पति ने की पलंग-तोड़ चुदाई

हेलो फ्रेंड्स, कैसे हो आप सब? मेरी पिछली स्टोरीज आप लोगों ने बहुत पसंद की, इसलिए आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद्.

मेरे बहुत से रीडर्स ने मुझे रिक्वेस्ट की थी की मैं बाप बेटी की एक इमेजिनरी स्टोरी लिखू. तो मैं अपने प्यारे रीडर्स को मना कैसे कर सकती हु. हाज़िर है एक पूरी तरह काल्पनिक स्टोरी बाप बेटी की. ये स्टोरी तो इमेजिनरी है, पर मैंने इसमें चरक्टेर्स रियल रखे हैं ताकि आप लोगों को पढ़ने में ज़्यादा मज़ा आये.

पहले में अपने नए रीडर्स को अपना इंट्रोडक्शन देदू. मेरा नाम मनीष है, मेरी आगे ३० इयर्स है, मैरिड हो. मेरा फिगर ३४-३०-३६ है, मतलब मैं पूरी सेक्स बम हो. मेरी शादी को ७ साल हो गए है. मैं अपने पति (दीपक, आगे ३२), सास (रजनी, आगे ५४) और बेटे (आरव, आगे ५) के साथ रहती हूँ. मेरे ससुर की डेथ मेरी शादी के १ साल बाद ही हो गयी थी.

मेरे मायके में मेरे पापा (अशोक, आगे ५४), मेरी माँ (गायत्री, आगे ५१), मेरा भाई (रोहन, आगे २७) और मेरी भाभी (रिया, आगे २५) है. मैं मुम्बई में रहती हूँ, हमारा खुद का फ्लैट है यहाँ. मेरे मम्मी-पापा पुणे में रहते है. पापा की रेडीमेड गारमेंट्स की शॉप है. रोहन की जॉब बैंगलोर में है, तो वो और रिया वहीँ रहते है. रिया भी वहीँ जॉब करती है. अब आते है स्टोरी पे.

मेरी मम्मी की कुछ टाइम से तबियत खराब रहने लगी थी. उनकी ट्रीटमेंट चल रही थी. तबीयत थोड़ी ठीक होती, पर फिर से बिगड़ जाती. दुसरे डॉक्टर्स को भी दिखाया पर कुछ असर नहीं हो रहा था. एक्चुअली मेरी माँ थोड़ी लापरवाही करती है. वो दवा टाइम पे नहीं लेती, इसलिए वो ठीक नहीं हो पा रही थी.

पापा चले जाते शॉप पे, फिर मम्मी घर पे अकेली रहती है तो कभी दवा लेती है कभी नहीं लेती. रिया कभी आती है पुणे, पर उसकी भी जॉब है तो वो कब तक छुट्टिया लेगी? रिया ने तो बोला की वो ब्रेक ले लेगी जॉब से जब तक मम्मी ठीक नहीं हो जाती, पर मम्मी पापा ने बोला की इतनी अच्छी जॉब है क्यूँ ब्रेक लेना. यहाँ सब मैनेज हो जायेगा.

मेरी बुआ जी (कविता, आगे ५६) भी पुणे में ही रहती है अपनी फैमिली के साथ. तो कभी वो आ जाती मम्मी की देख-बहाल करने.

अप्रैल २०२५ का १स्ट वीक था. मेरे बेटे आरव के एक्साम्स खत्म होने वाले थे. फिर उसके बाद उसकी छुट्टियाँ थी, तो मैं सोच रही थी की मैं चली जाउंगी थोड़े दिन मम्मी की देख-बहाल करने. मेरी लीव्स भी बहुत पेंडिंग थी, तो सब एक साथ ले लूंगी और कुछ दिन मम्मी पापा के साथ रह लूंगी.

उसी दिन ऑफिस से आके मैं फ्रेश हुई, फिर पापा को कॉल किया. मम्मी की तबियत के बारे में पुछा. फिर पापा ने ही पूछ लिया कि आरव की छुट्टियां होने वाली है तो क्या मैं कुछ दिन उनके वहां रहने आ सकती थी. मैंने बोला पापा को कि मैंने कॉल ही इसीलिए किया था, ये बताने की मैं उनके पास आ रही थी थोड़े दिनों के लिए.

