पिछला भाग पढ़े:- कजिन सिस्टर के साथ हस्बैंड स्वैपिंग-१७
हेलो दोस्तों, कैसे हो आप सब? सब बढ़िया न? आशा करती हु मेरी स्टोरीज आपके लुंड और चुत को पसंद आ रही होंगी. अब ज़्यादा टाइम न वेस्ट करते हुए सीधे स्टोरी पे आते है.
लास्ट पार्ट में आपने पढ़ा कि हम दोनों कपल्स ने पार्टनर एक्सचेंज करके एक-दुसरे के सामने चुदाई की. मतलब मैं चूड़ी आकाश जीजू से और अंकिता चूड़ी दीपक से, वो भी एक-दुसरे के सामने. चूत और गांड की चुदाई करके हम सब थक गए और वहीँ लेट गए. अब आगे-
कुछ देर बाद अंकिता मेरे और जीजू के पास आके लेट गयी. फिर बोलने लगी-
अंकिता: आकाश मेरी एक फंतासी है. क्या मैं आज वो पूरी कर सकती हु?
आकाश जीजू: क्यों नहीं डार्लिंग, जो भी फंतासी हो पूरी कर लो, इसमें पूछने की क्या ज़रुरत है.
अंकिता: उस फंतासी के लिए मुझे तुम दोनों की परमिशन चाहिए.
में: ऐसी क्या फंतासी है, जिसमे मेरी भी परमिशन चाहिए?
दीपक: कुछ तो अलग रहा है, बताओ न ऐसी क्या फंतासी है?
आकाश जीजू: हां डार्लिंग बताओ न क्या फंतासी है?
अंकिता: मुझे न दोनों से साथ में छोड़ना है.
में: दोनों से साथ में मतलब, थ्रीसम करना है?
दीपक: वाह, इसमें तो मज़ा आएगा.
आकाश जीजू: उसमे क्या है, ये तो हम करने ही वाले थे.
अंकिता: तुम लोग समझे तो हो न में क्या बोल रही हू?
दीपक: हां यार, उसमे न समझने वाली बात क्या है? एक तुम्हारी चूत छोड़ेगा और दूसरा मुह छोड़ेगा.
आकाश जीजू: और मनीषा क्या करेगी, वो सिर्फ देखेगी?
में: मैं इसके बोओब्स चूसूंगी न.
अंकिता: अरे यार, तुम लोग समझे नहीं. मैं अलग थ्रीसोमे की बात कर रही हु.
दीपक: ाचा, थ्रीसम और भी टाइप के होते है क्या?
में: अब क्लियर बता तुझे करना क्या है?
आकाश जीजू: हां डार्लिंग, बताओ न?
अंकिता: मुझे दोनों लुंड एक साथ चाहिए.
में: पागल है क्या? दो लंड एक साथ चुत में लेगी तो छूट के चीथड़े उड़ जायेंगे तेरे.
दीपक: हां और २ लुंड एकसाथ जायेंगे भी मुश्किल से.
अंकिता: अरे बाबा दोनों चुत में नहीं. एक चोट में और दूसरा गांड में, पर दोनों जगह एक साथ.
आकाश जीजू: अरे हां, ये तुम्हारी फंतासी काफी दिनों से थी. तुमने बताया था मुझे की तुम्हे दोनों छेद में एक साथ लुंड लेने है.
में: पर तू दोनों जगह एक साथ झेल पायेगी न?
अंकिता: पता नहीं, पर करना तो है.
दीपक: मज़ा आएगा ऐसे सैंडविच चुड़ै में.
में: ठीक है फिर कर लो अपनी फंतासी पूरी.
आकाश जीजू: हां आज तुम्हारी ये फंतासी भी पूरी कर ही देते है.
फिर हम सब उठे और बैडरूम में गए. जीजू लेट गए बेड पे और अंकिता उनके ऊपर लेट गयी. अंकिता ने जिजु का लंड अपनी चूत पे सेट किया और एक ही झटके में पूरा अंदर ले लिया. फिर अंकिता ने दीपक को इशारा किया कि आ जाओ मेरे ऊपर. फिर दीपक अंकिता के ऊपर चढ़ गया और अपना लंड अंकिता की गांड पे रख के एक झटका मारा और पूरा लंड अंकिता की गांड में उतार दिया.
