पति,पत्नी,सास ,ससुर की रासलीला – Part 2

चाहे वो उसका माँ, बहन, भाभी, बेटी या बहु क्यों न हो. एह्फ्री सेक्स का सिलसिला उस घर के आदमी ने ही शुरू किया था और अब उन्केबहू के मैके मी और बेटी कि ससुराल मी भी चालू हो गया है.इसीलिए बहनजी मैतो कहती हूँ कि अप जो भी हो रह है होने दे और चुप चाप शामिल हो जाये.” इतना सुब सुन कर मा ने नुपुर सेबोली, “बहु मुझे तो कुछ समझ नही अत, पता नहीं तुम लोगो कोक्य हो गया है. अच्छा ले चल, अपनी मन कि मुराद पूरी कर ले. चलाज तू मुझे भी अपनी तरह चिनल बना दे और मेरी छूट मेरे बेतेके लौरे से चुदने दे.”इतना सुनते ही बाबुजी हंस दिए और बोले चलो आज से इस घर मी भिफ्री सेक्स चालू होने जा रह है. जय हो छूट महारानी और लुन्द्माहराज कि. फिर वो नुपुर के पास आकार खडे हो गए. मेरे ससुमांदर कमरे मी से माला और सिंदूर दानी उठा लाई. बबुजे ने एक मलानुपुर को पहनाया और नुपुर ने भी एक माला बाबुजी को पहनाया. फिर्बबुजी ने नुपुर कि मांग मी सिन्दूर भरा. मेरे ससुमा ने नुपुर को अशिर्बाद देती हुई बोली,

“अब तक तू मेरी बेटी थी मगर आज्से तुमेरी समधिन बन गयी है. मैं चाहता हू कि समधी जी तुझ्कोखुब छोड और साल भरके अन्दर तेरे गोदी मेक नन्हा सा बछाकेले.” फिर बाबुजी ने माला मेरे मा को दिया और बोले, “लो एह मलाब अपने बेटे के गले मी दल दो. आज से तेरा बेटा ही तेरा आदमी होगौर तुझको नंगी कर तेरी छूट मी अपना लुंड पेलेगा.” मा एह सुनकर बाबुजी से बोली, “अच्छा है, मैं तो तुम्हारे बुधे लुंड तंग आगई थी अब एक जवान लुंड मुझे चोदेगा और मेरी छूट कि मस्तिझारेगा.” इसके बाद मा ने नुपुर से माला ले कर मेरे गले पहना दियौर मुस्कुरा कर बोली, “अब तक तू मेरा बेटा था लेकिन आज मैं तुझ्कोमाला पहना कर तेरे को अपनी आदमी मानती हूँ और अब चल आदमी बनानेका फ़र्ज़ पुरा कर.” मैंने भी मा कि मांग मी सिन्दूर दल दिया और मा से बोला, “अब आज से तुम मेरी मा नही मेरी पत्नी हो और चलो मेरेबिस्टर पर और हमलोग अपने पतिपतनी का धर्म निभाएँगे.” बबुजीताब बोले, “रुको, रुको अभी नए नए शादी हुए है,

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तुम लोग अप्नेबरों का पैर छुओ.” एह सुन कर मा और मैंने बाबुजी और नुपुर केपैर छुए और नुपुर ने मा को अशिर्बाद देते हुए बोली, “बहुस्वोभ्ग्यावती बोनो और जल्दी से पुत्रवती बनो.”तब मैंने देखा कि बाबुजी अपने कपरे खोलने लगे और अपने कप्रयूतर कर नुपुर को भी नंगी कर दिया.आज नुपुर अपनी झंते बिल्कुल्सफ़ कर रखी थी, उसकी छूट से हलके हलके रुस निकल रह था औरिस्लिये उसकी छूट बहुत चमक रही थी. मैं भी एह देख कर अप्नेकप्रे उतर दिए और अपनी मा के सामने बिल्कुल नंगा हो गया. मा मेराखारा १०” का लुंड देख कर बोली, “बेटा पार्थो तेरा तो लुंड बहुत्जंदर है. एह तो कोई भी चूड़ी या उन्चिदी छूट कि मस्त चुदाई कर के झर सकता है.” मैं तब अपनी मा के कपरे उतरने शुरू किया.सुबसे पहले मैंने उनकी साड़ी उतर दिया, फिर उनकी ब्लौसे के हूक्ख्लो कर ब्लौसे उनके शारीर से अलग किया. अब मेरी मा मेरे सम्नेसिर्फ़ पेट्तिकोअत और ब्रा पहने खरी थीं. मैं ब्रा के उप्पर से उन्किचुन्ची पाकर पहले हलके हलके से दबाया. चुन्ची पर हाथ पर्तेही मा बोली, “बेटा मेरी चुन्ची को जोर जोर से दबा, इसकी साड़ी दुध्तु आज पी ले, मेरी चुन्ची बहुत दिनों से थिक से मसली नही गयिहाई.”

