मेरा नौकर बन गया मेरा मलिक

दोस्तों मेरा नाम अमृता है. मैं एक लॉयर हू, और मेरी अपनी लॉ फर्म है. मेरी उमर 34 साल है, और मैं दिखने में ब्यूटिफुल हू. रंग मेरा गोरा है, और हाइट मेरी 5’7″. फिगर मेरा 36-32-36 है. सारे मर्द मुझे हवस भारी नज़रों से देखते है.

5 साल पहले मेरी शादी एक अमीर घर में हुई थी. मेरे पति हॅंडसम थे, लेकिन उनके परिवार वाले लालची थे. उन्होने शादी की रात की ऐसी डिमॅंड रखी, जिसको मेरे घर वाले पूरा नही कर सकते थे, तो हमारी शादी सुहग्रात से पहले ही टूट गयी.

मेरे घर वालो ने मुझे बड़ी मुश्किल से शादी के लिए मनाया था. लेकिन इस हादसे के बाद मैने उनको सख्ती से दोबारा शादी करने से माना कर दिया. लेकिन घर वाले होते ही चिपकू है, तो मुझे एमोशनल ब्लॅकमेल करने लगे.

घर पे रहना मुश्किल हो गया, तो मैने दूसरे शहर में फर्म खोल ली, और एक रेंटेड फ्लॅट में रहने लगी. मेरा काम अछा चल पड़ा, तो मैं बिज़ी रहने लगी. मैं दोस्तों के साथ घूमती-फिरती और ऐश करती थी. लेकिन मैं किसी लड़के के साथ सेट नही होती थी, बस दोस्त बना लेती थी. अपनी छूट की प्यास मैं फिंगरिंग करके बुझा लेती थी.

फिर मुझसे एक ग़लती हुई, जिसकी वजह से मेरी छूट की चुदाई शुरू हो गयी, और मैं अपने ही घर में गुलाम बन गयी. चलिए बताती हू सब कैसे हुआ.

इन दीनो मेरी फर्म का काम काफ़ी बढ़ गया था. मैं घर पर आके अपना खाना खुद पकती थी, लेकिन काफ़ी दीनो से मैं काफ़ी लाते हो जाती थी, और खाना खाए बिना ही सोने लगी. इससे मेरी तबीयत खराब होने लगी.

फिर मेरी एक फ्रेंड ने मुझे एक कुक रखने के लिए कहा. मैने उसकी बात मान ली, और एक 19 साल के लड़के को कुकिंग के लिए रख लिया. उसका नाम मोनू था. वो दूसरे शहर से था, इसलिए उसने मेरे घर में ही रहने के लिए बोला. मैने भी सोचा की 19 साल के लड़का तो बच्चा ही होता है, तो उसको हा बोल दिया.

फिर वो अपना बाग लेके मेरे घर में आ गया. उसको मैने 10×8 का स्टोर रूम रहने को दे दिया. वो बहुत अछा खाना बनता था, जिसको खा कर रूह खुश हो जाती थी. मैं उससे बहुत खुश थी.

फिर एक दिन मैं थोड़ी जल्दी घर पर आ गयी. जल्दी आई थी, तो खाना भी जल्दी खा लिया, और फ्री होके टीवी देखने लगी. मोनू भी फ्री होके साइड में बैठ गया, और टीवी देखने लगा. तभी टीवी में चल रही फिल्म में कुछ सेक्सी सीन्स आने लगे. मैं उनको देख कर गरम होने लगी. फिर मैने टीवी बंद किया, और अपने रूम में चली गयी. आज मेरा फिंगरिंग करने का मूड था.

सोने से पहले मैं अपने कमरे में पानी का एक जुग रखती हू. मैने सोचा की पहले पानी ले आती हू, और फिर फिंगरिंग करूँगी. फिर मैं उठी, और किचन में पानी लेने गयी. रास्ते में मोनू का रूम पड़ता था. उसका दरवाज़ा तो बंद था, लेकिन अंदर से आ आ की आवाज़े आ रही थी.

उसकी आवाज़े सुन कर ही मैं समझ गयी की वो अंदर मूठ मार रहा था. तभी मुझे पता नही क्या हुआ, मैने सोचा क्यूँ ना आज असली लंड के दर्शन कर लिए जाए.

