प्राकृतिक आपदा – 2

तो विक्रम ने कंगना को कोकिला के साथ जा कर सोने को कहा, कि उधर से रागिनी को भेज दो. कंगना चुपचाप उठ कर पहली सीट पर फिसल गई और रागिनी खिसक कर विक्रम के पहलू में आ गई. विक्रम ने मेरे चूतड़ पर चिकोटी काटते हुए इशारा बनाया, तो मैं भी यह कह कर कि यहाँ बहुत गर्मी हो गई है, उठ गई और कोकिला को अपनी जगह पर भेज दिया. मैं और कंगना थकी थीं, जल्दी ही सो गईं. विक्रम भी उन दोनों को अपने साथ सटा कर सो गया. उनके पैरों के हिलने से उनकी सारी गतिविधि का पता चल रहा था. पहले तो विक्रम ने कोकिला को अपने साथ सटा लिया और उसकि टांगों में अपनी टाँगे फंसा कर उसे चूमता रहा, फिर घूम कर दूसरी तरफ हो गया और रागिनी को चूमता रहा. मैंने उनकी टांगों से महसूस किया था, कि जब विक्रम रागिनी को चूम चाट रहा था तो कोकिला विक्रम के पीछे से उसके साथ चिपकी हुई थी. रात ज्यादा हो गई, और वारिश फिर से तेज होने लगी. उधर वारिश का शोर और इधर गाडी के जोर जोर से हिलने से मेरी नींद खुली तो पाया विक्रम रागिनी और कोकिला को वारी वारी नीचे लेकर चोद रहा था. मेरी नींद टूट चुकी थी तो मैंने अपनी चूत पर एक हाथ पाया जो मेरी चूत में ऊँगली दे रहा था तो मैंने भी कंगना को सहलाना शुरू कर दिया. काफी देर के बाद हम दोनों ही झड रहीं थीं तो विक्रम भी उन दोनों में से किसी एक के अन्दर अपना लम्बा लंड खाली रहा था, और उन तीनों की मिली जुली कामातुर आवाजें वातावरण को अत्यंत सेक्सी बनाए हुए थीं. सुबह के आठ बजे मेरी नींद खुली तो मैंने पाया, कंबल उतरा हुया था, और हम सब के सब नंगे एक दुसरे से चिपके थे.

मैंने पहले कंगना को फिर कोकिला और रागिनी को उठाया, तो हर उठने वाली ने पहले विक्रम को फिर उसके मस्त लंड को मुस्करा कर देखा, जैसे प्रभात का प्रणाम किया हो. रागिनी ने कम्बल विक्रम के उपर कर दिया और हम ने करीव करीव सूख चुके अपने अपने कपड़े पहन लिए और गाडी से थोड़ी दूर जा कर निबृत हो कर वारिश के पानी से हाथ बगैरा धो कर फिर आ कर गाडी में बैठ गईं. कंगना ने मेरे को कहा, दीदी यहाँ इस गाँव में तो कोई दिखाई ही नहीं दे रहा. मुझे भी अचरज हुया तो मैंने विक्रम को उठा दिया और उसे बताया. विक्रम के साथ हम सब वाहर निकले और पाया कि सच्च में सारा गाँव खाली था, कोई भी गाँव में न दिख रहा था. वारिश थम चुकी थी. विष्णु हमें लेकर एक घर में आया और हम ने वारिश के पानी को उबाल कर पीया और खाना बना कर भी खाया. ऐसा करते हुए ग्यारह बज चुके थे. विक्रम ने बड़ी मुश्किल से कार निकाली और हम सब को विठा कर यहाँ तक टूटी फूटी सड़क दिखाई देती रही चलता रहा. करीव सात आठ किलोमीटर के बाद हम एक कस्बे में पहुंचे तो उस गाँव के लोग भी वहीं पर थे. उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि रात को उधर दो तीन बाघ घूम रहे थे, वो एक आदमी और एक बच्चे को उठा कर ले गए थे. तो हम सब चल कर इधर आ गए. हालात इतने अच्छे न थे.

