रियान अंकल 1 पार्ट 14

रियान अंकल 1 पार्ट 14
लेखक- सीमा
अब आगे की कहानी
और सीधे हाथ से उसकी जाँघें सहलाते हुए, उलटे हाथ से उसकी कमर थाम ली, इस नए स्पर्श से स्वाति एकदम से सिहर गई, उसकी झुरझुरी उन दोनों ने महसूस की।
उसने हिलने, कसमसाने की कोशिश की लेकिन उन दोनों के बंधन ऐसे सख्त थे कि फिर वो ढीली पड़ गई और रियान के नए अजनबी हाथों को जैसे अपना लिया।
रियान ने सीधे अपने हाथ को उसके निचले तन पर फिराते हुए, दुपट्टा हटने के बाद कपड़ों के ऊपर से खरबूजे जैसे उसके बूब्स पर ले आया।
स्वाति ने फिर झुरझुरी ली, लेकिन अजय ने उसे छूटने न दिया और कसमसाहट के बाद जैसे विरोध ख़त्म हो गया और रियान बड़े प्यार से उसके बूब्स को सहलाने, दबाने लगा।
अजय ने तो स्वाति के हाथों को ऊपर किए हुए अपने हाथ उसकी पीठ पर रखे, उसकी गर्दन और पीठ सख्ती से थाम रखी थी।
रियान कुछ देर ऊपर से उन चूचियों को दबाने के बाद उसकी कुर्ती के अन्दर हाथ घुसा कर, उसकी त्वचा से स्पर्श करते हुए अब उसकी ब्रा तक पहुँच गया था और उसे ऊपर खिसकाने की कोशिश कर रहा था।
त्वचा पर रियान के हाथों ने पहले तो स्वाति को सिहराया, फिर इन्ही हाथों ने उसे उत्तेजित करना शुरू कर दिया, जब रियान उसकी ब्रा को ऊपर खिसका कर उसकी नग्न चूचियों तक पहुँचने में कामयाब रहा।
अपने सधे हुए हाथों से उन नरम गुदाज गेंदों को सहलाते, दबाते उसके चुचूकों को मसलने और छेड़ने लगा, तो स्वाति के शरीर में एकाएक बढ़ी उत्तेजना रियान साफ़ अनुभव करने लगा।
अजय को भी इस का पता चल गया क्योंकि उसके चुम्बन में आक्रामकता आ गई, रियान को और भी ज्यादा मजा देने के लिए।
अजय ने न सिर्फ अपने हाथों को उसकी पीठ पर रखे हुए स्वाति की ब्रा के हुक खोल दिए बल्कि हाथ नीचे करके उसकी कुर्ती को एकदम से ऐसा ऊपर उठाया के।
उसकी भरी-भरी चूचियां रियान की आँखों के आगे एकदम से आ गईं और उसने दोनों हाथों से उने पकड़ लिया, शर्म से स्वाति ने आँखें बंद कर ली।
अजय ने उसके गालों, गर्दन और कान को चूमते, चुभलाते और रगड़ने लगा, रियान ने हूटकर अपने साथ लाये बैग से शहद निकाल लिया।
यह शहद उसने स्वाति की दोनों भूरी-गुलाबी निपल्स पर मल दिया और फिर एक निपल्स को उसने अपने मुँह में समेट लिया और ज़ुबान से निपल्स पर लगे शहद को चूसने लगा।
एक हाथ से न सिर्फ वह स्वाति की दूसरी बूब्स सहला रहा था, बल्कि उसकी घुंडी पर शहद भी मल रहा था।
अजय स्वाति के चेहरे को चूम रहा था और रगड़ रहा था, उसकी पीठ को सहला रहा था और रियान एक-एक कर के दोनों चूचियों और घुंडियों पर शहद मल-मल कर उन्हें चूस रहा था।
स्वाति की सांसें उखड़ने लगी थी, उसके सारे शरीर में लहरें सी दौड़ने लगी थीं और साँसें भारी हो कर सिसकारियों में बदल गई थीं।
रियान ने स्वाति की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे करने की कोशिश की, लेकिन इस हाल में भी उसने अपनी सलवार थाम ली और उसे नीचे नहीं होने दिया।
