पहले चुदाई की, और फिर डराया

आपने पिछले पार्ट में पढ़ा, कैसे मेरे छ्होटे भाई के दोस्त विपुल ने मुझे आधे कपड़ों में देख कर अपना कंट्रोल खो दिया, और मेरे साथ रोमॅन्स करने लगा. फिर मैं उसकी हरकत से गरम हो गयी, और मैं भी उसका साथ देने लगी. मैं उसके लिप्स को चूसने और काटने लगी थी. विपुल मेरी छूट में फटाफट उंगली चलाने लगा और मैं झाड़ गयी.

मैने विपुल के लिप्स को धीरे से छ्चोढा और अपने दांतो से लिप्स काट कर मुस्कुरा रही थी. अब मेरी छूट उंगली से नही बल्कि एक लंड के लिए तड़प रही थी. मैं अपने आप को रोकने की बहुत कोशिश कर रही थी, पर छूट में लगी आग ने ना चाहते हुए मुझे अब उसके लंड के नीचे आने के लिए मजबूर कर दिया था.

अब मैने विपुल को बेड पर लिटाया, और उसकी पंत की क्लिप खोलने लगी. मुझे लंड लेने की जल्दी थी, तो मैने उसकी अंडरवेर के साथ घुटनो तक पंत उतार दी. मैने देखा तो झांतो के बीच में काले साँप की तरह उसका लंड खड़ा था. उसका लंड देख कर मैं हैरान रह गयी. मैने उसके लंड को हाथ में पकड़ा और हिलने लगी. वो एक-दूं से बड़ा हो गया. विपुल की आँखों में मुझे छोड़ने की भूख दिख रही थी. मैने कहा-

मैं: ऐसे क्या देख रहे हो? जो काम करना चाहते हो उसे पूरा करो. कभी सोचा नही था तेरे और मेरे बीच किसी दिन ऐसा होगा.

विपुल: मैने भी कभी नही सोचा था, की तुम इतनी आसानी से तैयार हो जाओगी.

संगीता: अब तुमने जो आग लगाई है, उसको ठंडा तो करना पड़ेगा. कमीने तुमने मुझे अपने पति को धोखा देने पर मजबूर कर दिया है. अब इतना हो गया है तो पूरा मज़ा करेंगे.

मेरी बात से विपुल की आँखों में चमक आ गयी. मैने अपना रंडी-पाना रोकने की बहुत कोशिश करी, पर आख़िर-कार लंड की भूख ने मुझे विपुल की रंडी बना दिया. मैं उसके लंड के पास गयी. उसके लंड के उपर से आती गंध मुझे मादक बना रही थी. मैं बार-बार उसके लंड को सूंग रही थी.

आख़िर-कार मैने अपनी आँखें बंद की, और लंड को मूह में ले लिया. विपुल तो सातवे आसमान में चला गया था. मैं पक्की रॅंड की तरह लंड को चूसने लगी, और उसकी भी सिसकारी निकल रही थी. वो मेरे बालों को मेरे कान के पीछे करके मेरे सर को बड़े प्यार से पकड़ कर लंड चुस्वा रहा था.

विपुल: क्या बात है दीदी? ऐसा मज़ा तो मेघा ने भी नही दिया. आप तो चुड़क्कड़ निकली. देख कर लगता है अपने बहुत से लंड चूज़ होंगे.

संगीता ( उसका लंड बाहर निकाल कर): पहली बार पति को धोखा दिया है. पता नही मुझे क्या हो गया है. तुमने कुछ काला जादू किया लगता है. ( मैं शरमाने लगी)

विपुल: मुझे कोई काला जादू करना नही आता.

संगीता ( उसके लंड को दिखा कर): ये है ना तेरा काला जादू. इसको देख कर रहा नही गया. ( मैं हासणे लगी, वो भी मुस्कुरा रहा था) चूस कर मज़ा आ गया. मेघा रोज़ चूस्टी होगी?

