मैं- हाँ आपको तो बड़ा मज़ा आता होगा.. पर मुझको तो ब्लू-फिल्म देख कर ही गुजारा करना पड़ता है।
तो वो अचानक बोल पड़ी- हाँ पता है.. कि तुम्हारा मुठ मारने की वजह से कितना बुरा हाल है।
मैं तो एकदम सन्न सा हो गया, मैं दिल में सोच रहा था कि इन्हें कैसे पता चल गया।
अब मुझे थोड़ा डर भी लगने लगा कि कहीं ये किसी को बता न दे।
मैं उसके पास बैठा और कहा- आप ये बात किसी को मत बताईएगा.. आप जो बोलोगी.. मैं वो करूँगा.. पर प्लीज़ मत बताना।
उसने अपना हाथ मेरे लण्ड पर रखा और बोली- क्या इससे नहीं मिलवाओगे?
गर्म आन्टी की चूत चुदाई
अब मैं समझ गया कि ये खुद चुदना चाहती है.. तो मैंने तुरंत अपना लण्ड.. जो उसके हाथ के स्पर्श से फिर से गरम हो गया था.. उसके हाथ में दे दिया.. और फिर उसे अपनी ओर खींच कर किस करने लगा।
मैं उसे इस तरह से चूम रहा था.. जैसे सदियों का प्यासा हूँ।
कोई करता भी क्या.. जब ऐसे हुस्न की मल्लिका खुद चल कर आपके पास चुदने के लिए आई हो.. तो कौन खुद पर सबर रख पाएगा।
मैं उसे बेतहाशा चूमने और चाटने लगा।
उधर वो मेरा लण्ड दबा-दबा कर मेरा जोश और बढ़ा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में इस कदर समाए थे.. जैसे कई दिनों से प्यासे हों।
बहुत ज़्यादा उत्तेजित था मैं.. तो मैं जल्दी से उसका गाउन उतारना चाहता था.. पर उसकी चैन नहीं मिल रहा था।
उसके गाउन को मैं ताक़त लगा कर खींचने लगा.. तो वो बोली- आराम से.. मेरी जान.. मैं अभी तुम्हारी ही हूँ.. आराम से करो।
मैं- क्या जानू.. इतने दिनों से मुझे तड़पा रही हो और आज जब हाथ आई हो तो मुझसे सबर नहीं होता।
इस बात पर उसने खुद ही चैन खोली तो उसका गाउन नीचे गिर गया, मेरे सामने उसके भरे हुए मम्मे थे.. जिन पर मैं टूट पड़ा।
वो इतनी कामुक हो गई थी कि वो मेरा सिर अपनी सीने में घुसा रही थी। मैं भी उसको कसके पकड़ कर उसके पूरे मम्मों को अपने मुँह में भरना चाहता था।
बारी-बारी से मैं उसके दोनों मम्मों को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं अमृत पी रहा होऊँ और मानो में सातवें आसमान पर उड़ रहा हूँ।
उस वक़्त की खुशी में लफ्जों में बयान नहीं कर सकता।
मैं उसका बदन चूमते हुए नीचे आने लगा.. जब मैंने उसकी नाभि पर चूमा तो वो सिहर उठी और मुझ अपने पेट पर दबाने लगी.. पीछे मेरा हाथ उसकी गाण्ड को दबा रहा था।
फिर उसकी चूत पर मैंने अपने होंठ लगा दिए और वो मादक सिसकारियाँ लेने लगी।
वो अपने एक हाथ से मेरे लण्ड को दबा कर मेरा भी बुरा हाल कर रही थी।
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली और अन्दर-बाहर करने लगा। कुछ मिनट बाद उसने मुझे बहुत ज़ोर से पकड़ा और वो अकड़ने लगी। फिर उसका रस निकल गया और वो मैं पी गया। अजीब सी खुश्बू थी उस अमृत की।
अब उसकी बारी थी.. तो उसने मुझे लेटा दिया और मुझ पर सवार हो गई, मेरा लण्ड हाथ में लिया और सहलाने लगी, फिर मुँह में लेकर चूसने लगी।
इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था, मेरा भी थोड़ी देर बाद निकल गया और मैं उसके मुँह में ही झड़ गया।