ये सोच कर मैने दरवाज़ा हल्का सा खोला, और अंदर झाँकने लगी. अंदर का नज़ारा देखते ही मेरी आँखें बड़ी हो गयी. मोनू बेड पर बैठा था, और मूठ मार रहा था. उसका लंड काफ़ी बड़ा था, लगभग 7 इंच का.

मैने कभी सोचा नही था की 19 साल के लड़के का लंड 7 इंच का हो सकता था. उसका लंड देख कर मैं मंतरा-मुग्ध हो गयी, और मेरी छूट में खलबली मच गयी. इससे पहले मैने सेक्स वीडियोस में इतना बड़ा लंड देखा था.

मोनू आँखें बंद करके अपने लंड को ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था. मुझे लगा की अभी जो सीन देखा था, उसी लड़की को इमॅजिन करके मूठ मार रहा होगा. उसके लंड की चाँदी जब उपर-नीचे होती, तो मुझे मेरी छूट में कुछ-कुछ होने लगता.

मेरा हाथ उसके लंड को देखते हुए मेरी छूट पर चला गया. मैं अपने पाजामे के उपर से अपनी छूट रगड़ने लगी. मुझे बड़ा मज़ा आने लगा. तभी मोनू बोला-

मोनू: दीदी आ, आप बहुत सेक्सी हो. एक बार डेडॉ दीदी.

ये सुन कर मेरी वासना और भड़क उठी. क्यूंकी दीदी वो मुझे बुलाता था. इसका मतलब ये था की वो मुझे इमॅजिन करके मूठ मार रहा था. अब मेरे दिल में आने लगा की मैं अंदर जाके उसको रंगे हाथ पाक्ड़ू, और फिर अपनी छूट की प्यास उससे बुझवौ. लेकिन फिर मैने अपने आप पर कंट्रोल किया, ये सोच कर की वो एक नौकर था.

मैं जल्दी से अपने कमरे में गयी, बेड पर लेट कर पाजामा और पनटी निकले, और फिर अपनी नंगी छूट को रगड़ने लगी. मेरा हाथ छूट पर था, आँखें बंद थी, और बंद आँखों में मोनू का लंड था.

मैं बड़ी तेज़ी से अपनी छूट के दाने को रग़ाद रही थी, और इसमे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरे मूह से आ आ की सिसकियाँ निकल रही थी. मैं स्पीड तेज़ करती जेया रही थी, और मज़ा बढ़ता जेया रहा था. फिर एक-दूं से मेरी छूट से पानी की पिचकारी निकली. मेरा शरीर झटके खाने लगा, और मुझे चरमसुख मिलने लगा.

अब मैं शांत हो गयी थी, और पूरी तरह से सॅटिस्फाइ थी. फिर मैं वैसे ही पड़ी रही, और कब सो गयी, मुझे पता ही नही चला. सुबा जब मेरी आँखें खुली, तो मैं नंगी पड़ी थी. मेरी छूट का पानी मेरी झांतो में जमा हुआ था.

फिर मैं उठी, और बातरूम गयी. मैं फ्रेश हुई, और फिर रेडी हो कर अपने कमरे से बाहर आई. मोनू नाश्ता रेडी कर चुका था, जो टेबल पर सज़ा हुआ था. जब मैने मोनू को देखा, तो मुझे रात को देखे उसके लंड की याद आ गयी. लंड को याद करते ही मेरी छूट में सुरसुरी सी बहने लगी.

नाश्ता करके मैं किचन में बर्तन रखने गयी. तभी मुझसे एक स्पून नीचे गिर गया. मैं स्पून उठाने नीचे झुकी, तो टाँगों के बीच से मेरी नज़र मोनू पर पड़ी. वो मेरी गांद को देख रहा था. मैने पंत-शर्ट पहनी थी, और मेरी पंत टाइट थी, जिसकी वजह से गांद की शेप सॉफ नज़र आ रही थी. तभी मैने उसके लंड की तरफ देखा, जो उसके पाजामे में खड़ा हुआ सॉफ दिख रहा था.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पढ़ने को मिलेगा. कहानी की फीडबॅक आप औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर दे सकते है.

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