रात के वक़्त भाभी के साथ सेक्स

भाभी सेक्स स्टोरी शुरू करते है-

मैने उनकी कमर पर चुटकी काटी, और उनकी आँखें बंद हुई, और एक हल्की सी आवाज़ आई आ की. मैने एक बार और काटी. फिर से मुझे आवाज़ आई आह की. उसके बाद भाभी बोली-

भाभी: क्या कर रहा है? चींटी क्यूँ काट रहा है? जो करना है वो कर, और जेया यहाँ से. अगर कोई आ गया तो हम दोनो मॅर जाएँगे. मुझे खाना भी बनाना है. अब आयेज-

मैं भाभी को चुटकी काटने के बाद वहाँ से चला गया अपने दोस्तों के साथ. मेरे दोस्त हमेशा ही कुछ नयी बातें किया करते थे. उन्हे भी भाभियाँ बहुत पसंद है.

शाम को मैं घर आया तो रात के 9 बाज रहे थे. सब अपने कमरे में सोने जेया चुके थे. मैं भी अपने कमरे आ गया, लेकिन अजीब लग रहा था की क्या करू. फिर थोड़ी देर में मैने पॉर्न देखना शुरू किया. उसमे एक ब्लॅक गाइ एक हॉट लेडी को बातरूम में ले जेया कर उसकी चुड चाट रहा था. मुझे बहुत ज़ोर से जोश आ गया उस वीडियो को देख कर. तभी मुझे याद आया की भाभी को देख आता हू, की वो सोई या नही.

मैं फिर धीरे से उनके कमरे के बाहर से उनको देख रहा था. वो मोबाइल चला रही थी. बच्चे सो गये थे उनके. मैने हल्का सा अपना सर उनके गाते से तोड़ा सा अंदर किया, तो उन्होने मुझे देख लिया, और मुझे देखने लगी.

भाभी: क्या है, क्यूँ आया है?

मैं: भाभी यहाँ आओ.

भाभी ने माना कर दिया, और इशारे में कहा जाओ यहाँ से. लेकिन मैं नही गया, और उनको बुलाया. उनको उठ के धीरे से आना पढ़ा.

भाभी: क्या है, जेया ना यहाँ से. क्यूँ आया है सोने के टाइम पर? अपने कमरे में जेया कर सो ना.

मैं: भाभी नींद नही आ रही है. आप तोड़ा सा मेरे साथ चलो ना.

भाभी ने माना कर दिया: कोई देख लेगा. मुझे नही आना.

लेकिन मैने धीरे से उनके शोल्डर से नीचे उनका हाथ पड़का ज़ोर से. मैं ऐसे हक जमा रहा था, जैसे भाभी मेरी ही बीवी हो. मैने उनसे नीचे आने को कहा. उन्होने मुझे कहा-

भाभी: ठीक है आती हू. तू जेया यहाँ से.

मैं नीचे अपने कमरे में आ गया, और भाभी नीचे आई और कहा: क्या है, क्या करना है अब?

मैं: भाभी आज सब सो गये है. मेरे साथ सो जाओ थोड़ी देर, फिर चली जाना.

भाभी: पागल है क्या? दोनो बच्चे उठ गये तो? और कोई आ गया तो? क्या कहूँगी उन्हे की कहा थी?

मैं: भाभी कुछ नही होगा. थोड़ी देर में चली जाना, बस थोड़ी देर बस.

भाभी: ठीक है, पर कुछ नही ठीक है.

मैं: भाभी सुबह जो रह गया था क्या वो तो कर सकता हू? या वो भी नही कर सकता हू जो मेरा छ्छूट गया था?

भाभी: ठीक है जल्दी कर ले.

मैं फिर भाभी के करीब आया, और उनकी कमर पर हाथ रख कर उनको दीवार के सहारे लगा दिया. फिर उनके होंठो के करीब आया, और उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए, और धीरे से भाभी के होंठ को काटा. भाभी ने मुझे धक्का दिया की काटो मत. मैं फिर से उनके होंठ को अपने होंठ से मिला कर धीरे-धीरे उनके होंठ चूसने लगा और उनका मूह खोलने की कोशिश करता रहा.

