रंडी मम्मी और गस्ति चाची का चुदाई किस्सा

चुदाई कहानी के पिछले पार्ट में मैने आपको मम्मी और चाची की आँखों देखी चुदाई का हाल सुनाया. अब आयेज-

मैं ये सब देख कर वहाँ से हॅट गया. मेरा दिमाग़ बिल्कुल घूम गया था, और दिल तेज़-तेज़ धड़क रहा था. मेरे दिमाग़ में ढेर सारे सवाल घूम रहे थे. मैं सीधा हॉल की तरफ गया और देखा की अनिल अंकल बाहर आ रहे थे, सिर्फ़ अंडरवेर में. विनोद और राजेश अंकल उनकी तरफ देख कर मुस्कुराए, जैसे ये सब उनके लिए नॉर्मल ही हो.

“अनिल, क्या हाल है? मज़ा आया ना?” विनोद अंकल ने थोड़ी हस्सी के साथ पूछा.

अनिल अंकल ने हल्का सा स्माइल करते हुए कहा, “भाई, सुनीता भाभी में ऐसा मज़ा है, मैं शब्द में नही बता सकता.”

“और वो भी, बिना किसी नखरे के,” राजेश अंकल ने हँसी रोक कर कहा.

“जब उन्हे छोड़ा, उनका जिस्म एक-दूं गरम हो गया था. लगता है की वो काफ़ी दिन से प्यासी थी,” अनिल अंकल ने आड किया.

“वो तो है,” विनोद अंकल ने हा में सिर हिलाया.

अनिल अंकल तोड़ा हस्स कर बोले, “लेकिन वो काफ़ी चुड़क्कड़ है. अभी बोल रही थी किसी और को भेजो… तो अब आप दोनो में से कौन जेया रहा है?”

इतने में महेश अंकल भी चाची का कमरा छ्चोढ़ कर बाहर आ गये. उनका चेहरा नॉटी स्माइल से भरा हुआ था, और अंडरवेर में अभी भी हल्का सा खड़ा लंड दिख रहा था, शायद वियाग्रा का असर था. विनोद और राजेश अंकल उनकी तरफ देख कर हँसी रोक नही पाए.

“महेश, क्या बात है? आज काफ़ी टाइम लगाया क्या?” राजेश अंकल ने च्चेड़ते हुए पूछा.

महेश अंकल ज़ोर से हस्सा, “भाई, क्या बतौन, रेखा में इतना मज़ा है की मॅन नही भरता. आज उसकी गांद मार कर इतना एंजाय किया की मैं खुद हैरान हो गया.”

“क्या बात कर रहा है?” विनोद अंकल ने हैरानी से पूछा.

“जब उसकी मटकती गांद देखता था, मेरा मॅन बेकाबू हो जाता था. आज साली की सारी गार्मी निकल दी,” महेश अंकल ने हस्स कर कहा.

“वो तो है यार, ऐसे तगड़े माल अशोक और सतीश को कैसे मिल गये?” महेश अंकल ने हस्सी के साथ आड किया.

राजेश अंकल खड़े होके बोले, “जैसे भी मिली हो, हमे छोड़ने मिल रही है, हमे और क्या चाहिए.” उनकी बात सुन कर सब अंकल ज़ोर-ज़ोर से हासणे लगे.

महेश अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो, अब तुम दोनो जाओ और मज़ा करो. हम यहाँ आराम से बैठते है.”

अनिल और महेश अंकल सोफा पर बैठ गये, पेग्स बना कर दारू पीने लगे. विनोद अंकल मम्मी वाले कमरे में, और राजेश अंकल चाची वाले कमरे में चले गये.

मैं फिर से दबे पावं, चुपके से मम्मी और चाची के कमरे की तरफ बढ़ा. हर कमरे से आती सिसकारियाँ और ठप-ठप की आवाज़ो ने मेरे दिल की धड़कन तेज़ कर दी थी. मैने धीरे से खिड़की से झाँका… और जो मैने देखा, उसने मेरी साँसें ही रोक दी.

मम्मी, जो अब तक अनिल अंकल के साथ चुदाई कर रही थी, अब विनोद अंकल का लंड चूस रही थी. उनके होंठो पर नॉटी स्माइल थी और विनोद अंकल उनकी छूट में अपना लंड ज़ोर से घुसा रहे थे. हर धक्के के साथ मम्मी के सिसकारियाँ और तेज़ हो रही थी.

दूसरी तरफ, चाची अब राजेश अंकल के साथ बिस्तर पर लेती थी. राजेश अंकल उनके उपर थे और उनकी छूट में अपना लंड डाल कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे. चाची भी सिसकारियाँ ले रही थी और हर धक्का उनके लिए गरम और नॉटी थ्रिल लेकर आ रहा था.