उस सारा दिन लोगों ने मिल बाँट कर बनाया और खाया. विक्रम ने उनसे कई जानकारीयां ले थीं, उन्हीं ने बताया था कि एक रास्ता है, तुम गाडी में उस रास्ते से जायो तो पहाड़ों के उपर उपर जोशीमठ तक पहुंच सकते हो. उस रात हम एक घर में एक ही कमरे की माध्यम सी रौशनी में सोये. वारिश तो थम चुकी थी, परन्तु दूर दूर तक रास्ते बन्द हो चुके थे. उस रात विष्णु ने सब से पहले कोकिला फिर रागिनी और चोदा, और वीर्य कोकिला के अन्दर भरा. थोड़ी देर के बाद उसने कंगना को चोदा, और अंत में मेरे को चोद कर भर दिया. हम चारों औरतें विक्रम से लंड से सन्तुष्ट थीं. उस घर की मालकिन से तडके सवेरे उठ कर विक्रम ने फिर से रास्ते की जानकारी लेकर पक्का किया और हमें बिठा कर दिन की पहली किरण में ही निकल पड़ा. गाडी में हमने खाया पीया और रास्ते में ही टट्टी पेशाब किया, पानी तो हर तरफ बहुत मात्रा में था. उबड खावड टूट चुके कच्चे पक्के रास्ते से गाडी को खींचता हुया शाम के तीन बजे तक हम साठ किलोमीटर का रास्ता पार करके जोशीमठ पहुंच ही गए. वहाँ पर हमें गाडी में पेट्रोल भी मिल गया और खाने पीने का सामान भी. रहने को होटल में कमरा ले लिया और जब तक रास्ते नहीं खुलते तब तक वहीं टिकने का सोचने लगे. मोबाइल चल पड़े थे, तो हम ने अपने अपने घर फोन कर दिया. कंगना ने भी अपने घर वालों को अपनी सारी स्थिती की जानकारी देकर उनके पतियों के मारे जाने का बता दिया.

उन्होंने यह भी बताया कि अब हम एक बहुत भले आदमी और उसकी पत्नी के साथ उनकी गाडी से आ रहे हैं. जैसे ही रास्ता खुलेगा, हम चल पडेंगे. होटल में भी कमरा तो एक ही मिल पाया था, परन्तु थोड़ी राहत की सांस आई थी, तो उस शाम हमने ठीक से खाना खाया था. लोगों के साथ बहुत लूट खसूट हुई थी, और बहुत से लोगों का हाल कंगना जैसा ही था. कई लोगों के पास तो पैसे भी न थे. विक्रम ने हर संभव जिस की मदद हो सकती थी, की थी, और अपने एटीएम् से पैसे निकाल कर दिए जा रहा था, उसने शायद उस शाम में ही एक लाख रूपए लोगों की मदद में खर्च कर दिए थे. पैसे खर्च करके विक्रम खुश था. कंगना, रागिनी और कोकिला लोगों के दुःख दर्द सुन सुन कर अपना दर्द भूल चुकीं थीं. रात को हम दो लोग नीचे और तीन बेड पर सोने वाले थे. विक्रम ने हम सब को दो दो टी शर्ट और एक एक पजामा ले दी थी. विक्रम के साथ यह तीनों भी हंस हंस कर वतियाने लग गईं थीं. इसी दौरान खबर आई कि शहर से तीन किलोमीटर पीछे एक लूट की वारदात हुई है, और चार औरतों और तीन आदमियों को मारा जा रहा है, जो पैदल पहाड़ से होकर आ रहे थे.

