नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम डिप्टी है. मैं 28 साल की हू. मैं पटना की रहने वाली हू, और अभी तक मेरी शादी नही हुई. मेरी हाइट 5’8″ है, और फिगर 34-30-36 है. रंग मेरा गोरा है, और मैं दिखने में खूबसूरत हू.
शादी ना होने का कारण मेरी लंबी हाइट है. आज-कल लड़कों की हाइट ज़्यादा लंबी होती नही, और अपने से लंबी लड़की से लड़के शादी नही करते. इस सेक्स कहानी में मैं आपको बतौँगी कैसे मैने नौकर से छूट चुडवाई. तो चलिए शुरू करते है.
मैं अपने मम्मी-पापा की इक-लौटी बेटी हू. मेरे पापा की बुक्स की शॉप है. उनका काम अछा-ख़ासा है. उन्होने दुकान पर एक लड़का रखा हुआ है, जिसकी उमर 20 साल है. वो पिछले 3 साल से हमारी दुकान पर ही काम कर रहा है. उसका नाम असलम है.
2 महीने पहले पापा की तबीयत अचानक से खराब हो गयी. इतनी खराब की डॉक्टर ने उनको बेड रेस्ट के लिए बोल दिया. लेकिन पापा दुकान-दुकान करने लगे, और दुकान छ्चोढ़ कर घर पर बैठने को तैयार नही थे.
फिर मैने उनसे कहा की जीतने दिन वो दुकान नही जाएँगे, मैं चली जौंगी. ये सुन कर पापा मान गये. वैसे पहले मैं भी जॉब करती थी, लेकिन फिर छ्चोढ़ दी थी.
फिर अगले दिन से मैने दुकान पर जाना शुरू कर दिया. असलम वहाँ का सारा काम संभालता था. बस हिसाब का ध्यान रखना होता था. अब आपको असलम के बारे में बता देती हू.
असलम 5’11” हाइट वाला लंबा-चौड़ा लड़का है. उसने जिम जाके काफ़ी तगड़ी बॉडी बनाई हुई है. रंग तोड़ा सावला है उसका, और ज़्यादा पढ़ा लिखा नही है. लेकिन काम में बहुत तेज़ है. ई
इसी तरह मैं रोज़ दुकान पर जाने लगी. फिर एक दिन कुछ अलग हुआ. हम लोग शाम 8 बजे दुकान बंद कर देते थे. एक दिन ऐसे ही मैं दुकान बंद करवा कर घर के लिए निकल पड़ी. दुकान कोई 5 काइलामीटर डोर थी, और मैं अक्तिवा पर आती-जाती थी.
जब मैं घर के पास पहुँची, तो मैने देखा मेरा मोबाइल दुकान पर ही रह गया था. जैसे ही मुझे ये पता चला, मैने अक्तिवा वापस दुकान की तरफ घुमा ली. कुछ देर में जब मैं दुकान पर पहुँची, तो मैने देखा दुकान का छ्होटा दरवाज़ा खुला था.
मुझे लगा की असलम कुछ काम कर रहा होगा. मैने दरवाज़ा खोला, और अंदर चली गयी. अंदर मुझे असलम दिखाई नही दे रहा था. फिर मैने सोचा की वो बातरूम में होगा, क्यूंकी वहाँ की लाइट ओं थी. मैं घर के लिए लाते हो रही थी, तो मैने मोबाइल लिया, और वहाँ से निकालने लगी.
जैसे ही मैं बाहर जाने लगी, मुझे बातरूम से असलम की आवाज़ आई. वो बोल रहा था-
असलम: आ डिप्टी, श डिप्टी मेरी जान. मेरी रंडी बन जेया तू. बहुत सेक्सी है तो. तुझे छोड़ने में बहुत मज़ा आएगा.
ये सब सुन कर मैं बहुत गुस्से में आ गयी. मैने सोचा जिसको मैं शरीफ समझ रही थी, वो लड़का मेरे बारे में ऐसी गंदी बातें कर रहा था. मैने सोचा की आज इसको रंगे हाथ पाकडूँगी.
ये सोच कर मैं आयेज बढ़ी, और बातरूम का दरवाज़ा खोल दिया. असलम अंदर आधा नंगा खड़ा था. उसका लंड उसके हाथ में था. वो मुझे देख कर एक-दूं से दर्र गया. मैं जैसे ही कुछ बोलने लगी, मेरी नज़र सीधे उसके लंड पर गयी. उसका लंड बहुत बड़ा और मोटा था.