विपुल: मेघा ने आज तक मेरा लंड नही चूसा है. ये सब उसको पसंद नही है. सब तेरी जैसी रंडी नही होती. और मैं मेघा से बहुत प्यार करता हू. उसको रंडी जैसी हरकतें नही करने दूँगा.

विपुल की बात से उस पर गुस्सा आ रहा था. पर विपुल कही ना कही सच बोल रहा था. मैं जिस रास्ते पर चल रही थी, वो रंडी-पाना ही तो था. अपने पति को धोखा दे कर एक-दो नही, पर अब कितने लोगों से चुड चुकी थी. पर मुझे विपुल की रंडी नही उसकी मालकिन बनना था. और मैने सोच लिया था की अब मेघा को गैर मर्दों से छुड़वाने का चस्का लगवा दूँगी. और उसको इतनी चुड़क्कड़ बना दूँगी की लंड चूज़ बिना रह नही पाए.

मैने उसके लंड को कुछ 10 मिनिट तक चूसा, और उसकी आँखों में देख कर मुस्कुरा रही थी. मैं उसको मेरे सेक्सी कर्व दिखाते हुए पागल बना कर पूरी नंगी हो गयी. वो भी जोश में आ गया, और पूरा नंगा हो गया. उसने मुझे दबोच लिया, और मेरी पूरी बॉडी पर किस करने लगा. विपुल की बॉडी स्मेल कर रही थी. उसकी गंध मुझे मदहोश कर रही थी.

मैने अब अपनी टांगे खोल कर उसको मेरी छूट दिखाई. मेरी छूट देख कर वो पागल हो गया. मैं हमेशा छूट सॉफ रखती हू. क्या पता कब कहा मर्वानी पड़े. विपुल ने उसका मोटा काला लंड हाथ में पकड़ा, और मेरी छूट पर सेट किया. जब से पिंकी की छूट में विशाल का मोटा और काला लंड जाते हुए देखा था, तब से मुझे भी ऐसे लंड से चूड़ने की इक्चा हो रही थी.

विपुल ने आधा लंड ही गुसाया, और मेरी आ निकल गयी. मेरी आँखें उपर चढ़ गयी. मुझे चुडवाए हुए कुछ 8-10 दिन हो गये थे. लंड जाते ही मुझे बहुत सुकून मिला. मैं आँखें बंद करके आ आ कर रही थी. विपुल ने एक ज़ोर का झटका मारा, और पूरा लंड छूट चीरता हुआ उतार गया.

मैने चिल्लाते हुए मेरी आँखें खोली. मेरी आँखें फटत गयी. मेरी सिसकारी निकल रही थी. उसको सुन कर विपुल और ज़ोर-ज़ोर से छोड़ रहा था. अब विपुल मेरी टाँगो को कंधे पर लेकर पूरा लंड छूट में उतार रहा था. मैं भी मज़े से मधुर आवाज़े निकाल कर छुड़वा रही थी. उसने कहा-

विपुल: संगीता मेरी जान कितने सालों के बाद आज तुम मुझे मिली हो. जब समझ आई थी तब से तुम्हे छोड़ने के सपने देखता था. हज़ारो बार याद करके लंड हिलाया होगा. आज मेरी किस्मत अची है, की तुम मिल गयी हो. तेरी छूट बहुत मस्त है.

संगीता: मैं भी पहली बार पति को धोखा देकर ऐसा गंदा काम कर रही हू. ( मैं बहुत झूठ बोल रही थी) विपुल तेरा लंड बहुत मस्त है. मुझे ऐसे कभी मेरे पति ने भी नही छोड़ा है मेरे भाई. तुमने मुझे दिल से चाहा होगा, इसलिए मैं तेरे नीचे हू.

विपुल: तुम मेरा लंड भी ले रही हो, और भाई भी बोल रही हो (मैने सेक्सी स्माइल दी).

