रात में मा बेटे का सेक्स

मों-सोन सेक्स स्टोरी कंटिन्यूस…

दूसरे दिन मैं सुबह सो रहा था तब फोन की घंटी बाजी. देखा तो अनिरुढ़ भाई का नंबर था. पहले तो मॅन किया काट डू, पर फिर सोचा, क्या पता क्या कहना चाहते हो. मैने फोन उठाया.

अनिरुढ़ (आवाज़ में थोड़ी घबराहट और शरम थी): हेलो आराव… यार, सुन्न… ग़लती हो गयी मुझसे.

मैं (मेरी आवाज़ में अब भी तोड़ा रूखा पन्न था): क्या ग़लती हो गयी, अनिरुढ़ भाई?

अनिरुढ़ (साँस लेते हुए): यार, वो कल रात जो कुछ भी हुआ… यामिनी जी ने फोन पर जो कहा… वो सब… मेरी वजह से था. मैं तोड़ा हवा बाज़ी कर रहा था. सोचा की तुम तो कूल हो, दोस्त हो… तुम्हे बुरा नही लगेगा. पर, सॉरी दोस्त. मुझे ऐसा नही करना चाहिए था.

मुझे उसकी आवाज़ में कोई चालाकी महसूस हुई. जो गुस्सा मेरे अंदर भरा था, वो धीरे-धीरे बढ़ने लगा. कहीं ना कहीं मुझे भी अनिरुढ़ भाई के लिए बुरा लग रहा था. वो बस एक अंजना प्यादा था मेरे खेल में, और उसे क्या पता था की उसकी हवा बाज़ी ने मुझे कितना मज़ा दिया.

मेरा तोड़ा ड्रामा मुझे मम्मी की छूट तक ले गया. और अनिरुढ़ भाई का माफी माँगना, इसका मतलब था की मम्मी ने उनको आचे से सुना दिया था.

मैं (धीरे से, पर सॉफ आवाज़ में): अनिरुढ़ भाई, देखो आप मेरे दोस्त हो. मम्मी भी आपको पसंद करती है. पर आयेज से ऐसी ग़लतियाँ ना करें जिससे मम्मी को बुरा लगे. उनको खुश रखना ज़रूरी है. आप दोनो का रिश्ता बहुत अछा है, और मैं नही चाहता की मेरी वजह से वो रिश्ता टूट जाए. उन्हें तकलीफ़ नही होनी चाहिए.

अनिरुढ़ (तोड़ा रिलीव्ड हो कर): नही यार, बिल्कुल नही होगा. मैं समझ गया. अब आयेज से बहुत ध्यान रखूँगा. यामिनी जी को भी माना लूँगा.

मैं (एक पल सोचा, फिर बोला): हा, उन्हें माना लेना. उनका मूड ठीक करना ज़रूरी है.

अनिरुढ़ (आवाज़ में थोड़ी हिम्मत लौट रही थी): ठीक है यार, थॅंक योउ. तू समझता है मुझे.

मैने फोन रख दिया. अनिरुढ़ भाई का कॉल मेरे लिए एक अजीब सी जीत थी. मम्मी ने उसको मेरे लिए दांता था, और उसने मुझसे माफी माँगी थी. इससे मेरा ईगो और भी बढ़ गया था. अनिरुढ़ भाई अब जानते थे की मम्मी उनके लिए कुछ भी कर सकती है, और वो जो भी करेंगी वो उनके बेटे के लिए होगा.

अब अनिरुढ़ भाई सिर्फ़ एक प्यादा ही नही, बल्कि एक घबराया हुआ प्यादा था. मेरे अंदर एक अजीब सा सुकून था. मम्मी ने अनिरुढ़ भाई को मेरे लिए दाँत दिया था, मेरे लिए. ये सोच कर मेरे दिल में एक गर्व और उनके लिए और भी ज़्यादा प्यार उमड़ रहा था. अब मम्मी पूरी तरह से मेरी बनाना था और ये बात मुझे पता थी की कैसे बनाना था.

मैने फ्रेश हो कर किचन में गया तब देखा मम्मी आज कुछ ज़्यादा ही खुश और फ्रेश दिख रही थी. उनके चेहरे पर एक ऐसी चमक थी जो मेरी आँखों से च्छूपी नही थी. मुझे पता था ये चमक किस वजह से थी, और इस बात से मेरे अंदर एक अजीब सा गर्व हो रहा था.