अजय ने उसके हाथ फिर बांध लिए और इस बार रियान को सफलता मिल गई, उसने सलवार नीचे कर दी और खाली हाथ से पैंटी के ऊपर से ही उसकी पाव-रोटी जैसी फूली हुई चूत पर हाथ फिराया तो स्वाति कांप गई।
रियान के साथ ही अजय ने भी अपना हाथ वहाँ पहुँचाया, तो उसकी पैंटी गीली मिली, तो अजय ने उसके चूतड़ों की तरफ हाथ ले जाकर उसकी पैंटी की इलास्टिक में उंगली फँसा दी ।
और उसे थोड़ा उचका कर पैंटी को नीचे खिसकाने लगा, पर अवरोध डालने के लिए स्वाति ने ताक़त लगाई, लेकिन रियान ने भी नीचे हाथ डाल कर उसके चूतड़ों को ऊपर उठा दिया ।
और पैंटी चूतड़ से नीचे हो गई और फिर दोनों जाँघों पर उन दोनों ने दबाव डाल कर उसकी पैंटी को उसके घुटनों तक पहुँचा दिया।
और फिर रियान को उसकी मखमली चूत के दर्शन हुए और आज उसकी चूत बिल्कुल सफाचट थी। लगता था जैसे सुबह ही शेविंग की हो यानि मन से स्वाति तैयार थी इस नए अनुभव के लिए।
स्वाति का उत्तेजना में हल्का सा उठा छोटा मांस और नीचे रक्षा कवच जैसी चूत का दाना गहरे रंग में उत्तेजना के कारण अपने पूरे वजूद में दिख रही थी, रियान इस नज़ारे से मस्त हो गया।
उसने अपनी उँगलियाँ नीचे ले जाकर उसकी सम्पूर्ण चूत पर फिराई तो स्वाति काँप कर रह गई और उधर चूत से बहा चिपचिपा पदार्थ रियान की ऊँगलियों से लग गया।
रियान ने अपनी ऊँगलियों को नाक के पास ला कर सूंघा और ऐसा लगा जैसे उस महक से वो मस्त हो गया हो।
रियान की आँखें बंद हो गईं, कुछ पल के लिए और उसने अपने होंठों से स्वाति की निपल्स निकाल कर ज़ुबान से उस लिसलिसे कामरस को चखा ।
और फिर उसे उसी चूची पर लगा कर फिर उस पर अपनी ज़ुबान रगड़ने लगा, अब अजय स्वाति के चेहरे गर्दन से होकर, झुकते हुए उसकी बाईं चूची पर पहुँच गया।
अब स्वाति पीछे की तरफ इतना झुक गई कि उसे सहारे के लिए अपने हाथ बिस्तर पर टिका देने पड़े।
और वो दोनों शहद मल-मल कर उसकी घुंडियों या निपल्स को ऐसे चूसने लगे जैसे कोई भूखे बच्चे दूध पीने में लगे हों।
यूँ तो स्वाति की चूत अनावृत थी लेकिन अभी वो सिर्फ उसे ऊपर से ही सहला रहे थे और इतने में ही उसकी गहरी-गहरी सिसकारियाँ छूटने लगी थीं।
दोनों निपल्स उत्तेजना से एकदम कड़ी होकर रह गई थीं, फिर अजय अपने पैर समेट कर बिस्तर पर ऊपर आ गया और स्वाति की पीठ के पीछे हो गया।
फिर अजय ने स्वाति को अपने सीने से लगाते हुए ऐसे सम्भाल लिया कि एक हाथ से उसका चेहरा दबाव बना कर अपनी तरफ मोड़ लिया और उँगलियाँ शहद से भीगा कर उसके होंठ और चेहरे को गीला कर दिया ।
और अजय ने अपनी बेक़रार जीभ से उसे चाटने लगा, तो दूसरे हाथ से उसकी चूत को सहलाते हुए उसके दाने को उँगलियों से गर्म करने लगा।
और इस पोज़ीशन में रियान अपने दोनों हाथ और मुँह से स्वाति की गदराई चूचियों का स्तनपान करने लगा, साथ ही उसने अपनी पैंट और चड्डी नीचे खिसका कर अपना लंड बाहर निकाल लिया था।
