हेलो मेरा नाम राहुल है. मैं मध्य प्रदेश के छोटे से गाँव में रहता हू. ये कहानी मेरी गाओं की प्रिया की है. प्रिया की उम्र लगभग ४५ साल थी. वो बहुत संस्कारी औरत थी. घर का सारा काम अकेली संभालती थी. उसके दो बेटे थे – बड़ा नेहल १२ साल का और छोटा मनोज १० साल का.
प्रिया रोज़ सुबह ५ बजे उठ जाती थी. चूल्हे पे रोटी बनाती थी. बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करती थी, और फिर घर के बाकी काम में लग जाती थी. उसका पति नरेश ४८ साल का था. वो गाँव में ही एक छोटी सी किराना दूकान चलाता था.
सुबह ७ बजे दुकान खोलता था और शाम ८ बजे तक बैठा रहता था. तक के घर आता था, खाना खाता था, रेडियो पे थोड़ी देर बैठता था और फिर सो जाता था. दोनों के बीच रिश्ता बहुत अच्छा था. कभी बड़ी लड़ाई नहीं होती थी, बेड पे भी वो पुराण जोष बिलकुल खत्म हो चूका था.
नरेश बस ऊपर चढ़ जाता था. अपना काम जल्दी निकाल लेता था और सो जाता था. प्रिया चुप-चाप लेती रहती थी. मनन में थोड़ा दुख होता था, लेकिन बोलती नहीं थी. प्रिया की सबसे अच्छी सहेली थी सीमा. सीमा की उम्र भी लगभग ४५ साल थी. वो थोड़ी चंचल थी. सीमा के पति रमेश शहर में मजदूरी करते थे. महीने में एक-दो बार ही घर आते थे.
सीमा घर पे अकेले रहती थी. बच्चे अपने नाना-नानी के पास रहते. दोनों सहेलियां रोज़ शाम को प्रिया के आँगन में चारपाई पे बैठ के घंटों गप्पे लड़ाती थी.
एक दिन शाम को बात चल रही थी. सीमा ने मुस्कुराते हुए प्रिया से पुछा, “अरे प्रिया दीदी, सच बताओ न. नरेश भैया के साथ रात का स्केन अभी भी गरम है या ठंडा हो गया? सब ठीक-ठाक चलता है क्या?”
प्रिया ने शर्मा के सर झुका लिया और धीरे से बोली, “अरे सीमा, सब नार्मल ही चल रहा है यार. वो थक के आते है, जल्दी खत्म कर देते है. और क्या चाहिए अब इस उम्र में?”
सीमा आँख मार के ज़ोर से हस्सी और बोली अरे दीदी, कभी नरेश भैया ने तेरी बुर को ज़ुबां से चाट के देखा है क्या? या बस ऊपर चढ़ के झटपट अपना माल बाहर निकाल देते है?”
प्रिया का चेहरा एक-दम लाल हो गया. वो गुस्से से बोली, “क्या गन्दी बात करती है तू सीमा! ऐसे बोलना भी नहीं चाहिए. हम ये सब नहीं करते, कितनी गन्दी है तू”
सीमा फिर हस्सी और बोली, “अरे संस्कार-संस्कार! एक बार तरय कर के देख न दीदी. कितना ज़बरदस्त मज़ा आता है जब मर्द ज़बान से चाट-ता है. औरत का बदन आग बन जाता है. लाइफ एक ही बार मिलती है, बर्बाद मत करो, एन्जॉय करो थोड़ा!”
प्रिया गुस्से में उठ गयी और चली गयी. लेकिन उस रात उसके मनन में वो बातें घूमती रही. अगले दिन सीमा फिर आयी. उसने बात शुरू की जावेद पहलवान की.
“दीदी, मेरा तो चक्कर गाओं के जावेद पहलवान से चल रहा है. वो अखाडा चलता है. बहुत ताकतवर आदमी है. घर के लिए पैसे देता है, कभी गिफ्ट देता है, और बेड पे तो जैसे आग लगा देता है! उसका लंड जैसे लोहे का मोटा डंडा – तेरी सोच से भी डबल ज़्यादा! और २ घण्टे बिना रुके पेलता है!”
