पड़ोसिनों की अदला बदली

मेरा नाम राज है, मेरी उम्र 26 साल और मेरी बीवी रश्मि की उम्र 22 साल है।
मेरा एक बेटा है, जिसकी उम्र 1 साल है।
बेटा होने के बाद भी, रश्मि मेरी पत्नी बहुत ही शानदार फिगर 32-28-34 की मालकिन है।
वो अपने शरीर का बहुत धयान रखती है।
जैसे, रोज़ सुबह जल्दी उठ कर योगा करना, तला हुआ और बाहर का खाना बिल्कुल ना खाना और ना जाने कौन-कौन सी प्राकृतिक चीज़ों से अपनी चुचियों और गाण्ड की रोज़ाना मालिश करना।
हाँ, बेटा होने के बाद उसके निप्पल ज़रूर थोड़े बड़े हो गये हैं, सिवाए इसके उसके बदन, चुचियों और गाण्ड की सुडोलता और गोलाई में कोई कमी नहीं आई है।

दोस्तो, मैं आप लोगों से एक बात पूछना चाहता हूँ.. मेरी बीवी हर एक दो दिन बाद, मुझसे अपनी चूत पर पेशाब करवाती है..
उसका कहना है, इससे चूत एकदम कसी रहती है और बहुत सी “गुप्त बीमारियों” से निजात मिलता है।
मुझे ये बिल्कुल पसंद नहीं और मुझे बहुत घिन आती है पर उसको बुरा ना लगे, इसलिए मैं ऐसा कर लेता हूँ पर मैं आप लोगों से जानना चाहता हूँ की क्या ये बात सच है।
वैसे ये बात तो है की उसकी चूत, कसी हुई तो बहुत है।
हमारा बेटा नार्मल डिलीवरी से हुआ है.. वावजूद इसके, कुछ ही दिनों में उसकी चूत फिर से पहले के समान कस गई थी।

खैर, मेरी बीवी को उसके इस हुस्न के चलते जो उसे देखता है, देखता ही रह जाता है।
शुरू में, मुझे कभी कभी मुझे बुरा भी लगता था पर अब मैं आदि हो चुका हूँ।
मित्रो, मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ।
हमारा एक छोटा सा फ्लैट है, जो तीसरे फ्लोर पर है और मेरे फ्लैट के ठीक नीचे दूसरे फ्लोर पर मेरी कंपनी में ही काम करने वाला जय रहता है।
वो दिखने में तो सुंदर है पर उतना ही झगड़ालु प्रवर्ति का है।
उसका, उसकी बीवी डॉली से आए दिन झगड़ा होता रहता है।
वैसे, हमारे रिश्ते एक दूसरे के साथ काफ़ी अच्छे हैं।
डॉली, हमेशा अपने पति जय से और पड़ोसियों से मेरे और रश्मि के रिश्ते को लेकर बात करती रहती है की इन दोनों की जोड़ी कितनी अच्छी है, कभी भी लड़ाई झगड़ा नहीं होता और एक दूसरे का कितना ख़याल रखते हैं।
वो ये तक कहती है की मेरी तो भगवान से ये प्रार्थना है की अगले जन्म में मुझे भगवान राज भाई साब जैसा पति दे।
अब मैं आपको, असली कहानी के बारे में बताता हूँ।
ये घटना, लगभग कुछ महीनों पहले की है।
मार्च का महीना था और होली आने वाली थी।
डॉली, अक्सर हमारे बेटे को खिलाने के लिए अपने घर ले जाया करती थी और मैं उसे वापस लेने के लिए, कभी कभी उसके घर चला जाता था।
इन कुछ दिनों से डॉली को मैंने देखा था की वो मेरी तरफ कुछ अलग नज़र से देखती है। नज़रें, काफ़ी देर तक टिकाए रखती है।
जब मैं उससे, अपने बेटे को गोदी से लेता तो वो मेरे हाथ को अपने मम्मों पर टच करने का प्रयास करती थी।
मैं समझ रहा हूँ, दोस्तो आप ये ही सोच रहे होंगे। ये भी दूसरी कहानियों की तरह, अपने मुँह मिंया मिट्टू बनना चालू हो गया।
अब बोलेगा, मेरा लण्ड 10-12 इंच का है। मैं बहुत खूबसूरत हूँ और मेरी 20-25 गर्ल फ्रेंड रही हैं पर दोस्तो, ऐसा कुछ नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दूं मैं कद काठी में सामान्य हूँ, मेरा लण्ड भी लगभग 7-8 इंच से बड़ा नहीं है और 20-25 तो क्या मेरी एक भी गर्ल फ्रेंड नहीं रही।
खैर, एक दिन मैंने भी सोचा की चलो देखता हूँ की इसका इरादा क्या है।

