नौकरानी की चूत का घोंसला

यह इंडियन सेक्स स्टोरी मेरे मकानमालिक की घरेलू नौकरानी के साथ चुदाई की है. मैं उसको नहाते हुए देखा करता था. मैंने उसको पटा कर उसकी चूत की चुदाई करनी चाही लेकिन …

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. दोस्तो, मैं अन्तर्वासना का बहुत बड़ा और पुराना प्रशंसक हूँ और अपनी कहानी आप तक पहुँचाना चाहता हूँ. लेकिन बहुत दिनों के बाद आज मौका मिला है। अगर कुछ त्रुटि हो गयी हो तो माफ कीजियेगा.

यह बात काफी पुरानी है, उस वक़्त मैं अपने गाँव से दूर रांची में में अपने परिवार के साथ किराये के मकान में रहता था. पापा की पोस्टिंग रांची में थी तो हम लोग वहीं पर साथ में रहते थे.

जिस मकान में मैं रहता था उस मकान का मालिक एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन था. सौ एकड़ जमीन थी उसकी लगभग। घर के आस पास बहुत सारे आम के बगीचे थे और बगीचे से बाहर खेत ही खेत थे. उसमें समय समय पर अनाज उगाए जाते थे।

मैं मकान के सबसे नीचे वाले फ्लोर पर रहता था और मकान मालिक ऊपर के फ्लोर पर रहता था. मकान मलिक के यहां ज्यादा लोग नहीं रहते थे. मकान मालिक व मालकिन, उसका एक लड़का और एक नौकरानी।
नौकरानी जिसका नाम सोनाली था दिखने में बहुत अच्छी थी. उसकी उम्र 25 साल की थी और मैं 21 साल का था. उस समय मेरा कॉलेज शुरू होने वाला था और मैं घर पर उन दिनों फ्री ही रहता था.

एक दिन सुबह जल्दी उठा और बगीचे में घूमने चला गया. जब मैं बगीचे में गया तो अचानक देखा कि सोनाली एक पेड़ के पीछे बैठ कर मूत्र त्याग कर रही थी. जब मैं उसके आगे बढ़ा तो वो हड़बड़ा कर उठी और कपड़े सही करने लगी. वो मेरी तरफ देख कर वो शर्म से पानी पानी हो रही थी और फिर वो चली गई.

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उसके चले जाने के बाद मैंने देखा कि जहां वो बैठी थी वहां पर जमीन में पानी के निशान हो गये थे. वो जमीन उसके पेशाब से भीग गयी थी. पता नहीं उसके बाद से मेरे अंदर उस नौकरानी की चूत को लेकर एक कामुकता सी जाग उठी थी.

अब मैं रोज सुबह जल्दी उठ कर सोनाली को ही देखता रहता था. सबसे पहले घर में वही उठती थी और बगीचे की तरफ का ताला खोल कर काम में लग जाती थी.

मैंने एक दो दिन ध्यान से देखा कि वो रोज बगीचे की तरफ पहले पेशाब करने के लिए जाती थी. जैसे ही पेड़ के पीछे बैठती थी तो मैं समझ जाता था कि वो मूत कर रही है. कई दिनों तक यह बात नोटिस करने के बाद मैं भी ब्रश करने के बहाने बगीचे में पहुंच जाता था ताकि उसको मूतते हुए देख सकूं. उसकी गांड के दर्शन कर सकूं. लेकिन हर रोज ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा था क्योंकि कई बार मैं सवेरे जल्दी नहीं उठ पाता था. लेकिन जिस दिन भी उठता था मैं उसकी गांड के दर्शन जरूर करता था.

जिस दिन मैं उसको नीचे से नंगी नहीं देख लेता था उस दिन मेरे मन में बेचैनी सी रहती थी. मैं उसके हर कार्यकलाप पर नजर रखने लगा था कि वो किस टाइम क्या काम करती है. मेरा ये सिलसिला रोज का बन गया था.

और एक दिन सोनाली को नहाते हुए देख ही लिया। वो हमेशा बाथरूम में नहीं नहाती थी. जब उसके नहाने का टाइम होता तो वो नहाने के लिए हमारे कमरे के पीछे जो स्टोर रूम था, ठीक उसी के पास खुली जगह पर एक हैंड पंप लगा हुआ था, वो उसी पर नहाती थी.

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दरअसल वो हैंड पंप बाउंड्री के भीतर में था और बाउंड्री में एक छोटा सा छेद था जिसके ठीक सामने हैंड पंप लगा हुआ था. मैं उसी बाउंड्री के बाहर से ठीक उसी हैंड पंप के सामने वाले छेद से छिप कर उसे नहाते हुए देखा करता था। जब वो नहाती थी तो ऊपर के सारे कपड़े पहन कर रखती थी. बाकी नीचे का कपड़ा खोल कर तौलिया लपेट लेती थी और नहाने लगती थी।

इस वजह से मैं उसके नीचे के हिस्से को तो नंगा देख पाता था लेकिन उसके चूचों को कभी मैंने नंगा नहीं देखा था. यहां तक कि मैंने उसकी चूत को भी नहीं देखा था क्योंकि वो तौलिया के नीचे से अपनी चूत पर साबुन लगाती थी और वो छेद थोड़ा सा ऊपर की तरफ था. इसलिए पूरा का पूरा नीचे तक का नजारा मुझे दिखाई नहीं पड़ता था. बस मैं इतना देख पाता था कि वो तौलिया को उठा कर नीचे बैठ जाती थी.

मेरा बहुत मन करता था कि उस पार जाकर अभी उसकी चूत को चूस लूं और उसकी गीली चूत की चुदाई कर दूं लेकिन अभी मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं आई थी. मैं बस अपने लंड को हिला कर ही काम चला लेता था. नहाने के बाद वो कपड़े बदलने के लिए उसी स्टोर रूम में जाती थी और दरवाजे को अंदर से बंद कर लेती थी. मैंने उसको कभी बाहर कपड़े बदलते हुए भी नहीं देखा था.

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