chudai kahani नितिन की टल्ली

मित्रों नमश्कार,
मैं हूँ नेहा और मैं पंजाब कि रहने वाली हूँ! मेरी उम्र २१ साल है और मेरा रंग गोरा है, चेहरा सुंदर और जिस्म आकर्षक है! मेरा कद पांच फुट छह इंच है, और मेरे छुईमुई शरीर के पैमाने ३४-२४-३६ है! मेरे माता और पिता के स्वर्ग सिधारने बाद मैं पिछले ५ साल से अपनी बड़ी बहन, जीजाजी और उनके इकलौते बेटे नितिन के साथ, पंजाब के एक बड़े शहर में रहती हूँ! मैंने बी एससी करने के बाद अब एम एससी कर रही हूँ! जीजा जी बैंक में एक बड़े अफसर हैं और दीदी स्कूल में टीचर हैं!

उनका बेटा नितिन १८ साल का है और बी बी ऐ कर रहा है! हमारा घर बहुत बड़ा है और हर एक को अलग अलग कमरा मिला हुआ है! हर कमरे के साथ बाथरूम भी लगा हुआ है! मैं अपने कमरे में जयादातर अर्धनग्न ही रहती हूँ! जीजाजी के जाने के बाद मैं अक्सर एक छोटीसी निकर और एक लो नेक की बनियान (बिना कच्छी और ब्रा के) ही पहनती हूँ जिस से मेरी लंबी टाँगे और मेरे मम्मों के दर्शन सब को आराम से हो जाते हैं!

मैंने अपना छोटा सा परिचय तो आप को दे दिया, अब मैं आप को उस घटना के बारे में बताना चाहूंगी जिस ने मेरे जीवन में बदलाव लाया और मुझे बेशर्म बना दिया! पहले मैं अपने जिस्म कि नुमाइश नहीं होने देती थी और हमेशा सलवार कमीज ही पहने रहती थी! लेकिन उस घटना के बाद मेरे पहनावे में बदलाव आगया और मैं घर में जिस्म की नुमाइश करने लगी!

जीजाजी के सामने तो मैं अपने जिस्म को ढक के रखती हूँ और ढंग के कपड़े ही पहनती हूँ पर दीदी और नितिन के सामने नेकर बनियान में ही घूमती रहती हूँ, कभी कभी तो उनके सामने ही टॉपलेस हो कर अपने कपड़े भी बदल लेती हूँ! दीदी बहुत टोकती है पर मैं परवाह ही नहीं करती हूँ!

वह घटना आज से एक साल पहले हुई थी! उस समय मुझे टाईफाइड हो कर हटा था और मैं बहुत कमजोर हो गई थी! कहीं वह पीलिया न बन जाए इसलिए डाक्टर ने मुझे हिलने डुलने से मना कर दिया था और बिस्तर पर ही आराम करने को कहा! उन्होंने कुछ दिनों के लिए नहाने धोने को भी मना किया और दीदी से मेरे जिस्म को स्पंज (गीले कपड़े से पोंछना) करने को कहा! सिर्फ बाथरूम जाने कि इजाजत दी और वहां भी कोई पकड़ के ले जाए! ज्यादातर तो दीदी ही यह सब करती थी लेकिन कभी कभी नितिन भी मुझे बाथरूम ले जाता था! वह मुझे अंदर छोड़ कर बाहर खड़ा हो जाता था और जब मैं आवाज देती थी तो वह वापिस मुझे बिस्तर तक छोड़ देता था!

दो सप्ताह के बाद मेरा बुखार तो उतर गया था लेकिन ज्यादा कमजोरी के कारण डाक्टर ने अगले १५ दिन के लिए भी वैसा ही आराम करने को कह दिया था! दीदी कि जिद पर और जीजाजी कि आज्ञा के कारण मैं बिस्तर पर ही लेटी रहती थी और जब जरूरत पड़ती थी तब दीदी को या नितिन को आवाज़ लगा देती थी! इस तरह अभी पांच दिन ही बीते थे कि खबर आई कि गांव में जीजाजी के पिताजी का निधन हो गया था और इसलिए जीजाजी और दीदी को तुरंत वहां जाना पड़ा! जाने से पहले दीदी ने मुन्नी (कामवाली बाई) को घर के बाकी काम के साथ साथ मेरा स्पंज करने और खाना बनाने को भी कह दिया था, इसलिए वह दिन में हमारे घर पर ही रहती थी और शाम का खाना बना कर अपने घर चली जाती थी!

