पूरी रात बहन की चुदाई की तैयारी

शिखा बेसूध पड़ी थी बेड पर. मैं भी गया और उससे चिपक कर लेट गया. तो वो डोर हॅट गयी.

शिखा: डोर हॅट सेयेल जानवर, कुत्ते, हाथ भी मत लगाना मुझे कमीने. ऐसे कोई छूट लेता है भला? मेरी छूट तो फादी ही, उपर से मेरी कमर भी तोड़ दी. मैं चिल्लती रही धीरे-धीरे भैया, पर नही, हवासी को तो बस छूट दिखाई दे रही थी, सो पेलता रहा.

वो उठी, और बातरूम में गयी. वाहा अपने को सॉफ किया, और दरवाज़े की तरफ चलने लगी. मैने झट से उठ कर उसे पीछे से पकड़ा.

विवेक: इतनी जल्दी कहा चल दी मेरी जान? अभी तो पूरी रात बाकी है, और तेरी गांद बाकी है.

शिखा (गुस्से में): एक काम कर तू बहनचोड़. आज तू फाड़ ही दे मेरी गांद. मेरी जान की दुश्मन बन गयी है मेरी ही गांद. ये पिछले 2 घंटे से जो छोड़ रहा है, और उससे पहले वो रौंद सब इस गांद के चक्कर में ही हुआ. लगा मेरी मा को फोन, और बोल दे की आज आपकी बेटी की गांद बजाने का प्लान है, तो उसे आज नही भेज रहा. आज तो उसकी इज़्ज़त की मा छोड़ूँगा.

मैने उसे अपनी तरफ घुमाया तो देखा उसके आँसू आ रहे थे. मैने आँसू पोंछे और उसे गले से लगा लिया.

विवेक: अर्रे-अर्रे रो क्यूँ रही है शिखा मेरी जान?

शिखा: क्या मेरी जान, मुझे लग रहा है आप बस अपनी फिज़िकल नीड्स के लिए मुझे अपने पास बुलाते हो, और सिर्फ़ अपने मज़े लेते हो. मुझे कितनी भी तकलीफ़ हो, उससे आपको कोई फराक नही पड़ता.

विवेक: ऐसी बात नही है मेरी जान. ऐसा क्यूँ बोल रही है? मैं क्या करू यार शिखा, तेरी छूट और तेरे बूब्स देखता हू तो मुझे चुदस चढ़ जाती है. फिर मैं सब भूल जाता हू. मुझे बस इतना याद रहता है, की कभी ये लड़की मेरे सामने खिलोने से खेलती थी, और अब मेरे लोड से खेल रही है. ये भैया-भैया बुलाने वाली अब मेरे लोड के नीचे पड़ी-पड़ी आअहह आअहह और तेज़ और तेज़ चिल्लती है. तो बस मुझे जोश आ जाता है, और सारा जोश तेरी छूट में उतार देता हू.

मेरी बात सुन कर वो हासणे लगी, और मुझे सीने पर मारने लगी. मैने उसे ज़ोर से गले लगाया.

विवेक: अछा चल, अब सिद्धि को कॉल कर, और बोल भैया की तबीयत तो और बिगड़ गयी है, और तू पानी की पत्तिया रख रही है मेरे सिर पे.

शिखा: अब क्यूँ?

विवेक: क्या मतलब अब क्यूँ? शिखा मेरी जान गांद नही देगी क्या आज?

शिखा: उफ़फ्फ़ बहनचोड़, हरामी ले आज छोड़ ही ले तू गांद यार. मेरी भी जान छ्छूते.

उसने फोन उठाया और सिद्धि को कॉल किया

शिखा: हेलो मम्मी, यार भैया की तबीयत और बिगड़ रही है. उनका फीवर कम ही नही हो रहा है. मैने पानी पत्तिया रखी है अभी उनके सिर पर.

सिद्धि: अछा रुक मैं आ रही

हू.

और उसने फोन कट कर दिया.

शिखा: भैया मुम्मा तो यही आ रही है अब.

हम दोनो की फटत गयी की अब झूठ पकड़ा जाएगा. मैं फटाफट बेड पर लेट गया, और एक पट्टी सिर पर रख दी. सिद्धि आ गयी उसने मुझे देखा.

सिद्धि: मैने बोला था ना चलो डॉक्टर को दिखा आते है. पर नही सुना तुमने.