किचन में मम्मी नाश्ता बना रही थी, और मैं पानी पीने के बहाने वहाँ गया. मम्मी ने जैसे ही मुझे देखा, उनके होंठो पर एक हल्की, नॉटी स्माइल आ गयी.

मम्मी (धीमी आवाज़ में, जब कोई आस-पास नही था): क्या हुआ मेरे शेर को? रात भर की थकान उतरी नही अभी तक?

मैं (मम्मी के करीब जाते हुए, उनकी कमर को हल्के से छ्छूते हुए): थकान तो डोर की बात है मम्मी, आपकी याद में नींद ही नही आई. आपकी चुदाई का नशा अभी तक चढ़ रहा है.

मम्मी ने शरमाते हुए मेरी तरफ देखा, और उनकी आँखों में वही चाहत थी जो रात को उनके चेहरे पर थी. उन्होने अपने हाथ से मेरी कमर पर हल्के से थप्पड़ मारा.

मम्मी (फुसफुसते हुए): बदमाश. अभी सब घर पर है, कोई देख लेगा.

अगले दिन शाम का वक़्त था, घर में सब लोग डाइनिंग टेबल पर खाना खा रहे थे. बड़ी फॅमिली थी, तो टेबल पर हँसी-मज़ाक और बातें चल रही तीन. मम्मी सब को सर्व कर रही थी. मैं अपनी चेर पर बैठा सब अब्ज़र्व कर रहा था, ख़ास कर मम्मी को. उनका फिगर सारी में और भी उभर कर आ रहा था, और मुझे अपनी आँखों पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था.

जब मम्मी मेरे पास सर्व करने आई, मैं जान-बूझ कर तोड़ा आयेज खिसक गया, जैसे बर्तन लेने के लिए. मम्मी ने नीचे झुक कर सब्ज़ी डाली, और उसी पल उनकी सारी का पल्लू तोड़ा साइड हुआ. मेरी नज़र सीधे उनके ब्लाउस के डीप नेकलिन पर पड़ी. उनकी भारी हुई क्लीवेज सॉफ दिख रही थी, और एक पल के लिए मेरी साँसें थम गयी. मैं उन्हें ही देखता रहा.

मम्मी ने सब्ज़ी डालते हुए मेरी तरफ देखा. उन्होने मेरी आँखों में देखा, उन्हें पता चल गया की मैं क्या देख रहा था. उनके होंठो पर एक हल्की, नॉटी स्माइल आ गयी. उन्होने हल्के से अपनी आँखें बड़ी की, जैसे कह रही हो, “क्या हुआ, देख रहे हो?” उस पल में एक अजीब सी गर्मी मेरे अंदर दौड़ गयी. उन्होने सीधे होने से पहले अपनी क्लीवेज को मेरे सामने एक और बार एक्सपोज़ किया, जैसे वो जान-बूझ कर मुझे टीज़ कर रही हो.

मैं खामोश रहा, पर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान थी. जैसे ही मम्मी वहाँ से हटी, मैने टेबल के नीचे से अपना हाथ धीरे से उनकी तरफ बढ़ाया. मेरा हाथ उनकी जाँघ पर जेया लगा, सारी के उपर से ही. उनकी जाँघ नरम और गरम थी. मैने हल्के से उनकी जाँघ को दबाया.

मम्मी जो अभी कुछ डोर गयी तीन, उन्होने एक पल के लिए अपनी हरकत रोकी. उन्होने अपनी नज़र नीचे की, मेरी तरफ. उनकी आँखों में एक शरारती चमक थी, और उनके होंठो पर वही च्छूपी हुई मुस्कान. उन्होने बिना कुछ बोले, मेरे हाथ को अपनी जाँघ पर हल्के से दबाया, जैसे वो कह रही हो, “बेशरम, यहाँ भी शुरू हो गया?” पर उस दबाने में एक अजीब सा आनंद था.

मैने भी उनका इशारा समझ लिया. मैं धीरे-धीरे उनकी जाँघ को सहलाता रहा. फॅमिली के दूसरे लोग अपनी बातों में मशगूल थे, उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नही था की टेबल के नीचे क्या चल रहा था. ये चोरी-चोरी की हरकतें मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी. मम्मी बीच-बीच में मेरी तरफ देखती थी, और उनकी आँखों में वही चाहत और इन्वाइट था.