देर शाम और रात में तो मुझे नितिन पर ही निर्भर रहना पड़ता था! दीदी के जाने के अगले दिन सुबह जब मुन्नी ने मेरे कपड़े उतार कर मेरे बदन को स्पंज कर रही थी तब मैंने देखा कि नितिन खिड़की से झांक कर मुझे देख रहा था! मुझे बहुत गुस्सा आया पर उस समये मैं चुप रही! जैसे ही मुन्नी वहां से चली गई तब मैंने नितिन को बुला कर उसकी उस हरकत पर बहुत डांटा! मेरी डांट सुन कर तो वह खिलखिला कर हंस पड़ा! जब मैंने उससे हँसने का कारण पुछा तो वह कहने लगा कि यह नज़ारा तो वह रोज देखता रहता था,

जब उसकी मम्मी भी मेरा स्पंज करती थी तब भी वह इसी तरह झाँक कर यह सब देखता रहता था! मेरे पूछने पर कि उसे यह सब देखने से क्या मिलता है, तो उसने कहा कि उसे मेरे गोरे रंग का जिस्म, मेरे मम्में और उनके उपर लगी काली काली निप्प्लें तथा नीचे चूत के उपर के भूरे रंगे के बाल देखने बहुत अच्छे लगते हैं और वह उन्हें छूने कि इच्छा भी रखता है! यह सुन कर मैं दंग रह गई और उसे एक बार फिर से डांट कर वहां से भगा दिया!
अगले दिन सुबहे मुझे बहुत पसीना आने कि वजह से जिस्म में खुजली हो रही थी और उधर से मुन्नी का सन्देश आया था कि वह देर से आयेगी! जब मुझसे खुजली बर्दास्त नहीं हुई, तब मैंने सोचा कि क्यों न नितिन का सहारा लिया जाए और उसे ही स्पंज करने को कह दूं! उसने तो मुझे नग्न देखा हुआ ही था तो मुझे उससे किसी बात कि शर्म नहीं आनी चाहिए! यह सोच कर मैंने नितिन को आवाज दी और उसे मुन्नी के देर से आने के बारे में बताया तथा उसे आग्रह किया कि वह मेरा स्पंज कर दे!

यह सुन कर वह पहले तो हिचकचाया फिर पूछने लगा कि क्या मैं उसे जिस्म की सब जगहें स्पंज करने दूंगीं! जब मैंने उसे हाँ कही तब वह खुशी खुशी भाग कर बाथरूम में गया और स्पंज सारा सामान ले आया! फिर उसने आगे बढ़ कर मेरे कपड़े उतारने शुरू किये! पहली मेरी कमीज उतारी, फिर मेरी ब्रा उतारी, फिर मेरी सलवार और कच्छी भी उतार दी! अब मैं उसके सामने बिलकुल नग्न थी! यही वह क्षण था जब से मेरे जीवन में बदलाव आया था और मैं शर्मसार से बेशर्म बन गई थी तथा घर भर में कम कपड़ों में ही घूमना शुरू कर दिया था तथा दीदी और नितिन के सामने अर्धनग्न भी हो जाती थी!
नितिन ने बड़े ध्यान से मेरी नग्नता को निहारा, मेरे मम्मों, निप्पलों तथा चूत के बालों पर हाथ फेरा! फिर मुझे उल्टा कर के मेरी पीठ और टांगो को स्पंज किया, मेरे चूतडों को जोर जोर से रगड़ कर स्पंज किया और मेरी गांड में ऊँगली भी कर दी!

जब मैंने उससे पुछा कि वह यह क्या कर रहा था तो उसने कहा कि अंदर तक स्पंज कर रहा था! उसका इस तरह गांड में ऊँगली करना और मेरे चूतडों को दबाना तथा मसलना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए मैंने उसे कुछ देर ऐसा करने दिया! कुछ देर के बाद में उसने मुझे सीधा किया और मेरे सिर और चेहरे, मेरी गर्दन, छाती, मम्मों, पेट, कमर, जाहंगों और टांगों को स्पंज किया! इसके बाद उसने मेरी दोनों टांगो को चौड़ा कर उन के बीच में विराजमान मेरी चूत को भी रगड़ते हुए स्पंज कर दिया! जब वह चूत का स्पंज कर रहा था तब उसने उसमे भी ऊँगली करने कि कोशिश की पर मैंने उसे रोक दिया! फिर मैंने उसे जल्दी से स्पंज खतम करने को कहा! इस के बाद उसने मुझे सूखे तौलिए से पोंछ दिया और मेरे मम्मो और उन की निप्पलों को पकड़ कर मसला और थोड़ी देर बाद वह मेरी चूत के बालों के उपर हाथ फेरने लगा!

