मेरा नाम वीरपाल कौर है. मैं पंजाब के गुरदासपुर से हु. मेरी उम्र २८ साल है, और मैं दिखने में बहुत सेक्सी हो. मेरा बदन भरा हुआ है, और फिगर ३८-३३-३८ है. मैं खाते-पीते घर की पंजाबन जट्टी हु. रंग मेरा दूध जैसा गोरा है. आज की सेक्स कहानी में मैं आपको बताऊंगी कैसे मेरे बड़े लुंड वाले देवर के साथ मेरी चुदाई हुई. तो चलिए शुरू करती हूँ कहानी.
२ साल पहले मेरी शादी हुई थी जसविंदर सिंह से. इनकी फॅमिली जालंधर की रहने वाली है, और काफी अच्छा परिवार है. जॉइंट फैमिली है, तो एक ही घर में १५ लोग रहते है. लेकिन घर इतना बड़ा है, की किसी को कोई दिक्कत नहीं आती.
मेरे हस्बैंड सरकारी अफसर है. दिखने में स्मार्ट है, और ाचा-ख़ासा कमाते है. किसी चीज़ की कोई कमी नहीं रहने दी मेरे हस्बैंड ने मुझे कभी. लेकिन एक चीज़, जो शादी में सबसे ज़रूरी होती है, वो नहीं दे पाए. और वो चीज़ है फिजिकल सटिस्फैक्शन.
ऐसा नहीं है की वो मुझे छोड़ते नहीं थे, या उनका लुंड छोटा था. पहली रात से ही उन्होंने मेरी बहुत चुड़ै की. उनका लुंड भी ६ इंच का है. लेकिन शादी से पहले मेरा जो बॉयफ्रेंड था, उसका लंड ७ इंच का था और मोटा भी मेरे पति के लंड से ज़्यादा था.
मेरा बॉयफ्रेंड मेरे साथ वाइल्ड सेक्स करता था. मुझे अचे से पहले चूसता था. मेरे बूब्स चूस कर लाल कर देता था, और चूत और गांड भी अचे से चाट-ता–चूसता था. उसके बाद मुझे पलंग पर मिशनरी पोजीशन में, डोगग्य पोजीशन में, काउगर्ल पोजीशन में, और पता नहीं कौन-कौन सी पोजीशन में छोड़ता था.
वो एक बॉडीबिल्डर था, और मुझे अपनी गोद में उठा कर उछाल-उछाल कर छोड़ता था. मुझे गोद में उठा कर दीवार के साथ लगा लेता, और मेरी चूत का भोंसड़ा बना देता था.
वो कोई अच्छी जॉब नहीं करता था, इसलिए मेरी उससे शादी नहीं हो सकती थी. और ये बात मुझे पहले से पता थी. फिर भी उसे छोड़ने के लिए मैं उसको हमेशा कहती रही कि शायद मेरे पेरेंट्स मान जाये.
वो शादी के लिए इंटरेस्टेड था. लेकिन मैंने उसको कहा की मेरे पेरेंट्स नहीं मान रहे, और मैं उनके खिलाफ नहीं जा सकती. हलाकि असल बात ये थी, की मैंने कभी अपने पेरेंट्स से उसकी बात ही नहीं की.
ये चीज़ जान कर आपको लग रहा होगा कि मैं कितनी बड़ी गन्दी हो. हां, ापनकेह सकते है. क्यूंकि मुझे इससे कोई फरक नहीं पड़ता. मैंने उसको अपनी छूट दी, उसके लिए इतना बहुत था. अब सारी ज़िन्दगी घिस-घिस के क्यों जिए.
लेकिन शादी के बाद बाद मुझे ऐश तो मिली, बूत चुत तगडी चुड़ै के लिए तरसने लगी. कभी-कभी मैं सोचती कि पुराने बॉयफ्रेंड से चुडु जाके. लेकिन फिर डर जाती कि अगर किसी को पता चला तो पन्गा पड़ जायेगा. बूत फिर मुझे एक बड़ा लुंड मिल गया. और वो लुंड था मेरे देवर का.
जब मेरी शादी हुई, तब मेरा देवर कनाडा में स्टडी कर रहा था. उसके फाइनल एक्साम्स थे, इसलिए वो शादी पर नहीं आ पाया. शादी के बाद जब साड़ी फॅमिली के साथ मेरा इंट्रोडक्शन हो रहा था, तब वीडियो कॉल पर उससे बात हुई. तब मुझे नहीं पता था कि एक दिन यही लड़का मेरी चूत का मालिक बनेगा.
