नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रुब्बी सिंग है. मेरी उमर 38 है, और मैं कानपुर में रहती हू. मैं शादी-शुदा हू. मेरे पति का नाम प्रमोद सिंग है. उनकी उमर 40 है. वो एक मल्टिनॅशनल कंपनी में जॉब करते है. हमारी शादी-शुदा ज़िंदगी बहुत अची कट्ट रही थी. लेकिन हमे कोई बच्चा नही था. बहुत कोशिश करने के बाद भी हमारी कोई औलाद नही हुई.
एक दिन हमारे पड़ोस में एक डॉक्टर और उनकी फॅमिली रहने आए. उनका नाम ड्र. अजय पांडे और उनकी वाइफ का नाम सुमन पांडे था. उनका एक लड़का भी था, जो हॉस्टिल में पढ़ाई कर रहा था.
एक दिन मेरे पति ने उन लोगों को डिन्नर के लिए बुलाया. मैने डिन्नर रेडी किया, और फिर वो लोग आ गये. काफ़ी टाइम बातें करने के बाद हमने डिन्नर किया, और फिर थोड़ी देर बातें की. मेरे पति बोले-
पति: डॉक्टर साहब, आप बहुत आचे लोग हो. हमारे एक बार बुलाने पर आप आ गये.
ड्र. अजय: ये तो घर की ही बात है. पड़ोसी से करीबी और होता ही कौन है? वैसे आप लोग भी हमे आचे लगे. भाभी जी के हाथ का खाना बहुत अछा था.
मैं: थॅंक योउ भाई साहब.
सुमन (डॉक्टर की वाइफ ): भाभी जी आपके बच्चे नही है क्या?
मैं: नही भाभी जी, भगवान ने मेरी गौड़ सूनी ही रखी है.
ड्र. अजय: कोई ट्रीटमेंट या कोई मेडिसिन ट्राइ नही की आप लोगों ने?
पति: सब करके देख लिया, पर रिज़ल्ट ज़ीरो ही था.
ड्र. अजय: मैं आप को एक हॉमऑयियापेतिक मेडिसिन देता हू. आप दोनो 3 गोली सुबा-शाम खाइए, रिज़ल्ट पक्का मिलेगा, और भाभी जी आपकी गौड़ सूनी नही रहेगी.
उन्होने हमे एक डिब्बी में गोलिया दी, और उनके बताए मुताबिक हमने वो ली, और बच्चे के लिए ट्राइ किया. उस गोली का असर सच में हुआ, और मैं प्रेगञेन्ट हो गयी. हमने डॉक्टर और उनकी वाइफ का बहुत आभार माना और उनको थॅंक्स किया.
देखते ही देखते 9 महीने हो गये, और फिर मैने एक लड़की को जानम दिया. हम सब बहुत खुश थे. डॉक्टर साहब की फॅमिली भी हमारा साथ दे रही थी. मेरी सारी हेल्प कर देते थे वो लोग.
अब हमारी बेटी 6 मंत की हो चुकी थी, तो डॉक्टर की बीवी सुमन मुझे बोली-
सुमन: रुब्बी, बच्ची अभी तुम्हारा दूध नही पीटी क्या?
मैं: नही भाभी जी, अभी नही पीटी.
सुमन: तो फिर तुम्हे तकलीफ़ होती होगी?
मैं: हा होती है. स्टान्नो में बहुत दर्द होता है.
सुमन: फिर क्या करती हो?
मैं: मेरे पति पी जाते है सारा दूध.
सुमन: हा ये ठीक है. मेरे बेटे ने जब दूध छ्चोढा था तब डॉक्टर साहब भी मेरा दूध पिया करते थे.
हम एक फॅमिली हो गये थे. सारे सुख-दुख शेर करते थे. एक दिन मेरे पति की कंपनी ने उन्हे 4 मंत के लिए मुंबई भेज दिया था, और नेक्स्ट दे ही निकलना था. तो उन्होने डॉक्टर फॅमिली में बताया, तो डॉक्टर की बीवी बोली-
सुमन: आप बेफिकर हो कर जाइए, हम है यहाँ.