थोड़ी देर बाद, महेश अंकल ने मम्मी की और अनिल अंकल चाची की चुदाई की. बेडरूम में मेरी मम्मी और चाची की सिसकारियों की आवाज़ गूँज रही थी. एक तरफ मम्मी और महेश अंकल का जोश हाइ था, और दूसरी तरफ चाची और अनिल अंकल अपनी चुदाई में खो गये. हर धक्का, हर टच, हर नॉटी टीज़िंग क्लियर्ली विज़िबल थी.

इस बीच, राजेश अंकल ने मम्मी के साथ और विनोद अंकल ने चाची के साथ चुदाई की. पुर दिन में हर अंकल ने अपनी हवस मिताई, और मम्मी और चाची दोनो एक ही दिन में चारो अंकल के साथ चुड गयी.

हर मोमेंट में उनकी चीकी स्माइल्स, नॉटी एक्सप्रेशन्स और हर चुदाई का रिदम, सब कुछ एक फॉरबिडन और लस्ट का मिक्स क्रियेट कर रहा था. मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था और आँखें बस उनसे हॅट नही रही थी.

मम्मी और चाची दोनो, अब कपड़े पहने हुए, हॉल में आई. उनके चेहरे पर अब भी एक अलग ही चमक थी—जैसे अभी-अभी जन्नत से लौट कर आए हो. विनोद और राजेश अंकल भी कपड़े पहें कर हॉल में आ गये. अब चारों अंकल और मम्मी- चाची एक साथ सोफा पर बैठे थे.

विनोद अंकल ने मम्मी की तरफ देख कर एक नॉटी स्माइल दी और कहा, “क्या भाभी, मज़ा आया ना?”

मम्मी शर्मा कर हस्सी और बोली, “तुम लोगों से मज़ा आता है… इसलिए आते रहते हो.”

राजेश अंकल ने चाची की तरफ देखते हुए कहा, “ये तो हमे पता ही था… तुम दोनो को देख कर ही लगता है.”

चाची ने भी एक नॉटी स्माइल दी और बोली, “तुम सब शैतान हो… हम देवरानी-जेठानी को बस निचोढ़ के रख देते हो.”

महेश अंकल ने हस्सी रोकते हुए कहा, “आज तुम दोनो से मेरा मॅन ही नही भरा.”

चाची ने उनके लंड की तरफ इशारा करते हुए चीकी स्माइल दी, “मुझे पता है आज ये इतना फॉर्म में क्यूँ है.”

अनिल अंकल भी हँसी रोक नही पाए, “तुम दोनो ने आज हम सब का दिन बना दिया.”

सब लोग हासणे लगे और एक-दूसरे की तरफ नॉटी नज़र डाल कर टीज़ करने लगे. हर एक ग्लॅन्स, हर एक स्माइल और सटल हिंट से रूम का माहौल और भी गरम हो गया. मम्मी और चाची के एक्सप्रेशन्स और नॉटी जेस्चर्स सबको लस्ट और एग्ज़ाइट्मेंट के मूड में डाल रहे थे.

उनके चेहरे पर वो कॉन्फिडेंट और शैतानी चमक, उनकी आँखों में नॉटी स्पार्कल, और उनकी बॉडी लॅंग्वेज, सब कुछ एक-दूं बोल्ड और टीज़िंग था. जैसे पूरा हॉल उनके कामुक उर्जा से जीवित हो गया हो. सब अंकल भी इस एनर्जी को एंजाय कर रहे थे, एक-दूसरे से मस्ती करते हुए और च्छूप-च्छूप के नॉटी बातें करते हुए.

और मैं, बस चुपके से ये सब देख रहा था. जो मा और चाची मैं मंदिर की देवी मानता था, वो आज पूरी तरह से पापा के दोस्तों की रंडियन बन चुकी थी.

महेश अंकल मुस्कुराते हुए बोले, “चलो मेरी प्यारी भाभियों, अब देर हो रही है. मैं तुम दोनो को घर के तरफ छ्चोड़ देता हू. वैसे, तुम दोनो का संस्कारी रूप देख कर तो मुझे भी पहली बार दर्र लगा था की उनको कैसे हॅंडल करू.”

मम्मी ने च्छेदते हुए जवाब दिया, “अर्रे महेश भाई, ऐसे मत बोलिए. आप में और दर्र? एक-एक करके कितने दोस्तों के साथ हमे छुड़वा लिया.” उनके होंठो पर चीकी स्माइल और आँखों में वही नॉटी चमक थी.

चाची भी हस्सी के साथ बोली, “हा भाभी, सच कह रही हो. शूकर मनाओ की आज सिर्फ़ चार ही थे, वरना मेरी जान निकल ही जाती.”

उनकी बात सुन के मेरी धड़कन रुक सी गयी. “मम्मी और चाची और कितने लोगों के साथ…” ये सोच कर मेरा दिमाग़ हिल गया.
विनोद अंकल मुस्कुराते हुए बोले, “ऐसा थोड़ी ने तुम्हे परेशन करते, आज तुम दोनो ही आने वेल थे, इश्स लिए किसी को बताया नही था.”