जो उत्तेजना से कड़ा हो कर अपने पूरे आकार में फनफना रहा था, अजय ने रियान के लंड देखकर सोचने लगा कि मुझसे उसका लंड 3 इंच लम्बा है।
बल्कि मुझसे कुछ मोटा भी था और उसका रंग डार्क शावला है, ये तो किसी को भी पसंद आ सकता है, मेरी बीबी की तो अब लॉटरी ही लग गई अब।
अजय तो यही सोच रहा था कि मेरी प्यारी बीबी स्वाति अब्दुल और हमीद के सड़े 8 इंच के लंड कैसे अपनी चूत और गांड़ में ले पाएगी, रियान का तो 9 इंच से बड़ा है।
इसी बीच रियान ने स्वाति का हाथ थाम कर उसे अपने लंड पर रखा तो स्वाति ने चौंक कर आँखें खोलीं और उसे देखा और फ़ौरन अपना हाथ वापस खींच लिया।
लेकिन इस एक पल में अजय को उसकी आँखों में लहराए जो भाव दिखे, वो यह सन्देश दे गए कि उसे रियान का लंड बहुत पसंद आ गया था ।
और फिर शर्म से उसने फिर आँख बंद कर लीं और वो फिर अपने काम में लग गए, यहाँ भी अजय ने स्वाति की झिझाक को दूर करने की सोचा।
अजय ने स्वाति का हाथ ले जाकर उसके लंड पर रख कर ऐसा दबाया कि उसे संकेत समझ कर लंड हाथ में लेना पड़ा और वो उसे पकड़े ही रहती अगर रियान उसके हाथ को ऊपर – नीचे न करता।
बहरहाल अब अजय स्वाति के चेहरे और होंठों को चूसे डाल रहा था, रियान उसकी चूचियों को मसल-मसल कर निपल्स का हाल बेहाल किए दे रहा था और स्वाति खुद धीरे-धीरे रियान के लंड को सहला और दबा रही थी।
कुछ देर ऐसे ही करने के बाद अजय ने भी अपना लोअर नीचे खिसका कर अपना लंड बाहर निकाल लिया और स्वाति की गर्दन पर दबाव डाल कर उसे इतना झुका दिया।
कि वो अधलेटी सी हो कर बाएं करवट हो कर झुकी और अजय के लंड तक पहुँच गई, पहले तो नए शख्स के सामने शर्म के कारण चेहरा इधर-उधर हटाया।
लेकिन अजय के ज़ोर डालने पर उसे मुँह में ले ही लिया और उस पर अपनी जीभ रोल करने लगी, पर इस अवस्था में उसकी दोनों चूचियाँ नीचे हो कर रियान के आक्रमण से सुरक्षित हो गईं।
तो रियान ने उसके नग्न गोरे और चमकते हुए चूतड़ों पर अपना ध्यान केंद्रीत किया, वो पीछे से उसके चूतड़ों के बिलकुल करीब होकर उसके पास आ गया।
और रियान अपने दोनों हाथों से स्वाति के डबल-रोटी जैसे रंग के मुलायम और गद्देदार चूतड़ों को फैला कर पीछे से उसकी गाण्ड का गुलाबी छेद और पीछे ख़त्म होती उसकी चूत को देखने लगा।
स्वाति की चूत कामरस से नहायी पड़ी थी, रियान ने उस रस से अपनी उंगली अच्छे से गीली की और फिर उसकी गाण्ड के छेद को कुरेंदने लगा।
अपने छेद पर रियान की ऊँगली का स्पर्श पाते ही स्वाति एकदम कसमसाई लेकिन अजय ने उसकी पीठ पर दबाव डाल कर उसे रोकने लगा ।
और उसी जद्दोजहद के बीच रियान ने अपनी चिकनाई से भरी ऊँगली स्वाति की गाण्ड के छेद में अन्दर उतार दी।
स्वाति उंगली अन्दर होते ही मचली और उसके मुँह से एक आह निकल गई, रियान की उंगली उसकी गांड़ में जाते ही वो सब कुछ समझ गया था।
कि अजय बहुत बड़ा गाण्ड का शौक़ीन है, और ज्यादा चुदने के बाद किसी भी लड़की का पीछे का छेद ऐसा ही हो जाता है और उसकी ऊँगली अजय के लंड से मोटी तो है नहीं।