उस कि इस हरकत से मैं बहुत गर्म होने लगी थी लेकिन अपनी बिमारी की कमजोरी को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने पर काबू रखा तथा उसे अलग हटने को और कपड़े पहनाने के लिए कहा! नितिन मेरे साफ़ कपड़े निकाल लाया और सब से पहले उसने मुझे कच्छी पहनाई लेकिन उपर करने से ने पहले मेरी चूत के बालों को अच्छी तरह मसला और एक बार फिर ऊँगली करने कि नाकाम कोशिश की! इसके बाद उसने मुझे सलवार पहनाई! ब्रा पहनाने से पहले उसने मेरे मेरे मम्मों को बड़े प्यार से मसला! उसका ऐसा करना मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन बात आगे ना बढ़ जाये इसलिए मैंने उसे कहा कि वह अब बस कर दे और बाकी के कपड़े पहना दे! मेरी बात सुन कर उसने मुझे ब्रा और कमीज पहना दी तथा स्पंज का सामान उठा कर वहां से चला गया!

जब वह जा रहा था तब मैंने देखा कि उसका पजामा आगे से उठा हुआ था और कुछ गीला सा भी लग रहा था! जब वह मेरे कमरे में वापिस आया तो उसने पेंट पहन रखी थी! मैंने उसे पूछा कि पेंट पहन ली है क्या कहीं जाना है तो वह बोला नहीं, सपंज का पानी गिरने से पजामा गीला हो गया था इसलिए बदल लिया! मैंने मुस्कराते हुए उसे देखा और कह दिया कि मैं तो समझी थी कि कुछ लीक हो गया था! वह कुछ नहीं बोला और वहीँ चुपचाप बैठा नीचे देखता रहा!
दुपहर को मुन्नी आई और उसने जब मुझे स्पंज के लिए पूछा तो मैंने उसे मना कर दिया और कहा कि जब काम खतम कर के शाम को घर जाने से पहले कर देगी! क्योंकि नितिन ने मेरे जिस्म को इतनी अच्छी तरह मसला और दबाया था इसलिए मुझे खाना खाने के बाद तुरंत नींद आ गयी! शाम को मुन्नी ने मेरा स्पंज करके बाद जब अपने घर चली गई तब नितिन मेरे कमरे में आ गया और मेरे पास बैठ गया! मैंने जब पुछा कि क्या बात है तो उसने मेरे मम्मों पर हाथ रख कर उन्हें दबाने तथा मसलने कि इजाजत माँगी!!

मेरे हाँ कहने पर उसने बड़े प्यार से मेरी कमीज और ब्रा उतर दी और मेरे पास लेट कर मेरे मम्मों पर हाथ फेरने लगा और मसलने लगा! कुछ देर के बाद उसने मेरे मम्मों कि निप्पलों को बारी बारी अपने मुहँ में डाल कर अहिस्ता अहिस्ता चूसने लगा! उस कि इस तरह मम्मों की प्यारी चुसाई से मैं सातवें आसमान पर तैरने लगी, मेरी चूत में भी गुदगदी होने लगी! तभी मुझे नितिन कि जाह्न्गों के बीच में कुछ हलचल महसूस हुई और पेंट भी उभरी हुई सी लगी! मैंने जैसे ही उस तरफ अपना हाथ बढ़ाया तो नितिन ने मेरा हाथ थाम लिया! तब मैंने उसे अपने से दूर कर दिया और कह दिया कि उसने तो मेरा पूरा जिस्म अच्छी तरह से देख लिया है और उससे खेल भी लिया है लेकिन अपना जिस्म अभी तक नहीं दिखाया! अब जब तक वह मुझको अपने शरीर नहीं दिखता और उससे खेलने नहीं देता तब तक मैं उसे अपने मम्मों को छूने भी नहीं दूंगी!

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मेरी यह बात सुन कर नितिन कुछ देर तक सोचता रहा और फिर कहा कि अगर मैं पूरी नग्न हो कर उसके साथ लेटूंगी तभी वह भी नग्न हो कर मुझे अपना जिस्म दिखायेगा और उससे खेलने देगा! मेरे मान जाने पर वह उसने अपनी टी शर्ट, बनियान, जींस तथा जांघिया उतार कर मेरे सामने खड़ा हो गया! उसका शरीर बहुत हष्टपुष्ट था और उसका लौड़ा (जो अभी पूरा खड़ा नहीं हुआ था) काफी तगड़ा लग रहा था! इस हालात में उसके लौड़े कि लम्बाई लगभग ७ इंच और मोटाई १ १/४ इंच लग रही थी! उसके टट्टे नीचे की ओर लटके हुए थे, उसके लौड़े के उपर का मांस पीछे हटा हुआ था तथा सुपाडा बाहर निकला हुआ था!