प्रिया हैरान थी उसकी बातें सुन कर. कैसे एक शादी शुदा औरत किसी गैर मर्द के साथ सम्बन्ध बना रही है. सीमा ने उसे समझाया कैसे उसको वो सब शारीरिक शुख जावेद ने दिया, जिसकी कल्पना उसे भी नहीं थी.
प्रिया पहले मना करती थी, गुस्सा दिखाती थी. लेकिन धीरे-धीरे सुनना अच्छा लगने लगा. रात को नरेश के साथ जब होता, तो मनन में जावेद की तस्वीर आती. सोचती रहती – सच में कितना मज़ा आता होगा?
एक दिन सीमा ने सीधा पुछा, “दीदी, अगर तू हां करे तो मैं जावेद से बात कर दूँगी तेरे लिए. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, बिलकुल चुप चाप.”
प्रिया ने तुरंत मना कर दिया, “नहीं सीमा, मैं शादी शुदा हो. ये सब पाप है. मैं ऐसा नहीं करूंगी.”
सीमा ने फाॅर्स नहीं किया. बस मुस्कुरा के बोली, “ठीक है दीदी. कल मेरे घर पे छोटा सा फंक्शन है. तू अकेली आ जाना, बच्चो को मत लाना.”
प्रिया को लगा शायद कोई पूजा-पथ या कीर्तन है. अगले दिन शाम ७ बजे वो अकेली सीमा के घर पहुँच गयी. घर पहुंची तो कोई फंक्शन नहीं था. घर सुनसान था, सिर्फ सीमा कड़ी थी मुस्कुराते हुए.
प्रिया ने पुछा, “ये क्या सीमा? फंक्शन कहाँ है?”
सीमा ने दरवाज़ा बंद कर दिया और बोली, “दीदी, आज तू सिर्फ देखेगी. देखना कैसे जावेद मेरे साथ मज़ा करता है. बस आँखों से सब देख लेना. कुछ करने की ज़रुरत नहीं. फिर घर जाके सोचना.”
प्रिया पलट के जाने लगी, लेकिन सीमा ने हाथ पकड़ लिया और बोली, “बस एक बार दीदी… सिर्फ देख ले. दिल मचल जाएगा तेरा.”
प्रिया के दिल में क्यूरोसिटी और डर दोनों थे. वो रुक गयी. सीमा उसे छोटे कमरे में ले गयी. वहां एक छोटी सी खिड़की थी बगल वाले कमरे की तरफ. पर्दा ऐसा लगा था कि अंदर से सब दिखे, बाहर से कुछ न दिखे. सीमा ने प्रिया को वहां बैठा दिया और बोली, “चुप रहना, आवाज़ मत निकालना और देख.”
सीमा ने एक सुन्दर पीली साड़ी पहनी थी – गहरी नेकलिने वाली ब्लाउज, पल्लू थोड़ा नीचे जिसमे से बोओब्स का क्लीवेज साफ दिख रहा था. वो बगल वाले कमरे में चली गयी.
कुछ देर बाद जावेद आया. वो ६ फुट लम्बा, मोटे बदन वाला पहलवान था – पत्थर जैसा शरीर, दाढ़ी थोड़ी बहुत थी, उम्र ४५-५० के आस-पास. अखाडा चलता था, दूकान भी थी – पैसे की कोई कमी नहीं थी उसके पास.
जावेद अंदर आया और सीमा को देखते ही पकड़ लिया, “कैसी हो मेरी रानी? बहुत दिन बाद मिले हो!”
सीमा ने गले लग के बोलै, “आओ न जावेद… आज पूरा ज़ोर लगा देना!”जावेद ने उसे उठा के पुराणी चारपाई पे पटक दिया और खुद सीमा के ऊपर आ गया. फिर अपने होंठ सीमा के होंठ के ऊपर रख कर किस करने लगा. ५ से १० मिनट तक दोनों में किसिंग चलती रही.
