पेट में दर्द और आस-पास ठरकी आदमी

अब आयेज:-

मैं जैसे ही वॉशरूम से राकेश सिर के साथ अपनी सीट की तरफ जेया ही रही थी, की तभी अचानक मेरे पेट में ज़ोर का दर्द स्टार्ट हुआ. मुझे ऐसा फील हुआ जैसे मैं अभी के अभी प्लेन के कॉरिडर में ही नीचे बैठ जौ. बुत फॉर्चुनेट्ली ऐसा हुआ नही. बुत मैने अपने हाथो से अपने पेट को कस्स के पकड़ा, और हल्का सा प्रेस किया.

मेरे फेस पे दर्द वाला एक्सप्रेशन था, और मैं जल्दी-जल्दी आयेज बढ़ रही थी. बुत राकेश सिर मेरे पीछे थे, तो उन्हे अभी तक पता नही था की मुझे कुछ प्राब्लम फिर से हुई थी. जैसे ही मैं अपनी सीट के पास पहुँची मुझे अंदर से सुकून मिला और मैं तुरंत बैठ गयी. पेट में दर्द इतना तेज़ था की मुझे कुछ नही सूझ रहा था.

पाटिल सिर: आ गयी माही वॉशरूम से?

मैं: जी सिर.

पाटिल सिर: कोई प्राब्लम तो नही है, तुम कुछ अनकंफर्टबल लग रही हो?

मैं: नो सिर, ई आम फाइन.

मैने सोचा की सिर को क्यूँ बेकार में बता कर परेशन करू. मेबी दर्द नॉर्मल हो जाए तो बताने का क्या फ़ायदा. ये सोच कर मैने कुछ भी नही बताया, और अपने फेस तोड़ा स्माइली बनाने की कॉसिश करती रही

राकेश सिर: माही वो क्रीम कब लगावगी (धीरे से पूछा)?

मैं: सिर यहा कैसे लगौ?

राकेश सिर: ब्लंकेट ओढ़ कर लगा लो. वैसे भी तुमने पनटी नही पहनी है. कोई प्राब्लम नही होगी.

मैं: सिर मेरा पेट वॉशरूम उसे करने के बाद से बहुत दर्द कर रहा है.

राकेश सिर: क्या! अब क्या हो गया?

मैं: सिर ई डॉन’त नो.

राकेश सिर: कही तुम्हारी पीरियड्स स्टार्ट होने वाले तो नही है?

मैं शॉक हो गयी एक-दूं से. फिर मैं फटाफट से अपने डेज़ काउंट करने लगी. क्यूंकी सिर की बात सुन कर मुझे एकाएक ख़याल आया. वैसा मेरा तो पीरियड वाली बात पे ध्यान ही नही गया था.

मैं (काउंट करते हुए): सिर बुत इतना ज़्यादा स्टमक पाईं तो मुझे पहले कभी भी पीरियड टाइम में नही हुआ है.

राकेश सिर: अर्रे वो छ्चोढो, तुम डेज़ काउंट करो. और मेबी 1स्ट्रीट टाइम तुम्हारे साथ सेक्षुयल आक्टिविटी होने के कारण इस बार ऐसा हो रहा हो. या हारमोन आक्सेस के कारण भी हो सकता है.

मैं: ओह मी गोद! सिर मेरा मेन्स्ट्रुयल साइकल एग्ज़ॅक्ट्ली 33 डेज़ का होता है और काउंट करने पे सेम आज का ही डटे आ रहा है.

राकेश सिर: अरे यार! अब क्या करोगी?

मैं: सिर मेरा पीरियड कभी भी स्टार्ट हो सकता है. अनफॉर्चुनेट्ली मैं ना पनटी पहनी हू, और ना ही पद कॅरी की हूँ. ओह गोद, अब मैं क्या करू?

इतने में पाटिल सिर इधर अपना सर घूमते है और पूछते है: अर्रे भाई राकेश और माही, क्या फुसुर-फुसुर चल रहा है भाई तुम दोनो में? कुछ मुझे भी बताओ.