विशाल ने कुछ 10-15 मिनिट तक मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करी. मैं भी गांद उठा-उठा कर लंड लेती रही. चुदाई के दौरान मैं 2 बार झाड़ गयी, और वो मेरी छूट में झाड़ गया. वो पूरा पसीने से भीग गया था, और उसका बॉडी बदबू मार रही थी. मेरा तो सर फटने जैसा हो गया.

संगीता: तुम यार कुछ अछा वाला पर्फ्यूम उसे करो, और झाँत सॉफ करके लंड को चिकना रखो. चल अब बातरूम में जाते है.

वाहा जेया कर मैने शवर ओं कर दिया, और पहले तो दोनो ठंडे पानी से सॉफ हुए. मैने विपुल को साबुन से आचे से नहलाया. मैं उसके लंड को सॉफ कर रही थी, तो वो फिरसे खड़ा हो गया. मैं अब वॉल का सपोर्ट लेकर घोड़ी बन गयी. उसने पीछे से मेरी छूट छोड़नी शुरू की. वो मेरा पैर उठा कर भी खड़े-खड़े मेरी चुदाई कर रहा था, और वो बोला.

विपुल: तेरी छूट इतनी मस्त है. अब तो जब भी मौका मिला, तेरी छूट मारने आ जौंगा. बहुत सपने देखे है. आज सारे सपने पुर कर रहा हू.

मैं: सिर्फ़ मेरे ही सपने देखे है, या किसी और को भी छोड़ना चाहता है?

विपुल: एक है जिसको छोड़ना चाहता हू. उसके सपने भी देखता हू. पर वो पासिबल नही है. उसके साथ होना मुस्किल है.

मैं ( घुटनो पर बैठ कर उसके लंड के साथ खेलते हुए): जैसे मैं आज ये तगड़े लंड से चुड रही हू. वैसे हो सकता है वो भी किसी दिन मिल जाए. कों है वो मुझे नही बताओगे? ( मैं नाराज़ होने का नाटक करने लगी)

विपुल: मैं आपको बता दूँगा तो शायद आप बुरा मान जाओगी.

संगीता: नही बताओगे तो भी बुरा मान जौंगी.

विपुल: नही दीदी ऐसा ना करो. मैं बताता हू. ( उसने बहुत रुक रुक कर बोला) मैं ना किंजल भाभी को (मेरे छ्होटे भाई की वाइफ).

संगीता: तो इतना डरने की क्या बात है? तुम मुझसे कोई भी बात कर सकते हो.

अब मैने उसके लंड को चूसने लगी, और उसका माल निकाल कर चाट गयी. मुझे वो बड़ी हैरानी से देख रहा था. मैने पूछा-

मैं: ऐसे क्या देख रहे हो?

विपुल: तुम एक नंबर की रंडी हो. ऐसा कों करता है?

संगीता: यहा मैं तेरे उपर दया खा कर अपने पति को धोखा दे रही हू. तुम्हे लगता है मैं रंडी हू. मुझे नही करना तेरे साथ कुछ. चले जाओ यहा से. मैं छ्होटे को बताती हू तुमने कैसे मेरे साथ ऐसा गंदा काम किया. और उसको ये भी बता दूँगी की तुम भाभी को छोड़ने की बात कर रहे थे.

मैने उसको बातरूम से निकाल दिया और मैं नहा कर अपने कपड़े पहन कर रेडी हो गयी. मैने देखा तो वो फ्लॅट के बाहर खड़ा था. मैं गुस्से से उसको आँखे दिखा रही थी. मेरी बातों से उसकी गांद फटत गयी थी. मैं अपने घर चली गयी. वाहा जेया कर मुझे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था. मैने सोचा की मैने ग़लत आदमी से छुड़वा लिया था.

दूसरे दिन मुझे पता था विपुल मुझसे बात करने और मुझे बहला-फुसला कर फिरसे छोड़ने चला आएगा. क्यूंकी मैने जो चुदाई का सुख दिया था, उसके बिना रहना उसके लिए बहुत मुश्किल था. शायद उसको पूरी रात नींद नही आई होगी. मैने दूसरे दिन मेरी मम्मी को घर पर भेज कर मेरी किंजल भाभी को बुला दिया. जब विपुल आया तो किंजल भाभी को वाहा देख कर दर्र गया. मैं और किंजल भाभी दोनो उसको बड़े गुस्से से देख रहे थे.

