नौकर ने दिया धक्का-पेल चुदाई का मज़ा

ही फ्रेंड्स, मैं दिव्या अपनी कहानी का अगला पार्ट लेके आप सब के सामने हाज़िर हू. अगर आपने पिछला पार्ट नही पढ़ा है, तो पहले उसको ज़रूर पढ़े.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की मैने एक बाय्फ्रेंड बनाया जिसने मुझे चुदाई की आदत डाल दी. उससे ब्रेक-उप के बाद मैने दूसरा बाय्फ्रेंड बनाया. लेकिन जब मैं उसके साथ चुदाई कर रही थी, तो वो शुरू में ही झाड़ गया.

फिर मेरी नज़र हमारे नौकर पद पड़ी, जो हमे च्छूप कर देख रहा था. वो हमेशा मुझे देखता रहता था, और आज भी च्छूप कर देख रहा था. फिर मैने सोचा की क्यूँ ना इससे अपनी छूट की आग बुझवाई जाए. ये सोच कर मैं उसको रूम में ले आई, और निकम्मे ब्फ को बाहर निकाल दिया. अब आयेज बढ़ते है.

मैं राजू की तरफ बढ़ी तो उसने आँखें नीचे कर ली. मैं बिल्कुल नंगी थी. फिर मैने उसके पास जाके कहा-

मैं: राजू मेरी बात ध्यान से सुनना. मेरी छूट में इस वक़्त आग लगी हुई है, जिसको बुझाना बहुत ज़रूरी है. मेरा ब्फ निकँमा निकला, और अब तू ही ये काम कर सकता है. मुझे पता है मेरे लिए तेरे अंदर हवस है, क्यूंकी मैने तुझे हमेशा से मुझे देखते हुए नोटीस किया है.

मैं: समझ ले आज तेरे पास मौका है मेरे साथ कुछ भी करने का. मेरे साथ कुछ करने के जो सपने तूने देखे है, आज वो सब कर दे. क्या पता दोबारा कभी मैं तुझे ये ऑफर डू या ना डू. तो आज तेरे पास मौका है मेरे साथ लंड की प्यास बुझाने का. आज ना मैं मालकिन हू, ना तुम नौकर. मुझे अभी के लिए बस एक रंडी समझो.

मेरे ये कहने के बाद राजू ने मेरी तरफ देखा. वो मुस्कुराया, और उसने मेरी कमर में हाथ डाल मुझे अपनी तरफ खींचा. अब मैं उसके जिस्म के साथ चिपक गयी. फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठो की तरफ बढ़ाए, और मैने अपनी आँखें बंद कर ली.

उसके होंठ मेरे होंठो के साथ जुड़े, और हम दोनो ने किस करनी शुरू कर दी. राजू शुरू में ही वाइल्ड किस करने लग गया, इतना भूखा था वो. क्या मस्त खींच-खींच कर मेरे होंठ चूस रहा था वो. होंठ चूस्टे हुए वो मेरी पीठ सहलाने लगा, और धीरे-धीरे मेरी गांद पर पहुँच गया.

अब हमारी इनटेन्स किस तो चल ही रही थी, साथ में वो मेरे चूतड़ भी मसल रहा था. मुझे मज़ा आ रहा था, और मैं फिरसे गरम होने लग गयी. फिर वो अपना हाथ मेरी गांद के चियर में ले गया, और मेरी गांद के च्छेद को दबाने लगा.

मैने फिर किस तोड़ी, और उसको पकड़ कर बेड पर धक्का दिया. फिर मैं उसके उपर आई, और उसकी बेल्ट खोल कर उसकी जीन्स नीचे की. उसका काला साँप अंडरवेर में खड़ा हुआ सॉफ दिख रहा था. फिर मैने उसका अंडरवेर नीचे किया, और उसका लंड बाहर निकाल लिया.

उसका लंबा, मोटा, और काला लंड देख कर मेरे मूह में पानी आ गया. मैने देखते ही लंड को अपने हाथ में लिया, और उसको हिलने लग गये. फिर मैने उसको अपने मूह में डाल लिया, और चूसने लगी. राजू आ आ करने लगा.

