रंडी के जैसे मैंने रिक्शेवाले का लंड लिया

दोस्तों मेरा नाम Antarvasna जरीना ख़ान हे और मैं एक डिवोर्सड लेडी हूँ. मेरे पति के अंदर मर्दानगी नहीं थी इसलिए मैंने ही तलाक ले लिया था उस से. मैं वैसे अभी फिजिक्स की टीचर हु एक स्कुल में. और मैं देखने में एकदम सेक्सी हूँ इसलिए मर्दों की राडार में रहती हूँ. मेरे स्कुल के चपरासी और स्टूडेंट सब मुझे लाइन मारते हे. पहले पहले मुझे अच्छा नहीं लगता था लोगों की आँखों में रहना. लेकिन पिछले दो साल से मुझे अन्दर से अच्छा फिल होता हे ये सब देख के. कोई मुझे देखे तो उस दिन चूत में ऊँगली करने की मजा कुछ और ही आती हे.

धीरे धीरे मैं अकेलेपन को मारने के लिए पोर्न और सेक्स की दुनिया की स्लेव हो गई. रात को डेली सोने से पहले पोर्न क्लिप्स देखने से मुझे अंदरूनी मजा आता था. मैंने आदत बना ली थी जैसे की सोने से पहले चुदाई देखनी हे. और इन सब से मेरे अन्दर की अन्तर्वासना और बढ़ी, मैं ऊँगली से चूत को खिलाती थी और नंगे सो के वासना को और सुलगाती थी.

मेरे अन्दर एक ऐसी फिलिंग ने जन्म लिया था की मैं ताकतवर मर्दों के लंड को ले लेना चाहती थी किसी भी कीमत पर. मुझे मोटे सिनेवाले मर्दों से ख़ास लगाव सा होता चला था. ऐसे लगता था की वो मुझे पकड के ऐसे चोदे की मेरे अन्दर की औरत को वो अपनी चुदाई की गुलाम बना दे. लेकिन पोर्न की दुनिया और असली दुनिया में यही तो फर्क हे. औरत को चोद के उसकी बॉडी को थकान से चूर कर दे ऐसे मर्द कम ही हे दुनिया के अन्दर!

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मैं सीटी की हद से बहार ही रहती थी. पति ने मुआवजे में एक जमीन का टुकड़ा भी दिया था जिसके ऊपर मैंने 1bhk बनवा लिया था. आगे एक छोटा सा रोड था. और अगल बगल में कुल मिला के चार और मकान थे. चारों ने मिल के एक वाचमेन को रखा था क्यूंकि वो जरुरी था इस एरिया में. महीने में एक बार मैं सफाई अभियान चलाती थी अपने ही घर में. घर के अन्दर और बहार दोनों की सफाई उस दिन आराम से होती थी. एक दिन ऐसे ही मैंने बहार की सफाई के लिए झाड़ू उठाई थी.

सफाई करने के बाद थक गई. और मुझे लगा की आज तो मेरे से खाना बनेगा नहीं. डिलीवरी नहीं करते थे रेस्टोरेंट वाले हमारे एरिया में. इसलिए मैं नहाने के बाद रिक्शा पकड के खाना लेने के लिए गई. एक हेल्थी रिक्शावाले को देखा मैंने जो बैठ के बीडी फूंक रहा था. उसके चहरे के ऊपर शेविंग करने का वक्त हुआ था उसकी निशानी जैसी हलकी सी बियर्ड थी. वो अपनी खाकी वर्दी में थोडा गन्दा सा लगता था.

मैंने देखा की वो शक्ल से ही एकदम मजबूत लगता था. मेरे बदन में उसको देख के ही गुदगुदी सी होने लगी थी. वो मुझे देख रहा था और मैं उस से नजरे नहीं मिला पाई. मैंने स्माइल दी. फिर मैंने उसके पास जा के कहा, शिला होटल चलोगे? पार्सल ले के वापस आना हे.

वो बोला: किसी और को देख लो, मैं नहीं जाऊँगा.

मैंने उसको देखा और अपनी साडी को थोडा निचे किया. अपने बूब्स का क्लीवेज उसे दिखा के मैंने कहा, टिप अच्छी मिलेगी. घर की सफाई कर रही हूँ, 1000 रूपये दे दूंगी अगर सफाई में हाथ बटायाँ खाने के बाद.

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वो मुझे ऊपर से निचे डेक के बोला, ठीक हे चलो.

मैंने रिक्शा में चढ़ते हुए भी अपने पल्लू को ऐसे गिराया की उसके मेरे ब्लाउस में उभरे हुए बूब्स देखने को मिले. वो मुझे किसी जानवर के जैसे ही देख रहा था, मैंने उसे देख के कहा ऐसे क्या देख रहा हे, खायेगा क्या?

मैं ये बोल के हंस पड़ी और वो कुछ नहीं बोला और रिक्शा चलाने लगा.

मैंने कहा, बड़ी स्लो चला रहे हो थोडा फास्ट करो ना!

वो बोला, गांड फाड़ दूँगा अगर तेज चलाई तो.

मैं चूप रही. उसने फास्ट की और वो बार बार शीशे में मुझे देख रहा था. मैंने कहा, कोई औरत को देखा नहीं क्या कभी?

वो बोला, बहुत देखी हे और बहुतो को थका के भगाया हे अपने घर से.

मेरे ऊपर वासना का खुमार चढ़ने लगा था. खाने के पार्सल में मैंने दो आदमी खा सके उतना सामान लिया. फिर हम लोग वापस मेरे घर पर आ गए. मैंने लोक खोला और उसे कहा, आओ अंदर.

वो मेरी गांड को ही देख रहा था बार बार.

मैंने कहा क्या हुआ?

वी बोला, तू अकेली रहती हे यहाँ पर?

मैंने कहा, हां?

वो बोला, तेरी शादी नहीं हुई.

मैंने कहा, मेरी तलाक हुई हे.

वो बोला: क्यूँ?

मैंने कहा मेरा पति मर्द नहीं था.

वो हंस पड़ा और बोला, तभी.

मैंने कहा, क्या तभी?

वो बोला कुछ भी नहीं.

फिर हमने खाना खाया. खाते हुए वो मेरे बूब्स के ऊपर नजरें गडाए हुए था.

मैंने कहा, क्या देख रहे हो.

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