अब अंकिता दोनों के बीच में थी. दीपक ने अंकिता की गांड में अपना लंड अंदर-बाहर करना स्टार्ट किया. अंकिता भी ऊपर नीचे होक जिजु का लंड अपनी चूत में ले रही थी और नीचे से जिजु अपनी गांड ऊपर-नीचे करके अंकिता को छोड़ रहे थे. अंकिता की सैंडविच चुदाई स्टार्ट हो गयी थी.
मैं ये सब देख के अपनी चूत सहला रही थी और अंकिता को चीयर भी कर रही थी. अंकिता के चेहरे पे थोड़ा दर्द दिख रहा था. उसके दोनों छेदों की चुदाई एक साथ हो रही थी. जैसे-जैसे दोनों लुंड उसके अंदर जाते, उसके मुँह से सिसकियां निकल रही थी. दीपक और आकाश जीजू के गोटे भी शायद एक-दुसरे से टकरा रहे थे. जीजू बेचारे दोनों के नीचे थे, तो वो नीचे से उतना ज़ोर नहीं लगा पा रहे थे.
जब दीपक गाँड से लुंड थोड़ा बाहर निकलता, तब अंकिता भी थोड़ी ऊपर होती और उसकी चूत से भी लुंड थोड़ा बाहर आता, और तभी जीजू नीचे से धक्का मार के लुंड फिर से चूत में डाल देते.
कुछ देर बाद तीनों उठ गए और जीजू बेड के किनारे बैठ गए. फिर अंकिता को अपनी गोद में बिठाया और इस बार जीजू ने अपना लंड अंकिता की गांड में डाल दिया. दीपक आया और अंकिता के दोनों पैर अपनी कमर के दोनों तरफ किये, और अपना लंड अंकिता की चूत पे रखा. फिर दीपक ने अपना लंड सीधे अंकिता की चूत में पेल दिया. फिर से नयी पोजीशन में अंकिता के दोनों छेदों की चुदाई एक साथ होने लगी. अंकिता के चेहरे पे दर्द के साथ-साथ एक ख़ुशी भी साफ़ दिख रही थी. उसकी फंतासी जो पूरी हो रही थी.
अब दोनों मर्दों ने अपनी स्पीड बढ़ानी स्टार्ट कर दी. नीचे से जिजु फुल स्पीड में अंकिता की गांड मार रहे थे और ऊपर से दीपक मशीन की तरह अंकिता की चूत चोद रहा था. डबल स्पीड से दोहरी चुड़ै अब अंकिता से शायद सेहन नहीं हो रही थी. उसकी चूत ने तो अपना पानी कब का निकाल दिया था. अब वो उन्हें रुकने को बोलने लगी.
पर दोनों मर्दों का रुकना अब शायद इम्पॉसिबल था. ऊपर से मैं भी दोनों मर्दों को बोल रही थी, की इसे ही छुड़ना था दोनों लुंड से एक साथ, अब रुकना मत और इसकी छूट और गांड को फाड़ के रख दो. मेरे उकसाने से दोनों मर्दों को और जोश आ रहा था और वो ज्यादा स्पीड में छोड़ने लगे.
थोड़ी देर में अंकिता को भी मजा आने लगा और वो आहें भरने लगी. उसने मुझे अपने पास बुलाया और उसके बूब्स मेरे सामने कर दिए. मैंने भी सीधे अपना मुँह उसके बूब्स पे लगा दिया और उसका निप्पल चूसने लगी. मैं अंकिता का एक बूब मसल रही थी और दूसरा चूस रही थी. अंकिता की ाहें बढ़ने लगी. शायद वो फिर से झाड़ने वाली थी. दीपक और आकाश जिजु की स्पीड भी बढ़ गयी थी और मैं उन तीनों के पास कड़ी उन्हें देखते हुए अंकिता के बूब्स से खेल रही थी.
थोड़ी ही देर में अंकिता चिल्लाते हुए झड़ गयी. उसके कुछ देर बाद ही आकाश जीजू ने भी उसकी गांड में आखरी धक्का मारा और वो भी उसकी गांड में ही झड़ गए. दीपक अभी भी लगा हुआ था और फुल स्पीड में अंकिता की चूत चोद रहा था. फिर दीपक ने भी स्पीड बढ़ा दी और पूछा की कहा निकलू, तो अंकिता बोली की आप भी भर दो मेरी चूत. दीपक ने भी आखरी कुछ धक्के अंदर तक मारे और अंकिता की चूत में ही सारा पानी निकाल दिया.
