नमस्ते दोस्तों..! तो भाइयों से चूड़ने और उनका सारा कम अपने अंदर लेकर मैं और रीमा घर वापस आए. मेरी हालत किसी चूड़ी हुई कुटिया की तरह हो गयी थी. पूरा मेकप उतरा हुआ था, और बाल बिखरे हुए थे. तभी चाची मेरे पास आई और बोली-
चाची: हाए सीमा, ये क्या हुआ तुझे? गयी तो साज-सॉवॅर के थी, और वापस इस तरह से आई है.
समीर भैया: कुछ नही मा… पार्क में खेलते हुए गिर गयी थी.
मैं बिना कुछ बोले रूम में चली गयी. पापा हमारी हालत देख कर समझ गये थे की हमारे साथ क्या हुआ था. वो मेरे पीछे-पीछे रूम में आ गये.
पापा (मुस्कुराते हुए): क्यूँ रे रंडी… आ गयी भाइयों से चुड कर? चल जल्दी नहा के आ, मेरे लंड में भी खुजली हो रही है.
मैं बातरूम में नहाने चली गयी. जब मैने अपने कपड़े उतारे और खुद को शीशे में देखा, तो मेरे शरीर पे चुदाई के दाग जगह-जगह थे. अब तो मुझे याद भी नही था की कौन से दाग किसके दिए हुए थे. मेरी छूट से अपनी भी भाइयों का कम तपाक रहा था. मैने उसे सॉफ किया और फिर नहा कर टवल लपेट कर बाहर आई. पापा वहीं बैठे फोन चला रहे थे.
मे: पापा मुझे आपको कुछ बताना था.
पापा: बोल रंडी…
मे (डरते हुए): पापा… आज जब भैया ने मुझे खेत में ले जेया कर छोड़ा.
पापा: तो उसमे कौन सी बड़ी बात है? तू घर की रंडी है. तेरा काम ही है चूड़ना और हमे मज़ा देना.
मे: हा पापा… मगर वो लोग मुझसे बच्चा चाहते है. आज तीनो ने मुझे खेत में ले जेया कर छोड़ा और सारा पानी मेरे अंदर मेरी छूट में ही गिराया. और उन्होने मुझे ई-पिल लेने से भी माना किया है.
पापा ये सुन कर आग बाबूला हो गये. पापा आ कर मेरे गले तो पकड़ कर ज़ोर से दबाने लगे. मुझे बिल्कुल साँस नही आ रही थी. मेरा पूरा सेहरा लाल हो गया.
मे: पापा मैने माना किया था उन्हे. मगर उन्होने मेरी बात नही सुनी.
फिर पापा ने मुझे ज़मीन पर पटक दिया और कमरे से चले गये. तब जाके मेरी साँस में साँस आई. मैं इतना तक चुकी थी, की मैं फ्लोर पर ही सो गयी. मेरी नींद पापा के कॉल से खुली. पापा के 2 मिस्ड कॉल थे. मैं जल्दी से उठ कर कॉल पिक किया.
पापा: कहाँ मॅर गयी थी रंडी?
मे: पापा वो मेरी आँख लग गयी थी.
पापा: जल्दी कोठी पे आ.
मैं समझ चुकी थी की कोठी पर फिर सब मेरी चुदाई करेंगे. मैं पिछली रात से बस चुड ही रही थी. पहले पुर रास्ते पापा कार में छोड़ते हुए लाए. फिर भाइयों ने खेत में ले जेया कर छोड़ा. अब फिर ना जाने कोठी पे कितने लोग होंगे. मेरी छूट सूज कर गुलाबी हो गयी थी. मेरा पूरा बदन टूट रहा था. नींद भी बहुत ज़ोरो की आ रही थी. मगर मेरी ये छूट ना जाने क्यूँ फिर गीली होने लगी थी.
मैने कपड़े पहले और कोठी पहुँची. कोठी पे पापा, बड़े चाचा, छ्होटे चाचा, और पापा के एक दोस्त श्याम अंकल थे. सब बैठ कर वहीं दारू पी रहे थे. मैने अंदर गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया, और सिर झुका कर वहीं खड़ी थी.
बारे चाचा: ये देख श्याम हमारे घर की नयी रंडी. रीमा के बाद अब इसकी बारी है.
