सफ़र की दोस्ती ओर चुदाई

safar ki dosti or chudai एक बार मैं अपने ऑफीस के काम से न्यू देल्ही से बॅंगलुर जा रहा था. मेरा रेलवे टिकेट ऑफीस वालों ने कर्नाटका एक्सप्रेस मे 1स्ट्रीट एसी मे करवा दिया था. मैं अपनी यात्रा के दिन शाम को आठ बजे न्यू देल्ही स्टेशन पर पहुँच गया. बाहर दिसंबर का महीना था इसीलिए ठंड बहुत पड़ रही थी और मैं अपनी सीट मे बैठ गया. थोरी देर के बाद ट्रेन चल पड़ी और टी.टी. आया और टिकेट चेक कर के चला गया. हमारे कूपे मे एक ही परिवार के दो औरतें और एक आदमी था. मेरा अप्पर बिर्थ था और ट्रेन छूटने के बाद मैं थोड़ी देर तक नीचे बैठा रहा फिर मैं अपने बर्त मे जाकर कंबल तान कर आँख बंद करके सो गया. नीचे वो आदमी और औरतें गप-शॅप लड़ा रहे थे.

उनकी बात सुन कर मुझे लगा कि वो आदमी एक एम.न.सी मे सीनियर एग्ज़िक्युटिव पोस्ट पर काम करता है और जो औरत बड़ी उमर की थी उनके ऑफीस से संबंध रखती हैं और छोटी उमर की लड़की उसकी बेटी है. मैं आँखे बंद कर के उनकी बातें सुन रहा था. उनकी बातों से लग रहा था कि दोनो औरतो मे मा और बेटी का संबंध है और वो सब मस्ती करने के लिए बॅंगलुर जा रहे हैं, लेकिन घर पर ऑफीस का काम बता कर आए हुए हैं. छोटी उमर वाली लड़की की उमर लगभग 19-20 साल थी और दूसरी की उमर लगभग 36-37 साल था. मुझे उनकी बातों से मालूम पड़ा की मा का नाम मीना और लड़की का नाम अंशु है. दोनो मा और बेटी उस आदमी को ‘सर’ कह कर पुकार रहे थे. दोनो औरतें ही देखने मे बहुत सुंदर थी. छोटी वाली का फिगर बहुत सेक्सी था.

उसके मम्मे उसकी ब्लाउस के उप्पेर से दिखने मे भारी भारी और तने दिखते थे और उसके चूतर गोल गोल लेकिन कम उभरे थे. दूसरी औरत के मम्मे भी बहुत बड़े बड़े थे और उसके चूतर भी खूब बड़े बड़े और फैले हुए थे. उनके साथ का आदमी का उमर लगभग 30-32 साल रही होगी और देखने मे बहुत स्मार्ट था. तीनो आपस मे काफ़ी घुल मिल कर बाते कर रहे थे. थोड़ी देर के बाद मेरी आँख लग गयी. रात के करीब 12 बजे मेरी आँख खुल गयी, मुझे बहुत प्यास लगी हुई थी. मैने अपनी आँख खोली तो देखा कि कूप मे नाइट लॅंप जल रही है और वो तीनो अभी भी बातें कर रहें हैं. फिर मेरे नाक मे शराब की महक आई तो मैने धीरे से नीचे झाँका तो मेरी आँख फैल गयी. उस समय अंशु खिरकी के साथ मेरे नचले वाले बर्त पर बैठी हुई थी और दूसरे बर्त पर मीना और ‘सर’ बैठे हुए शराब पी रहे थे.

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अंशु के हाथ मे एक कोल्ड ड्रिंक की बॉटल थी. उस समय दोनो मा और बेटी अपने कपड़े बदल चुकी थी. मीना एक हल्के नीले हाउस कोट मे थी और अंशु एक गुलाबी रंग की मॅक्सी पहने हुई थी. मज़े की बात ये थी कि मुझको लग रहा था दोनो मा और बेटी अपने अपने हाउस कोट और मॅक्सी के अंदर कुछ नही पहन रखी है और ‘सर’ सिर्फ़ एक बनियान और लूँगी पहने हुए हैं. मुझे लगा कि मीना और ‘सर’ काफ़ी शराब पी चुके हैं क्योंकि दोनो काफ़ी झूम रहे थे. शराब पीते पीते ‘सर’ ने मीना को अपने और पास खींचा तो मीना पहले अंशु की तरफ देखी और फिर ‘सर’ के बगल मे कंधे से कंधा मिला कर पैर के उप्पेर पैर चढ़ा कर बैठ गयी. मीना जैसे ही ‘सर’ के पास बैठी तो ‘सर’ अपने हाथ मीना के कंधे पर रख कर मीना के कंधे को सहलाने लगे.

मीना ने एक बार अंशु की तरफ देखा और चुप चाप अपने ड्रिंक लेने लगी. अंशु भी ‘सर’ और मा की तरफ देख रही थी. थोड़ी देर के बाद ‘सर’ अपना एक हाथ मीना के पेट के उपर रख कर मीना के पेट को सहलाने लगे. ऐसा करने से मीना तो पहले कुछ कसमसाई फिर चुप चाप अपने ड्रिंक लेने लगी. फिर ‘सर’ ने मीना के पेट से हाथ को और थोड़ा उपर उठाया और अब उनका हाथ मीना के मम्मो के ठीक नीचे था. उनकी इस हरकत से मीना सिर्फ़ अपने ‘सर’ को देख कर मुस्कुरा दी. फिर ‘सर’ ने अपना हाथ मीना के मम्मो पर रख दिया और अपना हाथ घुमाने लगे. अब ‘सर’ का हाथ मीना के मम्मो को उसकी हाउस कोट के उपर से धीरे धीरे सहला रहे थे. अपनी मम्मी और ‘सर’ का काम काज अंशु बड़े गौर से बिना पलक झपकई देख रही थी. थोड़ी देर के बाद ‘सर’ ने अपना ड्रिंक सामने की टेबल पर रख दिया और अपने दोनो हाथ से मीना के दोनो मम्मे पकड़ लिए और उन्हे ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे.

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अब मीना भी नही चुप बैठ सकी और उसने भी अपनी ड्रिंक टेबल मे रख कर ‘सर’ को अपने दोनो हाथों से पकड़ लिया, लेकिन ‘सर’ अपने दोनो हाथों से मीना के दोनो मम्मे पकड़ कर दबाते रहे. थोड़ी देर के बाद ‘सर’ अपना मुँह मीना की मम्मे के उपर लाए और उसके मम्मे को उसके हाउस कोट के उपर से ही अपने मुँह मे भर लिया और चूसने लगे. ‘सर’ ने मीना के मम्मे को हाउस कोट के उपर से चूमते चूमते अपना एक हाथ मीना के हाउस कोट के अंदर डाल दिया और अपने हाथ घुमा घुमा कर उसकी चुचयों को मसल्ने लगे फिर उन्होने मीना के कान मे कुछ कहा और मीना ने अपने हाथ से अपनी बेटी अंशु को अपने पास बैठने को कहा. अंशु ने पहले तो अपनी आँख घुमा ली पर मीना ने उसे आवाज़ देकर बुलाया तो वो उठ कर ‘सर’ और मीना के बगल मे बैठ गयी. फिर ‘सर’ ने मीना को और खिसकने को कहा और खुद भी मीना के साथ खिसक गयी. अब उन्होने अंशु को अपनी दूसरी तरफ बैठने के लिए कहा.

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