पति से बोर हुई औरत देवर से जाके चुदी

नमस्ते दोस्तों मेरा नाम संगीता है. इससे पहले आपने मेरी इस सीरीस की सारी कहानियाँ पढ़ी ही होंगी. इसके बाद मैं अपना एक और अनुभव लेके आई हू. मेरी शादी को 6 महीने पुर हो गये थे. मेरे पति लगभग रोज़ मुझे छोड़ते थे. पर अब पहले जैसा मज़ा नही आता था.

रोज़ रात मेरे पति काम पर से थके हारे घर आते थे. खाना खा के करीब 11-11:30 बजे मेरे करीब आते थे. फिर आधा एक घंटा चुदाई करते थे, और तक कर सो जाते थे. रोज़ उनकी बाहों में नंगी सोती थी, पर मेरी छूट की आग नही बुझती थी. मेरे देवर जी की शादी हुए अभी दो महीने ही हुए थे. रोज़ रात को देवर जी मेरी देवरानी को खूब छोड़ते थे.

कभी-कभी तो चुदाई रात भर चलती थी. देवरानी सुबा-सुबा सोती थी. नयी-नयी शादी का बहुत फ़ायदा देवर जी उठा लेते थे. सुबा देवरानी के चेहरे का नूवर ही बताता था की देवर जी ने कितनी गहराई तक चुदाई की थी. पिछले हफ्ते देवरानी माइके गयी थी, और यहा देवर जी देवरानी की छूट के लिए तड़प रहे थे. मुझे ये मौका बहुत अछा लगा.

मैं एक रात अपने पति के सोने के बाद अपने देवर के कमरे में चली गयी. देवर जी देवरानी को याद करके मूठ मार रहे थे. देवर जी पुर नंगे थे. मुझे देखते ही उन्होने मूठ मारना बंद किया, और अपने लंड पर हाथ रख उसे च्चिपाने की कोशिश की. मैं मुस्कुराइ, और देवर जी के पास बैठ गयी.

मैं: देवर जी शरमाओ मत, मैं समझ सकती हू. देवरानी जी नही है, तो आपको उनकी और उनकी छूट की याद आ रही होगी.

देवर जी: हा भाभी. आपकी देवरानी रोज़ रात मुझे और मेरे छ्होटे शेर का ख़याल रखती थी. पता नही कब वो वापस आएगी और मेरे लंड की आग बुझेगी.

मैं: कोई बात नही देवर जी. जब तक देवरानी नही आती, तब तक आपके शेर का ख़याल मैं रख देती हू.

ये कह के मैने देवर जी के हाथ को उनके लंड से हटाया, और उनका लंड अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी.

देवर जी: भाभी लेकिन भैया?

मैं: अब भैया से क्या ही च्चिपा है. और वैसे भी वो सो गये है. पहले जैसी बात उनके लंड में रही नही.

देवर जी: कोई बात नही भाभी. मैं हू ना. भैया की कमी मैं पूरी कर दूँगा.

देवर जी ने अपने दोनो पैर फैलाए. देवर जी दिखने में बहुत हॅंडसम है. उनकी बॉडी जिम वाले बॉडयबुलड़र्स जैसी है. और वो देख कर मैं समझ सकती हू की कैसे वो देवरानी जी के छूट में ज़ोर लगते होंगे. देवर जी ने जैसे ही पैर फैलाए, मैं उनके दोनो पैरों के बीच घुटनो पर बैठ गयी.

मैने उनकी चेस्ट और थाइस पर हाथ घुमाया. देवर जी हॉर्नी होने लगे. मैने पहले अपने दोनो हाथो से उनके लंड को सहलाया. फिर मौका मिलते ही उनका लंड मूह में ले लिया. उनका लंड मेरे पति से बड़ा था. करीब 9″ लंबा और 3.5″ मोटा. ये देख मेरी छूट में खुजली होने लगी. मैं एग्ज़ाइटेड हो गयी. मैने कुछ वक़्त लॉलिपोप की तरह चूसा, और फिर रुक गयी.