विपुल: भाभी आप यहा क्या कर रही हो?

किंजल भाभी (गुस्से में): मेरे घर में मुझे आ कर पूच रहे हो, मैं यहा क्या कर रही हू? मुझे आपको पूछना चाहिए की आप यहा क्यूँ आए है?

विपुल (डरते हुए): मैं, वो मैं, वो यहा मैं (आयेज कुछ बोल ही नही पाया).

किंजल भाभी: क्या मैं-मैं लगा रखा है. मुझे संगीता दीदी ने आपकी सारी हरकतों के बारे में बता दिया है. आपने दीदी के साथ जो कुछ किया, वो ठीक नही किए हो. कल से दीदी दररी हुई है. आपकी हरकतें ठीक नही है, इसलिए आज मैं यहा आई हू.

विपुल ( वो पूरा घबराया हुआ था. उसके पसीने छ्छूट गये थे): भाभी ऐसा कुछ नही है.

आप ग़लत सोच रही है. मैने ये सब जान-बूझ कर नही किया, ग़लती हो गयी मेरे से. (वो मेरे पास आ कर हाथ जोड़ कर) दीदी ई आम सॉरी. आप मेरी बड़ी बेहन जैसी हो.

किंजल: अभी अमरदीप (मेरा छ्होटा भाई) आते होंगे. आप उनको समझना कैसी ग़लती हुई. मुझे आपसे ये उमीद नही थी. इतना कुछ करने के बाद सॉरी बोलते हो, और दीदी भी मान रहे हो. इतना कुछ करने के बाद ऐसा बोलते हुए आपको…

किंजल भाभी चिल्ला रही थी, और उतने में मेरा छ्होटा भाई अमरदीप आ गया. उसने कहा-

अमरदीप: किंजल क्या हुआ? तुम विपुल को क्यूँ इतना दाँत रही हो?

किंजल: आपके दोस्त की हरकत से दीदी कितना दर्र गयी है, आपको पता है?

अमरदीप: क्या हुआ दीदी?

मैं: मैं हेर ड्राइयर उसे कर रही थी, तो मुझे शॉक लगा.

अमरदीप: वो तो बिगड़ा हुआ है. एक कस्टमर का रिपेर के लिए आया है. विपुल को बोला था रिपेर करने को शायद भूल गया होगा.

किंजल भाभी: इसीलिए दाँत रही थी. बिगड़ा हुआ समान रिपेर करके रखो, और घर में यहा-वाहा फेंका मत करो. अछा है दीदी ने उसे किया, बच्चे होते तो क्या कुछ हो जाता.

मैं और किंजल भाभी विपुल की शकल देख कर हस्स रही थी. उसके तो मूह में गोते आ गये थे. जब मेरा भाई वॉशरूम गया, तब भाभी ने विपुल से कहा-

किंजल भाभी ( नॉटी स्माइल के साथ): आज तो पर्फ्यूम लगा कर आए हो. ( उसके लंड की और देख कर) नीचे भी सफाई हो गयी होगी ऐसा लगता है.

किंजल भाभी की बात सुन कर विपुल के होश उडद गये. उसको समझ में नही आ रहा था उसके साथ क्या हो रहा था. उसको एक के बाद एक झटके मिल रहे थे. आप लोग भी सोच रहे होंगे की किंजल भाभी और मेरे बीच ऐसा क्या हुआ था, की मेरी भाभी भी इतना खुल कर बोलने लगी थी. और उस दिन विपुल के साथ क्या हुआ, वो जानने के लिए मूडछंगेरबोय की स्टोरी को पढ़ते रहिए. आप अपना फीडबॅक मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल कर सकते है.

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