पार्किंग में खड़ी गाड़ी में लड़की की चुदाई

उस दिन पूरी रात चुदने के बाद मैं ध्रुव के लंड की दीवानी हो गई थी। हम दोनों व्हाट्सएप और स्नैपचैट पर भी जुड़ गए। वो मुझे वक़्त-वक़्त पे हमारी सेक्स की छोटी क्लिप्स भेजने लगा। कभी अपने लंड की तस्वीर, तो कभी मेरी माल से भरी चूत की। ये सब देख के मैं बहुत जोश में आ जाती थी।

मैं और ध्रुव अक्सर मिलने लगे, और मौका मिलते ही जम कर सेक्स करते। मेरे ऑफिस की पार्किंग काफी ढकी हुई है, और बड़ी है। पर कारें कम होती हैं, तो वहां काफी गुप्त और गोपनीयता मिल जाती है। एक बार ध्रुव मेरे दोस्त को ऑफिस से वापस लेने के 1 घंटे पहले आ गया था। उसने मुझे मैसेज किया पार्किंग में आने को। मैं उससे मिलने चली गई।

उसने अपनी कार पिल्लर के पीछे लगाई जिससे किसी को कुछ पता ना चले। उसने कार का गेट खोला और मुझे अंदर खींच लिया। क्योंकि दोनों सीटों को उसने एक-दम आगे धकेल दिया तांकि पीछे अच्छी खासी जगह मिल सके। ध्रुव ने मुझे किस करना शुरू कर दिया था। मेरे गले को चूमता, मेरे टॉप के ऊपर से मेरे बूब्स को चूमने दबाने लगा। उस दिन मैंने ब्लैक स्लीवलेस टॉप विद बूब्स कप्स पहना था।

झटके में उसने मेरा टॉप उतार दिया और मेरे बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से खींचने लगा। मुझे ध्रुव का आक्रामक सेक्स बहुत पसंद था, इसलिए मैं मना नहीं करती थी। बिना वक्त बर्बाद किये उसने अपनी ट्रैक-पैंट उतार दी। उसका लंड किसी अजगर की तरह फनकार मार रहा था। मैंने उसका सुपड़ा मुंह में लिया और आंख बंद करके चाटने लगी। ध्रुव भी आंख बंद करके मस्त सिसकियां ले रहा था। उसने देखा कि अब लोग ऑफिस से घर जाने लगे थे, और अपनी कार की तरफ आ रहे थे।

ध्रुव ने मेरे बालों को एक हाथ में भर लिया और दूसरे हाथ को मेरी ठोड़ी के नीचे रख दिया। मेरा पूरा सर उसके कंट्रोल में था, और अब उसने तबादला करके मेरे मुंह की चुदाई शुरू कर दी। उसका लंड मशीन की तरह अंदर-बाहर हो रहा‌ था, और मेरे मुंह से लार टपक रही थी। करीब 2 मिनट के बाद वो अचानक से रुक गया।

उसने मुझे सीधा किया, और मेरी जींस को घुटनों के नीचे कर दिया। अब मैं आधा शरीर लेके सीट पे थी। ध्रुव मेरे पीछे था। अचानक से उसने लंड मेरी गांड में डालने की कोशिश की। मैंने हाथ पीछे करके उसको मना किया। फिर ध्रुव बोला, “हमने इतना सेक्स कर लिया है अब तो देदो”। फिर उसने मेरी चूत में लंड घुसा दिया। वक्त कम होने के कारण उसने मुझे काफी तेज़ चोदा। बिना लंड निकाले उसने मुझे अपने ऊपर काउगर्ल पोजीशन में ले लिया‌। मैं भूल-भुलैया से उछल-उछल के चुदने लगी।

करीब 4 मिनट तक चुदने के बाद ध्रुव सीट पे लेट गया। उसके पैर नीचे थे और मैं उसके ऊपर थी। उसने मेरे पैरों को अपनी जांघो के दाए-बाए रखा। अब सीधा मैं उसके लंड पे थी। बिना सपोर्ट के ध्रुव ने पहले धीरे से स्टार्ट किया, फिर उसने काफी तेज़ रफ़्तार से चूत मारी। उसका लंड मेरी चूत में अंदर तक घिस रहा था। पूरी कार हिल रही थी चट चट चट चट चट की आवाज़ पूरी कार में थी।

करीब 3 मिनट के बाद उसने आनन-फानन में अपना लंड निकाला, और मैं नीचे बैठ गई। तुरन्त मैंने उसका पूरा लंड मुंह में ले लिया, और चुनने के बाद कुछ सेकंड में उसने मेरे मुंह को भर दिया। मैं उसका पूरा माल गटक गयी। तुरन्त हमने टिशू से खुद को साफ किया।