जावेद ने साड़ी का पल्लू हटा दिया और ब्लाउज के बटन खोलने लगा. ब्लाउज खोलने के बाद जावेद ने ब्रा का हुक भी खोल दिया. अब सीमा ऊपर से पूरी नंगी थी. जावेद एक बूब को मुँह से चूसने लगा और दुसरे हाथ से दुसरे बूब को दबाता रहा.
फिर जावेद नीचे आया. उसने सीमा की साड़ी निकाल दी. फिर पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. अब सीमा सिर्फ पंतय में थी जावेद के सामने. पंतय अब पूरी गीली हो चुकी. पहले जावेद ने सीमा की पंतय सूंघी और अपने दांतो से सीमा पंतय उतरी. सीमा की बुर बिलकुल गीली थी, जो की चमक रही थी लैंटर्न की रौशनी में.
उधर प्रिया ये सब देख कर मदहोश हो रही थी. इधर जावेद अपना मुँह सीमा की बुर में लगा कर उसके गीले-पन्न को चाटने लगा. सीमा की छूट के रस को चाट रहा था. अब जावेद सीमा की चूत के अन्दर अपनी जीभ से चाटने लगा.
सीमा का बदन उछल रहा था, “ओह्ह्ह माँ… जावेद… और अंदर… हां वहीँ जगह! ज़ोर से चाट-ते रहो… ाःह!” काफी देर चाटने के बाद सीमा झड़ गयी, जिसे जावेद ने फिर से चाट के साफ़ कर दिया.
फिर सीमा ने पलट के जावेद की लुंगी खोल दी. जावेद का लंड बाहर आया जो की ८.५ इंच लम्बा, बहुत मोटा, एक-दम लाल जैसा गरम लोहा हो. सीमा ने उसे हाथ में पकड़ा, मुँह में लेकर चूसने लगी. पूरा अंदर ले जाती, गले तक, बाहर निकालती. जावेद के हाथ उसके सर पे मुंह में धकेल रहा था. “चूस रानी… पूरा ले अंदर… अहह कितना गरम मुह है तेरा!” जावेद ने कहा.
उधर प्रिया भी जावेद का लुंड चुपके से देख कर मदहोष थी. १० मिनट मुह चुदाई के बाद जावेद ने सीमा को घोड़ी बनाया. अब जावेद ने अपना लंड बुर में डाला. धीरे से पूरा अंदर घुसा दिया. सीमा ने अहह किया. फिर जावेद ने अपनी स्पीड बढ़ाई और ज़ोर-ज़ोर से ठोकने लगा. थप! थप! चारपाई पूरी तरह हिल रही थी पूरी.
सीमा चिल्लायी, “मार दाल जावेद… ज़ोर से पेल… मेरी बुर फाड़ दे! और तेज़… हां ऐसे ही!”
जावेद अब हर पोजीशन में सीमा की चुदाई करता. सीमा को लिटाया, उसकी दोनों टांगें फैला के अपना लंड अंदर-बाहर करने लगता. साइड में पलट के, एक टांग ऊपर उठा के. हर पोजीशन में १०-१५ मिनट्स. सीमा ४-५ बार झड़ गयी. हर बार चीख निकल रही थी. सीमा की छूट से पानी बाहर टपक रहा था, जिसे बाद में जावेद चाट कर साफ़ करता.
फिर जावेद ने तेल की बोतल लिया और अपने लंड पे लगाया और और सीमा की गांड के छेद पे भी लगा दिया. उसके बाद जावेद ने अपना लंड धीरे से गांड में डाला. सीमा दर्द से बोली, “अहह धीरे… !”
फिर धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई. ज़ोर से गांड में पलने लगा – १८-२० मिनट तक. सीमा मज़े में बोली, “हां… गांड में कितना अच्छा लग रहा… ज़ोर से दालो जावेद… फाड़ दो!” जावेद ने उसकी गांड मारनी स्टार्ट कर दी. सीमा भी मज़े से अपनी गांड मरवा रही थी.