थोड़ी देर बाद, मम्मी को किचन में कुछ काम से जाना पड़ा. जाते हुए उन्होने मेरे कान के पास से गुज़रते हुए धीरे से फुसफुसाया, “रात को मिलते है, बदमाश.”

मम्मी के जाने के बाद, मेरे चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान थी. दिन के उजाले में, इतने लोगों के बीच मम्मी के साथ ये चुपके से किया गया टीज़, मेरे अंदर की आग को और बढ़ा गया था. मुझे अब रात का बेसब्री से इंतेज़ार था.

रात करीब 11 बजे, जब पूरा घर सन्नाटे में डूब चुका था, धीरे से मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला. मैने अपनी साँसें रोक ली. अंदर मम्मी आई, और उनके होंठो पर वही शरारती मुस्कान थी जो डाइनिंग टेबल पर थी. पर इस बार, उनके चेहरे पर एक नयी चमक थी, एक नया जुनून. और उन्होने वही पीली सारी पहनी हुई थी, जो मैने दिन में पसंद की थी.

वो कमरे में आई और दरवाज़ा धीरे से अंदर से बंद कर दिया. कमरे में हल्की सी रोशनी थी. उन्होने मेरे बेड के पास आ कर अपने पल्लू को हल्के से उतरा. मेरी साँसें थम गयी. उनका ब्लाउस इतना टाइट था की उनके भरे हुए बूब्स उसमें से बाहर निकालने को बेताब थे. सारी में उनका फिगर और भी ज़्यादा सेक्सी लग रहा था.

मम्मी (धीमी, गरम आवाज़ में, मेरी आँखों में देखते हुए): सो गया मेरा बेटा? या अभी भी मम्मी का इंतेज़ार कर रहा था?

मैं (बेड से उठ कर उनके करीब जाते हुए, उनकी आँखों में देखते हुए): आपको क्या लगा, मम्मी? जब आप जैसी मम्मी हो, तो नींद कैसे आ सकती है? आप तो आज जानलेवा लग रही हो.

मम्मी ने एक नॉटी स्माइल दी और मेरे होंठो को चूम लिया. ये किस शुरुआत थी उस रात के जुनून की.

मम्मी (मेरी आँखों में गहराई से देखते हुए): आज मुझे अपनी चुदाई से खुश कर दे बेटा.

मैने बिना देर किए मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया. उनके गरम जिस्म का एहसास मिलते ही मेरा लंड शॉर्ट्स के अंदर अकड़ गया. मैने उनकी कमर को ज़ोर से पकड़ लिया.

मैं (मम्मी के कान में फुसफुसते हुए): आपकी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा, मम्मी. आज रात मैं आपको ऐसा मज़ा दूँगा की आप सब कुछ भूल जाओगी.

मम्मी ने एक मदहोश आ भारी. उन्होने अपने होंठो को मेरे होंठो पर मसला, और उनकी जीभ मेरे मूह में घूमने लगी. मैं उनकी जीभ को चूस्टा रहा, और मेरे हाथ उनकी कमर पर से होते हुए उनकी सारी के अंदर घुस गये, उनकी नंगी पीठ को सहलाने लगे. उनकी स्किन बहुत नरम और गरम थी.

मैने उनकी सारी खोलना शुरू किया. धीरे-धीरे उनकी सारी उनके जिस्म से अलग होने लगी, और उनका ब्लाउस और पेटिकोट में लिपटा शरीर मेरे सामने उभर कर आया. उन्होने खुद भी मेरी मदद की. जब सारी पूरी तरह उतार गयी, मम्मी मेरे सामने सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में थी. उनके भरे हुए बूब्स ब्लाउस में कस्स कर बँधे थे, और पेटिकोट में उनकी गोल गांद का उभार सॉफ दिख रहा था.

मैं (मम्मी के बूब्स को देखते हुए): मम्मी, ये ब्लाउस तो अभी भी तंग कर रहा है. इसको भी उतरो.