विवेक: अर्रे मैं मेडिसिन ले आया हू. बस खाने में थोड़ी देर कर दी थी, इसलिए वापस आ गया फीवर. वैसे ठीक हू, उतार जाएगा फीवर 5-10 मिनिट में दीदी.

सिद्धि: अछा ठीक है, तो आराम करो फिर तुम. कुछ भी ज़रूरत पड़े तो कॉल कर देना तुरंत. शिखा चलो, भैया को आराम करने दो.

फक फक ये तो प्लान को छोड़ दिया सिद्धि ने यार. शिखा को भी ले कर जेया रही थी यार बहनचोड़. मैं बिस्तर से उठा और जान-बूझ कर तोड़ा लड़खड़ा कर चला, और गिर पड़ा.

सिद्धि: अर्रे-अर्रे विवेक, उठा क्यूँ तू बेड से? तुझे तो बहुत वीकनेस हो गयी है बेटा.

उन दोनो ने मुझे उठाया, और बिस्तर पर बिताया. शिखा मेरी आक्टिंग देख कर स्माइल कर रही थी.

सिद्धि: शिखा बेटा एक काम कर. आज तू यही भाई के पास रुक, और उनका ध्यान रख. इसको टाइम से मेडिसिन दे देना, और कुछ खिला देना. खाने को है कुछ?

शिखा: नही मम्मी, बनाने जेया रहे थे. तभी फीवर आ गया.

सिद्धि: अछा ठीक है, तू रुक मैं बनती हू. जेया कर तुझे कॉल करूँगी, आ कर ले जाना. खुद भी खा लेना, और विवेक को भी खिला देना

विवेक: अर्रे दी आप क्यूँ परेशन होते हो? शिखा तू अपने लिए कुछ ऑनलाइन ऑर्डर कर ले. मुझे वैसे भी भूक नही है दीदी.

सिद्धि: चुप-छाप आराम कर समझा. शिखा कुछ ऑर्डर नही करना. मैं बना कर फोन करती हू.

सिद्धि गयी और शिखा ने डोर लॉक किया.

शिखा: बीसी मेरी किस्मत! एक लड़की अपने पेरेंट्स से और भाई से अपनी सेफ्टी एक्सपेक्ट करती है. पर देखो मेरा नसीब, मेरी सग़ी मा मुझे रात भर चूड़ने को यहा छ्चोढ़ गयी, और मेरा भाई मुझे रात भर छोड़ेगा एक सेकेंड भी आराम नही करने देगा. मेरी छूट और मेरा मूह तो छोड़ ही चुका है, बाकी बची गांद, तो आज उसको भी खोल देगा हरामी. हाए रे मेरी फूटी किस्मत.

शिखा: अब वाहा बैठा-बैठा क्या हास रहा है भाई. ले अब तो मा छ्चोढ़ गयी है चूड़ने को, तो शुरू हो जेया. पेल दे मुझे जैसे चाहे जहा चाहे. ग्राउंड फ्लोर पर मॅन हो तो वाहा ले चल, टेरेस पर छोड़ना हो तो वो वाहा ले चल. और बस पूरी रात छोड़ ले मेरी गांद. तेरा मॅन भर जाए तब तक पेल ले.

विवेक: अर्रे मेरी जान, गुस्सा क्यूँ करती है? यहा आ मेरे पास बैठ. अभी तू आराम कर, तब तक मैं रूम समेत लू. और फिर तेरी मा खाना देगी तो खा कर फिर शुरू करेंगे तेरी दूसरी सुहग्रात.

शिखा ने मुझे पेट पर मुक्का मारा: हमारी दूसरी सुहग्रात! पहली वाली में भी तूने ही निचोढ़ा था बहनचोड़. मैं अकेली नही चूड़ी थी, तूने ही छूट खोली थी तब. और तू ही गांद खोलेगा अब.

मैने उसको बिस्तर पर लिटाया और रूम की सफाई शुरू की. सारा कमरा सॉफ किया, किचन सॉफ की, तब तक शिखा सो गयी. बेचारी वैसे ही ताकि थी, और आते ही मैने बजा डाला बुरी तरह. तो सच में बेसूध सो रही होगी.

मैने भी सोचा सोने देता हू, रात तो पूरी अपनी थी ही. फिर कल भी उसके मों दाद ऑफीस निकल जाएँगे तो दिन भी अपना था पूरा. और फिर देखेंगे तो रात फिरसे अपनी कर लेंगे. एक प्याज़ ही तो लगेगा. सोचते सोचते मैं हासणे लगा और काम में लग गया. सारा काम निपटा कर नहाने चला गया.