मैंने मोबाइल कैमरे में देखा कि मेरे गले में लाल निशान और बूब्स भी लाल हो गए थे। फिर मैंने कपड़े पहने और बाल ठीक करके कार से निकल गई। ध्रुव ने मुझे गले लगाया और संतुष्टि भरी नजरों से देख रहा था। मेरे चेहरे पे घमासन चुदाई साफ़ दिख रही थी। मैं अपने डेस्क पर गई और घर के लिए निकल गई।

ऑफिस से निकलते ही ध्रुव और मेरे दोस्त आ गए अपनी कार से, और मुझे घर तक ड्रॉप करने का ऑफर दिया। मैं पीछे की सीट पर बैठ गई। हमने थोड़ी बातें की, पर ध्रुव की नजरें मुझ पर टिकी थी। इस बार ध्रुव ने मुझे पहले ड्रॉप किया। मैं घर पहुँच गई।

मैंने नोटिस किया कि मेरे बूब्स और भी बड़े हो गए थे। गांड भी गोल या उभरी हुई दिखती थी। ध्रुव मुझे गुदा मैथुन के लिए बहुत बार बोल चुका था। मैं सोच के जोश में आ जाती थी कि कितना दर्द होगा जब मैं उसका लंड अपने गांड में लूंगी। पिछले 3 महीनों से मेरे और ध्रुव के बीच सेक्स हो रहा था। कभी होटल में, कभी उसकी कार में, कभी मूवी थियेटर में,‌ एक बार तो उसने मुझे थिएटर में पूरी नंगी करके छोड़ा था। खैर वहां हमारे अलावा सिर्फ एक और जोड़ी थी।

कभी-कभी वो मेरे घर के पास आकर कॉल करता। मैं किसी तरह घर से निकलती या समय की पाबंदी के कारण सिर्फ ब्लोजॉब दे पाती। हर सप्ताहांत हम दोनों जम के सेक्स करते हैं। मैं घर में ऑफिस में अतिरिक्त काम होने का बहाना बनाती, और पूरे 8-9 घंटे ध्रुव के साथ बिताती। इस बीच हमलोग 4-5 राउंड जम के सेक्स करते कभी होटल के कमरे में, कभी बाथरूम में, कभी बालकनी में।

एक बार मेरे माता-पिता दादा जी की तबीयत खराब होने के कारण मुंबई चले गए। घर पे कोई नहीं था, सिर्फ मैं अकेली बच गयी थी। ये बात मेरे बॉयफ्रेंड को पता थी। वो मुझसे वीडियो कॉल पर बात करते रहता था। इस बीच ध्रुव भी व्यस्त था। मेरे माता-पिता को गए हुए लगभग 9 दिन हो गए। वो अगले सप्ताह लौटने वाले थे।बहुत दिनों से मेरी चुदाई नी हुई थी, बस वीडियो कॉल पर बॉयफ्रेंड के सामने उंगली कर पाती थी। मैंने ध्रुव को अपने घर आने के लिए कहा। किसी तरह उसने टाइम निकाला और मुझे मेरे ऑफिस से डायरेक्ट पिक करते हुए मेरे घर आ गया।

उसने मुझे कॉल पे ही बोल दिया था कि वो घर पे दोस्तों के साथ ट्रिप पर जा रहा था ऐसा बोल के आ रहा था, तो वो दो दिन तक मेरे घर पे ही होगा। उसने मेरे दोस्त को भी यही बातें बोली। मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली, कि मैं अपने दादा जी को देखने जा रही थी। मैं समझ गई थी कि मेरी ढाई दिन तक चुदाई होगी, और मैं मन ही मन गांड मरवाने के लिए भी राजी हो गई थी।

ध्रुव ने हम दोनों को पिक कर लिया था। उसने पहले मेरे दोस्त को ड्रॉप किया, और उससे बोला कि वो मुझे ड्रॉप करके ठीक अपने दोस्त के पास जाएगा, और मैंने अपने दोस्त को बोला कि मेरी फ्लाइट रात की थी, तो मैं अब 3-4 दिन के बाद मिलूंगी। ये बोल कर हमने एक-दूसरे को बाय किया। अब ध्रुव ने मेरे घर के सामने अपनी कार पार्क करी। पहले मैं निकली और घर के अंदर गई। थोड़ी देर बाद ध्रुव अंदर आ गया। तांकि दूसरों को पता ना चले।

इससे आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा।

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