इसलिए स्वाति को कोई ज्यादा फर्क नही पड़ा था, अब उसकी उत्तेजना एकदम से अपने चरम पर पहुँच गई और वो ज़ोर-ज़ोर से अजय के लंड पर आक्रमण करने लगी।
और दूसरी तरफ उतने ही ज़ोर से रियान भी स्वाति के शरीर की ऐंठन को पढ़ कर अपनी ऊँगली उसकी गाण्ड में अन्दर-बाहर करने लगा।
और स्वाति की नाक से फूटती साँसों का बेतरतीब क्रम बता रहा था कि वो अपने चरम पर पहुँच चुकी थी और फिर देखते-देखते वह लंड मुँह से निकाल कर एकदम से अकड़ गई।
और अपना चेहरा बिस्तर की चादर में छुपा लिया, कुछ पल के लिए वो तीनों ही अलग हो कर हांफते हुए अपने आपको सँभालने लगे।
अजय एक सिरे के पास ही अधलेटी अवस्था में था और बीच में स्वाति एकदम औंधी पड़ी थी और उसके चूतड़ों के पास रियान कुहनी के बल लेता उसकी गाण्ड को निहार रहा था।
स्वाति की चूचियाँ भले अब भी नग्न थी और बिस्तर की चादर से रगड़ खा रही थीं, लेकिन पीठ पर उसकी कुर्ती नीचे सरक कर कमर तक पहुँच गई थी।
और उसकी सलवार और पैंटी उसके घुटनों पर थी जिससे उसके चूतड़ वैसे ही नग्न और आमंत्रण देते लग रहे थे।
पांच मिनट में ही रियान ने इस आमंत्रण को स्वीकार कर लिया और उसके चूतड़ों को सहलाने लगा, दो मिनट की मालिश के बाद स्वाति के जिस्म में जैसे जान आई।
उसने चेहरा उठा के रियान को देखा और फिर जैसे शरमा कर चेहरा नीचे कर लिया, अजय ने उसे बगलों में हाथ देकर उठाया और इस तरह चूमने लगा जैसे इसी ज़रिये से वो उसका आभार प्रकट कर रहा हो।
कुर्ती सरक कर नीचे जाने को हुई तो अजय ने उसे थाम कर ऐसा ऊपर किया कि जिस्म से अलग करके ही छोड़ा, साथ ही उसकी ब्रा को भी उसकी बाहों से निकाल फेंका।
स्वाति अब अवरोध उत्पन्न नहीं कर रही थी, जिससे पता चलता था कि इस रगड़ा-रगड़ी से वो मानसिक रूप से पूरी तरह डबल डोज़ के लिए तैयार हो चुकी थी।
और स्वाति के इस समर्पण को देख रियान ने भी उसकी सलवार पैंटी समेत नीचे की और उसके पंजों से निकाल कर नीचे ही डाल दी।
रियान ने सोचा कि अब हम दो कमीने मर्दों के बीच वो बेचारी एकदम नग्न अवस्था में अधलेटी शर्मा रही थी और उसकी शर्म देख कर उने भी ये अन्याय लगा कि हम उसके सामने कपड़ों में रहें।
रियान ने अजय को कपड़े उतारने को बोला और स्वाति को अलग कर के उस दोनों ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके।
रियान बोला अब ठीक है, अब वो तीनों ही मादरजात नग्न थे और अजय के इशारे पर रियान भी उसके पास आ गया था कि वो तीनों ही एक-दूसरे से रगड़ रहे थे।
रियान ने उसका चेहरा थाम कर उसे चूमने की कोशिश की, लेकिन स्वाति ने शर्म से चेहरा घुमा लिया, तो वो पीछे से उसकी गर्दन पीठ पर चुम्बन अंकित करने लगा।
जबकि अजय सामने से उसके कान की लौ चुभलाते हुए उसकी ढीली पड़ गई चूचियों को दबाने, सहलाने लगा, और रियान भी उसे सहलाए, दबाए और रगड़े जा रहा था।