मुझे भी रेफ्रेश होना था, सो एक हॉट शवर लिया. मस्त बाहर आया, कपड़े पहने. टाइम देखा तो 3 घंटे हो गये थे. सिद्धि का कॉल क्यूँ नही आया अभी तक खाने के लिए यार. ये सोच ही रहा था की उसका कॉल आ गया. मैने कॉल पिक किया.

सिद्धि: सॉरी-सॉरी यार, ऑफीस से अर्जेंट कॉल आ गया था, तो लाते हो गयी. शिखा को भेज दो खाना ले जाएगी वो.

विवेक: ओक दी, भेज रहा हू.

मैने शिखा को जगाया, और उसे खाना लाने को भेजा.

वो खाना ले कर वापस आई. हमने साथ बैठ कर खाना खाया और फिर बेड पर लेट गये. वो मेरे सीने पर सिर रखे थी, और मुझे अपनी ट्रिप के किससे सुना रही थी. सुनते-सुनते हम दोनो की ही आँख लग गयी पता नही कब. अचानक फोन बजा तो हम दोनो की आँख खुली. सिद्धि की कॉल थी.

शिखा: हा मम्मी क्या हुआ?

सिद्धि: अब कैसी तबीयत है विवेक की?

शिखा: अब आराम है मम्मी. खाना खिला कर दवाई डेडी थी. अभी सो रहे है वो. मैं भी जेया रही हू सोने, बहुत तक गयी हू ट्रॅवेलिंग से. मम्मी पूरी बॉडी पाईं कर रही है.

सिद्धि: ओक गुड नाइट, सो जेया.

शिखा: मम्मी सुबह मुझे कॉल करके उठना मत, मुझे सोने देना जितना सौ मैं प्लीज़. फ्लॅट की एक चाबी है मेरे पास. आप लोग निकल जाना अगर मैं ना अओ तो.

सिद्धि: ओक-ओक बाबा, सो ले अभी जितना सो पाए. फिर कॉलेज में देखती हू कैसे सोती है.

कॉल डिसकनेक्ट हुआ. फिर मैने उसे ज़ोर से गले लगाया.

विवेक: अर्रे वाह मेरी जान, ये अछा किया तूने जो सिद्धि को डिस्टर्ब करने से माना कर दिया. अब तो सुबह तक बाजौंगा तुझे मेरी जान. और फिर सारा दिन भी तो है हमारे पास. अब बस छोड़ुगा, फिर सौंगा, फिर उठ कर छोड़ुगा, फिर सो जौंगा, फिर उठ कर फिर छोड़ुगा कल शाम जब तक तेरे मों दाद नही आ जाते, तब तक

शिखा: जी नही, ऐसा कुछ नही होगा प्रॉपर रेस्ट करेंगे. आई समझ? सिर्फ़ चुदाई चुदाई चलती है दिमाग़ में आपके तो.

विवेक: अछा बाबा ठीक है. और आज की रात तो मेरी है ना? उसमे तो कोई रोक-टोक नही चलेगी तेरी.

शिखा: हाहाहा मेरी रोक-टोक चलती ही कब है बहनचोड़! जब जहा मॅन होता है छोड़ते हो.

मैने लाइट्स दीं कर दी, और शिखा को अपने पास खींच कर गोद में बिताया, और उसके होंठो पर एक किस दी.

विवेक: मेरी जान रोक-टोक तो मेरी भी नही चलती है. तुझे नंगा देखता हू फिर जैसे-जैसे लंड कहता है चुप-छाप करते जाता हू.

हमने स्मूच करना शुरू किया. वो भी फुल जोश में साथ दे रही थी. कभी मेरे अप्पर लीप तो कभी लोवर लीप को चूस रही थी. हमारी जीभ आपस में लड़ाई कर रही थी, कों किसके मूह में घुसेगा पहले. उफ़फ्फ़ बाइ गोद मज़ा ही आ गया यार किस में आज तो.

मैने उसके बूब्स पकड़े, और उसे लिटा दिया, और खुद उपर हो गया उसके. पर वो नही रुक रही थी. मस्त होंठ चूस रही थी साली. मुझ पर भी जानवर सवार हो गया. मैं उसके होंठो को पीने लगा. ज़ोर-ज़ोर से चूस्टे हुए दबा कर खींच देता लिप्स, और बूब्स दबा-दबा कर निचोढ़ देता.