यह देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झट से उस के लौड़े को हाथ में ले लिया और उसे हल्के हल्के मसलने लगी! कियोंकि मैंने किसी लौड़े को इतनी नज़दीक से पहली बार देखा और पकड़ा था इसलिए मुझे कुछ अजीब लग रहा था! तभी वह एकदम सख्त हो कर तनने लगा! मैंने घबरा कर लौड़े को एकदम छोड़ दिया! इस पर नितिन ने हँसते हुए कहा के डरो मत यह काटेगा नहीं, यह तो खुश हो कर सलामी दे रहा था! उसका तन्ना हुआ लौड़ा बहुत ही सुंदर दिख रहा था और मुझे उस पर बहुत प्यार आने लगा! उसका सुपाडा तो एकदम चमक रहा था और १ १/२ इंच के गोल गोल दोनो लटके हुए टट्टे अब सिकुड कर उपर कि ओर चिपक गए थे!

ऐसा मनभावन नज़ारा देख कर मेरी चूत में अब गुदगदी के साथ साथ खुजली भी होने लगी थी, वह गीली भी होने लगी थी तथा उसमें से पानी रिसने लगा था जिस के कारण मेरी कच्छी भी गीली होने लगी थी! मुझे पहली बार चूत और लौड़े के बीच का अद्रश्य रिश्ता समझ में आने लगा था! मैंने नितिन कि लौड़े को हाथ में पकड़ कर आगे पीछे करने लगी (मुठ मारने लगी) जिससे नितिन एकदम घबरा गया और सिकुड़ने तथा हिलने लगा! अब उसका लौड़ा मस्त हो गया था और उसकी लम्बाई ८ इंच और मोटाई १ १/२ इंच हो गया था! मैंने नितिन से पूछे बिना उसके लौड़े को चूम लिया और सुपाडे को जीभ से चाटने लगी! उसी समय नितिन को एक झटका लगा और उसके सुपाडे के छिद्र में से पानी जैसी एक बूँद बाहर निकली!

यह देख कर मैंने नितिन की ओर देखा तो उसने इशारे से चाटने के कहा, तब मैंने उस बूँद को चाट लिया! मुझे उस का स्वाद बहुत अच्छा लगा और मेरे से रहा नहीं गया! मैंने अपने होंट सुपाडे के उस छिद्र पर लगा कर जोर से चूसा और उसके अंदर से सारा पानी खींच कर पी गई! इसके बाद मैंने मुंह खोल कर सुपाडे को अंदर लेने कि कोशिश की लेकिन उसे पूरा अंदर नहीं कर सकी इसलिए उसको फिर से चाटने लगी!
नितिन ने पांच मिनट तक मुझे अपने लौड़े के सुपाडे को चाटने दिया और फिर मुझे अलग कर उसने मेरी सलवार और कच्छी उतार दी! कच्छी का गीलापन देख का उसने मेरी जाहंगो के बीच में हाथ डाल कर चूत को छू कर देखा और गीले हाथ को अपने मुहँ में रख कर चाटा और मेरी ओर देखा! जब मैंने पुछा कि स्वाद कैसा है तो उसने कहा शरबत जैसा!

फिर वह जल्दी से मेरे बिस्तर पर मेरी टांगों की तरफ सिर कर के लेट गया और मेरी टांगो को चौड़ा कर के अपना मुहँ मेरी चूत पर लगा दिया और मेरा रस खींच कर चूसने तथा पीने लगा! मैंने भी जब उसके लौड़े को अपने चेहरे के पास देखा तो मेरा मुहँ भी अपने आप खुल गया और मैं उसका सुपाडा चूसने लगी! कुछ देर के बाद नितिन ने मेरे छोले पर जीभ घुमाई तो मुझको झटका लगा और मेरी चूत में से एकदम पानी छूटा जिसे नितिन ने पी लिया! मैंने भी अपने मुहँ को और ज्यादा खोला तो नितिन का पूरा सुपाडा मेरे मुहँ के अंदर चला गया और मैं उसे बड़े प्यार से चूसने लगी! दस मिनट तक ऐसे ही दोनो कि चुसाई चलती रही और फिर जब मुझे एक और झटका लगा तो मैं चिल्लाई आईईईईईई…………… और नितिन के मुहँ में पानी कि टंकी खोल दी! नितिन ने सारा पानी पी लिया! मैं बहुत गरम होगी थी