फिर हम सब वहीँ बैठ गए और एक-दुसरे को देख रहे थे. फिर मैंने अंकिता से पुछा-
में: तो कैसा लगा अंकिता २ लुंड से एक साथ छोड़ने में?
अंकिता: क्या बताऊं यार, पहले थोड़ा दर्द हुआ, पर बाद में जो मज़ा आया वो में बता नहीं सकती.
में: हां वो तो तेरे चेहरे पे दिख रहा है.
दीपक: सच में यार, मज़ा ही आ गया.
आकाश जीजू: अंकिता एट लास्ट तुम्हारी फंतासी पूरी हो ही गयी.
अंकिता: थैंक्स तो आल ऑफ़ यू फॉर थिस वंडरफुल एक्सपीरियंस.
हम सब साथ में: वेलकम डिअर.
अंकिता: मनीषा तुझे भी ये एक्सपीरियंस करना चाहिए.
में: ना बाबा, तुझे देखा था कैसे तड़प रही थी तू पहले. मुझमे तो इतनी हिम्मत नहीं, मैं तो १ लुंड से ही खुश हु.
दीपक: यार पर बाद में देखा न कितने मज़े से चुद रही थी ये. तुम भी थोड़ी हिम्मत करो, ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा?
में: आज तो नहीं, नेक्स्ट टाइम देखेंगे.
आकाश जीजू: कोई फाॅर्स मत करो यार. हम यहाँ एन्जॉय करने मिले है, तो बस एन्जॉय करो.
में: थैंक्स जीजू.
दीपक: चलो ठीक है.
अंकिता पूरी तरह थक गयी थी तो वो बोली कि अब मैं थोड़ी देर रेस्ट ही करुँगी. पर मैं उन लोगों की चुड़ै देख के गरम हो गयी थी. तो मैं सीधे दीपक के पास गयी और उसका लंड चूसने लग गयी. दीपक हसने लगा और बोला की ये हुई न बात और वो एन्जॉय करने लगा.
हमें देख के आकाश जीजू भी मेरे पैरों के बीच में आये और मेरी चूत चाटने लगे. उन दोनों के लुंड थोड़ी ही देर में फिर से कड़क हो गए. फिर जीजू ने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना मोटा लुंड मेरी गांड में डाल दिया. फिर दीपक उठा और उसने अपना लम्बा लुंड मेरे मुँह में डाल दिया.
अब मैं भी २ लुंड से एक साथ मज़े ले रही थी एक मुह में और दूसरा गांड में. अंकिता देख के मुस्कुरा रही थी और बोली कि तुने भी २ लुंड का मजा ले ही लिया. मैं भी हसने लगी. जीजू का लुंड गांड में अंदर तक जा रहा था और दीपक भी मेरे गले तक अपना लंड घुसा रहा था. दोनों बड़े मज़े से मेरा मुंह और मेरी गांड छोड़ रहे थे.
फिर कुछ देर बाद दीपक ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और अपना लंड मेरी गांड में पूरा पेल दिया. फिर नीचे से धक्का देके मेरी गांड मारने लगा. जीजू भी पास आये और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. उनका लंड मोटा था तो मेरा पूरा मुह उनके लुंड से भर गया था.
फिर मैंने बोला कि यार तुम लोग मेरी गांड ही मार रहे हो कब से, मेरी चूत भी तो प्यासी है. ये सुन के ांकिता जीजू के पैरों के बीच से मेरे पास आई और सीधे मेरी चूत चाटने लगी. अब मैं सातवें आसमान पे थी. गांड में दीपक का लुंड तबाही मचा रहा था. मुह मेरा लॉक कर दिया था जीजू ने अपने मोठे लुंड से, और चुत में अंकिता की टंग अंदर तक जा कर मुझे झड़ने पे मजबूर कर रही थी.
मैं ज़्यादा सहन नहीं कर पाई, और कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी की बौछार कर दी, जिसे अंकिता पूरा पी गयी. कुछ देर बाद दीपक भी मेरी गांड में ही झड़ गया. जीजू अब भी मेरा मोह छोड़ रहे थे. फिर मैंने जिजु को बोला की अब मेरी चूत में डाल दो अपना लंड. दीपक का लुंड सिकुड़ गया था पर अब भी मैं उसकी गोद में ही बैठी थी और उसका लंड मेरी गांड में ही था.