मैं भी मा कि ब्रा खोल कर उनकी एक चुन्ची को जोर जोर दबनेलगा और दुसरी चुन्ची मी मुह लगा कर उसकी निप्प्ले अपने मुन्ह्मे लेकर चूसने लगा. मा अपने चुन्ची दबी और चुसी से गरमा गयीऔर अपने हाथों मी मेरा लौरा पाकर लिया और उसकी सुपर खोलने और्बंद करने लगी. अब मैंने भी मा कि पेट्तिकोअत का नारा खींच करुसको उनकी तंगो से अलग कर दिया. आज मा पेट्तिकोअत के नीचे पैंटी नही पहने हुए थी और उनकी पेट्तिकोअत खुलते ही वो पूरी तरह सेनंगी हो गयी. उनके नंगे होते ही मैं मा को बिस्टर पर चित लेतादिया और उनके उपर चरने लगा.तबतक बाबुजी बोली, “आरे पर्थोरुको, अभी एक काम बाकी है.” “क्या काम”, मैंने बाबुजी सेपुचा. “रुको मैं आ रह हूँ” बाबुजी बोले और चित लेटी नंगी माके पास आ गए. उन्होने मा कि छूट को अपने दोनो हाथ से खोल कर्बोले, “ले बेटा मैं आज नुपुर कि चुदाई कि फ़ीस पुरा कर रह हूँ, लीब तू भी मेरी बीवी कि छूट मी अपना लुंड पेल कर इसको जब चाहे,जैसे चाहे छोड़.”

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मैं एह सुन कर अपनी नंगी मा पर पेट के लेट गया और दोनो हाथ सयूनकी चुन्ची मसलने लगा और अपनी होतों से उनकी होतों को चुस्नेलगा. अपनी चुन्ची मसले और होंठ चुसी से मेरी मा बहुत गर्मगाये और अपने पैर मेरे दोनो तरफ फैला दिए जिससे कि मेरा लुंड अबुनकी छूट के मुहाने लग गया. मैं धीर से अपनी मा से पूछा, “माब तुमको छोड़ सकता हूँ?” मा ने मेरे छाती मी अपना मुँह चुप कर्शर्मा के बोली, “जाओ मैं नही जानती.तुझे जो भी करना है कर,लेकिन जल्दी कर.” मैं एह सुन कर मा से बोला, “आरे छूट चुद्वानेकी इतनी जल्दी है तो मेरा लुंड को अपनी छूट कि दरवाजे पर रखौर फिर देख अमी कितना जल्दी करता हूँ.” मा ने मेरे लुंड अप्नेनाजुक तों से पाकर कर अपनी छूट पर लगा दिया और मुझको अपने हाथ और पैर से बांध लिया. अब मैं अपनी कमर को उठा कर एक जोर द्र्धक्का मर कर अपना १०” का लुंड मा कि छूट के अन्दर दल दिया. मैस जोर धक्के से तिलमिला उठी और जोर से सिसकारी मर कर हमको और्जोर से जाकर लिया. मैंने मा से पूछा, “मा क्या ज्यादा लग गया है,क्या मैं अपना लुंड बाहर निकल लूँ?” “ख़बरदार, लुंड बाहर मत्निकालना,

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