साधु बाबा के साथ कामुकता शांत की

sadhu baba ke sath kamukta मेरी नाम सुमना बनर्जी है, ये स्टोरी आज से 4 साल पहले की है जब मेरी एज 17 साल की थी, और मैं 9 थ क्लास एग्ज़ॅम देने के लिया स्टडी कर रही थी. मुझे उस समय सेक्स के बारे मे कुछ भी आइडिया नही था. मैं 9 थ क्लास मे दो टाइम्स ड्रॉप की थी. मैं पढ़ाई लिखाई मे बहुत कमजोर थी. मैं सरीर से बक्सम फिगर की थी. 17 साल मे ही मेरे सरीर का साइज़ 38-26-38 का था. मैं 5′ 5″ की थी. मेरे बूब्स बहुत बड़े बड़े थे, और मेरी जंघा इतनी मोटी थी कि दोनो जंघा चलते समय एक साथ जुड़ जाती थी. मेरी पढ़ाई लिखाई से मेरी मम्मी-पापा बहुत परेशान थे.

मेरे अच्छे रिज़ल्ट के लिया मेरी मम्मी नेमंदिर मे बहुत सी पूजा की परसाद चढ़ाया था. इतना करने के बाद भी मैं तीसरी बार 9 थ क्लास मे फेल आई. मैं बहुत परेशान सी हो गयी. बट मेरी मम्मी-पापा मुझे कुछ नही बोले. थे लव्स मी आ लॉट. कुछ दिन बीत गये. मैं चौथी बार एग्ज़ॅम देने की तैयारी मे थी. एक दिन मेरे पापा एक साधु बाबा के साथ मेरी पढ़ाई-लिखाई की कमज़ोरी को लेकर डिसकस कर रहे थे. साधु बाबा ने पापा को मुझे साथ लेकर आने की सलाह दी. पापा ने घर आकर मेरी मम्मी को ये बात बताई. अगले दिन मॉर्निंग मे मम्मी, पापा और मैं कार मे साधु बाबा के आश्रम पहुँची. साधु बाबा की एज 40 के आस-पास थी. गतिला बदन और श्यामला था. हम सभी ने बाबा को प्रणाम किया.

साधु बाबाने मुझे अपने पास बैठाया, और मेरी हाथ की रेखा देखने लगा. पापा को साधु बाबा बोले, कि तेरी बेटी की हाथ की रेखा बहुत ही परेशान करने बाली है. तुझे इससे छुटकारा दिलाने के लिए मुझेतेरे मकान मे हवन करना पड़ेगा. पापा हाथ जोड़े खड़े थे. मम्मी बोली, बाबाजी आप कुछभी करे, पर हमारी परेसानी दूर करे. साधु बाबा ने मम्मी-पापा को हवन की तैयारी करने की लिस्ट बना दी. और अगले दिन से सात दिन तक हवन के लिए हमारे मकान मे साधु बाबा को रहने के लिए अर्रेंजमेंट किया. हमारा मकान बहुत बड़ा और तीन मंज़िला है. फर्स्ट फ्लोर मे दो नौकरानी और एक ड्राइवर रहेता था,

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और सेकंड फ्लोर हमेशा खाली रहेता था. साधु बाबा के रहेने की , और हवन-पूजा के लिए टू रूम सेकेंड फ्लोर मे साफाई हुई. पापा नेअगले दिन बाज़ार से हवन का सारा समान ड्राइवर से मँगवाया. मेरे पापा साधु बाबा को लेकर दोपहर 03.00 पीएम घर आपस आए. मम्मी पानी से साधु बाबा के पैर धुलाए, और नमस्कार किया. पापा साधु बाबा को तीसरे मंज़िल मे लेकर गये. मम्मी और मैं पूजा का समान लेकर उप्पर पहुँची. साधु बाबा ने 4.00 पीएम पूजा और हवन की तैयारी की. हम सभी(मम्मी-पापा, नौकरानी और ड्राइवर) 4.00 पीयेम हवन के रूम मे आकर बैठ गये. साधु बाबा अपनी झोली से भगवान नारायण और शिव की मूर्ति निकाल के उसको फ्लवर से सजाया. अगर बत्ती जलाया, और मन्त्र पाठ पूजा करने लगा.

करीबन 6.00 पीयेम पूजा ख़तम हुई. साधु बाबाने सभी को लाल टीका लगाया, और पापा को कहा कल से 03 पीयेम से हवन होगा. इस हवन मे सिर्फ़ तेरी बेटी रहेगी, ज़रूरत पड़ने पर तुझे बुलाउन्गा. पापा ने कहा, मैं कल से कुछ दिन के लिए बिज़्नेस के सिलसिले से ज़म्सेद्पुर जा रहा हूँ. मेरा पत्नी आपकी देख भाल करेगी. साधु बाबा नेमम्मी को बोला, बेटी कल 03.00 पीयेम फिर पूजा चालू होगा. तेरी बेटी उपबास करेगी. और एक वाइट कलर की सिल्क सारी लेकर आना. हम सभी साधु बाबा को रूम मे लेकर गये, खाने पीने का समान पहेले से ही रखा था. साधु बाबा को प्रणाम करके हम सभी नीचे लॉट आए. अगले दिन पापा ड्राइवर को लेकर ज़म्सेद्पुर चले गये. मम्मी नहा धो कर हवन की तैयारी करने लगी. दोपहर 03.00 पीयेम हवन का टाइम था. मैं डरी डरी सी थी.

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मम्मी ने मुझे समझाया. बोली, साधु बाबा बहुत चमत्कारी है और भगाबान का प्रतीक है. उनसे डरना नही, भक्ति करना, और बात मानना. तेरी पढ़ाई-लिखाई अच्छी होगी. अगले दिन दोपहर तीन बजे मम्मी नेमुझे लेकर हवन रूम प्रबेस किया. साधु बाबा नेमम्मी से पुचछा, बेटी कपड़े लाई? मम्मी ने एक सिल्क की सारी साधु बाबा को दी. साधु बाबा ने सारी को बीच से ब्लेड से काट के दो टुकड़े बनाए. और उसमे फूल, चंदन और सिन्धुर का तिलक लगाया. साधु बाबा ने मम्मी को कहा जा बेटी,

जब मैं बुलाउन्गा तब आना. मम्मी चली गयी. साधु बाबा ने मुझे कहा, बेटी तेरा उपबास है ना ? मैने कहा हां. साधु बाबा ने सिल्क का एक टुकड़ा कपड़ा मेरे हाथ मे थमा दिया. और कहा जा बेटी नहा ले. नहा कर सादा कपड़ा पहनना, दूसरा कोई बस्त्र शरीर नही रहना चाहिए. मैं कपड़े लेकर बाथरूम मे गयी, और फ्रोक खोलके सिल्क का वाइट कपड़ा पहेन लिया. कपड़ा बहुत छ्होटी सा था. और मेरे बदन बहुत मुस्किल से ढाका था. सिल्क का कपड़ा इतना पतला था कि मेरा गदराया जिस्मउसमे से झलक रहा था. चड्डी नही होने के कारण मेरी कमर के नीचे का हिस्सा भी दिखाई दे रहा था.

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