पेंटिंग्स बनाने आई लड़कियो की कामुकता

paintings banane aai ladkiyo kamukta मेरा नाम प्रताप सिंह रजा साहब है. मैं एक माना हुआ पेंटर हूँ. मेरे नाम से ही पेंटिंग्स हजारों रुपयों में बिकती है. मेरी शादी शहर के सबसे राईस परिवार की लडकी करिश्मा के साथ हुई थी. करिश्मा मेरे रुतबे के कारण प्रभावित हुई और हमारी शादी हो गई. करिश्मा बेहद खुबसूरत है. ये बात अलग है कि उसका स्वभाव बहुत ही अलग है. मैंने शादी के बाद से उसकी अनगिनत पेंटिंग्स बनाई है. उकी जिद से मैंने उसकी दो न्यूड पेंटिंग्स भी बनाई थी. वो उस दौरान पूरे पूरे दिन बिना कपड़ों के मेरे सामने स्टूडियो में बैठी रहती जिस मुद्रा में मैं चाहता उसी मुद्रा में. उन दिनों मेरे दो ही काम होते थे. या तो करिश्मा की पेंटिंग बनाना या करिश्मा के साथ सेक्स का आनंद उठाना.

करिश्मा को दावतें देने का बहुत शौक था. मैं भी उसे मना नहीं करता था. लेकिन एक बार ऐसी ही एक दावत में वो एक विदेशी टूरिस्ट लड़के से मिली और उसे लेकर हमारी हवेली के एक कमरे में चली गई. मुझे यह खबर हमारे घर के एक नौकर ने बताई. जब मैं उस नौकर के बताये कमरे में गया तो मैंने देखा कि करिश्मा और वो अंग्रेज लड़का पूरी तरह से नंगे हैं और जमीन पर बिछे कालीन पर लेटे हुए सेक्स कर रहे हैं. मेरा खून खौल गया. मैं कमरे में घुसा और उस लड़के को ननगा ही खींच कर बाहर ले आया और उसे मारते हुए हवेली के बाहर फेंक आया. करिश्मा मुझ पर चीख पड़ी. उस दिन के बाद हम दोनों के रिश्ते बहुत नाजुक दौर में पहुँच गए. हमामे बात चीत बंद हो गई. वो अब बिना मुझे बताये कभी भी बाहर चली जाती.

मैं परेशान रहने लगा. मुझे फ्रांस के लिए कुछ न्यूड पेंटिंग्स बनाने का आर्डर मिला. मैं मोडलों की तलाश में मुंबई और दिल्ली गया. अंत में मुंबई से दो लडकीयों से सारा सौदा तय कर उन्हें अपने साथ ले आया. उन्हें मेरे सामने वाले कमरे में ही ठहरा दिया. करिश्मा को मैंने दोनों लड़कीयों मोना और शीना से मिलवाया. करिश्मा को मैंने सब कुछ बता दिया.

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मुझे करीब बीस पेंटिंग्स बनाने का आर्डर मिला था. यह काम करीब तीन महीने चलने वाला था. सबसे पहले मोना की पेंटिंग्स बनानी शुरू की. मोना गोवा से थी और एंग्लो इंडियन थी. उसके जिस्म के कर्व ऐसे खतरनाक थे कि कोई भी बहक जाए. मुझे तो उसे तीन महीने तक बिना कपड़ों के देखना था. जब मैं उसकी पेंटिंग बनाता तो शीना भी कभी कभी मेरे पास बैठ जाती. कभी कभी मोना के कुछ हिस्सों को मुझे chhuna भी पड़ जाता. लेकिन मोना बिलकुल भी बुरा नहीं मानती. वो ज्यादातर मुस्कुरा देती.

करीब एक सप्ताह में मोना की एक पेंटिंग पूरी हो गई. अब मैंने शीना की पेंटिंग बनानी शुरू की. शीना का जिस्म मोना जैसा घुमावदार तो नहीं था लेकिन मोना से ज्यादा गदराया हुआ था. पता नहीं कैसे लेकिन पहले ही दिन शीना के सभी कपडे उतारे जाने के बाद मेरी जब शीना से नजर मिली तो शीना ने भी मेरी ही तरह देखा. आँखों में कुछ अनजाने से बिना किये इशारे हो गए.