फिर उनको बताया कि: इस वीक में आरव के एक्साम्स भी खत्म हो जायेंगे. तो मैं सैटरडे को ही आ जाउंगी.

पापा ये सुन के खुश हो गए. मैंने सोचा आज ट्यूसडे है तो ३ दिन है मेरे पास. फिर मैंने दीपक को बोला की मैं ये सैटरडे को जा रही हु अपने मम्मी-पापा के पास, तो उनको भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी. फिर मैं अपनी सास के पास गयी. उनको पूछा तो वो भी बोली कि इसमें पूछने की क्या बात है, तुम्हारी मम्मी की तबियत खराब है, तो तुम्हारा फ़र्ज़ बनता है उनकी देख-बहाल करना.

फिर वो बोली सैटरडे तक क्यूँ वेट करना, कल ही चली जा और बोली की ाराव का टेंशन मत ले उसे में संभाल लूंगी. फिर बोली की वैसे भी अगर तू आरव को लेके जाएगी, तो वहां आरव को सम्भालेगी या अपनी मम्मी को. मुझे भी लगा बात तो सही है.

फिर मैंने मेरी सास को थैंक यू बोला उन्हें हुग किया. उसके बाद मैंने सोचा कल ऑफिस जाके लीव के लिए अप्लाई कर दूँगी और इवनिंग में निकल जाऊंगी. मैंने पापा को नहीं बताया, सोचा उन्हें कल जाके सरप्राइज दूंगी.

फिर उस रात जब मैं और दीपक बैडरूम में थे, तो दीपक बोलै की-

दीपक: यार, कल तुम चली जाओगी तो मैं यहाँ कैसे रहूँगा अकेला?

में: अरे यार तुम्हे पुछा था न, अब क्यों ऐसा बोल रहे हो?

दीपक: अरे बाबा, तुम्हारे जाने में मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है. मैं तो बस बोल रहा हु की मैं तुम्हे मिस करूँगा.

में: ज़्यादा याद आये तो आ जाना वहाँ. पुणे कोण सा दूर है.

दीपक: हां पर तुमसे रोज़ चुदाई की जो आदत है, उसका क्या?

में: देखो रोज़ तो नहीं, पर मैं अंकिता को बोल के जाउँगी, जब तुम्हारा मनन हो उसके पास चले जाना (अंकिता मेरी कजिन सिस्टर है. हमने अंकिता और उसके हस्बैंड आकाश के साथ स्वैपिंग किया हुआ है- “कजिन सिस्टर के साथ हस्बैंड स्वैपिंग” ये स्टोरी पढ़ सकते हो).

दीपक: वो तो ठीक है, बूत फिर भी तुम्हे मिस करूँगा मैं.

में: हां मिस तो मैं भी करुँगी तुम्हे.

दीपक: फिर आज तो धमाल बनता है.

में: हां, मैंने कभी मन किया है क्या?

फिर हम एक-दुसरे को किस करने लगे, धीरे-धीरे हमारे कपडे कब उतर गए पता ही नहीं चला. दीपक मेरे बूब्स चूस रहे थे और मैं उनका लुंड सहला रही थी. फिर हम ६९ में आ गए. दीपक मेरी चूत चाट रहे थे और मैं उनका लंड चूस रही थी.

दीपक की टंग मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी और मैं उनका लंड अंदर गले तक लेके चूस रही थी. दोनों ही अपने काम में माहिर थे, तो दोनों ही उस मोमेंट को फुल एन्जॉय कर रहे थे.

फिर दीपक मेरे ऊपर आ गए और मेरे बूब्स से खेलते हुए मुझे किस करने लगे. फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पे रखा और एक ही बार में पूरा अंदर डाल दिया. मेरे मुँह से आअह्ह्ह निकल गयी. फिर वो अपनी कमर को ऊपर-नीचे करके मुझे छोड़ने लगे. साथ-साथ मेरे बूब्स भी मसल रहे थे और मेरे होंठ भी चूस रहे थे.

मैं भी नीचे से कमर हिलै के उनका साथ दे रही थी. दीपक ने चुड़ै की स्पीड बढ़ा दी. उनका लंड मेरी चूत के झाड़ तक जाके वापस आ रहा था. कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. अब चुड़ै की फच फच की आवाज़ें आणि स्टार्ट हो गयी थी.