देवर जी: भाभी, आपकी देवरानी को लंड चूसना पसंद नही. तो वो मूह में नही लेती. आप प्लीज़ उसे ऐसे ही लंड चूसना सिखाइए ना.

मैं: चिंता मत कीजिए देवर जी. जिस दिन वो वापस आएगी, उसी रात उसे ट्रेन करके आपके पास भेजूँगी.

देवर जी: भाभी प्लीज़ थोड़ी देर और चूसिए ना मेरा लंड. इस मूह की गर्माहट के लिए मैं तरस गया हू.

इतने कहते ही देवर जी ने मेरी सारी का पल्लू कंधे से नीचे गिराया, और अपना लंड मेरे मूह में घुसाया. ज़ोर लगते हुए उन्होने खुद ही अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. वो ऐसे उत्तेजित और हॉर्नी हो रहे थे, जैसे पता नही कितने दीनो से इस दिन का इंतेज़ार कर रहे हो.

उन्हे मेरा मूह छोड़ने में बहुत मज़ा आया. कुछ देर बाद उन्होने मेरे मूह में ही अपना सारा माल निकाल दिया. ये देख कर मैं थोड़ी सी उदास हो गयी की अगर देवर जी तक गये होंगे तो आज भी मेरी छूट ठंडी ही रह जाएगी. मेरी उदासी को देवर जी ने भाँप लिया.

उन्होने कहा: चिंता मत करो भाभी. ये तो बस ट्रेलर था. अभी आयेज-आयेज देखो होता है क्या. आज आपकी छूट की आग भी बुझा दूँगा.

ये सुन कर मैं खुश हो गयी. उन्होने झट से मुझे अपने करीब खींचा, और मुझे फ्रेंच किस करने लगे. उसके बाद मेरी गर्दन पर चूमना शुरू किया. उन्होने मेरी ब्लाउस और ब्रा को निकाला, और उपर से नंगा कर दिया. उन्होने अपने दोनो हाथो से मेरे मम्मो को ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू किया.

उनके हाथ ही मेरी चीख निकालने के लिए काफ़ी थे. उन्होने अपने मूह में मेरे बूब्स दबाए. उन्हे चूस-चूस कर लाल कर दिया, और बीच-बीच में मेरे निपल्स को काटने लगे. उन्होने मेरी सारी को खीच कर उसे उतरा. फिर पेटिकोट का नाडा खोल कर अपने मूह से पेट और कमर पर चुम्मा-छाती करने लगे.

मैं भी माधमस्त हो गयी थी. मेरे पति से ऐसी ही कुछ उम्मीद मुझे थी. पर वो मुझे गरम करते ही नही थे. खैर, फिर देवर जी ने मेरे पेटिकोट को पैरों से अलग किया, और उल्टा पटक कर लिटा दिया. पीछे से देवर जी ने मेरी पीठ पर किस करते-करते मेरी टाइट्स और पैरों तक चूमा. मेरी पनटी को दोनो हाथो से पकड़ कर नीचे खिसकाया.

देवर जी ने कस्स कर दो चार तमाचे मेरी गांद पर मारे. इस दर्द के लिए मैं पता नही कितने महीनो से तड़प उठी थी. मैने भी अपनी गांद उठा कर उनका साथ दिया. देवर जी भी समझ गये मैं आज तोड़ा हार्ड और रफ सेक्स चाहती थी. उन्होने भी एक-दो तमाचे और जड़ दिए मेरी गांद पर.

फिर उन्होने मेरी गांद को चाटना शुरू किया. मुझे सीधा करके मेरी छूट में अपना मूह घुसाया, और मेरी छूट चाटने लगे. मैने भी उनका सिर पकड़ कर मेरी छूट में घुसना चाहा. वो कभी मेरी छूट में उंगलियाँ डाल कर मुझे गरम करते, तो कभी उनकी जीभ से चाट-चाट कर मेरे मूह से आ अया की आवाज़ निकालते.