इसलिए नितिन के लौड़े को जोर से चूसने लगी, तभी उसका लौड़े ने फडफडा कर अपना रस मेरे मुहँ में उड़ेल दिया! मुझे ऐसा लगा कि उसने मेरे मुहँ में रबड़ी डाल दी है और मैं उसे मजे ले कर खा गई! इसके बाद नितिन मेरे साथ लिपट के लेट गया और मुझ को किस किया! अब उसका ढीलाढाला लौड़ा मेरी चूत के बालों से चिपका हुआ था और मेरे मम्में उसकी छाती से चिपके हुए थे!
करीब एक घंटे के बाद हम अलग हुए और नितिन ने मुझे सिर्फ सलवार और कमीज पहना दी और मेरी ब्रा तथा कच्छी को बाथरूम में डाल दी! बाद में उसने पजामा और टी-शर्ट पहनी और रसोई से खाना लाया! हम दोनो ने मिल कर एक ही थाली में खाना खाया! खाने के दौरान मैंने नितिन से कहा कि दीदी और जीजाजी के आने तक वह मेरे ही कमरे में मेरे साथ ही सो जाये करे ताकि रात में मुझे बाथरूम

जाने आने में उसकी मदद मिल सकेगी! नितिन मान गया और बर्तन रसोई में रखने के बाद वह मेरे पास आ कर लेट गया! उसने अपना एक हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया और मैंने भी उसके लौड़े को पकड़ लिया! हम बहुत देर तक बाते करते रहे और फिर सो गए! बातों बातों में नितिन ने मुझसे चुदाई के बारे टोहने कि कोशिश की लेकिन मैंने उसे टाल दिया और बात आगे नहीं बढ़ने दी! मैं अपनी कमजोरी कि वजह अभी ऐसा कुछ नहीं करना चाहती थी जिस से मैं दुबारा बीमार पढ़ जाऊं! इसलिए अगले चार दिन तक हमने अपनी दिनचर्या इसी तरह मसला मसलाई, चूसा चुसाई और शरबत पीने तथा रबड़ी खाने तक ही सीमत रखी!

पांचवें दिन भी जब दीदी का फोन आया तो उन्होंने बताया कि वह लोग सात दिन बाद अगले इतवार रात तक ही वापिस आ पाएँगे! क्योंकी जीजाजी बड़े हैं इसलिए वह सभी रीति रिवाज समाप्त होने के बाद ही यहाँ से चलेंगे! दीदी ने मुझे एक बार डाक्टर को बुला कर दिखने की सलाह भी दी! उनके ऐसा कहने पर मैंने डाक्टर साहिब को फोन करा और उन्हें आ कर देख जाने को कहा, तो उन्होंने शाम को चार बजे तक पहुचने का कहा! तब मैंने नितिन को कालेज में फोन कर के सब बता दिया और कहा कि वह चार बजे से पहले ही घर पहुँच जाये!
शाम को ४ बजे डॉक्टर साहिब आये और मेरा चेकअप किया और कहने लगे कि मेरा स्वस्थ पहले से बहुत बेहतर हो गया है और मैं अब उठ बैठ सकती हूँ तथा नहा धो भी सकती हूँ! लेकिन मुझे अभी खाने पीने का ध्यान रखना होगा और आराम भी करना होगा! मैं सिर्फ घर

में चल फिर सकती हूँ! डॉक्टर साहिब के जाने के बाद मैंने मुन्नी को कह दिया कि उसे अगले दिन से जल्दी आने कि जरुरत नहीं है और जैसे पहले आती थी वैसे ही आया करे! मुन्नी के जाने के बाद मैं उठ कर बाथरूम गई और बाद में नितिन के कमरे में उसके पास जा कर बैठ गई! नितिन बिस्तर पर बैठा पढ़ रहा था तो मैं भी उसी के पास बैठे बैठे लेट गई! आधे घंटे के बाद नितिन का काम समाप्त हो गया तो वह भी मेरे पास लेट गया और मेरे चेहरे पर हाथ फेरने लगा! अचानक उसने मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे मुहँ को चूम लिया! मुझसे भी नहीं रहा गया और मैंने भी उसके होंठों पर जोर से किस कर दिया! फिर क्या था नितिन मेरे साथ लिपट गया और होटों को होटों