पति बेफिकर हो कर चले गये. सुमन मेरे साथ हमेशा रहती थी, मेरा हेल्प करती थी. जब मेरे स्टान्नो में दर्द होता तो मैं उसे बोल देती. वो बोली-
सुमन: अगर तुम्हे बुरा ना लगे तो मैं मदद कर डू?
मैं: आप कैसे मदद करेंगी?
सुमन: अगर मैं डॉक्टर साहब को बोलू की वो तुम्हारे स्टान्नो का दूध पीले तो?
मैं शॉक रह गयी.
मैं: ये क्या बोल रही है आप? डॉक्टर साहब कैसे मेरे स्टान्नो का अपने मूह से दूध पी सकते है?
सुमन: तुम्हारा दर्द कम होगा, इसलिए मैं बोल रही थी.
मैं: पर ऐसे-कैसे मैं डॉक्टर साहब के सामने अपना स्टअंन खोल कर दिखा सकती हू? नही भाभी जी, ऐसा नही कर सकती मैं.
सुमन: तकलीफ़ होगी रुब्बी, इसलिए बोल रही हू.
मेरी निघट्य पर से स्टान्नो पर गीला होने लगा था. मेरी निघट्य भीगने लगी थी. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था क्या करू. तभी अचानक डॉक्टर साहब आ गये और आ कर सुमन के बगल में बैठ गये. उनकी नज़र मेरी गीली निघट्य पर पड़ी. मैने अंदर ब्रा भी नही पहनी थी.
वो मुझे देख कर बोले: अर्रे ये क्या रुब्बी, तुम्हारी निघट्य तो गीली हो गयी दूध से.
सुमन: वही मैं रुब्बी को समझा रही थी की आप से मदद लेले. पर वो माना कर रही है.
ड्र. अजय: रुब्बी ऐसे तो तुम्हे दर्द होता रहेगा.
मैं: पर मैं कैसे आपके सामने अपना स्टान्नो को दिखौ?
ड्र. अजय: सुमन भी यहाँ है. कोई प्राब्लम नही है.
मैं दर्द की वजह से बोली-
मैं: ठीक है, पर आप लोग प्रमोद को कुछ नही बताना इस बारे में.
ड्र. अजय: बिल्कुल नही, मैं समझ सकता हू तुम क्या बोलना चाहती हो. अब अपनी निघट्य उपर करो. मैं तुम्हारा दूध पी लेता हू.
मैने हिचकिचा कर धीरे से अपना निघट्य उपर की. अब सुमन और डॉक्टर के सामने मेरे दोनो स्टअंन थे, जिनके निपल्स पर दूध की बूंदे थी.
ड्र. अजय: अर्रे सुमन, रुब्बी के स्टअंन तो तुम्हारे स्टान्नो से बड़े है.
सुमन: अछा जी.
मैं: नही भाभी जी, आपके स्टअंन मुझसे बड़े है.
ड्र. अजय: अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. सुमन ज़रा अपनी भी निघट्य उठा कर दिखाओ.
सुमन ने भी अपनी निघट्य उपर की और अपने स्टअंन खोल कर मेरे बगल में बैठ गयी. फिर बोली-
सुमन: सच में रुब्बी, तुम्हारे स्टअंन बड़े है मेरे स्टान्नो से.
मैं: तो क्या होता है?
ड्र. अजय: अछा चलो अब मैं रुब्बी तुम्हारा दूध पी लेता हू.
डॉक्टर साहब अपने मूह को मेरे निपल्स पर रख कर मेरा दूध पीने लगे. शुरू में दर्द हो रहा था. बाद में दर्द कम हो गया. मैने अपनी आँखें बंद कर ली थी. मेरे हाथ अपने आप डॉक्टर साहब के बालों में उंगलिया फेरने लगे, और मैं गरम होने लगी थी. सुमन मुझको ऐसे देख कर अचानक बोली-
सुमन: रुब्बी ये मेरे पति है, तेरे नही.
और हासणे लगी. मैने अभी आँखें खोली और अपना हाथ डॉक्टर साहब के बालों से हटा लिया और बोली-
मैं: सॉरी भाभी जी, मैं तोड़ा…
सुमन: समझ गयी मैं.