मैं: नही सिर, कुछ भी नही. बस ऐसे ही नॉर्मल.

पाटिल सिर: अर्रे माही, तुम बता नही रही हो. बुत तुम्हारा फेस बता रहा है की तुम कुछ परेशन हो. टेल मे वॉट हॅपंड?

अब मैं सिर को क्या बताती, मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था क्या बोलू, कहा से बतौ, क्या-क्या बतौ. मॅन में बहुत गुस्सा आ रहा था राकेश सिर पे. क्यूंकी उन्ही की वजह से मैं उस दिन मेंटली और फिज़िकली हरास थी.

पाटिल सिर: माही तुम मुझे अपना समझती हो तो प्लीज़ मुझे बताओ क्या हुआ है. जब से वॉशरूम से आई हो, तुम कुछ ठीक नही लग रही हो.

मैं: सिर वो मेरे स्टमक में अचानक से पाईं स्टार्ट हो गया है. बस इसीलिए थोड़ी अपसेट हू.

पाटिल सिर: अचानक से स्टमक पाईं! कही तुम्हारे पीरियड्स तो नही स्टार्ट होने वाले?

मैं: सिर मेबी.

मैं सिर को चाहती भी तो सारी बात खुल कर नही बता सकती थी. सिचुयेशन ही ऐसी हो चुकी थी उस दिन मेरे साथ.

पाटिल सिर: फिर इतना अपसेट क्यूँ हो? इट’स जस्ट आ नॉर्मल प्राब्लम. डॉन’त वरी माही, इट’स नॅचुरल.

मैं: या सिर, ई नो, बुत…

पाटिल सिर: बुत, वॉट बुत? टेल मे, बताओ आयेज भी तो बोलो.

मैं: सिर आप राकेश सिर ही पूछिए, वो सब बताएँगे आपको.

मैं: राकेश सिर प्लीज़ टेल हिं अबौट मी प्राब्लम.

पाटिल सिर: एस टेल मे, वॉट थे प्राब्लम इस?

राकेश सिर: सिर वो माही पद कॅरी नही की है इसलिए तोड़ा वो अपसेट है, बाकी सब नॉर्मल है.

पाटिल सिर: वो तो करना चाहिए था माही को. बुत नही भी की तो कोई बात नही, अरहोस्तेस्स से बात करे, वो लोग मेबी अरेंज कर दे.

राकेश सिर: सिर बुत.

मैं समझ गयी राकेश सिर क्या बोलने जेया रहे थे. वो सिर को मैने पनटी नही पहनी हू थी, ये बात बताने जा रहे थे. बुत मैं जानती थी की राकेश सिर इतना ही बोल पाएँगे और ये बताना ठीक नही होगा. क्यूंकी पूरी बात ना बताई जाए तो फिर आधा अधूरा बता कर क्यूँ और टेन्षन बढ़ाना. इसीलिए मैने उन्हे टच करके इशारा किया, और वो समझ गये.

राकेश सिर: बुत से मेरा मतलब अगर नही अरेंज हुआ तो?

पाटिल सिर: तब का तब सोचा जाएगा. माही अब दर्द कैसा है?

मैं: सिर अभी भी है, बुत पहले से तोड़ा रिलॅक्स है.

राकेश सिर: तुम ज़्यादा स्ट्रीस मत लो, आराम करो तुम.

पाटिल सिर: हा, माही तुम तोड़ा आराम करो.

ऐसा कह कर उन्होने मेरा ब्लंकेट को तोड़ा और उपर खींच कर आचे से धक दिया और फिर वो अपना लॅपटॉप उसे करने लगे.

राकेश सिर: माही वो क्रीम लगा लो, या मैं लगा डू?

मैं: सिर आप कैसे?

राकेश सिर: अर्रे ब्लंकेट के अंदर क्या ही दिख रहा है.

मैं तोड़ा सोचने लगी.