उनका मूह खुल गया और मैं अपनी जीभ उनकी मूह में डाल कर घूमने लगा, और उनकी जीभ से मिलने लगा. बहुत ही चिकनी थी उनकी जीभ, मज़ा आ रहा था. मैने अपना थूक उनके मूह में थूका और उपर से उनका मूह अपने होंठो से बंद कर दिया, ताकि वो मेरा थूक निकाल ना पाए. मैं उन्हे चूज़ जेया रहा था. हमारी लार गिरने लगी थी. फिर उन्होने मुझे धक्का मारा की अब बस, अब नही.

भाभी: मैं जौ अब?

मैं: अभी कहाँ, अभी तो शुरू ही करा है. मैं आपकी चड्डी उतरूँगा अभी. मुझे वो सूंघनी है. भाभी निकालो तो अपनी चड्डी.

वो मुझे घूर्ने लगी और मुझे निकाल कर डेडी. मैं उनके सामने उनकी छूट वाले हिस्से को चाट रहा था. वो देख रही थी की मैं कैसे उनके छूट वाले हिस्से पर, जहाँ उनकी छूट चड्डी पर चिपकी हुई थी, वहाँ चाट रहा था. मैने उसे सूँघा. मज़ा ही आ गया सूंघ कर तो.

मैं: लो भाभी अब इसे पहन लो.

तो उन्होने माना कर दिया: अब तुम ही रख लो इसे. मैं नही पहन रही इसे अब.

मैने फिर से कहा: भाभी आपने कहा था ना सारी बात मानोगी?

भाभी ने मेरे हाथ से चड्डी ली, और धीरे से पहनने लगी.

भाभी: गीला लग रहा है मुझे नीचे.

मैं: इसीलिए तो दी है भाभी. अब से रोज़ मुझे अपनी चड्डी देकर जाना, और मैं उसे गीला करूँगा, और आप फिर उसे मेरे सामने पहन कर निकलोगी.

भाभी: ये कुछ ज़्यादा नही हो रहा है?

मैं: कहाँ भाभी, आपने ही तो शर्त रखी थी. बस उसी श्रत के बदले में मैने भी रखी थी, और अब पूरी कर रहा हू मैं तो.

भाभी: नही मैं रोज़ अपनी चड्डी तुझे नही दूँगी.

में: भाभी देनी तो पड़ेगी. वरना में आपके कमरे में आ कर खुद नीकलौंगा, और फिर वही आपको पहँनी पड़ेगी.

भाभी: ठीक है दे दूँगी. मेरे कमरे में आने की ज़रूरत नही है.

मैं: तो अब आप अपना ब्लाउस उतरो.

भाभी: क्या. दिमाग़ तो ठीक है तेरा?

मैं: हा भाभी निकालना तो पड़ेगा ना. नही तो मैं आपके बूब्स कैसे देखूँगा?

भाभी: उपर से ही देख लो, क्या दिक्कत है? दिख तो रहे है. मैं नही निकाल रही ब्लाउस.

मैं: भाभी निकाल रही हो या नही?

भाभी ने सॉफ माना कर दिया था की वो ब्लाउस नही उतारेंगी.

में: ठीक है फिर मुझे उपर से दबाने दो.

भाभी: हा लेकिन धीरे दबाओगे तेज़ नही.

मैं: भाभी ब्लाउस निकाल नही रही हो. बूब्स दबाने देने नही रही हो, तो क्या करू मैं?

भाभी: उपर से कर लो, लेकिन ब्लाउस मत निकालो मेरा. कोई रात में उठ जाएगा, तो क्या करेंगे हम? समझा कर तू.

मैं: ठीक है भाभी, उपर से दबा लूँगा, आओ मेरे पास.

भाभी: धीरे दबाना.

मैं: हा ठीक है भाभी, धीरे ही दबौंगा. आओ तो सही. करने से पहले ही दर्र रही हो.

भाभी करीब आई और अपनी आँखें बंद कर ली, और खड़ी हो गयी चुप-छाप.

मैं: भाभी आँखें तो खोलो. बिना आँखें खोले मज़ा कैसे आएगा?

भाभी: तूने दबाने का कहा था. आँखें खोलने का नही. अब दबा, नही तो मैं जेया रही हू.

आयेज की कहानी अगले पार्ट में.

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