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मैंने जब अपने बेटे को उसकी गोदी से लेने के लिए हाथ बड़ाया तो जानमुझ कर, बेटे को अपनी तरफ नहीं लिया।
डॉली, मेरे बेटे को छोड़ने का इंतेज़ार करता रहा।
मेरा हाथ कम से कम 10 सेकेंड तक उसके 32 साइज़ के चुचे से स्पर्श करता रहा। लेकिन, वो नहीं हिली और मंद की मंद मुस्कुराती रही।
मेरे ही दिल की धड़कन तेज हो गई और मैंने हाथ हटा लिया।
अब मैं चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए बोला – भाभी जी, अब मेरे बेटे को दे भी दो.. .. घर जाना है.. ..
इस पर डॉली मुस्कुराते हुए, शरारती अंदाज़ में बोली – ले लो ना, भाई साब.. .. आपको कौन मना कर रहा है.. ..
मैं समझ गया की वो आज अलग मूड में है।
मैंने फिर से हाथ बड़ाया तो उसने बेटा नहीं दिया और दो कदम पीछे हो गई और फिर से चिड़ते हुए बोली – ले लो ना, भाई साब.. .. अपना बेटा.. ..
मैं फिर से आगे बढ़ा और उससे इस बार छीना झपट करने की कोशिश की। इस छीना झपट में, मैंने उसके मम्मों को खूब सहलाया।
उस दिन के बाद से, आए दिन जब भी जय घर पर नहीं होता था तो वो मेरे बेटे को ऐसे ही मुझे देती।
मुझे भी मज़ा आने लगा.. मैं समझ गया था की वो मुझसे चुदवाना चाहती है..
ऐसा नहीं की मैं अपनी बीवी के साथ खुश नहीं था या हमारे रिश्ते में, कोई कड़वाहट थी।
रश्मि को भी चुदवाने का बहुत शोक था और मैं अक्सर उसे चोदा करता था।
हाँ, जैसे मैंने पहले बताया था बस मुझे उसकी चूत पर पेशाब करना पसंद नहीं था और एक चीज़ ये भी थी की रश्मि चुदाई के वक़्त, ज़्यादातर उसी पोज़ में चुदवाती थी, जिसमें उसे मज़ा आता था।
मैं अपनी पसंद के पोज़ में चोदने चाहूं या पोज़ बदलना भी चाहूं तो कहती की नहीं, अभी नहीं.. .. या ऐसे ही, करो ना.. ..
उसको चुदाई की भी बहुत जल्दी रहती थी.. मतलब, जैसे ही हमारा मूड बनता वो लण्ड को अपनी चूत में डलवा लेती.. जबकि, मुझे उसके चुचे चूसने, उसकी चूत और गाण्ड चाटने का काफ़ी दिल करता था..
मेरा लण्ड भी वो कभी कभी ही चूसती।
ये कहना सही है की वो चुदाई अपने अनुसार करती थी, मेरे नहीं।
वैसे, डॉली की तरफ आकर्षित होने के ये कोई कारण नहीं था। इन सब बातों के बावजूद, मुझे रश्मि के साथ चुदाई में पूरा मज़ा आता था और मैंने कभी किसी दूसरी औरत के बारे में नहीं सोचा था।
खैर, पर जब डॉली ने खुद ही शुरूवात करी तो मैं इतना भी महान नहीं था की पीछे हट जाता और मुझे तो नहीं लगता कोई भी स्वस्थ लण्ड वाला ऐसा करेगा।
फिर, एक दिन तो हद ही हो गई.. उसने मुझे अचानक होंठों पर किस कर दिया..
मैं भी यही चाह रहा था की कुछ ऐसा हो.. मगर, मैं पहल नहीं करना चाहता था..
हकीकत में, मैं बहुत फटु किस्म का इंसान हूँ पर जैसे ही, उसने चुंबन किया मैंने उसको जकड लिया।
उसने मेरे बेटे को नज़दीक पड़ी, चारपाई पर लिटा दिया और फिर से मुझसे चिपक गई।
तभी मैंने उसे बोला की गेट खुला है, कोई आ जाएगा।
वो तुरंत गई और गेट बंद कर दिया और इस बार मैंने उसको बेड पर पटक दिया और उसकी साड़ी खोल दी, उसका शरीर बहुत मस्त था।
काफ़ी स्लिम थी, वो.. मगर, उसके चुचे एकदम गोल और 32 या 33 साइज़ के लगभग थे..
ज़्यादा बड़े नहीं थे.. लगभग, रश्मि जीतने ही थे और दिखने में भी लगभग वैसे ही थे..
गोरे, गोल, बेहद नरम और काले रंग की छोटी सी निप्पल।
मैं अपनी जिंदगी में, दूसरे नंगे चुचे देख रहा था।

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