तब मुझे पता लगा की रीमा मुझसे पहले इनसे चुड कर जेया चुकी थी. मैं मॅन ही मॅन में खुश थी की शायद इनकी ताक़त रीमा पर खर्च हो चुकी है तो अब शायद मेरे साथ ज़्यादा रफ ना करे. मगर मैं बहुत ग़लत थी.
तभी पापा ने अपनी बेल्ट उतरी और मेरे गले में कुत्ते के पत्ते की तरह पहना दी. मैं कपड़े उतार ही रही थी की पापा ने मेरे सूट को पकड़ के फाड़ दिया. पापा इतने गुस्से में थे की सूट के साथ-साथ मेरी ब्रा भी फाड़ दी. मैने खुद ही पाजामे को उतार दिया नही तो वो ये भी फाड़ देते.
फिर पापा ने मेरी बेल्ट को टाइट किया. पहले तो ग्रिप इतनी टाइट नही थी, मगर फिर धीरे-धीरे कॉलर का ग्रिप बहुत टाइट हो गया. मेरा फेस लाल हो रहा था.
फिर पापा ने मुझे घोड़ी बनने को कहा. मैं वैसे ही गले में बेल्ट का पत्ता लिए घोड़ी बन गयी. फिर श्याम अंकल उठ कर आए और मेरी खुली छूट को फैला कर देखने लगे. सुबा की चुदाई के बाद मेरी गांद का च्छेद भी अभी तक फैला हुआ था, और छूट तो ढीली पद ही गयी थी.
श्याम अंकल: आप ठीक कह रहे थे भैया. आप लोगों ने बहुत छोड़ा है इसे. छूट सूजी पड़ी है मगर फिर भी ढीली है. गांद का तो भोंसड़ा बन गया है.
बड़े चाचा: ये रंडी बाहर भी मूह मार्टी थी. इसीलिए हमने घर में ही इसकी गर्मी उतार दी. पर बिल्कुल तगड़ी माल है, जो चाहो कर लो इसके साथ. माना नही करती.
ये सब सुन कर मुझे बुरा तो लग रहा था, मगर मेरी छूट भी गीली हो रही थी. तभी बड़े चाचा उठे और उन्होने अपनी बेल्ट निकली. फिर मेरी गांद पे एक ज़ोर की बेल्ट मारी. मैं दर्द से मचल उठी. मैं चीखना चाहती थी, मगर पापा ने मेरे गले में इतनी ज़ोर का पत्ता बाँधा था की साँस भी मुस्किल से ले पा रही थी.
चाचा वहीं नही रुके. उन्होने बेल्ट से ज़ोर-ज़ोर से मेरी गांद और पीठ पर मारना शुरू किया. मैं वहीं घोड़ी बन कर मार सहती रही.
चाचा को देख कर छ्होटे चाचा और श्याम अंकल भी शुरू हो गये. सब ने बेल्ट लेकर मेरी पिटाई शुरू की. उन लोगों ने मार-मार कर मेरी गांद नीली कर दी.
पापा (हेस्ट हुए): तो श्याम, कैसी लगी हमारी रॅंड?
श्याम: रंडी तो कड़क है.
पापा: हा रंडी बनने का शौंक है इसे.
श्याम अंकल: हा इसकी तो गांद तक खुल गयी है.
मैं चुप-छाप घोड़ी बन पड़ी थी. श्याम अंकल ने फिर सामने पड़ी तेल की शीशी ली, और अपने हाथो में लगाया. पहले तो उन्होने 2 उंगलियाँ मेरी गांद में डाली. मुझे इतना कुछ ख़ास पता नही चला, मगर धीरे-धीरे उन्होने पाँचो उंगलियाँ मेरी गांद में डाल दी.
मैं समझ चुकी थी की वो क्या करना चाहते थे. मैने भी खुद को रेडी कर लिया था. देखते-देखते श्याम अंकल ने पूरी मुट्ठी मेरी गांद में डाल दी. और वो अंदर जाते जेया रहे थे. उनकी गांद मुझे अंदर कमर तक महसूस हो रही थी. फिर उन्होने मुझे अपने हाथ से छोड़ना शुरू किया.
मे: अंकल प्लीज़ आराम से… बहुत दर्द हो रहा है.
इतने में छ्होटे चाचा दोबारा से गुस्से से उठे, और मेरी पीठ पर बेल्ट मारी.
छ्होटे चाचा: चुप साली रांड़. सब पता है हमे कितना दर्द हो रहा है तुझे. नाटक मत कर.