करीब १ घंटे तक उसकी गांड और बुर दोनों मारे. आखिर में जावेद ने ज़ोर के १०-१२ धक्के मारे. फिर सीमा की बुर में ही गरम माल भर दिया. दोनों थोड़ी देर लेटी रहे वैसे ही नंगे. जावेद ने सीमा को किस किया और बोला, “कल फिर आऊँगा रानी… और तेरी सहेली प्रिया को भी बता देना. उनके लिए भी तैयार हो!”
जावेद चला गया. सीमा पसीने से तर-बतर अंदर आई जहाँ प्रिया छुपी थी और बोली
“देख लिया प्रिय? अब बताओ… दिल मचल रहा न? बुर अब तक गीली है न सिर्फ देख के?”
प्रिया कुछ बोली नहीं. उसका बदन आग की तरह जल रहा था, बुर से पानी टपक रहा था. वो चुपके से उठी और घर चली गयी.
रात भर प्रिया को नींद नहीं आयी. नरेश सो गया था जल्दी, लेकिन प्रिया लेती रही – मनन में वो स्केन घूम रहा था. जावेद का मोटा लुंड, सीमा की चीखें, वो मज़ा… सब याद आ रहा था. उसने अपने आप को हाथ से छुआ भी – पहली बार ऐसे, बुर पे उँगलियाँ फेरते हुए. थोड़ा मज़ा आया, लेकिन पूरा नहीं.
अगले दिन सुबह उठ के नार्मल काम शुरू किया – रोटी बनायीं, बच्चों को स्कूल भेजा. लेकिन मैं कहीं और था. दोपहर में सीमा आयी.
“क्या सोचा प्रिय बहिन? कल से मैं मचल रहा है न?”
प्रिया ने शर्मा के बोलै, “सीमा… मैं… नहीं जानती. ये गलत है न?”
सीमा ने हाथ पकड़ा, “गलत कुछ नहीं. नरेश भैया को पता नहीं चलेगा. बस एक बार तरय कर ले. जावेद बहुत समझदार है. पैसे भी देता है. ख़याल रखता है. और मज़ा तो इतना की ज़िन्दगी बदल जायेगी!”
प्रिया चुप रही. अगले २-३ दिन ये बातें चलती रही. सीमा रोज़ आती, डिटेल्स बताती – कितना देर किया, कैसे किया. प्रिया सुनती रहती, अंदर से गरम होती रहती. एक शाम प्रिया ने हिम्मत करके बोला, “सीमा… अगर मैं हां करू… तो क्या गारंटी है किसी को पता नहीं चलेगा?”
सीमा मुस्कुरा दी, “बिलकुल गारंटी! जावेद को बता दूँगी. वो कल शाम को आएगा मेरे घर. तू अकेली आ जाना. पहले सिर्फ बात करेगी. फिर जो मनन करे.”
प्रिया ने हां कर दी. दिल ज़ोर से धड़क रहा था. अगले दिन शाम को प्रिया अकेली सीमा के घर पहुँच गयी. जावेद वहां पहले से ही था मुस्कुराता हुआ.
“प्रिय… आओ न. बहुत सुन चूका हु आपके बारे में.” प्रिया शर्मा गयी. बैठ गयी जावेद के पास. जावेद ने चाय पिलाई, बातें की. फिर जावेद बोलै, “अगर मनन करे तो आज सिर्फ तरय कर ले. कुछ गलत नहीं. बस मज़ा आएगा.”
प्रिया का दिल ज़ोर से धड़कने लगा. सीमा ने मुस्कुराते हुए बोला
“दीदी… बस एक बार.” और प्रिया ने… हां कर दी.
अब नेक्स्ट पार्ट में बताउंगा की कैसे प्रिय जावेद के नीचे आई. फिर प्रिया की आग कैसे बढ़ गयी और कितने लोगों के नीचे प्रिय ायी.