दोस्तों मैं प्रांजल अपनी बाप-बेटी सेक्स कहानी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा, और वो आपको पसंद भी आया होगा. जिन लोगों ने पिछला पार्ट नही पढ़ा है, पहले वो उसको ज़रूर पढ़ ले.
पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की कैसे मैने नशे में होने का नाटक करके पहले अपने पापा का लंड चूसा. उसके बाद मैने अपने पापा से छूट चुस्वाई. फिर मैं सो गयी, और जब हम घर पहुँचे, तो मेरी नींद खुल गयी. अब आयेज-
मैं और पापा घर के अंदर आ चुके थे. मैने पापा को पापा बोल दिया था, तो मेरा नाटक ख़तम हो चुका था. मैं सीधे अपने कमरे में गयी, और नाइट सूट पहन कर बिस्तर पर लेट गयी. पापा अपने रूम में चले गये थे. मम्मी अब तक सो चुकी थी.
मेरी छूट अभी भी गरम थी. फिंगरिंग करने का मेरा दिल नही था, और चुदाई मेरी होने नही वाली थी. फिर मैं जैसे-तैसे सोने की कोशिश करने लगी. आधा घंटा हो चुका था, लेकिन कम्बख़्त नींद थी, जो पड़ने का नाम नही ले रही थी.
तभी मुझे अपने रूम के दरवाज़े पर कुछ आहत सुनाई दी. मैने देखा, तो दरवाज़ा धीरे-धीरे खुल रहा था. मैने सोने का नाटक किया, और दरवाज़े की तरफ देखती रही. दरवाज़ा पूरा खुल गया, और पापा धीरे-धीरे अंदर आने लगे.
मैं पापा को अपने रूम में देख कर हैरान हो गयी. मेरे दिमाग़ में काई सवाल आने लगे. जैसे पापा मेरे रूम में क्या कर रहे थे? कहीं उनको शक तो नही हो गया की मैं कार में नाटक कर रही थी? वो ये तो चेक नही करने आए थे की मैं सो चुकी थी या नही?
अब पापा मेरे करीब आने लगे, और उन्होने धीरे से मुझे आवाज़ लगाई: प्रांजल!
मैने कोई रेस्पॉन्स नही दिया, और सोने का नाटक कर रही थी. मैं देखना चाहती थी की पापा क्या करने वाले थे. फिर पापा ने अपना हाथ आयेज बढ़ाया, और मेरे कंधे पर रख कर मुझे तोड़ा हिलाया. शायद वो चेक कर रहे थे की मैं सोई थी या नही. लेकिन मैं लाश की तरह पड़ी रही.
फिर पापा अपना हाथ मेरे कंधे से मेरे बूब पर ले गये, और उसको दबाने लगे. मैं हैरान हो गयी. वो एक हाथ से मेरा बूब दबा रहे थे, और दूसरे हाथ को मेरी गांद पर फेरना शुरू कर दिया.
मैं समझ गयी थी की जो खेल मैने गाड़ी में शुरू किया था, पापा उसको आयेज बढ़ाना चाहते थे. तो मैने अपनी भी चाल चल दी.
मैने नींद का नाटक करते हुए पापा का हाथ पकड़ लिया, और आँखें बंद रखे हुए बोली: वरुण, तोड़ा ज़ोर से दब्ाओ ना.
मेरी ये बात सुन कर पापा मेरे बूब को ज़ोर से दबाने लगे. मैं आ आ करके हल्की आहें भरने लगे. फिर मैने पापा का दूसरा हाथ पकड़ा, और उसको अपने पाजामे में डाल दिया. मैं उनको बोली-
मैं: वरुण ये क्या उपर-उपर से कर रहे हो? अंदर से करो ना.
पापा मेरी बात समझ गये, और मेरी पनटी में हाथ डाल कर मेरी छूट मसालने लगे. मैं तेज़ साँसें लेते हुए सिसकियाँ लेने लगी. अपना दूसरा हाथ उन्होने मेरी त-शर्ट के अंदर डाल दिया. मैं सोते वक़्त ब्रा नही पहनती, तो अब मेरा नंगा चुचा पापा के हाथ में था.
अब पापा नीचे से छूट सहला रहे थे, और उपर से चुचा दबा रहे थे. मैं पागल हो रही थी, और मेरी छूट पानी छ्चोढने लगी थी. तभी मैने कहा-
मैं: वरुण छोड़ो ना मुझे.