उसी पोजीशन में जीजू ने मेरे लेग्स ऊपर किये और दाल दिया अपना लंड मेरी चूत में. जीजू फुल स्पीड में मेरी चूत छोड़ने लग गए. अंकिता मुझे किस करने लगी और साथ में मेरे बूब्स भी मसल रही थी.
जीजू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे और वो मुझे छोडे ही जा रहे थे. उनका मोटा लंड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था. दीपक का लुंड अभी भी मुझे मेरी गांड में फील हो रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दीपक का लुंड फिर से टाइट हो रहा था. मैंने पीछे मुड़ के दीपक को देखा तो वो हसने लगा. अब मुझे डर लगने लगा कि कहीं ये दोनों एक साथ छोड़ने न लगे, पर एक अलग एहसास और एक्ससिटेमेंट भी हो रही थी.
कुछ ही देर में दीपक का लुंड मुझे मेरी गांड में अंदर तक फील होने लगा. मतलब उसका लुंड फिर से रेडी हो गया था. दीपक और जीजू में कुछ इशारा हुआ और जीजू रुक गए. उनका लंड मेरी चूत में ही था पर कुछ मूवमेंट नहीं थी. अब दोनों के लंड मेरी चूत और गांड में थे, पर बस रुके हुए. अंकिता मुझे किस करने लगी और मेरे बूब्स से खेलने लगी. फिर वो मेरे बूब्स चूसने लगी. उसकी इस हरकत से में और भी गरम हो गयी. फिर आकाश जिजु बोले-
आकाश जीजू: परमिशन है क्या दोनों को?
मैं एक-दम साइलेंस, बस जीजू को देख रही थी.
आकाश जीजू: तुम चाहो तो दोनों के साथ एन्जॉय करो, या किसी एक को ना बोलो वो अपना लुंड निकाल देगा. अब सब तुम्हारे ऊपर है
अब मुझे छोड़ना भी था और डर भी लग रहा था, एक अजीब सी उलझन में थी मैं. तभी अंकिता मेरे कान के पास आयी और धीरे से बोली-
अंकिता: देख तुझे छुड़ना है दो लुंड से ये मुझे पता है, और ऐसा मौका फिर मिलेगा भी नहीं. तो ज़्यादा सोच मत और हां बोल. ये एक्सपीरियंस तू ज़िन्दगी भर याद रखेगी ये मेरी गारंटी है.
दीपक: यार जल्दी बोलो, सब तुम्हारे आंसर का वेट कर रहे है. अगर तुम्हे नहीं करना है तो बोलो मैं हट जाता हु.
अब मैंने भी सोचा कि यार अब पीछे नहीं हटना. अब ये एक्सपीरियंस भी ले ही लेती हूं और अब अगर में मन करती, तो दीपक और आकाश जीजू को हर्ट भी होता. और अंदर से मुझे भी करना ही था, तो मैंने बोला-
में: कर लो जो करना है, पर धीरे से. जंगली मत बन जाना दोनों.
आकाश जीजू: तुम टेंशन मत लो, बड़े प्यार से छोड़ेंगे हम दोनों. तुम ये बहुत एन्जॉय करोगी.
दीपक: हां डार्लिंग, तुम बस एन्जॉय करो.
अंकिता: चलो अब शुरू हो जाओ दोनों.
पहले दीपक का झटका पड़ा मेरी गांड में और उसने अपना लंड अंदर-बाहर करना स्टार्ट किया. फिर जीजू ने भी मेरी चूत छोडना स्टार्ट किया. दोनों धीरे-धीरे छोड़ रहे थे. और मैं तो पता नहीं कहाँ थी. ये एक्सपीरियंस कुछ अलग ही था. दोनों लुंड मेरे दोनों छेदों में अंदर तक जा रहे थे. कुछ देर बाद दोनों ने अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ाई तो मुझे थोड़ा दर्द का एहसास हुआ. पर अब में पीछे हट नहीं सकती थी. अंकिता फिर से मेरे बूब्स चूसने लगी और मेरी बॉडी भी सहला रही थी.