फिर देवर जी ने अपनी बेल्ट निकली, और उसको कंधे पर रख कर सिर के पीछे से लपेट लिया. उन्होने मेरे दोनो पैरों को खीच कर अपनी और किया. बीच में बैठ कर देवर जी ने अपना लंड मेरी छूट पर सेट किया. सिर्फ़ दो-टीन धक्को में ही पूरा 9 इंच का लंड मेरी छूट के अंदर डाल दिया. मेरी चीख निकाल दी उन्होने. पर ना वो पहली बार चुदाई कर रहे थे, और ना मैं पहली बार चुड रही थी. तो लंड मेरी छूट में आराम से चला गया.

उन्होने कमर से मेरी गांद को पकड़ा, और कुछ ही देर में अपनी रेल-गाड़ी दौड़ना शुरू किया. उनकी चुदाई की छाप-छाप आवाज़ पुर कमरे में गूंजने लगी.

मैं: देवर जी आह, देवर जी आह आह. धीरे देवर जी.

देवर जी: भाभी आपको छोड़ने में बड़ा मज़ा आ रहा है. आपकी देवरानी बहुत नाटक करती है. पर आपकी तो बात ही अलग है.

फिर देवर जी ने थोड़ी हार्ड फक्किंग शुरू की.

मैं: देवर जी, बहुत दर्द हो रहा है. प्लीज़ देवर जी, धीरे कीजिए आहह आहह.

देवर जी: क्या भाभी आप भी. अभी तो बस शुरुआत है. मेरा कम अभी-अभी तो निकला है. मैं इतनी जल्दी नही झड़ने वाला. चलिए आज रात कस्स कर छोड़ूँगा.

ये कह के उन्होने अपने स्पीड बधाई. मैं पुर तरीके से उनकी हवस का शिकार हो गयी थी. पर मुझे पता था की रोज़-रोज़ ऐसे छूट फाड़ चुदाई मेरे नसीब में नही. इसलिए मैने भी चुदाई का आनंद लिया. मेरी आँखों से मीठे दर्द के आँसू निकल गये. चीखना और चिल्लाना उसी मीठे दर्द का हिस्सा था.

देवर जी ने करीब 20 मिनिट तक चुदाई की. फिर वो लेट गये. मैने कुछ देर तक उनके शरीर को चूमा, और उनकी जिम वाली बॉडी का आनंद उठाया. थोड़ी देर आराम करने के बाद देवर जी का लंड फिर खड़ा हो गया.

देवर जी: चलो भाभी. अब आपकी गांद का स्वाद भी चख लू. मेरी बीवी कहा रोज़ चुड़वति है. बस दो-टीन बार मानने के बाद चुदाई करने देती है.

मैं: ज़रूर देवर जी. आज आप जो माँगॉगे मिलेगा. और देवरानी को तो मैं ऐसा ट्रेन करूँगी की आपके सामने उसकी कुछ नही चलेगी.

देवर जी ने मुझे कुट्टी बनाया, और अपना लंड मेरी गांद पर सेट किया. उन्होने कुछ ही धक्को में पूरा लंड मेरी गांद में घुसा दिया. मेरे पति का लंड उनसे छ्होटा था, तो इस बार मुझे दर्द हुआ. पर देवर जी कहा मानने वाले थे. उन्होने कमर पकड़ी, और ज़ोर-ज़ोर से चुदाई शुरू की.

बीच-बीच में मेरी सॉफ्ट और गोरी गांद को तमाचे भी मारने लगी. देवर जी ने घपा-घाप मेरी चुदाई की. मेरी तो कुछ ही देर में हालत खराब हो गयी. पर देवर जी का जोश कम नही हुआ. उस वक़्त मुझे देवरानी से ईर्ष्या हुई की कैसे उसे इतने स्टॅमिना वाला पति मिला. फिर भी वो नाटक करती थी. ऐसे पति हो तो कों चुदाई नही करना चाहेगा?