दोस्तों जैसे की मैने बताया की मेरी शादी नही हो रही थी. लेकिन कहीं ना कहीं मेरे अंदर वो प्यास च्छूपी बैठी थी, जो हर औरत के अंदर होती है. और वो थी लंड की प्यास. असलम का बड़ा और मोटा लंड देख कर मेरी बोलती बंद हो गयी. मेरे अंदर बह रहा खून डबल स्पीड से दौड़ने लगा.
तभी वो बोला: दीदी आप! आप यहाँ कैसे?
उसकी बात सुन कर मैं होश में आई. मेरा गुस्सा तो तादा हो गया था, उसका लंड देख कर. लेकिन फिर भी मैं गुस्से का नाटक करती हुई बोली-
मैं: असलम ये क्या कर रहे हो तुम? तुम्हे शरम नही आती. तुम ये सोचते हो मेरे बारे में?
ये सब बोलते हुए मैं लगातार उसका लंड देख रही थी. उसने भी ये नोटीस किया की मैं उसके लंड को घूर रही थी. फिर वो बोला-
असलम: सॉरी दीदी, लेकिन आप हो ही इतनी सेक्सी. मैं खुद पर कंट्रोल नही कर पाया.
मैं: ये कोई जवाब नही हुआ.
असलम मेरी तरफ बढ़ते हुए बोला: दीदी जवानी एक बार आनी है. उसमे अगर मज़ा नही किया तो क्या किया. आपका भी तो दिल करता होगा ना मज़ा करने को. देखना चाहेंगी चू कर इसको.
मैं: मैं क्यूँ छूने लगी तुम्हारे इसको?
असलम: जैसे देखे जेया रही हो, वैसे चू भी लो.
ये सुन कर मैं थोड़ी घबरा गयी. असलम मेरे पास आया, और उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया. ये ज़िंदगी में पहली बार मैने किसी मर्द का लंड पकड़ा था. लंड हाथ में लेते ही मेरी छूट से पानी बहने लगा. फिर वो बोला-
असलम: इसको हिलाओ ना.
उसकी बात मानते हुए मैं लंड को हिलने लगी, जैसे पॉर्न वीडियो में देखा था. मैं अब तक उसके वश में आ चुकी थी. मैं लंड हिला ही रही थी, की अचानक उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया, और मेरे होंठो से होंठ लगा दिए.
होंठो से होंठ मिलते ही मैं किसी और दुनिया में पहुँच गयी. वो मेरे होंठ चूसने लगा, और मैं उसका साथ देने लगी. होंठ चूस्टे हुए वो मेरी लेगैंग्स (मैने लेगैंग्स और कुरती पहनी थी) के उपर से मेरे चूतड़ दबाने लगा. मैं आ आ ह्म ह्म की सिसकियाँ भरने लगी.
जब मैने उसको रोका नही, तो उसने मुझे गांद से पकड़ कर काउंटर पर बिता दिया. फिर मेरी लेगैंग्स और पनटी को खींच कर निकाल दिया. अब मेरी छूट नंगी उसके सामने थी. वो नीचे गया, और मेरी छूट चाटने लगा. मैं पागल होने लगी.
कुछ देर में वो खड़ा हुआ, और अपना लंड मेरी छूट पर सेट करके धक्का मारा. उसका आधा लंड मेरी छूट में गया, और मैं तड़प गयी. उसने मेरे होंठो पर अपने होंठ लगाए, और मुझे छोड़ने लगा.
कुछ दर्द के बाद मुझे बहुत मज़ा आने लगा. मैं पीछे लेट गयी, और वो मेरे बूब्स दबाते हुए मुझे छोड़ने लगा. छूट इतना पानी छ्चोढ़ रही थी, की छाप-छाप की आवाज़े आने लगी. 10 मिनिट में मेरा पानी निकल गया, लेकिन वो उसके बाद भी मुझे छोड़ता रहा. फिर और 10 मिनिट छोड़ने के बाद उसने अपना माल मेरी जांघों पर निकाल दिया.
मैं फिर खड़ी हुई, और खुद को सॉफ किया. फिर कपड़े ठीक करके वहाँ से निकल गयी. पापा के दुकान पर वापस आने से पहले जीतने भी दिन मैं वहाँ रही, हर रात वापस आने से पहले असलम ने मुझे छोड़ा. मुझे बहुत मज़ा आया.