रियान ने इशारा किया तो अजय ने स्वाति को घुमा कर सीधा किया और इस स्थिति में ले आया कि उसकी पीठ अधलेटी अवस्था में उसके पेट से सट गईऔर उसके नितम्ब बेड के किनारे ऐसे पहुँच गए।
कि जब रियान बिस्तर से नीचे उतर कर उसकी टांगों के बीच बैठा तो उसका चेहरा स्वाति की सामने से खुली चूत से बस कुछ सेंटीमीटर के फासले पर था।
उसने दोनों हाथों से स्वाति का पेट और पेड़ू सहलाते हुए अंगूठे से उसकी प्यारी चूत के दाने को छुआ व सहलाया और फिर उस पर अपनी ज़ुबान लगा दी।
स्वाति सिस्कार कर कुछ अकड़ सी गई और अपनी मुट्ठी में अजय की जाँघ दबोच ली, रियान ने उसके नितम्बों के नीचे से हाथ डाल कर उसकी जाँघें दबा ली।
और अपनी जीभ स्वाति की चूत में घुसा कर उसे चाटने और कूरेदने लगा, बहुत ज्यादा देर नहीं लगी जब उसका शरीर काम उत्तेजना से भुनने लगा।
अजय उसे अपने से सटाये उसके बूब्स को मसल रहा था और उसे बीच-बीच में चूम रहा था, लेकिन उसे अपने लंड को मुँह में नहीं लेने दे रहा था।
क्यूंकि वो नहीं चाहता था कि उसकी उत्तेजना अपने समय से पहले चरम पर पहुँच जाए, जब लगा कि अब वो काफी गर्म हो चुकी है।
तो अजय ने स्वाति को खुद से अलग किया और रियान को ऊपर जाने को बोला, रियान उठ कर ऊपर हो गया और वो नीचे उसकी जगह।
अजय ने हथेली से स्वाति की कामरस और रियान की लार से बुरी तरह गीली हो चुकी चूत को पोंछा और फिर खुद अपनी जीभ वहाँ टिका दी।
साथ ही अपनी बिचल्ली ऊँगली उसके गांड़ के छेद में अन्दर सरका दी, ऊँगली अन्दर जाते ही स्वाति ऐसा ऐंठी कि उसी पल उसके पास अपना चेहरा ले गए रियान को थाम लिया।
और रियान और स्वाति ऐसे प्रगाढ़ चुम्बन में लग गए, जैसे अब वह कोई और ही न हो, कोई सगा हो, अजय अपने काम में लगा था।
वो जीभ से उसकी चूत और चूत के दाने को रगड़ रहा था साथ में ऊँगली से उसकी गांड़ भी चोद रहा था और स्वाति की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी।
स्वाति को चूसते रियान की निगाह अजय से मिली तो उसने उसे आँखों ही आँखों में लंड चूसवाने को पूछा, तो अजय ने हां में इशारा कर दिया।
रियान ने अपना चेहरा पीछे कर के खुद घुटनों के बल हो कर अपना लंड स्वाति के होंठों के एकदम करीब कर दिया।
स्वाति की निगाहें उस हाल में भी अजय के तरफ गईं और उसके कहने पर उसने रियान के लंड को अपने मुँह में ले लिया, रियान की आँखें आनन्द से बंद हो गईं और उसने स्वाति का सर थाम लिया।
अजय नीचे स्वाति की चूत चाटने में और ऊँगली से चोदने में मस्त था और वो लार बहा-बहा कर रियान का लन्ड चूसने में मस्त थी।
वो उसके लंड को ऐसे चूस रही थी कि किसी बच्चे को उसका पसंदीदा खिलौना मिल गया हो, कुछ देर बाद रियान ने अपना लन्ड निकाल लिया और स्वाति मुँह खोले ही रह गई।
स्वाति अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी और चुदने के लिए लगातार सिस्कार-सिस्कार कर ऐंठ रही थी, अजय उठ गया और अपने लंड को थोड़ा थूक से गीला कर के उसकी चूत पर रखा।