करीब 5 मिनिट के बाद किस तोड़ी, और उसके बूब्स के बीच में मूह दबा लिया और चाटने लगा. वो पागल होने लगी, और अपनी चेस्ट उपर उठाने लगी, और मेरे बालों को पकड़ कर मेरा मूह बूब्स में दबाने लगी. फिर बारी-बारी उसके बूब्स चूज़ काज़ कर दबा कर.

शिखा: इम्‍म्मम मा भैया आह एस्स, पे जाओ मेरा सारा डूडू यार.

विवेक: रंडी साली तेरे बूब्स चूस-चूस कर कभी नही तकता हू. बस इनमे से दूध निकालने लगे, फिर बताता हू तुझे साली. फिर सुबह और शाम की छाई तेरे ही दूध की बनाया करूँगा.

शिखा: उम्म्म, हा कर लेना.

मैने बूब्स चूस्टे-चूस्टे उसकी छूट में 2 उंगलियाँ डाल कर उन्हे भी काम पर लगा दिया.

शिखा: आ आ.

मैने उसकी नाभि चूस्टे-चूस्टे सारी गीली कर दी, और फिर धीरे-धीरे उसकी छूट की तरफ आ गया, जो पूरी गीली हो गयी थी पहले ही.

मैने उसकी छूट के होंठो को खोला, और अपना मूह जितना जेया सकता था, उतना अंदर कर दिया.

शिखा: आह भैया आ.

फिर मैने उसकी छूट का दाना मूह में दबा कर होंठो से दबा दिया. वो झेल नही पाई, और झाड़ गयी.

शिखा: उम्म्म्म भैया…

और हानफते-हानफते अपनी साँसे कंट्रोल करने लगी, और बेड पर लेट गयी. मेरा मूह अभी भी उसकी छूट पर था, और मैं छाते जेया रहा था उसे. अब मैं उसकी छूट उपर से चाट रहा था जैसे कोई कुत्ता पानी पीटा है ठीक वैसे ही.

शिखा: बस करो भैया, अब इधर आ जाओ और सो जाओ.

विवेक: ये क्या बात हुई बहनचोड़! अपना झाड़ गयी, और मेरे लंड का नही सोचा.

शिखा: भैया इसको शांत करना अब मेरे बस की बात नही है. यार ये तो हमेशा ही मेरी लेने की फिराक में रहता है. अब सारा टाइम तो टांगे नही खोल कर रख सकती मैं इसका सोचने को.

विवेक: गांद तो खोल सकती है ना?

शिखा: अर्रे मेरी मा, क्या है ये लड़का! भैया आपके दिमाग़ में मेरी गांद के अलावा कुछ और भी चलता है?

विवेक: नही फिलहाल तो बस तेरी गांद च्छाई है शिखा. एक बार इसे बजा लू, फिर सोचूँगा कुछ और. तैयार हो जेया अब बस बहुत वेट हो गया.

शिखा: भैया बहुत दर्र लग रहा है. इस कालू को गांद देने में फटत जाएगी मुझे पता है. प्लीज़ तोड़ा रहम करना अपनी छ्होटी बेहन पर भैया.

विवेक: दर्र मत बहना, बहुत प्यार से मारूँगा तेरी गांद.

शिखा: अर्रे चलो झूठे, छूट भी बहुत प्यार से ही छोड़ते हो ना, जो गांद प्यार से छोड़ोगे. मुझे पता है कुत्तों की तरह पेलोगे गांद मेरी. मैं कितना भी चिल्लौ, कितना भी गिड़गीडौ, कोई फ़ायदा नही होगा. अछा मुझे 10 मिनिट का तो रेस्ट दो यार. फिर गांद मारना.

विवेक: ओक रेस्ट कर तू. मैं अभी आया.

शिखा: नही-नही कही नही जाना. मुझे सब पता है टॅबलेट लेने जेया रहा है बहनचोड़. नही यही बैठो, मेरे पास. कोई वियाग्रा नही लेनी. ऐसे ही छोड़ना गांद.

विवेक: अर्रे नही लेने जेया रहा टॅबलेट कोई. ठीक है बैठा हू यही, अब खुश?

गांद चुदाई अगले पार्ट में.

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