मैं अब ज़ोर-ज़ोर से लंड चूस रही थी. फिर राजू ने अपने बाकी कपड़े उतार दिए, और पूरा नंगा होके मुझे उल्टा घुमा कर अपने उपर ले लिया. अब हम 69 पोज़िशन में थे. फिर राजू ने अपना मूह मेरी छूट पर लगा लिया, और मेरी छूट चाटने-चूसने लगा. इधर मैं उसका लंड ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थी.

हम दोनो फुल जोश में एक-दूसरे का लंड और छूट चाट-चूस रहे थे. कुछ देर ऐसा ही करने के बाद उसने मुझे अपने उपर से नीचे उतार कर लिटाया, और खुद मेरे उपर आ गया. फिर उसने मेरे दोनो बूब्स पकड़े, और उनको ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा.

नीचे से उसका लंड मेरी छूट के साथ बार-बार टकरा रहा था. मैं इतनी उत्तेजित हुई पड़ी थी, की गांद हिला कर कोशिश कर रही थी की लंड मेरे अंदर चला जाए. राजू मेरी बेचैनी को समझ गया, और अपना लंड हाथ में लेके मेरी छूट पर रगड़ने लगा. मैं तड़प रही थी हवस में.

फिर उसने लंड छूट के मूह पर रखा, और ऐसा ज़ोर का धक्का मारा, की लंड मेरी छूट को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया. मेरी चीख निकली, तो उसने लंड बाहर निकाल कर फिरसे धक्का मारा. मैं उसको रुकने के लिए बोलने लगी, लेकिन वो बार-बार ऐसा करने लगा. ऐसा लग रहा था की मुझे दर्द दे कर उसको मज़ा आ रहा था. वो तब तक ऐसा कर रहा था, जब तक मुझे दर्द हो रहा था.

फिर उसने मेरे बूब्स चूसने शुरू किए, और साथ में मेरी छूट छोड़ने लगा. बड़ा मज़ा आ रहा था. मैं चुड़क्कड़ ज़रूर थी, लेकिन इतना लंबा लंड मैने कभी नही लिया था. वो ढाका-धक मुझे छोड़ रहा था, और साथ में कभी मेरे होंठ चूस्टा, कभी बूब्स चूस्टा, और कभी गर्दन चूमता. मुझे तो ऐसा लग रहा था की मैं जन्नत में थी.

फिर उसने अपनी स्पीड और बधाई, और फुल स्पीड पर मुझे छोड़ने लगा. मैं अपने चरम पर पहुँच चुकी थी, और मेरी छूट पानी छ्चोढ़ गयी. वो फिर भी धक्के मारता रहा. अब मेरी छूट सुन्न हो गयी थी. फिर उसने छूट से लंड निकाला, और मुझे घोड़ी बना लिया.

मेरी गांद मेरे पहले ब्फ ने छोड़ी थी, वो भी दो बार. और उसको काफ़ी वक़्त हो चुका था. राजू ने घोड़ी बनते ही मेरी गांद के च्छेद को जीभ से चाटना शुरू किया. इसमे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. फिर उसने लंड सेट किया, और ज़ोर लगाने लगा.

जैसे ही लंड का टोपा अंदर गया, मेरी तो जान ही निकल गयी. मैं चीखने लगी, लेकिन वो प्रेशर बढ़ता गया. धीरे-धीरे उसका लंड मेरी गांद में घुसता गया. मैं बहुत दर्द में थी, लेकिन वो मुझे खुद से अलग नही होने दे रहा था. फिर जब लंड पूरा अंदर घुसा गया, तो वो रुक गया.

कुछ मिनिट बाद वो धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा. धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा, और मुझे मज़ा आने लगा. कुछ देर में मैं किसी रंडी की तरह उससे अपनी गांद छुड़वा रही थी. मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा था. 20 मिनिट मेरी गांद छोड़ने के बाद उसने लंड मेरे मूह में डाला, और सारा माल मुझे पीला दिया. मेरे नौकर ने मुझे पूरी तरह संतुष्ट कर दिया.

उस दिन के बाद मैं जब चाहे उससे चुड लेती थी. थे एंड.

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