तो मेरी नजरें शरम से झुक गई और धीरे से उनका लण्ड दबा कर बोली- ये?
‘हाँ मेरी भोली सी गुड़िया इसी का तो पूछ रहा हूँ।’
तो मैं हंस दी, और शरमा कर बोली- बहुत प्यारा सा है।’
‘बिना देखे ही कह दिया प्यारा है।’ तो उनके सीने मैं मुंह छुपा कर मैं धीरे से बोली ‘आपने दिखाया ही नहीं तो फिर।’
‘देखोगी जान।’ तो मैं उनसे लिपट गई और अपने आप को ना रोक सकी।
‘कब से तरस रही हूँ सच्ची’। और वो एकदम से मुझसे लिपट गये उनकी पूरी जबान मेरे मुंह के अन्दर थी इतनी जोशीली इतनी गरम कि मैं पागल हो उठी। मेरे दोनो दूध दबा कर लाल कर दिये और मेरी चीख उनके मुंह मैं ही घुट गई मैं बुरी तरह तड़प उठी क्योंकि कि उनकी अंगुली एकदम से मेरी चूत मैं घुस पड़ी। मेरी पूरी चूत भीग गई। मेरे चूतड़ और गहराई से लेने के लिये उछलने लगे।
उनके गरम लण्ड के उपर रज की बूंदे आ गई। खूब चिकना हो गया उनका प्यारा सा लण्ड। मैं बेचैन हो कर सिसकी।
‘बस, ऊफ… बस ना प्लीज, दिखा ही दो ना अब, मेरी जान कब से तड़प रही हूँ।
मैंने उनसे अलग होने कि कोशिश कि तो मुझे फिर से लिपटा कर सिसके
‘क्या मेरी जान बताओ ना मुझे।’
‘मेरा, मेरा, उफ़ कैसे नाम लूं मैं मुझे शरम आती हैं श्याम।’
‘मेरी जान मेरा ये प्यारा तुम्हे पसंद है ना’
‘हां हां मेरी जान है यह तो, कितना प्यारा है’ मैं लण्ड दबा कर सिसक उठी। – तो बताओ ना अपनी जान का नाम।’
‘मत सताओ ना प्लीज उफ़ आह आह, मत करो ना मर जाऊंगी मैं सच्ची, ऊउइ नहीं इतनी ज़ोर से नही, दुखती है ना’
‘क्या दुखती है मेरी जान।’
हाय रे मां, मैं क्या करूं प्लीज, दिखा दो ना, अब ना तरसओ अपनी निक्को को।’
वो मेरे होंठ चूस कर सिसके – बस एक बार नाम ले दो मेरी जान।’
मेरी शरम से बुरी हालत थी मैं उनके सीने मैं मुंह छुपा कर सिसक उठी – मेरा आह मेरा वाला लण्ड … ऊउइ ऊनह ऊनह आह’
और वो मेरे होठों से झुम गये। और फिर हम दोनो अलग हुए तो वो उठे और मुझे अपने सीने से लगा कर बैठ गये और अब जो मेरी नज़र पड़ी तो मैं देखती रह गई। सावँला, सलोना, तना हुआ लण्ड
मेरी हथेली पर रखा हुआ था। मैं उसे देख रही थी और वो मेरे गोल, भरे भरे और तने हुए दूधों से खेल रहे थे और उनकी अंगुली धीरे धीरे मेरी चूत की दरार मैं उपर नीचे चल रही थी। बहुत मस्ती छाने
लगी थी। खूब तना हुआ उनका 7 इंच लम्बा और खूब ,मोटा गरम लण्ड बहुत हसीन लग रहा था जिसका सुपारा उनकी चिकनी रज से गीला हो रहा था। मेरे होंठो पर होंठ रख मेरी चूत दबा कर वो
सिसके –
‘जान कैसा लगा मेरा।’ तो मैं मस्त हो गई, – ‘बहुत प्यारा है सच्ची, उफ़ कितना बड़ा और मोटा है ये।’
‘खेलो ना इस से’ तो मैं धीरे लण्ड सहलाने लगी और उन्होने चूंची पर होंठ रगड़ कर उस पर जैसे ही जबान फैरी तो उन्होने मेरा चेहरा अपने सीने पर दबा लिया ।
‘आह आअह मेरी जान मेरी निको मेरी उफ़ उफ़ आह कितनी गरम अह चिकनी जबान है अह मज़ा आ गया’ ‘उफ़ मेरी प्यारी सी चूत। ऊम ऊम मेरी जान मेरे श्याम खूब ले लो मेरी आह पूरी ले लो आह ऊउइ। किस से खेलूं मेरी जान; मेरी मेरी अहा मेरी च च चूत से ऊफ’और मेरे मुंह में उनकी जबान घुस गई।
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