डॉक्टर अभी भी मेरे स्टान्नो को चूस रहे थे. सुमन बोली-
सुमन: अब क्या रुब्बी को और गरम करोगे. मैं भी स्टअंन खोल कर बैठी हू बगल में. रुब्बी का स्टअंन चूस्टे हुए देख कर मुझे भी मॅन करने लगा है. मेरे भी चूस लो.
डॉक्टर साहब हास्से और मेरे स्टान्नो से मूह हटा कर सुमन के स्टान्नो को चूसने लगे. मैं उन्हे बस देख रही थी. तभी डॉक्टर साहब ने मेरे स्टान्नो को दबाना शुरू कर दिया. मुझे भी अछा लगने लगा. मैं बस आँखें बंद करके फील कर रही थी. सुमन ने मुझे देखा और बोली-
सुमन: वाह डॉक्टर साहब, रुब्बी का भी दबा रहे हो.
ड्र. अजय: अब क्या करू, इतने बड़े बूब्स कभी देखे नही, इसलिए हाथ चला गया रुब्बी के बूब्स पर.
मैं: कोई बात नही, अब मुझे दर्द नही हो रहा है.
डॉक्टर: कैसे होगा, मैने तुम्हारा सारा दूध पी लिया है.
सुमन: अब मुझसे रहा नही जेया रहा है. डॉक्टर साहब चलो चुदाई कर लेते है.
मैं वहीं बैठी थी, तब डॉक्टर बोले-
डॉक्टर: रुब्बी क्या तुम भी आज हमारे साथ?
सुमन: क्या बोल रहे हो, रुब्बी कैसे हमारे साथ चुदाई करेगी?
मैं: ये कैसे हो सकता है? प्यार और सेक्स दो ही लोगों में होता है ना?
डॉक्टर: होता है रुब्बी.
मैं: कैसे हो सकता है?
सुमन: हा ऐसा कैसे हो सकता है?
डॉक्टर: अगर तुम दोनो तैयार हो तो हम तीनो एक साथ सेक्स कर सकते है.
मैं: मैने पहले कभी पति के अलावा और किसी के साथ सेक्स नही किया.
सुमन: इससे पहले तुमने कभी अपना दूध भी तो किसी और को नही पिलाया था. चलो ना, ट्राइ करते है.
मैं: पर प्रमोद को कभी पता ना चले?
डॉक्टर: किसी को कुछ पता नही चलेगा.
मैं भी तैयार हो गयी. अब मैं और सुमन डॉक्टर साहब के सामने अपनी निघट्य उतार दिए. डॉक्टर साहब हमे ऐसे देख कर बोले-
डॉक्टर: मैने कोई अछा काम किया होगा, इसलिए मुझे दो-दो खूबसूरत औरतों को छोड़ने का मौका मिल रहा है.
सुमन: अब घूरते ही रहेंगे या शुरू भी करेंगे?
मैं: हा डॉक्टर साहब, शुरू कीजिए. आपने मेरा दूध पी कर मुझे गरम पहले ही कर दिया था.
डॉक्टर साहब टाइम वेस्ट किए बिना मेरे बूब्स को दबाने लगे और बोले-
डॉक्टर: रुब्बी तुम्हारा स्टअंन इतना बड़ा है, मेरे हाथो में भी नही आता है. मज़ा आ रहा है दबाने में.
सुमन: डॉक्टर साहब अपने कपड़े उतरो.
डॉक्टर साहब ने अपने कपड़े उतार दिए और न्यूड हो कर खड़े हो गये. मैने उनका लंड देख कर अपनी बर पर हाथ फेरा और कहा-
मैं: डॉक्टर साहब, आपका लंड प्रमोद के लंड से भी बड़ा है. ये देखिए मेरी बर गीली हो गयी.
सुमन: आज डॉक्टर साहब हम दोनो को जन्नत की सैर करा दो.
डॉक्टर साहब ने मेरा बाल पकड़ कर मुझे लंड को चूसने को कहा. मैने लंड को अपने हाथ में लेकर अपने मूह में डाल दिया. सुमन सोफा पर खड़ी हो कर अपना बूब्स डॉक्टर साहब से चुसवाने लगी. डॉक्टर साहब का लंड बहुत टाइट हो गया था. मैं और तेज़ी से लंड को मूह के अंदर-बाहर लेने लगी. डॉक्टर साहब मुझे देख कर बोले-
डॉक्टर: अया रुब्बी, कितनी आचे से मूह में लेती हो तुम. मज़ा आ गया. सुमन देखो रुब्बी को, कितना आचे से लंड चूस रही है.