राकेश सिर: अर्रे सोचो मत माही, वैसे भी तुम लगावगी तो उतने आचे से नही लग पाएगा, और मैं आचे से लगा दूँगा.

मैं (कुछ देर सोचने के बाद): ओक सिर लगा दो, बुत आराम से लगाना, बहुत दर्द है अभी भी.

राकेश सिर: तुम टेन्षन मत लो, मैं आराम से लगौँगा.

राकेश सिर मेरे पर्स में से वो क्रीम धीरे से निकलते है, और उसे प्रीस करके अपनी उंगलियों पे लगा लेते है. फिर वो धीरे से अपना लेफ्ट हॅंड मेरी ब्लंकेट के अंदर डालते है, और मेरी स्कर्ट को उपर करते है. फिर वो मेरी छूट तक पहुँच जाते है.

मैं: सिर प्लीज़ आराम-आराम से लगाना.

राकेश सिर: तुम तोड़ा अपना पैर फैलाओ ताकि मैं आचे और आराम से लगा पौ.

मैं वैसा ही करती हू, और अपनी पैर को हल्का सा फैलती हू, जिससे छूट के आस-पास अछा स्पेस हो जाए, और क्रीम आचे से लग पाए. राकेश सिर क्रीम को रब करने लगते है. मुझे बहुत दर्द हो रही थी. मैने धीरे से उनको बोला-

मैं: सिर और धीरे-धीरे करो, बहुत दर्द हो रही है.

सिर मेरी बात मान कर और धीरे-धीरे रब करने लगे. अब मुझे अछा फील हो रहा था. वो हल्का-हल्का रब किए जेया रहे थे. पाटिल सिर अपने लॅपटॉप में लगे हुए थे. उन्हे पता नही था उनके बगल में ये सब भी हो रहा था.

बगल वाली रो में हमारी ही टीम के 3 लोग बैठे हुए थे. कुछ इस प्रकार से उनकी सीटिंग थी.

पीयूष छाबदिया सिर विंडो सीट पे थे. मिड्ल सीट पे सत्यम खुराना सिर थे. और पिछली सीट पे पाटिल सिर के प.आ. मुकेश सिंघल जी थे. मैने देखा तो पीयूष और सत्यम सिर बातें कर रहे थे. बुत मुकेश जी को मेबी डाउट हो गया था की कुछ तो चल रहा था हमारे और राकेश सिर में. तो वो लगातार एक ही नज़र से मुझे ही देखे जेया रहे थे.

मैने राकेश सिर को कहा: सिर अब लग गया ना. अब हाथ बाहर निकाल लीजिए. कुछ और करने की कोशिश मत कीजिए. मैं बहुत परेशन हू अभी.

राकेश सिर मेरी बात को मान गये और बोले: मॅन तो नही है हटाने का हाथ, बुत तुम कहती हो तो हटा लेता हू. तुम्हारी छूट तो बिल्कुल गरम लग रही है माही. आहा मज़ा आ गया यार टच करके.

मैने फिर उनका हाथ पकड़ा, और उनका हाथ बाहर की और निकाला. मुझे पता था वो मुझे बातों में उलझाना चाह रहे थे. फिर मैने अपने पैर को सही पोज़िशन में किया, और स्कर्ट को भी अड्जस्ट किया. मैने देखा की राकेश सिर उस हाथ को अपने नोस के पास ले जेया कर खूब सूंघ रहे थे. ये देख कर मुझे बहुत हॉर्नी फील हुआ. मैने राकेश सिर से यू ही पूछा-

मैं: राकेश सिर अगर मेरे पीरियड्स दुबई पहुचने से पहले जर्नी में ही स्टार्ट हो गये, तो?

राकेश सिर: फिर तो बड़ी प्राब्लम हो जाएगी माही. ई होप ऐसा ना हो.

मैं: एस सिर, ई ऑल्सो होप सो.