मम्मी ने एक नॉटी स्माइल दी और अपने हाथो से अपने ब्लाउस के हुक्स खोलने लगी. एक-एक हुक खुलते ही उनके बूब्स और ज़्यादा उभर कर आने लगे. जब सारे हुक्स खुल गये, उन्होने ब्लाउस को अपने जिस्म से अलग कर दिया. वो अब सिर्फ़ ब्रा और पेटिकोट में थी. उनके आधे से ज़्यादा बूब्स ब्रा में से बाहर थे, और उनकी निपल्स की हल्की झलक दिख रही थी.

मम्मी (शरमाते हुए, पर आँखों में जुनून था): अब क्या आराव? और कुछ चाहिए?

मैं (मम्मी को बेड पर धकेलते हुए): अब तो पूरी मम्मी चाहिए, वो भी नंगी.

मम्मी बेड पर लेट गयी, और मैने उनका पेटिकोट भी उतार दिया. वो अब सिर्फ़ ब्रा और पनटी में थी, उनका गोरा जिस्म मेरे सामने था. मैने अपने कपड़े भी उतार दिए, और अब हम दोनो बिल्कुल नंगे थे.

मैं मम्मी के उपर आ गया. हमारे नंगे जिस्म एक-दूसरे से टकराए, और एक अजीब सी गर्मी और सुकून का एहसास हुआ. मैने उनके होंठो को चूमा, और फिर उनके गले से नीचे उतार कर उनके कंधो और छ्चाटी पर किस करने लगा. मम्मी ने अपने हाथो को मेरे बालों में कस्स कर पकड़ लिया.

मैं उनके बूब्स को अपने हाथो में दबाया और उन्हें चूसना शुरू किया. मम्मी के मूह से मदहोश सिसकियाँ निकालने लगीं. उन्होने अपने कमर को हल्के से उपर उठा कर मेरा साथ दिया. मैने एक बूब को मूह में लेकर चूसा, और दूसरे को हाथ से मसला.
मम्मी का जिस्म अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था.

मैं धीरे-धीरे नीचे उतरा, उनकी कमर और पेट पर किस करते हुए. जब मैं उनकी पनटी के पास पहुँचा, मम्मी ने अपने पैर थोड़े खोले, जैसे वो मुझे निमंत्रण दे रही हो. मैने उनकी पनटी को धीरे से उतरा और उसे एक तरफ फेंक दिया. उनकी छूट मेरे सामने थी, गुलाबी और हल्की नामी से भारी हुई.

मैं (मम्मी की छूट को देखते हुए: मम्मी, ये तो आज और भी प्यारी लग रही है.

मम्मी (साँसें तेज़, आँखें बंद: आराव… मेरी जान… अब और इंतेज़ार नही होता.

मैने अपना चेहरा मम्मी की छूट के करीब लाया और उसे धीरे से चूमा. उनकी गरम साँसें और उनके जिस्म की महक मुझे मदहोश कर रही तीन. मैने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी छूट के उपरी हिस्से पर फेरना शुरू किया. मम्मी ने एक मदहोश आ भारी, और उनका जिस्म मेरे स्पर्श से काँप उठा.

मैं धीरे-धीरे उनकी छूट को चाटने लगा, उपर से नीचे तक, और फिर वापस उपर. हर बार जब मेरी जीभ उनकी छूट पर फिरती, मम्मी के मूह से सिसकियाँ निकालने लगी. उन्होने अपने हाथो से मेरे सिर को पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पर और कसने लगी. उनकी गरम साँसें मेरे कानों में पद रही थी. उन्होने अपनी छूट से रस्स छ्चोढना शुरू कर दिया, और मैं उस रस्स को चाट-चाट कर पीने लगा.

मम्मी (तेज़ सिसकारियों के साथ: आ… आराव… बस कर… मैं झड़ने वाली हू…

मैं मम्मी की छूट को तब तक चाट-ता रहा जब तक उनका जिस्म कंपन करना शुरू ना कर दे. मम्मी एक तेज़ चीख के साथ झाड़ गयी, उनका रस्स मेरे मूह में भर गया. मैने उस रस्स को पूरी तरह से पिया. उन्होने मेरे सर को उपर खींचा और मेरे होंठो पर अपनी उंगली फेरी.

मम्मी (हानफते हुए, आँखों में प्यार): आराव, तू तो कमाल है.

मैने शर्मा कर मम्मी की आँखों में देखा. उन्होने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रखा, जो अब पूरी तरह से खड़ा और तैयार था.

तो बे कंटिन्यूड….

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