से भिड़ा कर किस करने लगा! हम बहुत देर तक एक दुसरे कि जीभ को भी मुहँ में ले कर बारी बारी चूसते रहे और किस करते रहे!
रात का खाना खाने के बाद हम दोनों नग्न हो कर एक ही बिस्तर पर लेट गए! नितिन कभी मेरे मम्मों को चूसता और कभी हाथों से मसलता! बीच बीच में वह अपने हांथों से मेरी चूत और चूत के बालों को सहला भी देता! मैं भी उसके लौड़े और टट्टों से खेलती रही, कभी आगे पीछे हिलती, कभी मरोड़ती, कभी सुपाडे को मॉस से ढक देती और कभी सुपाडे को बाहर निकल कर उसे जीभ से चाट लेती! इस तरह आधे घंटे तक हम एक दुसरे से खेलते रहे और रोज कि तरह के एक दूसरे को चूसते चसाते रहे! जब हम दोनों ने अपनी अपनी शरबत और रबड़ी की टंकियां खाली कर दी तब सीधे हो कर एक दूसरे से लिपट के सो गए! सुबह नितिन कि नींद खुली तो वह किचन में

जा कर चाय बना लाया और हम दोनों ने चाय पी! फिर हम दोनों एक ही बाथरूम में घुस गए और एक साथ टोयेलेट सीट पर बैठ कर मूता भी और हगा भी! बाद में नितिन ने मुझे खूब साबुन लगा कर नहलाया, उसने हर जगह हाथ लगा लगा कर मसला और मस्ती ली! मैंने भी उसे खूब साबुन लगाया और उसके लौड़े और टट्टों को रगड़ रगड़ नहलाया! फिर हमने एक दुसरे को कपड़े पहनाये, दोनो ने मिल के नाश्ता बनाया और खाया! कालेज जाने से पहले नितिन मेरे पास बाई कहने आया और मेरे मेरे मम्मों को दबा कर मुझे किस किया! जब वह किस कर रहा था तब मैंने भी उसके लौड़े और टट्टों को कस के दबा दिया, जिससे वह एक दम सी सी कर उठा था!
नितिन के जाने के बाद मैं कुछ देर के लिए मैंने बिस्तर पर आराम किया और मुन्नी के आने पर उठ कर उस को काम समझा

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या तथा किचन का काम समेटने में लग गई! दुपहर को जब मुन्नी काम खतम कर के चली गई तो मैं नितिन का इन्तजार करते हुए फिर बिस्तर पर लेटे लेटे सो गई! तीन बजे के बाद नितिन आया और मुझे जगाया, तब हम ने खाना खाया और फिर उसीके कमरे में लेट कर एक दुसरे के अंगों से छेड़खानी करते हुए सो गये! पांच बजे नींद खुली तो मैंने उठ के कपड़े पहने और बाहर वाले कमरे आ कर बैठ गई! नितिन ने भी कपड़े पहने और पढ़ने बैठ गया! साढ़े पांच बजे मुन्नी आई और उसने हमें चाय पिलाई, फिर रात का खाना बनाया और बाकी का काम समेट कर चली गई! मुन्नी के जाने के बाद मैंने ब्रा और कच्छी सहित अपने कपड़े उतार दिए और निकर तथा बनियान पहन कर नितिन के पास बिस्तर पर लेट गई! नितिन पढाई के साथ साथ अपने एक हाथ से मेरे मम्मों और निप्पलों को मसलता रहा!

जब वह पढ़ कर उठा तो मैंने खाना लगाया और हमने एक दूसरे को खिलाया! खाने के दौरान नितिन ने कहा कि उस रात हम उसीके कमरे में सोते हैं! मेरे हाँ कहने पर उसने बिस्तर को ठीक किया और अपने कपड़े उतार दिए! फिर मेरी निकर तथा बनियान उतार कर मुझे भी नग्न कर दिया और मुझ से चिपट गया! बातों ही बातों में नितिन ने बताया कि उसने मुझे और दीदी को छोड़ कर और किसी भी लड़की या औरत को नग्न नहीं देखा था! मुझे और दीदी को वह अक्सर बाथरूम में नहाते हुए देखा करता था! जब मैंने पूछा कि कैसे देखता था तो उसने बताया कि जब मैं और दीदी नहाने जाती थीं तो अक्सर बाथरुम का दरवाज़ा आधा खुला छोड़ देती थीं और वह उस में