हम दोनो की बात-चीत चल ही रही थी, की तब तक प्लेन में सीट बेल्ट साइन ओं हुआ, और कॅप्टन ने टर्ब्युलेन्स होने की अनाउन्स्मेंट की. सारे लोग सीट बेल्ट लगाने लगे

पाटिल सिर: माही सीट बेल्ट लगा लो, और डरना मत, कुछ भी नही होगा. ज़्यादा दर्र लगे तो आँखें बंद कर लेना.

मैने हा में सर हिलाया.

सिर ने मेरी ब्लंकेट को साइड किया और सीट बेल्ट लगाई. मैने नोटीस किया की पाटिल सिर सीट बेल्ट लगाने के बहाने से मेरी छूट को बार-बार टच कर रहे थे. मैने इग्नोर किया क्यूंकी पाटिल सिर मुझे बहुत मानते भी थे, सो मैने इग्नोर किया.

पाटिल सिर: माही, तुम्हारा दर्द ठीक हुआ?

मैं: सिर अब पहले से ठीक है, बुत है अभी भी.

पाटिल सिर: ई होप जल्दी ठीक हो जाए. क्र्यू से पद माँगा तुमने?

मैं: नो सिर.

पाटिल सिर: मैं बूलौऊन क्र्यू को? अटेंडेंट कॉल बटन प्रेस करू?

मैं: नो-नो सिर, रहने दीजिए. वैसे भी दर्द अभी स्टार्ट हुआ है, तो वो इतनी जल्दी स्टार्ट नही होगा.

पाटिल सिर: अरे योउ शुवर?

मैं: एस सिर, ई आम शुवर.

पाटिल सिर: तब तो ठीक है. माही मैं एक बात फिरसे क्लियर कर डू, मुझे वाहा कोई प्राब्लम नही होनी चाहिए किसी भी तरह की, और मैं जो बोलूँगा, जैसा बोलूँगा, वो तुम बेझीजक करोगी. क्यूंकी मैं तुम्हारा प्रोड्यूसर हू. तुम पर लाखों क्रोरो रुपय खर्च करूँगा. तुमको एक बिग स्तर बनौँगा. तो बदले में मुझे भी पर्सनल बेनिफिट्स मिलना चाहिए ना.

मैं: एस सिर, ऑफ कोर्स. मैं प्रॉमिस करती हू मेरी वजह से कभी भी आपको प्राब्लम नही होगी.

पाटिल सिर: गुड गर्ल माही, वेरी इंटेलिजेंट गर्ल.

मैं (स्माइल के साथ): थॅंक योउ सिर.

पाटिल सिर: वॉट आ ब्यूटी योउ अरे. तुम्हारे आयेज तो स्वर्ग की अप्सरा भी फैल है.

मैं अपनी टॅरिफ सिर के मूह से सुन कर बिल्कुल ही खुश हो गयी. सिर मेरा हाथ अपने हाथो में रख के दबाने लगे, और मुझसे यहा-वाहा की बातें करने लगे. इतने में अचानक टर्ब्युलेन्स स्टार्ट हो गया. मैं तो बहुत ज़्यादा ही दर्र गयी थी. फिर कुछ देर बाद कंडीशन नॉर्मल हुई. सीट बेल्ट साइन ऑफ हुआ. फिर हम सब ने अपनी-अपनी सीट बेल्ट खोली.

इतने में पाटिल सिर ने कहा: राकेश और माही, उतना तुम दोनो. मैं ज़रा वॉशरूम से आता हू.

राकेश सिर उठे. फिर मैं उठी, अपनी स्कर्ट को अड्जस्ट किया, क्यूंकी मेरा माइंड एक-दूं कॉन्सेंट्रेशन में था.

पाटिल सिर जाते वक़्त बॅक साइड से जान बूझ कर मेरे बूम से अपना लंड रग़ाद कर गये. मुझे उनका बिग लंड फील हुआ. मुझे तो दर्र लगा कही मेरी स्कर्ट उपर ना हो जाए, नही तो फिर सब को ही मेरे न्यूड बूम दिख जाते.