फिर दीपक ने मुझे घोड़ी बन्ने बोलै. मैं बेड पे ही जोड़ी बन गयी. दीपक मेरे पीछे आये और पीछे से मेरी चूत में लन्ड डाल दिया. ये पोजीशन दीपक की फवौरीते है. उन्हें पीछे से मेरी गांड को देखते हुए छोड़ना बड़ा अच्छा लगता है.

मैं झुकी हुई थी. दीपक के झटके मेरी चूत पे पड़ रहे थे और हर झटके पे मेरे बूब्स भी पूरे हिल रहे थे. वो बीच-बीच में मेरी गांड पे थप्पड़ भी मार रहे थे. दीपक की स्पीड बढ़ गयी और उसके झटके एक-दम तेज़ हो गए. कुछ ही देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए. दीपक के लुंड का पानी मेरी चूत में भर गया था.

मैं वहीँ पेट के बल लेट गयी और दीपक मेरे पास ही लेट गए. दीपक कभी मेरी पीठ सहला रहे थे तो कभी गांड. उनके टच से में फिर से गरम होने लगी. फिर में उठ गयी और दीपक का लंड मुँह में लेके चूसने लगी. मैं अपनी ज़बान से चाट-ते हुए उसका लंड चूस रही थी. दीपक आँखें बंद किये एन्जॉय कर रहा था.

कुछ ही देर में दीपक का लुंड फुल टाइट हो गया. इस बार मैं उसके ऊपर आ गयी और उसका लंड मेरी चूत पे सेट करके उसके ऊपर बैठ गयी. उसका पूरा लंड मेरी चूत के अंदर था. ये मेरी फवौरीते पोजीशन है, इसमें मुझे बहुत मज़ा आता है और कण्ट्रोल भी मेरे हाथ में रहता है.

मैं दीपक के लुंड पे उछल उछल के उनसे चुद रही थी और वो भी नीचे से अपनी कमर उठा के मुझे छोड़ रहे थे. दीपक ने मेरे बूब्स पकड़ लिए और मसलने लगा. इससे मुझे और जोश आ गया और मैं ज़्यादा उछलने लगी उसके लंड पे.

फिर हमने पोजीशन चेंज की. दीपक मुझे बेड के किनारे पे लाये और मेरी टांगें अपने कंधे पे राखी और दाल दिया लंड मेरी चूत में. इस पोजीशन में लुंड एक-दम गहरायी तक मेरी बच्चेदानी को छू के वापस आ रहा था. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरे मुँह से सिसकियां निकल रही थी. दीपक भी दे दना दन मेरी चूत छोड़े जा रहे थे. मेरी चूत ज़्यादा टिक नहीं पायी और पानी उगल दिया. दीपक का लुंड मेरे पानी से पूरा भीग गया था.

फिर दीपक ने मुझे उल्टा लिटा दिया पेट के बल और मेरी चूत के नीचे एक पिलो रख दिया जिससे मेरी गांड ऊपर उठ गयी. मैं समझ गयी अब मेरी गांड बजने वाली थी. फिर दीपक मेरे ऊपर आ गए और अपना ६ इंच का मोटा लुंड मेरी गांड में पेल दिया. मेरे मुँह से जोर से चीख निकल गयी. फिर दीपक मेरी गांड की ठुकाई करने लगा.

उसका लंड मेरी गांड की गहरायी तक जा रहा था. दीपक ने स्पीड बढ़ा दी, अब उसका लंड तेज़ी से मेरी गांड के अन्दर बाहर हो रहा था. उसके टट्टे मेरी गांड से टकरा रहे थे, जब वो गहरे तक अन्दर डालता अपना लंड. फिर कुछ टाइम में उसके धक्के और गहरे और तेज़ हो गए.

मैं समझ गयी कि उसका होने वाला था और मेरा भी होने ही वाला था. मैं भी नीचे से गांड उठा के उसका लुंड और अंदर तक ले रही थी. फिर हम दोनों साथ ही झड़ गए और उसने मेरी गांड पूरी भर दी.

फिर हम उठे और वाशरूम जाके खुद को क्लीन किया और बेड पे आके लेट गए और बातें करने लगे.