और हल्के से अन्दर सरकाया, सुपाड़े के अन्दर जाते ही स्वाति की आह छूटी और तीन बार में अन्दर-बाहर कर के अजय ने समूचा लंड अन्दर सरका दिया और उसके घुटने थाम कर धक्के लगाते हुए उसे चोदने लगा।
रियान उसकी पीठ से टिक गया और उसकी हिलती हुई चूचियों को अपने हाथों से सम्भाल कर उन्हें दबाते और सहलाते पीछे से उसके होंठों को चूसने लगा।
थोड़ी देर के धक्के के बाद रियान ने अजय को हटने को कहा, वो पीछे आ गया और वो बगल में हट गया, स्वाति बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई और रियान उसकी जाँघों के बीच आ गया।
अजय के लन्ड से चूदाई होने से स्वाति का छेद तो अन्दर तक खुल ही चुका था, लेकिन फिर भी रियान का लंड न सिर्फ उससे लम्बा था बल्कि मोटा भी था, और उसका लंड एक झटके में आधा लंड उसकी चूत में गुसा गया।
तभी स्वाति की ज़ोर की चीख निकल गई, कुछ पल रुक कर रियान ने भी अपने लंड को अंदर बाहर करते ही उसकी चूदाई करना शुरू कर दिया था।
रियान अपने लंड को धीरे धीरे उसकी चूत में अंदर सरकाता जा रहा था, जिससे उसकी चीख निकल जाती, जब पूरा लंड अंदर चला गया तो रियान स्पीड से हचक कर चोदने लगा।
स्वाति सोचने लगी कि अजय के मुकाबले रियान के चोदने में ज्यादा जोश और ज्यादा आक्रामकता है, उसका एक कारण यह भी है कि में उसके लिए एकदम नया और फ्रेश माल हूं ।
जबकि अजय तो मुझे शादी से चोद रहा था और मुझे इस नए-पन का मज़ा भरपूर आ रहा है, अजय को भी स्वाति के चेहरा पर चूदाई का सुख साफ दिख रहा है ।
स्वाति की साँसें मादक सीत्कारों में बदल गई थी, आँखें जैसे चुदाई के नशे में खुल ही नहीं पा रही थीं और अपनी उत्तेजना को वो बिस्तर की चादर अपनी मुट्ठियों में दबोच कर उसे सहन करने की कोशिश कर रही थी।
बहुत जोरदार चुदाई के बाद रियान हटा तो अजय उसकी चूत पर चढ़ गया, हालांकि रियान के लंड ने जो जगह बनाईं वो उसके लंड निकालते ही एकदम से कम न हो पाई।
और अजय के लंड डालने पर ऐसा लगा जैसे कोई कसाव ही न रहा हो और स्वाति की चूत बिलकुल सालो से चुदी रंडियों के जैसी हो गई थी ।
इससे स्वाति के आनन्द में भी विघ्न आई, लेकिन बहरहाल, अजय चोदने से पीछे न हटा और उसकी सिसकारियाँ कम तो हुईं लेकिन ख़त्म न हुईं।
अजय के बाद जब रियान ने फिर अपना लौड़ा घुसाया तो उसकी सिसकारियाँ फिर उसी अनुपात में बढ़ गईं, फिर रियान ने ही लण्ड निकाल कर उसे उठाया।
और उल्टा कर के ऐसा दबाया कि स्वाति का बायां गाल बिस्तर से सट गया और कंधे, पीठ नीचे हो गई, ऊपर सिर्फ उसके चौपायों की तरह मुड़े घुटनों के ऊपर रखी गाण्ड ही रह गई।
उसके आगे-पीछे के दोनों छेद अब हवा में बिलकुल सामने थे, स्वाति को ये समझने की ज़रुरत नहीं कि उसके दोनों छेद वो एकदम मस्त कर देने वाले थे।
लेकिन जहाँ गाण्ड का छेद अभी सिमटा हुआ अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था वहीं चूत का छेद इतनी चुदाई के बाद बिल्कुल खुल चुका था।
