स्कूल वाली दोस्त को चोदा

इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं चुपचाप उसके कमरे को तरफ गया तो दरवाज़ा खुला ही हुआ था।

मेरे अंदर जाते ही उसने दरवाज़ा बन्द कर दिया।
मैं अंदर गया तो वो बेड पर उलटी लेटी हुई थी।

मैं उसके पास जाकर बैठ गया और बात करने लगा। बात करते करते मैंने अपना एक हाथ उसके कंधे पे रख दिया।
जब उसने कुछ नहीं बोला तो फिर धीरे धीरे मैंने अपना हाथ उसके मोमों पर रख दिया और उनको दबाने लगा।

मेरे हाथ लगते ही उसने अपनी आँखें बंद कर ली।
मैंने अपने होंठो को उसके पास ले जा कर उसके होंठों पर रखा ही था उसकी सांसें गर्म होने लगी।

मैंने देर न करते हुए उसके होंठों को चूसने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।

मैं एक हाथ से उसके चूचियों को दबा रहा था, उसका साइज करीब 30 या 32 का रहा होगा।
फिर मैंने एक हाथ उसके निकर के अंदर डाला तो उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी और उसने अंदर पैंटी भी नहीं पहनी थी।
इस वजह से मुझे भी कोई परेशानी नही हुई चूत को कुरेदने में!

जैसे ही मैंने उंगली उसकी चूत के अंदर डालनी शुरू की तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया।
मैं समझ गया कि यह अभी कच्ची कली ही है… मैंने धीरे धीरे उसकी टी शर्ट को उतारा और फिर उसकी केपरी को और उसे पूरी नंगी कर दिया।

उसके होंठों का खूब रसपान करने के बाद उसके पेट को चूमता हुआ मैं उसकी चूत पर आ गया।
हम दोनों 69 की पोजिशन में आ गए, मैंने उसकी चूत को चाट चाट कर लाल कर दिया।

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उसने पहले तो मेरा लण्ड चूसने से मना कर दिया पर जब वो झड़ने वाली थी तब खूब जोर जोर से चूसने लगी।

मैंने टाइम खराब न करते हुए उसके दोनों टांगों को फैलाया और उसकी चूत पर अपना लण्ड सैट किया।
जैसे ही मैंने एक झटका मारा तो लण्ड फिसल कर बाहर निकल गया।
दूसरी बार फिर झटका मारा लण्ड फिर फिसल के बाहर निकल गया।

इस बार मैंने टेबल से तेल उठाया, पहले अपने लण्ड पर लगाया फिर उसकी चूत पर। इस बार मैंने फिर झटका मारा तो लण्ड चूत को चीरता हुआ चूत में समा गया और उसके मुँह से चीख निकल गई।

उसके होंठों को मैंने अपने होंठों से दबा रखा था जिससे उसकी चीख उसके मुंह में दबकर रह गई।
मैं कुछ देर वैसे ही पड़ा रहा, जब वो कुछ थोड़ा नॉर्मल हुई तो उसने अपनी गांड उठा कर खुद धक्के लगाने शुरु कर दिए।

मैं समझ गया कि चूत गर्म है तो मैंने धक्के लगाना शुरू कर दिया और इस बार वो भी नीचे से अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थी।

जब मैं थोड़ा ज्यादा जोर से धक्का मारता तो वो थोड़ा चीख पड़ती।
इस दौरान उसके मुँह से आहहह… आहह… ऊई मा मर गई… उफ्फ्फ… की आवाज़ें निकल रही थी।

करीब 10 मिनट की चुदाई में वो दो बार झड़ चुकी थी और मैं भी झड़ने वाला ही था तो मैंने झटके तेज तेज मारे।
उसकी तो जैसे जान ही निकल गई थी।
उसने मुझे कस कर पकड़ा और मेरे होंटों का रसपान करने लगी।

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जैसे ही मैं झड़ने को हुआ तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से निकाल कर अपना सारा वीर्य उसकी चूत के ऊपर ही छोड़ दिया।

जब हम दोनों अपने आप को साफ़ करने के लिए बाथरूम में गए तो मैंने देखा कि उसकी चूत पर खून लगा हुआ था।
वो यह सब देख कर डर गई।
मैंने उससे कहा- पहली बार चुदाई में ऐसा ही होता है।

उसके बाद मैं उसके भाई के कमरे में आकर सो गया और सुबह उन सब को विदा बोल कर वापस चंडीगढ़ आ गया।

और एक बार फिर मैंने उसे चंडीगढ़ में बुलाकर होटल में चोदा..

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दोस्तो, यह थी विकास की कहानी, विकास की जुबानी।
आप सब से अनुरोध है कि आपको ये कहानी कैसी लगी, इसके जवाब में अपनी मेल ऊपर दी गई ईमेल पर ही भेजें।
आप चाहो तो मुझे भी मेल की कॉपी कर सकते हो।

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