दीपक: यार मैं ये सब बहुत मिस करूँगा.

में: हां मिस तो मैं भी करुँगी.

दीपक: तुम्हारा मायका यहीं आस-पास होता तो मैं रोज़ आ जाता तुम्हारी गांड मारने.

में: पुणे कोण सा दूर है, जब मनन करे आ जाना.

दीपक: बूत रोज़ तो नहीं आ सकता न.

में (मज़ाक में): एक काम करो, अपनी माँ को पटा लो. फिर जब मैं नहीं रहूंगी तो उन्हें छोड लिया करना.

दीपक (हस्ते हुए): अगर तुम हेल्प करेगी, तो एक दिन माँ को भी छोड़ लूँगा.

में: तुम सच में कमिने हो. अपनी माँ के बारे में ऐसा सोचते हो.

दीपक: अरे यार मैं तो तुम्हारी बात का जवाब दे रहा था बस. वैसे भी जिसकी माँ इतनी हॉट हो, वो बेचारा ऐसा सोचेगा ही न.

में: तुम्हे तो हर औरत हॉट लगती है, सिर्फ मुझे छोड़ के.

दीपक: अरे डार्लिंग, तुमसे होत कोई हो सकती है क्या? तुम तो सेक्स बम हो.

में: अब मस्का मत लगाओ.

दीपक: मस्का नहीं जानेमन, सच बोल रहा हु.

में: ाचा सच बताना, तुम अपनी माँ के बारे में वैसा सोचते हो क्या?

दीपक: टॉपिक खत्म करो न, कुछ बोलूंगा तो फिर गुस्सा हो जाओगी और आज मुझे तुम्हे गुस्सा नहीं करवाना.

में: अरे मैं गुस्सा नहीं करुँगी, बताओ न तुम.

दीपक: माँ ने इस ऐज में खुद को कितना फिट रखा है, और उनको भी तो ज़रुरत होगी ही न. ऐसा नहीं है की मेरी नीयत खराब है उनके लिए, पर है तो वो सेक्सी यार.

में: हां ये बात तो सही बोली. वो इस ऐज में भी सब के लंड खड़े करवा सकती है.

में: अच्छा चलो, मैं तुम्हे परमिशन देती हु. अगर उन्हें पट्टा पाओ तो पत्ता लो, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

दीपक: क्या यार तुम भी!

में: अरे मैं मज़ाक नहीं कर रही, तरय तो करो.

दीपक: तुम्हारी हेल्प के बगैर कैसे होगा? मुझे हमारा रिलेशन खराब नहीं करना कुछ गड़बड़ करके.

में: अच्छा चलो मैं कोई आईडिया सोच के तुम्हे बताऊँगी, वो तो तरय कर सकते हो न. और रिलेशन खराब नहीं होगा ये मेरी गारंटी.

दीपक: ठीक है, देखते है. यार तुम कितना सोचती हो मेरे बारे में, तुम्हारी जैसी वाइफ तक़्दीर वालो को ही मिलती है.

में: तुम भी तो सोचते हो मेरे बारे में तो मैं क्यों न सोचु?

फिर एक-दुसरे को किस करते हुए हुग करते है और सो जाते है. मॉर्निंग में दीपक को बोल के ट्रेन की टिकट बुक करवा दी पुणे के लिए. इवनिंग में ६ बजे की ट्रेन थी, तो मुझे आज भी ऑफिस से हाफ डे में ही घर आना पड़ेगा. फिर मैंने ऑफिस पहुँचते ही १ मंथ की लीव का मेल कर दिया अपने मैनेजर को.

कुछ ही देर में मैनेजर मेरी डेस्क के पास आया और पूछने लगा इतनी लीव्स एक साथ क्यों चाहिए तुम्हे. मैंने भी अपनी माँ की तबियत के बारे में बता दिया. मेरा रेपो ऑफिस में ाचा है, मैं जल्दी लीव लेती ही नहीं. तो मेरे मैनेजर ने भी आसानी से मेरी लीव्स अप्प्रोवे कर दी. अब तो मेरा मैं भी नहीं लग रहा था ऑफिस में. मैं जल्दी से अपने घर जाना चाहती थी, और मम्मी पापा को सरप्राइज देना चाहती थी.