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बताने वाले के साथ जाने को कोई तैयार न हुया तो विक्रम ने कंगना को साथ लेकर उस आदमी को बिठा कर उस जगह पहुँचा. यह आदमी उनका कोई पहचान वाला तो न था, परन्तु इन्हीं लोगों के साथ साथ आ रहा था, और यह भी अपनी बीबी और बच्चे को गँवा चुका था. होटल में मौजूद लोगों में से किसी ने भी हिम्मत न की थी, सिर्फ विक्रम ही उस आदमी और कंगना को साथ लेकर गया था. उस जगह पर पहुंच कर देखा तो कोई न मिला तो थोड़ा आगे जा कर भी जोर जोर से विक्रम ने आवाजें लगाई, तो एक जगह से चीखने की आवाज सुन कर वो भाग कर उस रोज वाले आदमी से छिना हुया दात्त्र लेकर आगे बढ़ा तो देखा, दो आदमी दो लड़कियों और एक आदमी को मार रहे थे. विक्रम ने अपने साथ वाले आदमी को भी हिम्मत दी और जाकर उनमें से एक आदमी को पकड़ कर लूटने वाले लोगों की सहायता से बाँध दिया और फिर दुसरे को भी भागते हुए को काबू कर लिया. उनके पास से बहुत सा लूट का माल बरामद हुया था, जिसमें काफी ज्यादा सोने के गहने और काफी रूपए थे. उन दो लड़कियों और आदमी को पूछा कि तुम्हारा क्या सामान था, तो उन लोगों ने अपना सामान ले लिया और उन बदमाशों को लूट के सामान के साथ पुलिस के हवाले कर दिया. अब हमारे पास होटल में कमरा तो एक ही था,

फिर उन लड़कियों को कहाँ पर सुलाएं. जब वो लडकियाँ आई तो देखा था, एक तो गोरी विदेशी युवती थी जिस के वाल भूरे और आँखें नीली थीं, और दूसरी अत्यंत सुन्दरी किसी राजस्थान के स्टेट की राजकुमारी थी, और वो दोनों आपस में सहेलियाँ थीं, और वो विदेशी युवती भारत में घूमने आई थी. राजकुमारी एश्वर्या ने भी अपनी दादी को इस आपदा में गँवा दिया था, और यह दोनों अपनी दादी साथ केदारनाथ गईं थीं, और वापिसी पर थीं. दोनों के कपड़े बुरी तरह से फटे हुए थे, और उन दोनों में से एक ने विक्रम की कमीज और दूसरी ने अपने फटे कपड़ों के उपर विक्रम की बनियान पहन रखी थी. उनके साथ भी बहुत बुरा हुया था, और वो दो दिन से पैदल चल रहीं थीं. रास्ते में ही दादी गिर कर मर गई थी, और उस के वाद वो बदमाशों के चंगुल में फंसी हुई थीं. आखिर विक्रम ने आ कर उन दोनों को अपनी जगह पर सुला दिया और खुद वाहर निकल गया. इस सारे काम में रात के ग्यारह बज चुके थे. आधे घंटे के बाद विक्रम फिर से आया और उन दोनों को और रागिनी को अपने साथ ले गया. उन दोनों को हमारी एक एक टी-शर्ट उसने पहनने को दे दिया था. हमें कह गया कि तुम कमरा बन्द कर लो मैं आ कर यहीं सोयुन्गा. रात के एक बजे मुझे विक्रम का फोन आया, कि मैं अभी पुलिस स्टेशन से वापिस आ रहा हूं,

आप् लोग सो जायो सुबह ही मिलेंगे. मैंने भी सोचा सब थके हुए हैं, विक्रम आज करने तो वाला है नहीं, तो मैं कंगना और रागिनी से वातें करती हुई सो गई. दोनों ने विक्रम की मर्दानगी और उसके लंबे लंड की बहुत तारीफ़ करी थी. मेरी बहुत इज्जत और धन्यवादी थीं, और वो सब मुझे विक्रम की पत्नी ही समझ रहीं थीं. तभी तो वातों में वार वार आपके पति बहुत अच्छे और मज़बूत इंसान हैं, कह रहीं थीं. सुबह हम लोग नौं बजे मिले और मिल कर सब ने नाश्ता किया और आगे का प्रोग्राम बनाने का सोचने लगे. कोकिला कंगना को मेरे से छुपा कर बता रही थी, कि साथ साथ सोये थे, तो रात को उसे और विदेशी क्रिस्टी और राजकुमारी एश्वर्या, तीनों को विक्रम ने खूब चोदा था. कोकिला और क्रिस्टी ने तो बहुत मज़ा किया, परन्तु एश्वर्या शायद रात को पहली वार चुदी थी, उसका बहुत खून निकल गया था. तभी वो टाँगे चौड़ी करके चल रही थी. नाश्ते के बाद हम सब के सब हमारे वाले कमरे में आ गए थे, और विक्रम कहीं पर चला गया था. वो दोपहर के बारह बजे वापिस आया था, और हमें सब को गाडी में बैठने को कहा. उसने होटल का हिसाब चुकता करके हम लेकर ऋषिकेश की तरफ चल पड़े थे. मैंने पूछा रास्ता खुल चुका है, तो उसने बताया था, कि लोकल लोग आ जा रहे हैं, गाडियां तो अभी नहीं आ रहीं. उस शाम तक हम सब टूटे फूटे रास्तों से होते हुए रात तक ऋषिकेश पहुंच गए और फिर वहाँ पर होटलों में भीड़ देख कर हम सीधा हरिद्वार आ गए. हम कुल सात लोग थे,