देवर जी ने 20-25 मिनिट तक छोड़ा, और फिर मेरी गांद के उपर ही पूरा माल निकाल दिया. फिर मैने बातरूम जेया कर सब सॉफ किया. मैं बेड पर नंगी ही लेट गयी. बहुत महीनो बाद इतनी ज़बरदस्त चुदाई हुई थी, की मैं बहुत खुश थी. देवर जी ने मुझे बाहों में भर लिया, और हम दोनो एक-दूसरे के नंगे जिस्मो की खुशी लेते हुए सो गये. बीच-बीच में उनके हाथ कभी मेरे बूब्स को दबाते, तो कभी उनकी उंगलियाँ मेरी छूट और गांद को छेड़ती.

ऐसे ही खेल-खेल करते-करते देवर जी ने रात भर मुझे सोने नही दिया. और सुबा-सुबा मैने फिर एक बार 5-10 मिनिट के लिए उनका लंड चूसा. जैसे ही उनका लंड खड़ा हुआ, वो एक और बार चुदाई करने को तैयार हो गये. उन्होने बातरूम में ले जेया कर शवर के नीचे खड़ा किया. फिर अपना लंड मेरी छूट में डाल के छोड़ना शुरू किया. उन्होने मुझे अपनी गोदी में ही उठा लिया.

मैने भी उनसे लिपट कर अपनी छूट छुड़वाने का आनंद लेने लगी. उपर से पानी और नीचे से चुदाई. वाह क्या दिन की शुरुआत हुई थी. 15-20 मिनिट की चुदाई के बाद देवर जी झाड़ गये. मैं उनसे चुदाई करके बहुत खुश थी. उस पुर दिन देवर जी मुझे छेड़ रहे थे. वो घर पर जब भी मौका मिलता तब कभी बूब्स पर हाथ लगते तो कभी छूट में उंगली करने के लिए मुझे मानते. मैने भी अपने सारी उपर करके उन्हे सब करने देती.

पर दूसरे ही दिन मेरी देवरानी जी वापस आ गयी. मैने उन्हे बताया की कैसे उनके पति को क्या क्या चाहिए. तो देवरानी ने कहा की आज रात वो देवर जी को सब करने देंगी, और वो भी सब कुछ करेंगी. फिर देर रात फिर उनके कमरे से चुदाई की आवाज़ आने लगी. जाम कर देवर जी ने देवरानी को पेला. पूरी रात उनकी चुदाई चली. जब मैं उनके कमरे सूभ गयी, तो देखा देवरानी नहाने गयी थी, और देवर जी जस्ट नहा के आए थे.

देवर जी नंगे ही थे, और टवल से अपने बाल पोंछ रहे थे. मैने उन्हे आवाज़ दी, तो वो वैसे ही नंगे मेरी और आए, और खुशी से बोले-

देवर जी: वाह भाभी, क्या ट्रेन किया है. पूरी रात ऐसा पेला है आपकी देवरानी को, की आज चल भी नही पा रही. मूह में तो लिया ही, गांद भी मरवाई आज तो. भाभी आप से चुदाई करने में भी बड़ा मज़ा आया.

मैं: देवर जी. अगर किसी चीज़ के लिए देवरानी माना करे, तो मुझे बताना. मैं बराबर उसे सीखा दूँगी. चलिए अब मेरे नंगे-पुँगे देवर जी, कपड़े पहनिए, और नाश्ता करने आइए.

ये बोल के हम दोनो हस्स दिए. आपको ये कहानी कैसी लगी ये जवानिकजोश@आउटलुक.कॉम पर ज़रूर बताइए. आपकी ईद सेफ रहेगी. कॉमेंट भी कर सकते है आप. अगर आपको कहानी पसंद आई तो मैं और ऐसे ही एक्सपीरियेन्स शेर करूँगी.

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