से झांक कर देखा करता था! उसने यह भी बताया कि दीदी तो चूत के बाल हमेशा साफ़ रखती है और उसने उन्हें कई बार शेव करते हुए भी देखा था! उसने बताया कि उसका किसी भी लड़की या औरत के साथ कोई भी सम्बन्ध नहीं था और मैं पहली लड़की हूँ जिसे उसने छूआ था, हाँ उसने दीदी के पास लेटे लेटे उनके मम्मों पर कई बार हाथ रख कर सोया था! उसने बताया कि लड़कियों से क्या और कैसे करना होता है इसके बारे में उसे कुछ भी पता नहीं है और इसीलिए डरता है कि अगर वह बाहर किसी लड़की से रिश्ता बनाए तो कहीं उसका मजाक ना उड़ जाये! इसलिए उसने इस बारे में मुझे उसकी सहायता करने का आग्रह किया ताकि बात घर में ही रहेगी! जब मैंने उससे पूछा कि किसी तरह कि सहायता चहिये तो उसने मेरे साथ चुदाई करने की इच्छा प्रकट की!

मैंने उसे बताया कि मैं तो पहले कभी चुदी नहीं और मुझे इस बारे में जयादा मालूम नहीं है तो उसने कहा कि वह भी पहली ही बार करगा! उसने बताया कि उसने इन्टरनेट पर इस बारे में बहुत कुछ देखा हुआ है! तब मैंने भी उसे बताया कि नेट पर तो मैंने भी बहुत कुछ देखा है पर कुछ करने को डर लगता है! इसके बाद हम रोज कि तरह किस करते रहे और चूत और लौड़े को चूसते रहे! नितिन की बातों और चुसाई के कारण मैं बहुत गरम हो गई और मुझ से रहा नहीं गया तो मैंने नितिन के कान में कहा कि मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है और उसको मिटाने के लिए कुछ करे! तब नितिन ने उठ कर मुझे सीधा किया और मेरी टांगों को चौड़ा कर के मेरी चूत को चूसने लगा!

वह बार बार मेरे छोले पर जीभ फेरने लगा जिस की वजह से मैं आह्ह्ह आहह्ह्ह और सी सी सी की आवाजें निकालने लगी! मेरे अंदर की आग बहुत जयादा भडकने लगी तब मैंने नितिन से कहा कि अब और सहा नहीं जाता और अब थे आग तो तुम्हारी बौछार से ही बुझेगी! तब नितिन ने मेरी दोनों टाँगे उपर उठा कर अपने कंधों पर रखा और अपने लौड़े को मेरी चूत के मुहँ पर रख के उसे अंदर डालने के लिए धक्का लगाने लगा लेकिन उसका लौड़ा बार बार फिसल जाता था!

कई कोशिशों के बाद जब नितिन को सफलता नहीं मिली तो उसने मुझसे मदद के लिए इशारा किया! तब मैंने हाथ नीचे कर के नितिन के लौड़े को पकड़ कर चूत के मुहँ पर लगा दिया और उसे धक्का लगाने को कहा! नितिन ने जैसे ही अहिस्ता से धक्का लगाया तो उसका लौड़ा फिसला नहीं और मेरी चूत के मुहँ पर टिक गया! अगले धक्के लगने से उसका सुपाडा मेरी चूत के अंदर घुसने लगा और मेरी चूत में दर्द होनी शुरू हो गई! मैंने उस दर्द को बर्दाश कर लिया और मैंने नितिन को धक्का लगाते रहने को कहा! जैसे ही नितिन ने एक और

धक्का लगाया तो उसका आधा सुपाडा चूत के अंदर चला गया और मेरी उईईईईई………………… कर के चीख निकल गई! मुझे लगा कि मेरी चूत फट रही थी और वह दर्द मुझ से सहन नहीं हो रहा था! नितिन ने पूछा भी कि क्या वह लौड़े को हटा ले लेकिन मैंने उसे मना कर दिया और धक्का लगाने को कहा! इस बार नितिन ने थोड़ा जोर से धक्का लगाया और उसका पूरा सुपाडा मेरी चूत के अंदर चला गया और मेरी तो उईईईईई………..माँ………. उईईईईई………..माँ………. की चीखे निकल गई! मैंने नितिन को थोड़ा रुकने को कहा!

लगभग पांच मिन्ट रुकने के बाद मुझे कुछ आराम मिला तो मैंने नितिन को फिर से धक्के लगाने को कह दिया! जब उसने अगला धक्का लगाया तो उसका लौड़ा मेरी चूत में दो इंच घुस गया था और दर्द के मारे मेरी चीखें पूरे कमरे में गूँज गई! मैं तड़पने लगी और मेरे आंसू निकल आये! इस बार नितिन रुका नहीं और एक और धक्का मार कर अपने आहा लौड़ा मेरी चूत के अंदर घुसा दिया! अब तो मैं हाथ पैर पटकने लगी, उईईईईई………..माँ………. उईईईईई………..माँ………. करके चीखें मारने लगी और नितिन को गालियां भी देने लगी!