तो विक्रम ने तीन कमरे बुक करे. एक में मैं और विक्रम, दुसरे में कंगना, कोकिला और रागिनी, और तीसरे कमरे में क्रिस्टी और एश्वर्या को उसने ठहरा दिया. हम ने मिल कर खाना खाया और सोने से पहले हमारे कमरे में सब मिले. अभी तक का सारा खर्च विक्रम का ही हो रहा था. विक्रम ने सब को कहा, कि परमात्मा की मेहरवानी से हम सब बच कर वापिस आ गए हैं. अभी तक उधर से कोई गाडी वापिस नहीं आई है. रास्ता खुलने में अभी शायद सात आठ दिन लग जाएँ, वैसे हेलिकोप्टर से लोगों को निकालने का काम प्रशासन ने शुरू कर दिया है. वैसे तो हम सब के साथ बहुत बुरा हुया है, यह कोई खुशी का समय तो नहीं है, परन्तु मेरी इच्छा है, कि हम सब लोग दो तीन दिन तक एक साथ रहें. फिर न जाने कभी मिलना हो या न. एश्वर्या को छोड़ सब ने हाँ कही तो क्रिस्टी ने एश्वर्या को भी मना लिया. विक्रम ने उस रात मेरे को एक बार और एश्वर्या और क्रिस्टी को बहुत देर तक चोदा, जबकि कंगना, कोकिला और रागिनी को नहीं किया था. शायद वो सोई रहीं थीं, और उनको हमारे चुदने का पता भी न था. मैं जब सो कर उठी तो मेरे साथ विक्रम वाले स्थान पर कंगना सोई थी, और मेरे कंगना को पूछने पर उसने बताया था, कि विक्रम रागिनी और कोकिला के साथ सोया है, मैं तो उससे एक वार चुद कर यहाँ आ गई थी.

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अगले दिन हम फिर से स्टेशन बदल कर ठहरे, और उसके अगले दिन दूसरी जगह. हर रोज हम जगह बदल रहे थे. हमारी आपस में जो भी वातचीत हो रही थी, उसके अनुसार कोई भी हमारे में से अभी विछुड़ना न चाहती थी. विक्रम तो जिस को चाहता चोदने लग जाता और कोई भी विक्रम को न नहीं कह रही थी, उसके हाथ लगाते, या चूमते ही खुद चुदने को तैयार हो जाती थी. अब तो राजकुमारी एश्वर्या भी खूब चुद रही थी. आखिर वो दिन आ गया सब को विक्रम ने अपने अपने गंतव्य की रेल की टिकटें बुक करवा कर भेज दिया. खुद हम अपने घर आ गए. पाँचों औरतें विक्रम से जुदा न होना चाहतीं थीं, और एश्वर्या को छोड़ सब ने ही उसे उनको अपने पास रख लेने को कहा था. एश्वर्या शायद कुंवारी लड़की थी, इसीलिए कह न पा रही थी. सब ने विक्रम को अपना पता और फोन नम्बर दे कर उसका ले लिया था, और उस दिन जुदा होने का गम उन सब की आँखों में था. मैं घर आई तो मेरे सास ससुर और पति ने सवालों की वौछार कर दी. मैंने उन सब को कहा, कि हम बच कर आ सके हैं, इतना क्या कम है. गाडी बर्क-शॉप में भेजनी पड़ी थी.

