पता नहीं तब तक मेरी बुद्धि कहाँ जा चुकी थी, मेरी चुत से नदी बह रही थी, मम्मे और चूचियाँ बुरी तरह दुःख रहे थे लेकिन उनका मीठा मीठा दर्द मेरे शरीर में आग लगा रहा था, मैंने धीरे से पूछा- कहाँ और कैसे?
बस, फिर क्या था, दोनों की आँखों में चमक आ गई।
लम्बे कद वाला लड़का बोला- अंसल प्लाज़ा उतर जाते हैं। उसके पार्क में कोई नहीं आता। उसका कैम्पस बड़ा है, और वहाँ काफी जंगल है। मुझे एक दो जगह मालूम हैं, वहाँ कहीं अपना काम बन जाएगा।
अंसल प्लाजा तो अगला ही स्टॉप था!
सोचने या संभलने का मौका मिले, इससे पहले ही मैं उनके साथ मेट्रो से उतर चुकी थी।
जैसे ही मैं उन दोनों के साथ स्टेशन से बाहर निकली, मुझे थोड़ा होश आया। यह मैं क्या कर रही थी? पर तब तक लम्बा लड़का एक ऑटो रोक चुका था और हम तीनों उस ऑटो में सवार हो गए।
उसने ऑटो वाले को रास्ता बताया।
मेरी किस्मत खराब भी या पता नहीं अच्छी थी, यह वही ऑटो वाला था जिसकी मैंने कुछ देर पहले गालियाँ देते हुए माँ बहन एक की थी।
इतने में दूसरे लड़के ने मुझे बीच में बैठा कर मेरा बैग मेरे घुटनों पर रख दिया। इस तरह ऑटो वाले की निगाह बचा कर उसने फिर मेरे मम्मे और चूचियाँ मसलने शुरू कर दिए। मेरे बदन में फिर से गर्मी आने लगी।
पर तब तक डर भी लगने लगा था, मैं एक शादीशुदा जवान औरत एक नहीं, दो बिल्कुल अनजाने मर्दों से चुदने जा रही थी, मुझे तो यह भी पता नहीं था कि ये कंडोम इस्तेमाल करेंगे या नहीं।
ऑटो चले जा रहा था और रास्ता सुनसान हो गया था, सड़क पतली थी। आखिर हिम्मत जुटा कर मैंने लम्बे लड़के से फुसफुसा के कहा- आज नहीं करते, कभी और करवा लूँगी, आज जाने दो।
उसने बोला- ऐसा मत बोल रानी, आज बात बन रही है, इसे तोड़ मत, इतना आगे आकर पीछे मत हट। हम दोनों दोस्त मिलकर तुझे बहुत प्यार से चोदेंगे।
मैंने कहा- देखो मैंने पहले कभी नहीं किया है, मेरे साथ ऐसा मत करो, मुझे जाने दो, शादीशुदा औरत हूँ।
हमारी बातों से ऑटो ड्राईवर को शायद शक हो गया, अचानक ऑटो किनारे पर रोक कर बोला- तुम लोग इस मैडम को जानते हो?
मुझे आशा बंधी कि ऑटो ड्राईवर के होते ये लड़के मेरे साथ कुछ नहीं कर सकते, मैंने कहा- हम मेट्रो में मिले थे और ये मुझे बेवक़ूफ़ बना कर यहाँ लाये हैं। कृपया मुझे वापस ले चलिए।
‘अरे! आप तो वही मैडम हो, जो अभी कुछ देर पहले ही हमको ज़बरदस्त गरियाई थीं?’
मैंने कोई जवाब नहीं दिया, आखें झुका लीं।
मैं अपनी गलती से फंस चुकी थीं। अब मुझे बस इतना लग रहा था कि इनको जो भी करना है फटाफट हो जाए ताकि मैं इस मुसीबत से निकलूं।
दूसरा लड़का बोला- चुप साली! मेट्रो में तो टांगें चौड़ी कर रही थी, मम्मे दबवा रही थी और चुदने को रजामंद होकर हमारे साथ यहाँ आई, और अब बात से फिरती है?
फिर ऑटो ड्राईवर से बोला- देख चुपचाप चला चल, इसकी चुत तो आज हम फाड़ेंगे ही, चाहे कुछ भी हो जाए। अगर तू बीच में पड़ेगा तो पिटेगा, अगर साथ देगा तो तू भी इसकी ले लेना।
‘तुम भैया फिकर मत करो, बहुत गालियाँ दे रही थी। मुझे शक था रंडी ही होगी। फिकर मत करो, ऐसी जगह ले चलेंगे कि पूरी रात भी इसको चोदोगे तो कोई नहीं आएगा वहाँ!’
इस पर वे दोनों जोर जोर से हंस पड़े।