चूत ने रियान के लन्ड को निगलने में ज़रा भी अवरोध न दिखाया, रियान उसके दोनों चूतड़ों को उँगलियों से दबोचे गचा-गच अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था, तब अजय स्वाति के सर को सहला रहा था।
फिर रियान हटा तो अजय उसकी गाण्ड के स्पर्श के साथ चूत चोदने पर उतर आया, हालांकि रियान के मोटे लण्ड से चुदने के बाद चूत में अजय को वो मज़ा नहीं आ पा रहा था।
लेकिन वो लंड की प्यासी बीबी को छोड़ भी तो नहीं सकता था, बहरहाल कुछ देर की चुदाई के बाद वो हटा तो रियान ने चोदना शुरू कर दिया।
रियान ने चूदाई में झड़ने के टाइम उसे ऐसे दबोचा के स्वाति उसके लन्ड से निकल ही ना पाई और पूरी चूत रियान के वीर्य से भर गई।
रियान झड़ने और लण्ड बाहर निकलने के बाद स्वाति के बगल में ही गिर कर जोर जोर से हांफने लगा, लेकिन उसने अजय की बीबी की चूत का रास्ता दुश्वार कर दिया।
पूरी चूत उसके वीर्य से भरी हुई थी, तो अजय ने एक बार लण्ड अन्दर कर के रियान के वीर्य से अपने लण्ड को सराबोर किया और स्वाति की गाण्ड के छेद में उतार दिया।
और गाण्ड के कसाव और गर्माहट ने कुछ ही धक्कों में अजय का पानी भी निकाल दिया और उसने उसकी गाण्ड अपने सफ़ेद पानी से भर दी।
फिर वो भी बिस्तर पर पसर गया और स्वाति भी उन दोनों के बीच में ही फैल कर हांफने लगी, आँखें उसकी अभी भी बंद थी लेकिन चेहरे पर परम संतुष्टि के भाव थे।
वो तीनों करीब आधे घंटे तक ऐसे ही बेसुध पड़े रहे, इसके बाद अजय ही पहले उठा और स्वाति को सहारा देकर उठाया और उसे उसी नंगी हालत में चलाते हुए बाथरूम ले आया।
पीछे से रियान भी आ गया, अब कपड़े तो वैसे भी तन पर नहीं थे, अजय के कहने पर स्वाति ने उसके सामने ही पेशाब किया और उन्होंने भी साथ ही उसकी धार से धार मिलाई।
तत्पश्चात, अजय ने ही शावर चालू कर दिया और वो नहाने लगे, स्वाति ने तो उन्हे नहीं नहलाया, लेकिन उन दोनों ने मिल कर उसे बड़ी इत्मीनान से ऐसे नहलाया जैसे बच्चे को नहलाते हैं।
उसके दोनों छेदों में ऊँगली डाल-डाल के सारा वीर्य बाहर निकाली और साबुन से दोनों छेद अच्छी तरह धोए और उसके साथ चिपट और रगड़ कर खुद भी नहाते रहे।
इस अति-उत्तेजक स्नान में सिर्फ स्वाति ही नहीं बल्कि वो दोनों भी गरम हो गए और उसे गोद में उठा कर वापस बिस्तर पर ले आए।
अब रियान उसके चूचों और उसके होंठ चूस रहा था तो अजय ने चॉकलेट निकाल ली जो रियान अपने साथ ही लाया था, पहले अजय ने अपने लंड पर चॉकलेट लगाई।
फिर उसके बाद रियान ने भी यही किया और वो दोनों घुटनों के बल बैठे स्वाति के चेहरे के इतने पास आ गए कि दोनों के लण्ड उसके गालों को छूने लगे और उसे लंड चूसने को कहा।
शरमाई तो वह अब भी, लेकिन पहले की तरह उसने आँखें बंद नहीं की, बल्कि चुपचाप पहले अजय और बाद में रियान का लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी।
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