प्रोफेसर की बेटी की चुदाई

हाई फ्रेंड्स, मेरा नाम अंकित हैं और मैं छत्तीसगढ़ का रहनेवाला हूँ. मैं बी.टेक का स्टूडेंट हूँ और यही के एक कोलेज में पढ़ रहा हूँ. आज आप को अपनी स्ट्रेंज सेक्स स्टोरी बताने जा रहा हूँ जिसमे मैं अपने टीचर की बेटी चुदाई की थी. तो चले चलते हैं अब स्टोरी पर.
मेरे कोलेज का रिजल्ट आ गया था और मैं खुश था. मैं एक छोटी ट्रेनिंग करना चाहता था जिसके लिए मैंने 3-4 जगह पर मेल किये हुए थे. मुझे चेन्नई के एक प्रोफेसर का रिप्लाय आया जो मुझे ट्रेनिंग देने में रूचि रखता था. मैंने सोचा की चलो वही रह लूँगा दूर हैं लेकिन वो प्रोफेसर का नाम अच्छा था. और उसके हाथ निचे ट्रेनिंग लो तो सीवी अपनेआप वेल्यु में बढ़ जाती थी. मैंने प्रोफेसर के मकान के पास ही एक पीजी एकोमोडेशन ले लिया. इस प्रोफेसर की एक बेटी थी साला एकदम बढ़िया पिस था. उसके बूब्स बहुत ही बड़े थे और कमर पतली सी. उसकी गांड गद्देदार थी. और नसीब से वो भी मेरे साथ अपने पापा से वही ट्रेनिंग ले रही थी. हम लोग अक्सर साथ में पढ़ते थे. प्रोफेसर की बीवी 2 साल पहले ही मर गई थी.
घर पे प्रोफेसर और उसकी यह हॉट बेटी श्रुति ही रहते थे. जब मैं प्रोफेसर के वहां जाता तो श्रुति को ही देखता रहता था. उसका मस्त बदन मुझे उत्तेजित करता रहता था. श्रुति एक मोडर्न ख्याल की लड़की थी जिसे टॉप और स्कर्ट पहनना पसंद था. उसके ढीले टॉप के ऊपर से उसके बूब्स देखना भी एक लहावा था. कभी कभी मैं उसकी जांघ को जानबूझ के स्पर्श कर देता था इंस्ट्रूमेंट सेटिंग या दुसरे ऐसे काम के वक्त. पहले तो उसने नोटिस नहीं किया लेकिन फिर वो मुझे देखती जब मैं उसे स्पर्श करता जांघ पर. लेकिन वो कुछ नहीं बोली और मैं समझ गया की उसे भी मजा आता हैं इसमें. मैंने देखा की अब वो भी मुझे लाइन दे रही थी क्यूंकि मैंने उसे अक्सर अपनी और ताकते हुए पकड लिया.
कभी कभी मैं प्रोफेसर के घर वक्त से पहले ही पहुँच जाता. और तब श्रुति को बाथरूम से निकलते हुए देखने का चांस मिल जाता. कभी कभी वो टॉवल लपेट के बहार आती थी जिसमे उसका क्लेवेज और ¼ बूब्स भी दिख जाते थे. मैं यही सिन को याद कर के मुठ मार लेता था घर जाके. मैं श्रुति को पाना चाहता था और उसकी चूत को कैसे भी कर के बजाना चाहता था.
उस दिन प्रोफेसर हमें कुछ दिखा रहे थे की तभी उनके मोबाइल पर कॉल आई और वो बातें करते करते कमरे से बहार हो गए. श्रुति ने मेरी और देख के पूछा, अंकित डेड पढ़ाते हैं वो तुम्हे समझ में आता हैं.
मैं: हाँ आता हैं तो.
श्रुति: मुझे कुछ समझ नहीं आता हैं यार, मैं शर्म के मारे कुछ कह भी नहीं सकती, मेरी मदद करोंगे? क्या तुम मुझे अपने फ्री समय में बता दोंगे?
मेरी हालत तो बड़ी खुशमिजाज हो गई. वो सामने से करीबी ढूंढ रही थी. मैं कहा, हां क्यूँ नहीं जब तुम कहो बता दूंगा तुम्हे!
उसने खुश हो के मुझे थेंक्स कहा. और तभी प्रोफेसर कमरे में घुसे. उन्होंने चेर पर बैठते हुए कहा, मुझे कोलेज के काम से कल से 3 दिन के लिए बहार जाना हैं. ट्रेनिंग उतने दिन बंध रहेंगी. मैं कुछ असाइंमेंट दे देता हूँ वो आप लोग कर लेना. प्रोफ़ेसर से छोटा सा होमवर्क दिया और उसी शाम को वो निकल गए. शाम को श्रुति मुझे कोर्नर के पिज़्ज़ा शॉप में मिल गई. मुझे देख के वो मेरे पास आ गई.
अंकित, कैसे हो?
मैं ठीक हूँ श्रुति, असाइंमेंट कर लिया.?

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