अनिल अंकल पूच गये, “आज रचना भाभी क्यूँ नही आई?”

मम्मी ने हल्का सा स्माइल देते हुए कहा, “आज सुबह वो पीरियड में आ गयी.”

मैने ये सुन कर और हैरान हो गया. रचना आंटी, मेरी मम्मी की अच्छी दोस्त, और उनके हज़्बेंड सुनील अंकल भी पापा के ग्रूप में है. और वो दोनो भी काफ़ी भोले है. लेकिन पापा के दोस्त, उनकी बीवियों के साथ… बिल्कुल हरामी! और मेरी मम्मी और चाची, और ना जाने कौन सी आंटी उनके साथ अपनी प्यास बुझा रही थी.

कार में बैठते वक़्त मम्मी ने अपनी सारी ठीक करते हुए महेश अंकल की तरफ देखा और आँखों से एक नॉटी सिग्नल दिया. चाची ने भी सीट पर झुकी हुई महेश अंकल को लिप्स किस दे रही थी. महेश अंकल ने किस तोड़ कर बोला, “चार-चार लोगों से चूड़ने के बाद भी तेरा मॅन नही भरा?”

मम्मी ने हेस्ट हुए बोला, “इसकी आग तो आपने ही भड़काई है, अब आप ही संभलो.”

मैं चुपके से उन्हे देखता रहा, और सोच रहा था की ये दोनो कितनी बड़ी रंडिया है. जैसे ही कार निकल गयी, मैं वही दिमाग़ में हिलते एमोशन्स और गुस्से के साथ खड़ा रह गया.
घर वापस आके, जब मैं अंदर गया, तो मम्मी और चाची बिल्कुल नॉर्मल लग रही थी. डिन्नर टेबल पर सब बैठे थे, जैसे कुछ भी हुआ ही ना हो.
पापा ने पूछा, “सत्संग कैसा था, सुनीता?”

मम्मी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “बहुत सुकून मिला और मॅन को एक अलग ही शांति मिली.”

चाची ने कहा, “हा, जेठ जी.” उन्होने अपनी बातें बिल्कुल भोले और विनम्र अंदाज़ में कही, जैसे पहले वाला मस्ती भरा रूप बिल्कुल च्छूप गया हो.

दादी खुश होते हुए बोली, “अछा है, दोनो इश्स उमर में सत्संग में जेया रही है. मुझे तो जाने का मॅन करता है पर तबीयत ऐसी है की घर से निकल नही पाती.”

अब मुझे बुरा फील हो रहा था की बेचारी दादी को क्या पता की उनकी दोनो बहू किसी सत्संग में नही पर चुदाई करवाने जाती है. मैं ये सब सुन कर हैरान था. जो मम्मी और चाची थोड़ी देर पहले रणदीपना कर रही थी, अब बिल्कुल संस्कारी और धार्मिक लग रही थी. उनके चेहरे पर वही भोली और प्यारी मुस्कान थी, जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

मैं चुप-छाप खाना खाता रहा, और दिमाग़ में बस एक ही ख़याल: “ये मेरी मा और चाची है, या कोई और?”

उस दिन मुझे सिर्फ़ अपनी मा और चाची का असली रूप ही नही, बल्कि पापा के दोस्त कितने गंदे और हरामी है, ये भी पता चला. ये सब अपनी सीधे-साढ़े दोस्तों की बीवियों के साथ चुदाई करते है, और पापा को इसकी भनक तक नही है.

आज भी पापा का उनके दोस्तों के साथ बहुत अछा रीलेशन है. रोज़ मिलते है, हस्सी-मज़ाक करते है, लेकिन मैं अब उन सब को अलग नज़र से देखता हू. एक तरफ वो पापा के भोले दोस्त है, और दूसरी तरफ वो लस्टी और शैतानी ग्रूप है, अपने दोस्तों की बीवियों के साथ चुपके से मज़े लेते रहते है.

मेरी आँखों के सामने अब भी वो नंगे जिस्म, वो चुदाई, वो नॉटी बातें और वो सिसकारियाँ जाग रही है. हर एक जेस्चर, हर एक नॉटी स्माइल मेरे दिमाग़ में चिपक गयी है. मैं ये सब भूल नही सकता, और शायद कभी भूल भी नही पौँगा.

ये मेरी ज़िंदगी की कड़वी सकचाई है, एक दुनिया जहाँ प्यार, मस्ती और लस्ट एक साथ चलती है, और जहाँ सिर्फ़ मेरी मा और चाची ही नही, बल्कि उनके साथ पापा के दोस्तों का असली चेहरा भी मेरे सामने आ गया.

और सच काहु, मेरी मा और चाची, घर वालों की आँखों में धूल झोंक कर, आज भी पापा के दोस्तों से छुड़वाने जाती है.

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