श्याम अंकल कहा रुकने वाले थे. वो अपने हाथ से मेरी गांद में अंदर-बाहर करते रहे. मेरी छूट और गीली हो कर पानी टपकाने लगी. जब फाइनली उन्होने हाथ बाहर निकाला, तो मेरी गांद का च्छेद पूरी तरह से फैल गया था.
चाचा ने मज़ाक करते हुए उसी च्छेद में पानी की बॉटल डाल दी, और वो भी आराम से चली गयी.
छ्होटे चाचा: देखो कुटिया की पूंछ निकल आई है.
तभी बड़े चाचा मेरे सामने आ कर बैठ गये, और पापा के हाथ से उन्होने बेल्ट लेकर खुद पकड़ लिया, और बेल्ट को और टाइट कर दिया.
बड़े चाचा: चल साली रंडी, लंड चूस. यहीं तेरा गिफ्ट है.
मैने उनकी पंत की ज़िप खोली, और उनके लंड को बाहर निकाला. मुझे साँस बहुत कम आ रही थी. मगर मुझे पता था की अगर मैं कुछ बोलूँगी, तो चाचा और टाइट कर देंगे. मैं वैसे ही उनका लंड चूसने लगी. उनका लंड चूस्टे वक़्त चाचा मेरे फेस पर छानते भी मारे जेया रहे थे.
मे: उग्गघह…. उघह…अवव्वकक… अवववव्वककक… अवववव्वककक
मैं कोई ग़लती नही करना चाहती थी, नही तो और मार पड़ती, और चुदाई और रफ होती. इसीलिए मैं बहुत शिद्दत से लंड चूस रही थी.
तभी श्याम अंकल ने मेरी गांद से बॉटल को निकाला, और उसी च्छेद में लंड डाल कर मूतने लगे. उनकी पेशाब से मेरी पूरी गांद भर गयी. जैसे ही मेरी गांद थोड़ी सी टाइट हुई, अंकल मेरी गांद को छोड़ने लगे.
मेरी गांद इतनी फैल गयी थी की लंड महसूस ही नही हो रहा था. तभी पापा ने भी अपना लंड मेरी गांद में डाल दिया. दोनो मिल कर साथ में मेरी गांद को छोड़ने लगे. तभी छ्होटे चाचा भी अपना लंड लेकर मेरी छूट में डाल दिया.
इस वक़्त मेरी गांद में दो लंड, छूट में एक और मूह में एक लंड था. चारो के चारो कोई कमी नही छ्चोढ़ रहे थे. जितना हो सकते लंड उतना अंदर तक डाल कर छोड़ रहे थे. सब ने इन तरह से ग्रिप बनाई थी, की मैं हिल तक नही पा रही थी.
ऐसे ही कुछ देर तक मेरी चुदाई करने के बाद उन्होने मुझे सीधा लिटा दिया, और फिर श्याम अंकल मेरी छूट छोड़ना शुरू किए. सच बोलू तो चार लंड एक साथ लेने के बाद सिर्फ़ एक लंड लेना राहत की ही बात थी. अंकल ने मेरी दोनो टाँगें अपने कंधे पर रखी, और मेरी छूट में ज़ोर-ज़ोर के शॉट लगाने लगे.
मेरी छूट खुद ही झड़ने लगी और मैं मोन करने लगी. उपर से अंकल मेरे दोनो निपल को पकड़ कर मसालने लगे, और मूह में लेकर चूसने लगे. पापा और चाचा सब बैठ कर देख रहे थे. पापा की आँखों में अभी भी गुस्सा था. जब अंकल का मॅन भर गया तो फिर पापा आए. उन्होने भी मेरी छूट को छोड़ना शुरू किया.
तभी पापा मेरे बालों को खींचते हुए बोले: चुप साली रंडी, एक आवाज़ नही निकलनी चाहिए.
दोनो चाचा ने मेरे दोनो हाथ पावं चारो दिशाओ में फैला कर रस्सी से बाँध दिए और मेरे मूह को मेरे ही दुपट्टे से बाँध दिए. मैं बिल्कुल खुली पड़ी थी. पापा मुझे छोड़ते रहे. सब ने मेरी बारी-बारी से इसी तरह चुदाई की. कोई छूट छोड़ता तो कोई मेरी गांद छोड़ता, और सब मेरे मूह में आ कर अपना माल गिरा रहे थे, और मैं सब पिए जेया रही थी.