बुत ऐसा नही हुआ. लेकिन मुकेश जी ने नोटीस किया था पाटिल सिर को ऐसा करते हुए. क्यूंकी मैं उन्ही के जस्ट सामने खड़ी हुई थी. तो शुवर है की उन्होने देखा होगा. फिर अपनी सीट पे मैं और राकेश सिर दोनो बैठ गये.

राकेश सिर: माही तुम्हारा दर्द कैसा है अब?

मैं (स्माइल के साथ): कों सा पूच रहे है? आपका वाला या नॅचुरल वाला?

राकेश सिर (तोड़ा गिल्टी फील कर के): दोनो.

मैं: नॅचुरल वाला तो अब ठीक है कंपेर्ड तो बिफोर. और आपका वाला क्रीम लगाने के बाद से तोड़ा रिलॅक्स फील करवा रहा है. ओवरॉल अभी दोनो ठीक ही है.

राकेश सिर: माही ई आम अगेन सॉरी. अब से ऐसा नही होगा मेरे द्वारा.

मैं: ओक सिर, बुत प्लीज़ ढयन रखिएगा आयेज से, सेक्स मीन्स प्यार सिर, नोट टॉर्चर.

राकेश सिर (मेरे हाथ अपने हाथो में पकड़ कर): प्रॉमिस तो योउ आयेज से ऐसा कभी नही होगा.

मैं: थॅंक्स सिर फॉर अंडरस्टॅंडिंग.

राकेश सिर: माही पाटिल सिर को कभी नाराज़ मत करना. वो तुम्हे स्तर तो बनाएँगे ही, मालामाल भी बहुत कर देंगे. तुम देखी ना वो तुम्हे कितना मानते है. 50क तुरंत दिलवा दिए तुम्हारे पॉकेट खर्च के लिए. उनको खुश रखोगी तो तुमसे सारे लोग खुश रहेंगे.

इतने में पाटिल सिर आ जाते है, और राकेश सिर उठते है. फिर मैं उतना चाहती हू की पाटिल सिर रोक देते है और बोलते है-

पाटिल सिर: माही तुम विंडो की तरफ हो जाओ, मैं बीच में हो जाता हू.

मैने भी वैसा ही किया जैसा सिर ने बोला. अब मैं विंडो सीट पे थी. बुत प्राब्लम अब ये थी की मैं राकेश सिर से अब सीक्रेट बात कुछ नही कर सकती थी, और ना ही वो कर सकते थे. अब प्लेन में क्र्यू मील्स सर्व करने लगे थे.

अब आयेज क्या हुआ मेरे साथ. मुझे पाटिल सिर ने विंडो साइड बैठने के लिए क्यूँ बोला? खाना खाने के बाद मेरे साथ क्या हुआ? ये सब आप लोगों को अपकमिंग पार्ट्स में पता चलेगा. तब तक आप लोग इमॅजिन कीजिए की मेरे साथ आयेज क्या हुआ होगा.

मुझे मैल करके बताइए बाकी रियल में क्या-क्या हुआ और कैसे हुआ. ये आपको स्टोरी के अगले पार्ट में जानने को मिलेगा.

अब तक की स्टोरी आप लोगों को कैसी लगी मुझे मैल करके बताइए. मेरी

एमाइल ईद है- महिसिंघहबेउती2232@गमाल.कॉम

आप सब मेरी इस स्टोरी सीरीस को इतना ज़्यादा पसंद कर रहे है आप सब इसके अपकमिंग पार्ट के लिए इतना ज़्यादा उत्सुक रहते है. मुझे हज़ारों मेल्स आई इसके अपकमिंग पार्ट्स के लिए. हा तोड़ा पर्सनल रीज़न्स की वजह से स्टोरी लाते जेया रही है. बुत आप सब इग्नोर कीजिए, और स्टोरी का भरपूर लुफ्ट उठाइए. स्टोरी को इतना सारा प्यार देने के लिए आप सब का दिल से शुक्रिया.

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