बस मेरे ये कहने की देर थी, की पापा ने मेरा पाजामा पनटी समेत निकाल दिया. अब मैं नीचे से नंगी थी. उपर से उन्होने मेरी त-शर्ट बूब्स के उपर करके मेरे बूब्स भी नंगे कर दिए.
फिर पापा खड़े हुए, और अपने सारे कपड़े उतार दिए. पापा का लंड बिल्कुल तन्ना हुआ था. मैं मॅन ही मॅन चहक रही थी, की आज मेरी छूट में लंड जाएगा और मेरी प्यास बुझाएगा.
फिर पापा नीचे से मेरे पैर चूमने लगे. उसके अंगूठे को चूसने लगे. ये सब बहुत हॉर्नी कर रहा था मुझे. पापा मेरे पैरों को चूम कर मेरी टाँगों को चाटने लगे, और फिर मेरी छूट चूसने लगे. मेरा बाप मेरी छूट की आग को और भड़का रहा था.
छूट का स्वाद लेने के बाद पापा ने मेरी टाँगें खोली, और बीच में आ गये. फिर उन्होने अपना लंड मेरी छूट पर सेट किया, और ज़ोर का धक्का मारा. पहले धक्के में उनका लंड फिसलता हुआ आधा मेरी छूट में चला गया.
मुझे दर्द हुआ, तो मेरी चीख निकालने लगी. लेकिन उससे पहले पापा ने अपने होंठो से मेरे होंठ बंद कर दिए. फिर पापा धक्के पे धक्के मारते गये, और लंड मेरी छूट को चीरता हुआ कुछ ही सेकेंड्स में पूरा अंदर चला गया.
पूरा लंड अंदर डालने के बाद पापा कुछ देर रुके. इस दौरान पापा ने मेरे होंठ चूज़, बूब्स दबाए और चूज़. जब उनको लगा की मेरा दर्द कम हो गया होगा, तो उन्होने धीरे-धीरे लंड मेरी छूट में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. मुझे अब बहुत मज़ा आने लगा था. मैं आ वरुण, श वरुण की आवाज़े निकालने लगी थी.
फिर पापा ने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बधाई. मैने अपनी टाँगें अपने पापा की कमर पर लपेट ली, और मेरा बाप मुझे फुल स्पीड में छोड़ने लगा. वो बार-बार मेरे निपल्स पर बीते करते, जिससे मेरे पुर शरीर में करेंट सा दौड़ने लगता और दर्द भी होता.
मेरी छूट बहुत पानी छ्चोढ़ रही थी, जिससे चुदाई में छाप-छाप की आवाज़े निकालने लगी थी. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मेरे दिमाग़ में आया-
दिमागी ख़याल: यार ये मज़ा सिर्फ़ आज के लिए है? आज तो नशे में होने का बहाना चल गया. लेकिन दोबारा कैसे चुड़ूँगी? ऐसा करती हू, अब जाग जाती हू.
फिर मैने आ आ करते हुए अपनी आँखें खोल दी, और हैरान होते हुए बोली: पापा! ये आप क्या कर रहे हो?
पापा (धक्के लगते हुए): बेटा तुम्हे ही मुझे कहा था करने को.
मैं: पापा ये ग़लत है.
पापा: बेटा अब तो हो चुका. क्या सही क्या ग़लत? तुम्हे मज़ा नही आ रहा क्या?
मैं: मज़ा तो आ रहा है.
पापा: तो बस मज़ा लो.
फिर मैं बस आ आ करती रही, और पापा छोड़ते रहे. आधा घंटा छोड़ने के बाद उन्होने अपना माल मेरे पेट पर निकाल दिया और साइड हो गये. फिर मैने कहा-
मैं: पापा आज तो आपने छोड़ दिया. अब आयेज क्या?
पापा: जब भी दिल करे बता देना. वैसे भी तेरी छूट में बड़ी आग है. जब तू नशे में थी, तब मैने इस आग को देख लिया था.
मैं मुस्कुराते हुए शर्मा गयी, और अपनी आयेज की चुदाई का भी इंतेज़ां कर लिया. फिर पापा चले गये, और मैं सो गयी.
थे एंड.