जब सब का मॅन भर गया तो उन्होने मेरे हाथ पावं खोले. मैं बुरी तरह से मार से लाल हो गयी थी. मैं अपनी गांद के बाल बैठ भी नही सकती थी. मुझे समझ में आया की पापा मुझे प्रेग्नेंट होने से रोकना चाहते थे. मेरी गांद किसी कुटिया के तरह खुल गयी थी और छूट का तो बुरा हाल था.
फिर सब ने मुझे घुटनो पर बिताया और मुझे घेर लिया, और मुझपे पेशाब करना शुरू किया. सब ने मुझे पेशाब से नहला दिया. मैं दोबारा वहीं फ्लोर पर गिर गयी. सब ने मुझे इतना छोड़ा था की सब की साँस चढ़ गयी थी.
पापा: तो श्याम, कैसी लगी तुझे मेरी सीमा? कोई दिक्कत ना हो तो मैं ये रिश्ता पक्का समझू?
श्याम: हा अगर शादी के बाद भी ऐसे ही छोड़ने देगी, तो मुझे ये मेरे छ्होटे बेटे के लिए मंज़ूर है.
पापा: हा हा बिल्कुल, कभी नखरे करे तो ऐसे ही चुदाई कर देना या हमे बुला लेना.
श्याम: हा वो सब ठीक है, मगर तुझे पता है ना की मेरे छ्होटे बेटे में कमी है? नल्ला है वो.
पापा: उसकी कोई दिक्कत नही है. इसकी गर्मी उतारने के लिए तेरे बाकी बेटे और हम भी तो है.
तब मुझे पता चला की पापा ने मेरा रिश्ता श्याम अंकल के छ्होटे बेटे से पक्का कर दिया था. मैं बिल्कुल रिक्ट करने की हालत में नही थी. और मैं कर भी कुछ नही सकती थी. तभी पापा उठे और मुझे बोले-
पापा: सुना तूने… ये तेरे होने वाले ससुर है. ये जो बोले, जब बोले, जैसा बोले, वैसा करना होगा तुझे. कोई शिकायत नही आनी चाहिए. चल अब निकल यहाँ से. तेरा काम आज के लिए ख़तम हुआ.
मेरे कपड़े पूरी तरह फटत चुके थे. मैं नंगी ही जैसे-तैसे उठी और अपना सूजा हुआ बदन लेकर नंगी ही कोठी से वापस अपने कमरे में आ गयी. सुबा के 3 बाज रहे थे, तो सब सो रहे थे. मैं अपने कमरे में आ कर वैसे ही नंगी सो गयी. मेरी गांद बुरी तरह से काली हो गयी थी. मेरे शरीर से पेशाब की बदबू आ रही थी. मगर मेरे में नहाने तक की हिम्मत नही बची थी.
सुबा चाची जैसे ही मेरे कमरे में आई मेरी हालत देख कर चीख उठी. सब घर वाले मेरे कमरे में इकट्ठे हो गये.
चाची: ये तेरी ऐसी हालत किसने की सीमा?
मैं कुछ नही बोल रही थी. तभी पीछे से पापा बोल पड़े-
पापा: भाभी मुझे लगता है इसका कोई टॉक्सिक ब्फ है. कल हमने इसका रिश्ता श्याम के छ्होटे बेटे से फिक्स कर दिया है. उसी का गुस्सा इसके बाय्फ्रेंड ने इससे लिया है.
चाची (गुस्से में): सीमा क्या ये सच है?
मैने सिर हिला कर हा भर दी. मेरे पास और कोई ऑप्षन भी नही था. ये सुन कर चाची भी गुस्से में भर आई और बोली-
चाची: तू इतनी गिरी हुई निकलेगी मैने नही सोचा था सीमा. इसकी जल्द से जल्द शादी करा कर निकालो इससे.
सब मुझपे गुस्सा थे जब की मेरी कोई ग़लती भी नही थी. सब मुझे उसी तरह छ्चोढ़ कर चले गये.
तो दोस्तो कैसी लगी मेरी रफ चुदाई? स्टोरी का बेस्ट पार्ट मुझे कॉमेंट में ज़रूर बताए और अगर कोई स्टोरी आइडिया हो तो वो भी कॉमेंट में ज़रूर बताए. पर्सनल छत करने के लिए सीमा8317149@गमाल.कॉम पर ग-छत पे मेसेज करे.