विक्रम अपने घर चला गया था और दो दिन के बाद आया था, फिर ऑफिस जाने लगा. चार दिन के बाद सुबह जब मेरे पति और ससुर मंडी गए तो मैं उसके कमरे में चली गई. उसे सोये देख कर मैं खुद ही नंगी होकर उसके साथ सो गई. उसकी नींद खुली तो मेरे को नंगी पा कर चोदने लग गया. आज मैं अकेली थी चुदने वाली तो उसने मेरे को तोड़ कर रख दिया. मैं पूर्ण तृप्त हो कर उसके कमरे से निकली थी. फिर मैंने उसके लिए नाश्ता बनाया और उसके कमरे में रख दिया. मैं अपने साथ बहुत सारे पैसे भी ले गई थी. पैसे की हमारे घर में कोई कमी न थी, और तिजोरी भरी हुई थी. मैंने तीन लाख रूपए उसके कमरे में रखे थे, उसके भी शायद तीन लाख तो लग ही गए थे. अगले दिन से मेरा नियम बन गया, और मैं पति और ससुर के मंडी जाते ही उसके साथ जा कर सो जाती, और जी भर के चुद कर सास के उठने से पहले वापिस आ जाती. मेरे को जीवन का बहुत असली आनंद आने लग गया था. विक्रम का लंड मेरे को पूरा सन्तुष्ट कर देता था,

और मैं अपने भाईओं और पति के लंड भूल जाना चाहती थी. इस वार मेरी महावारी मिस हो गई थी, डॉक्टर को दिखाने पर मैं उम्मीद से निकल आई थी. मैं बहुत खुश थी. अगली सुबह मैंने बहुत से पैसे तिजोरी से उठाये और कल का लाया हुया बर्फी का डिब्बा लेकर उसका मुंह मीठा करवाते हुए विक्रम को देते हुए कहा, लो मेरे राजा अपना सारा नुकसान पूरा कर लेना, कहीं कोई कसर न रहने दूँगी मैं आपको. वो भी खुश हो गया था, और उसने बताया कि कंगना और कोकिला भी माँ बन गईं हैं, उनका फोन आया था. उनके ससुराल वाले अपने बेटे के अंश को गंवाना न चाहते थे, इसलिए उनसे बहुत खुश थे. दिन बहुत अच्छे व्यतीत हो रहे थे, कंगना गुजरात के बडोदा से और कोकिला जामनगर और रागिनी सूरत से थी. अब विक्रम छुटटी लेकर वहाँ भी जाने लगा था. एक साल के बाद एक दिन विक्रम ने बताया था, कि वो राजस्थान जा रहा है. उस वार वो एश्वर्या को मिल कर आया था. उसके बाद उसने हमारे घर से कमरा छोड़ दिया और नौकरी छोड़ कर कहीं चला गया.

फिर काफी देर के बाद पता चला था, कि उसने एश्वर्या से शादी कर ली है, और क्रिस्टी और एश्वर्या संग रह रहा है. तीनों ही अब अमेरिका की किसी स्टेट में रह रहे हैं. रागिनी ने दोबारा शादी कर ली थी, और कोकिला और कंगना अपने बच्चे को पाल रहीं थीं. मेरा बेटा चार साल को हो गया है, और मैं अब उसके साथ बहुत खुश हूं. जब भी विक्रम विदेश से आता है, तो रागिनी, कोकिला, कंगना और मेरे को जरूर मिल कर जाता है. एक साल में दो दो दिन भी उसके साथ रह कर ऐसा लगता है, जैसे साल भर की प्यास बुझ गई हो. मैं उसको अब भी ढेरों पैसे देती हूं, ताकि वो साल में कम से कम एक वार तो आ जाए मेरे पास. परमात्मा की कृपा से मैं और रागिनी विक्रम के दुसरे बच्चे को जन्म देने वाली हैं. दोस्तों आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, अपने विचार जरूर लिखना. मेरा पता है : [email protected]


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