे अंदर एक रंडी जाग गयी थी, जो अपनी जेठानी के भाई से छुड़वा रही थी, और लंड चूस रही थी. विजय का बहुत सारा स्पर्म निकला जो मैं पूरा छत गयी.

मेरे फेस पर स्माइल थी, और मैं बहुत सॅटिस्फाइड थी. विजय ने भी मुझे स्माइल करते हुए उठाया, और मेरे होंठो को चूमने लगे. अब हम दोनो बेड पर सो गये, और एक-दूसरे को किस कर रहे थे.

थोड़ी देर बाद मैने जब उठने की कोशिश की, तो मुझसे चला नही जेया रहा था. मेरी गांद में बहुत दर्द हो रहा था. विजय ने मेरी बातरूम तक जाने में हेल्प की.

हम दोनो ने साथ में बातरूम में हॉट वॉटर से शवर लिया. विजय मुझे बहुत आचे से ट्रीट कर रहे थे. उन्होने बहुत प्यार से पूरी बॉडी को टवल से पोंचा, और मुझे गोदी में उठा कर बेडरूम में ले आए. खुद टवल लपेट लिया, और मुझे अपने हाथ से ब्रा पनटी पहना दी. फिर मुझे त-शर्ट और लेगैंग्स पहना दी. उसके बाद मेरे गाल पर किस किया, और मुझे आराम करने को बोला.

विजय: रूपाली आप आराम करो. मैं खाना बना कर देता हू. हम साथ में लंच करेंगे.

थोड़ी देर बाद वो मुझे अपनी गोदी में उठा कर टेबल पर ले गये. हमने एक ही प्लेट में खाना खाया. वो मुझे अपने हाथो से खिला रहे थे. ऐसा ट्रीट तो मुझे जिग्नेश ने भी नही किया था. मैं थोड़ी एमोशनल हो गयी थी. जब कोई चुदाई के बाद भी इतनी केर करे तो उसके लिए इज़्ज़त और बढ़ जाती है. लंच के बाद दोनो साथ में बैठ कर मोविए देख रहे थे.

मैं तो उनसे चिपक कर बैठ गयी थी. मेरा सर उनके कंधे पर था. हमारे हाथ एक-दूसरे के हाथ में थे. बीच-बीच में हम किस भी कर रहे थे. मैने कभी सोचा नही था की मुझे किसी गैर मर्द से इतना प्यार और इज़्ज़त मिलेगी.

जब शाम को शीला दीदी और बच्चे घर पर आए, तब मैं डिन्नर बना रही थी. शीला दीदी मेरे पास आई और मुझे पीछे से पकड़ लिया. मैं दर्र गयी. मेरे मूह से विजय निकल गया. दीदी ने मेरी और नॉटी स्माइल की, और मैं शर्मा गयी.

शीला: क्या बात है. तेरा चेहरा बता रहा है आज तूने भी विजय का मज़ा लिया है. कैसे किया?

मेरी देवरानी ने अब मुझे और विजय के बीच क्या हुआ सब बता दिया. और मैं कंफर्टबल हो गयी. क्यूंकी मुझे दर्र था की रूपाली को मज़ा नही मिला तो वो मेरे लिए ख़तरा बन सकती थी.

अब नेक्स्ट पार्ट में बतौँगी मैने और मेरी फॅमिली ने मेरे भाई के साथ कैसे मज़े लिए. आपको स्टोरी अची लगे तो मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे. और आपकी फीडबॅक कॉमेंट करे. कहानी अची लगे तो अपने दोस्तों से शेर करे.

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