अब मुझे दर्द के साथ मज़ा भी आने लगा. दोनों मर्द कोई जल्दबाजी नहीं कर रहे थे. वो इतनी ही स्पीड में मेरे दोनों छेद छोड़ रहे थे, जितने में मुझे ज़्यादा दर्द भी न हो और मजा भी आये. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा पूरा शरीर लुंड से भर गया है.
वो एहसास कुछ अलग ही था. अब मैंने खुद ही उन्हें बोलै की स्पीड बढ़ाओ और फाड़ दो मेरी चूत और गांड. ये सुनते ही दोनों मर्दों का जोश डबल हो गया और वो दोनों डबल स्पीड में छोड़ने लगे.
मेरे मुँह से चीखें निकल रही थी क्यूंकि अब दर्द बढ़ने लगा था. तभी अंकिता ने अपनी टंग मेरे मुँह में डाल दी और मेरी चीखें बंद कर दी. दोनों मर्द अपने अपने लुंड से मेरी गांड और चूत का बैंड बजा रहे थे. अब तो मुझे भी जोष चढ़ गया था और मैं खुद ही अपनी कमर हिला के उनका लुंड अपने अन्दर ले रही थी.
सच में ये एक्सपीरियंस मेरी लाइफ का बेस्ट एक्सपीरियंस था अब तक का. मैं दूसरी बार झाड़ने वाली थी. मैंने उन्हें बोला की अब फाइनल कर ही दो मेरा. फिर दोनों ने अपनी तूफ़ानी स्पीड से मेरी चूत और गांड का भुर्ता बना दिया और कुछ ही देर में मेरी चूत ने ढेर सारा अमृत बहा दिया.
अब मैंने दोनों मर्दों को बोला की मुझे दोनों के लुंड का पानी एक साथ पीना है. तो दोनों मर्दों ने कुछ धक्के और लगाये मेरी चूत और गांड में फिर दोनों ने अपना लंड निकाल दिया. दीपक ने मुझे अपनी गोद से उठाया और वो भी मेरे आगे आ गया. अब मैं घूटने पे बैठी थी और दीपक और जीजू अपना लंड लिए मेरे आगे खड़े थे.
मैंने उन दोनों का लंड पकड़ लिया और ज़ोर-जोर से हिलने लगी. अंकिता मेरे पीछे आ गयी और पीछे से मेरे बूब्स मसलने लगी. फिर कुछ ही देर में दोनों मर्दों के लुंड ने हार मान ली और अपना सारा पानी मेरे मुँह में ही डाल दिया. कुछ पानी मेरे मुह पे यहाँ-वहाँ गिरा, वो अंकिता ने चाट के साफ़ कर दिया. मेरे मुँह में दोनों लुंड से निकला हुआ मिक्स पानी भरा था जिसे में सारा पी गयी. फिर दोनों मर्दों के लुंड भी चाट के साफ़ कर दिए.
अब हम सब वहीँ लेट गए और बातें करने लगे. सब ने काफी एन्जॉय किया था. फिर कुछ देर बाद हम सब ने कपडे पहन लिए और कुछ नाश्ता किया. हमने डीडे किया की जब भी हमें लगेगा कि हमारे पार्टनर के साथ हमें बोर लग रहा है, तो हम फिर से ऐसी स्वैपिंग करेंगे. और फिर हम अंकिता और जीजू को हग करके बाय किया और अपने घर आ गए. तो इस तरह हमारी स्वैपिंग यादगार बन गयी.
मेरी स्वैपिंग स्टोरी अब यहीं खत्म होती है. आप लोगों को मेरी स्टोरी कैसी लगी अपना फीडबैक मेल के ज़रिये ज़रूर बताइएगा. मैं फिर से आउंगी कोई नयी स्टोरी लेके, तब तक आप अपना प्यार देते रहिएगा. और फ्रेंड्स प्लीज आप लोग नंबर या पिक्स मत माँगिएगा. आप लोग समझ सकते है प्राइवेसी.
आप मुझे मेल पे या ग-छत पे मैसेज कर सकते है. मैं तरय करुँगी सब को रिप्लाई करने का. हां बूत कोई फ़ालतू बातें न करे प्लीज.
तो फ्रेंड्स टाटा, बाई-बाई, अलविदा, जल्द मिलेंगे कोई नयी इंटरेस्टिंग स्टोरी के साथ. तब तक मुझे दुआओं में और ख्वाबों में याद रखना.
माय ईमेल ईद : मनीषजैं३९९१@जीमेल.कॉम