नितिन का अब सुपाडे समेत चार इंच मेरी चूत में था इसलिए वह कुछ देर के लिए रुक गया! जब मैं शांत हुई तो मुझे लगा कि मेरी चूत से कुछ रिस रहा था, मैंने अपना हाथ अपनी चूत पर लगाया और उँगलियाँ को खून से लथपथ देखा तो मैं घबराह गई लेकिन फिर सोचा कि जब ओखली में सिर दिया है तो डरना किस बात का, यह तो होना ही था! इसके बाद नितिन ने मुझे शांत देख कर एक और धक्का पूरे जोर से लगा दिया और पूरा का पूरा आठ इंच का लौड़ा मेरी चूत के अंदर घुसा दिया! इस बार भी मुझे दर्द भी हुआ और मैं उईईईईई………..माँ………. कर के चीखी भी लेकिन यह दर्द अब मुझे मीठा लगने लगा था!

अब नितिन ने अहिस्ते अहिस्ते धक्के लगाने शुरू कर दिए और कुछ ही देर में ऊन्हे तेज भी कर दिए! मुझे आनंद आने लगा था और मैं भी उसके धक्कों का साथ देने लगी थी! लगभग दस मिन्ट कि तेज चुदाई के बाद मेरी चूत एकदम सिकुड गई और नितिन के लौड़े को जकड लिया! उसे धक्के लगाने में दिक्कत होने लगी थी तब वह थोड़ी देर के लिए रुका और मेरे ढीले होने का इंतज़ार करने लगा! जब उसे ढीलापन महसूस होने लगा तो वह फिर से धक्के लगाने लगा! इस बार वह बहुत तेज धक्के लगा रहा था और मैं उसे और तेज और तेज शाबाश नितिन बहुत तेज़ी से करने की आवाजें लगा रही थी! इसी तेज धक्कों में अचानक नितिन का लौड़ा फडफडाया और मेरी चूत भी एक दम से सिकुड़ी और हम दोनों की एक साथ चीखे निकली उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्………….. उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………..

आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… उईईईईईईईईई…………….. उईईईईईईईईई…………….. आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… और नितिन के लौड़े ने बरसात कर दी! एक बोछार, दो बोछार, तीन बोछार, चार बोछार, पांच बोछार , छह बोछार………… और फिर मैं गिनती भूल गई! पता नहीं नितिन ने कितनी ही बोछारें करी, मेरी चूत में तो जैसे बाढ़ आगई थी जिससे मेरी सारी आग बुझ गई! हम दोनों बहुत थक गए थे इसलिए नितिन ने मेरी टाँगे अपने कंधों से उतारी और निढाल हो कर मेरे ऊपर ही लेट गया, मेरी चूत भी ढीली होने लगी थी और उसका सिकुड़ा हुआ लौड़ा अब टल्ली (सुकड़ा हुआ लौड़ा) बन कर मेरी चूत से बहार निकलने लगा था! लगभग पांच मिन्ट के बाद नितिन का साँस में साँस आई तो वह मेरे ऊपर से हटा तथा अपनी टल्ली को मेरी चूत से बाहर निकला!

हम दोनों उठ कर बाथरूम गए और एक दूसरे को धोया तथा साफ़ किया, तब मैंने देखा कि नितिन कि टल्ली एकदम लाल हो गई है और उस पर नीले रंग कि नसें उभर आईं हैं! जब मैंने नितिन को इस बारे में बताया तो उसने कहा कि इतनी रगडाई के कारण तह तो होना ही था! फिर कमरे में आ कर नितिन ने मुझे लिटाया और मेरी चूत को ध्यान से देखा और बताया के वह भी काफी खुल गई थी, उसके बाहर का भाग बहुत लाल हो गया था तथा सूज गया था! अंदर का भाग गुलाबी रंग का होगया था! इस चुदाई से मुझे इतना आनद तथा संतोष मिला था कि मैंने पागलों कि तरह नितिन को अपने पास खींच कर लिटा लिया और उसे और उसकी टल्ली को चूमने लगी! नितिन भी मुझे और मेरी चूत को चूमता रहा और फिर हम दोनों एक दूसरे को लिपट तथा चिपट के नींद कि आगोश में खो गए!
अगले दिन क्या हुआ यह मैं आप को कुछ समय के बाद ही बताउंगी! तब तक कृपया इंतज़ार कीजिये और इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए! बाई बाई ……………!

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