फिर ६ महीने बाद सासु माँ ने कहा कि देवर वापस आने वाला था. घर के सब लोग बहुत खुश थे, क्यूंकि वो २ साल बाद घर आ रहा था. वैसे मैं बता दू, मेरे देवर का नाम मनकीरत सिंह है, और प्यार से उसको सब मोंटी बुलाते है.
फिर वो दिन आया, जब वो घर आया. घर के सारे मेल मेंबर्स उसको दिल्ली एयरपोर्ट से लेने गए थे. हम लोग घर पे उसका इंतज़ार कर रहे थे. फिर सारी गाड़ियां वापस आयी, और गाडी में से निकला, एक हैंडसम हंक.
जब मैंने पहली बार उसको देखा, तो मैं मंत्र-मुग्ध हो गयी. २३ साल का जवान लड़का, ६ फीट की हाइट, फिट गयम बॉडी, एक-दम हृतिक रोशन लग रहा था. मैं तो उसको देखते ही उस पर फ्लैट हो गयी. फिर वो के पांव छूने लगा. जब मेरे पास आने लगा तो मेरे भी पांव छूने लगा. लेकिन मैंने उसको रोकते हुए कहा-
मैं: अरे नहीं-नहीं, मैं इतनी बुज़ुर्ग नहीं हो.
ये बात सुन कर सब हस पड़े. फिर मोंटी बोलै-
मोंटी: कोई न भाभी, आपके गले मिल लेते है.
ये बोल कर उसने मुझे गले लगा लिया. माँ कसम, इतने सेक्सी लड़के के गले लग कर रूह खुश हो गयी. उसको भी ज़रूर मज़ा आया होगा जब मेरे जूसी बूब्स उसकी हार्ड चेस्ट में दबे होंगे.
फिर सब बैठ गए. डिनर टाइम था, तो सब ने मिल कर डिनर किया. उसके बात बहुत सारी बातें और हसी मज़ाक हुआ. इस दौरान मेरी नज़र मोंटी पर ही थी. वो भी बीच-बीच में मेरी तरफ देख रहा था, ये मैंने भी नोटिस किया. अब सेक्सी तो मैं भी हूँ, और इतनी सेक्सी भाभी को कोई देवर कैसे बार-बार नहीं देखेगा.
फिर सब सोने चले गए. उसके बाद ऐसे ही दिन बीतने लगे. देवर ने ऊपर के एक खाली कमरे को गयम बना लिया था, जहाँ वो सुबह-सुबह एक्सरसाइज करता था. वो तकरीबन १०×१० का रूम था, जिसमे एक खिड़की भी थी.
एक दिन सुबह-सुबह मेरी नींद खुल गयी. मुझे रूम में थोड़ी घबराहट हो रही थी, तो मैंने सोचा छत पर जाके थोड़ी सैर कर लो, और फ्रेश एयर भी मिल जाएगी. जब मैं ऊपर गयी, तो मोंटी के गयम रूम से आवाज़ आ रही थी अहह अहह की. मैंने सोचा हैवी वर्कआउट कर रहा होगा, इसलिए आहें निकल रही होंगी. मैंने ध्यान नहीं दिया, और छत पर घूमने लगी.
तभी मुझे उसके कुछ बोलने की आवाज़ आयी. जब मैंने पास जाके सुना तो मैं हैरान हो गयी. क्यूंकि वो मेरा नाम ले रहा था. फिर मैंने खिड़की से अंदर झाँका, तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी.
मेरा देवर मेरा नाम लेके अपना लंड हिला रहा था. और लुंड भी एक-दम एनाकोंडा जैसा था. उसका लुंड लगभग ८ इंच का था, और मोटा मेरी बाजू जितना था. उसका लुंड देख कर मेरी चूत में खुजली होने लगी. मेरे मानन में आने लगा कि यहीं है वो जो मेरी प्यास बुझा सकता था. और वो मुझे छोड़ना भी चाहता था.
दोस्तों इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. यहाँ तक की कहानी कैसी लगी गुलाटी.ग़लती५५५@जीमेल.कॉम पर बताये.
अगला भाग पढ़े:- बड़े लुंड वाले देवर ने मारी छूट-२