रात को मैं और करिश्मा सोये हुए थे. यहाँ मैं यह बता दूँ कि उस अंग्रेज लड़के के घटना के बाद मेरा करिश्मा से निस्मानी सम्बन्ध नहीं हुआ था. मैंने देखा कि मेरे सामने वाले कमरे की लाईट रात को एक बजे के बाद भी जल रही है. इस कमरे में तो शीना और मोना दोनों रुकी हुई थी. मैं उठकर बाहर आ गया. मैंने देखा कि दरवाजा खुला हुआ है. मैं

कमरे में दाखिल हुआ. मोना तो खर्राटे भर सो रही थी. शीना जाग रही थी. मैंने जैसे उसकी तरफ देखा तो मेरी उससे नजर मिल गई. वो पलंग से उठी और मेरे पास आ गई. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. मैं और शीना उस कमरे से बाहर आ गए. मेरे बगल में एक और कमरा खाली था. यह मेरा पेंटिंग्स का स्टोर था. दीवारों पर पेंटिंग्स ही पेंटिंग्स टंगी हुई थ. एक कोने में एक बहुत ही पुँराना पलंग बिषा हुआ था. मैं और शीना उस पलंग पर लेट गए. हमने धीरे धीरे अपने सारे कपडे उतार दिए और हम बिस्तर हो गए. पहली ही बार में शीना ने मेरे गुप्तांग को अपने जननांग में घुसाने की बात की और मैंने भी उसकी बात मान ली. हमने सारी रात साथ बिताई. सवेरा होने से पहले हम अपने अपने कमरे में आ गए. किसी को कोई पता नहीं चला. .

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पेंटिंग बनाते समय भी जैसे ही मोना कमरे से बाहर चली जाती मैंने शीना के नंगे शरीर से कहलें लग जाता. इस तरह से शीना की पहली पेंटिंग बारह दिनों में पूरी हो पाई इन बारह दिनों में हमने सात रातें साथ साथ बिताई.

मोना की दूसरी पेंटिंग बननी शुरू हुई. पहली बार करिश्मा स्टूडियो में आई. मोना एक सोफे पर बहुत ही उत्तेजित कर दे वाली मुद्रा में लेटी हुई थी. शीना मेरे बगल में ही बैठी हुई थी और मैं पेंटिंग बना रहा था. करिश्मा कब अन्दर आकर खड़ी हुई मुझे पता नहीं चला. मेरी पीठ दरवाजे कीतरफ थी इसलिए. मोना ने अब मेरे कहे अनुसार अपनी पीठ मेरी तरफ की हुई थी. मैंने पेंटिंग अनाते बनाते शीना के तरफ एखा. शीना ने मुझे आँख मारी. मैं बिना यह देखे कि करिश्मा दरवाजे के पास ही खड़ी हुई है; शीना के पास गया और उसके होंठों को चूमने लग गया. शीना ने भी मेरे गालों को अपने हाथों से दबाया और मुए ही वापस उसी गर्मी से चूमा. करिश्मा ने अपना गला खंकारा. मैंने चौंक कर करिश्मा की तरफ देखा लेकिन बिलकुल नहीं घबराया.मैंने शीना के होंठ चूमना जारी रखा. करिश्मा चीखती हुई बाहर चली गई. मोना और शीना दोनों घबरा गई. इस दौरान मोना ने भी मुझे और शीना को एक दूजे को चूमते हुए देख लिया. वो हमें देखकर मुस्कुराई. मोना ने एक तौलिउया अपने बदन पर डाला और मेरे करीब आकर बोली ” मैंने क्या कुसूर किया है जो मैं इससे अलग हो गई हूँ.” मैंने मुस्कुराया और मैंने उसके होंठ भी चूम लिए.

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