सुमन: वाह रुब्बी, बहुत मज़ा आ रहा है तुमको देख कर. हट्तो अब मैं मूह में लेती हू.
मैं हॅट गयी और सुमन मूह में लेने लगी. मैने डॉक्टर साहब को देखा. वो मेरे बूब्स को दबा रहे थे. मैं उनके पास गयी, और उनके होंठो पर किस करने लगी. काफ़ी देर तक ऐसे ही करते हुए हम तीनो एक-दूसरे से अलग हुए.
अब डॉक्टर साहब सुमन को लिटा दिए और उसकी बर चाटने लगे. सुमन मेरा हाथ पकड़ कर अपने बूब्स को डबवाने लगी, और मेरा सर पकड़ कर किस करने लगी. मैं सुमन को किस कर रही थी, और डॉक्टर साहब सुमन की बर चाट रहे थे. काफ़ी देर ऐसा करने के बाद डॉक्टर साहब मुझे लिटा दिए, और मेरा बर चाटने लगे. उफफफ्फ़, मेरी बर पर उसकी जीभ कमाल कर रही थी.
सुमन मेरे बूब्स पीने लगी. अब डॉक्टर साहब उठे. सुमन अब भी मेरे बूब्स चूस रही थी. अब डॉक्टर साहब ने अपना लंड मेरे बर में डाल दिया, और मैं चिल्ला उठी.
मैं: आआआहह डॉक्टर साहब.
डॉक्टर: कितनी नरम बर है तुम्हारी. मज़ा आ रहा है छोड़ने में.
मैं: अया, मज़ा आ रहा है डॉक्टर साहब. प्रमोद कभी ऐसे नही किए. और छोड़ो मुझे, सुमन तुम मेरे बूब्स को ऐसे ही चूस्टी रहो. मज़ा आ रहा है.
ऐसे ही हम तीनो चुदाई का मज़ा ले रहे थे. थोड़ी देर बाद मेरा पानी निकल गया, और डॉक्टर साहब ने भी अपना पानी छ्चोढ़ दिया मेरी बर में. अब डॉक्टर साहब सुमन को लिटा दिए, और उसकी बर में अपना लंड जो अभी तक तन्ना हुआ था, डाल दिए. वो सुमन को छोड़ने लगे.
मैं नीचे बैठ कर डॉक्टर साहब की गोटियों को मूह लेकर चूसने लगी. डॉक्टर साहब सुमन को तेज़ी से छोड़ रहे थे, और मैं उठ कर डॉक्टर साहब के मूह में अपना बूब डाल कर अपना बूब चुसवाने लगी.
ये अनुभव लाइफ में पहली बार हो रहा था. मज़ा आ रहा था. अब सुमन और डॉक्टर साहब का पानी निकल चुका था. हम तीनो सोफा पर बैठ गये. डॉक्टर साहब हम दोनो के बीच में बैठ कर, हमारे कंधो पर हाथ रख कर, हम दोनो के बूब्स दबाते हुए बोले-
डॉक्टर: कैसा लगा तुम दोनो को?
सुमन: मज़ा आ गया, रुब्बी के बूब्स सच में कमाल के है, मज़ा आ गया चूसने में.
मैं: भाभी जी आपका बर भी रसीला है, और डॉक्टर साहब का तो जवाब ही नही है. इतनी अची चुदाई आज तक प्रमोद ने नही की.
डॉक्टर: अर्रे कोई बात नही, उसे भी शामिल कर लेंगे.
मैं: तब तो मज़ा चार गुना हो जाएगा.
डॉक्टर: ठीक है, आज से हम तीनो घर पर ऐसे ही नंगे रहेंगे.
सुमन और मैं हम दोनो खुश हो गये. खुशी के मारे सुमन डॉक्टर साहब को किस करने लगी, और मैं उनका लंड मूह में लेने लगी……
अब अगले भाग में कैसे मेरे पति भी चुदाई में शामिल हुए, इसका आप लोग मज़ा लीजिएगा. तब तक चुड़वते रहिए.
आपकी रुब्बी.