१ बजे ही में ऑफिस से निकल गयी और घर जाके फटाफट पैकिंग कर ली. दीपक भी जल्दी आ गए आज ऑफिस से और हम सब साथ बैठ के बातें करने लगे. मैं आरव को गोद में लेके उससे प्यार कर रही थी, क्यूंकि अब मैं १ मंथ तक उससे दूर रहने वाली थी.

में: आरव बीटा दादी को ज़्यादा तंग मत करना.

सास: अरे तू क्यों टेंशन ले रही है. यहाँ सब मैनेज हो जायेगा. तुम समधन जी का ध्यान रखना.

में: हां माँ. थैंक यू.

सास: अरे इसमें थैंक यू क्या बेटा, और आरव की छुट्टियां हो जायेगी तो हम सब भी आएंगे समधन जी से मिलने.

दीपक: हां हम भी आयेंगे.

में: आप सब को मिस करुँगी मैं.

दीपक: हम भी मिस करेंगे.

में: माँ आप आरव के साथ इनका भी ध्यान रखना.

सास: ये तेरा पति बाद में बना पहले मेरा बेटा है.

दीपक: अरे तुम क्यों इतना टेंशन ले रही हो?

में: तुमको रात को मेरे बगैर नींद न आये तो माँ के साथ सो जाना तुम (आँख मारते हुए).

सास: अरे तुम यहाँ सब की टेंशन मत लेना, यहाँ मैं हूँ न.

में: हां माँ आप हो तभी तो मैं जा पा रही हू.

ऐसे ही बात करते-करते मेरी ट्रेन का टाइम हो गया. मैंने सास और आरव को हग करके बाय बोला. दीपक मुझे स्टेशन छोड़ने आने वाले थे, तो हम फिर निकल गए. मैं ट्रेन में बैठने से पहले वहीँ दीपक को हुग किया और बोला कि ध्यान रखना खुद का और बाकी सब का भी. मैंने अंकिता से बात कर ली है, तो कभी मनन हुआ तो चले जाना उसके पास, और माँ के लिए भी कोई आईडिया सोच के बताती हु.

दीपक बोलै: तुम भी वहां खुद का ध्यान रखना, और यहाँ का टेंशन मत लेना. और अगर तुम्हे कोई ऑप्शन मिले तो तुम भी वहां एन्जॉय करना.

फिर हमने एक-दुसरे को लव यू बोला और में ट्रैन में बैठ गयी. मेरी ट्रेन निकलने तक दीपक वहीँ खड़े थे. ९ बजे तक मैं पुणे स्टेशन पहुँच गयी (ट्रेन के सफर में ऐसा कुछ हुआ नहीं जो मैं आप लोगों से शेयर करो, तो वो पार्ट स्किप करती हु).

मेरा घर स्टेशन से ज़्यादा दूर नहीं है, टैक्सी से मुश्किल से २० मिनट लगते है. फिर मैं स्टेशन के बाहर आई और टैक्सी कर ली. मैं ९:३० तक घर के बाहर खड़ी थी, और खुश हो रही थी कि मम्मी पापा मुझे देख के कितना सरप्राइज हो जायेंगे. मैं बहुत टाइम बाद मायके में इतने दिनों के लिए रहने आई थी, तो मैं भी बहुत एक्ससिटेड थी. मैंने डोर बेल बजा दी.

इस पार्ट में इतना ही, आगे की स्टोरी के लिए अगले पार्ट का वेट करिये. आशा करती हु आप बोर नहीं हुए होंगे, क्यूंकि इस पार्ट में ज़्यादा मसाला नहीं था. पर इंट्रोडक्शन भी ज़रूरी है, वरना स्टोरी पढ़ने में मज़ा नहीं आता. मैं जितना हो सके स्टोरी को इंटरेस्टिंग बनाने का तरय किया है, बाकी तो आप लोग बताओगे की स्टोरी कैसी लगी.

प्लीज मेल पे अपना फीडबैक ज़रूर दीजियेगा और मैं जल्दी ही आउंगी स्टोरी का अगला पार्ट लेके. तब तक के लिए लुंड और चुत को मेरा प्रणाम.

माय ईमेल: मनीषजैं३९९१@जीमेल.कॉम

अगला भाग पढ़े:- पापा की ख़ुशी के लिए उनसे चुड़ गयी-२

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