नौकर बन गया मलिक और लंड चुस्वाया

हेलो दोस्तों, मेरा नाम मानव है, और मैं 24 साल का हू. मैं मुंबई में अकेला रहता हू, क्यूंकी मेरी जॉब मेरे घर से डोर है. कंपनी ने मुझे एक 2भक फ्लॅट के, साथ एक कार, और घर की सॉफ-सफाई के लिए एक नौकर दिया. नौकर का नाम अब्दुल है.

पहले तो मुझे नौकर के लिए झीजक हुई. लेकिन कंपनी की सर्वीसज़ में वो इंक्लूड था. तो मैने ज़्यादा ध्यान नही दिया. मुझे क्रॉस ड्रेसिंग का बहुत शौंक था. क्यूंकी मेरी गांद उभरी हुई है, और मेरे बूब्स भी है. तो पहले तो मैं मम्मी की ब्रा, पनटी, सारी, सलवार, कुर्ता पहन कर ट्राइ करता था. पर अब अकेले रहने के कारण मेरे पास कोई कपड़े नही थे.

फिर मैने ऑनलाइन ब्रा, पनटी, लाइनाये, और बहुत सेक्सी-सेक्सी ड्रेसस मँगवाई. मैं सुबा 9 बजे ऑफीस जाता था, और शाम के 7 बजे आ जाता था. 2 दिन बाद जब मैं घर पर नही था, तब पार्सल आ गया, और मैं वो देख के बहुत खुश हुआ.

मैने सीधे जेया कर सब ट्राइ किया, और अपनी फोटोस भी ली. फिर मैं सो गया. अब्दुल घर में पुर दिन अकेला रहता था. क्यूंकी वो मेरे ही फ्लॅट में रहता था. फिर एक दिन जब मैं ऑफीस से लौटा तो भीगा हुआ था बारिश की वजह से.

मैं अपने रूम में गया, तोड़ा अपना बदन पोंचा, और खुद को शीशे में देखने लगा. जब देख रहा था तो मुझे ब्रा पहनने का मॅन हुआ. वो दिन मैं मेरे गीले बदन की वजह से बहुत ज़्यादा सेक्सी लग रहा था. फिर मैने स्टॉकिंग्स पनटी और ब्रा पहन ली.

मैने लिपस्टिक लगा ली, अपना मेकप किया, और फोटोस ले ही रहा था की तभी दरवाज़े पर अब्दुल आ गया. मैने अपने आप को टवल से ढकने की कोशिश की पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अब्दुल का रंग काला था, और वो हाइट में तोड़ा छ्होटा था. पर उसके मसल्स बहुत ज़्यादा थे, और उसकी आगे भी 43 थी. फिर भी वो बहुत तगड़ा मर्द दिखता था.

उसने मुझे देख कर बोला: क्या च्छूपा रही है रंडी? मुझे पता है तेरे छिनाल-पाने के बारे में. तूने ये नही सोचा क्या की जब तू ऑफीस गयी तब ये पार्सल आया था, और मैने ये खोल कर देख भी लिया था. मुझे पता है तुझे रंडियों के कपड़े, और उनकी तरह सजना पसंद है. लेकिन अब तक मैं चुप था. पर…

ये सुनते ही मेरे मूह से निकला: पर क्या?

अब्दुल बोला: एक रंडी बनने के लिए तुझे पहले एक मर्द के लोड से चूड़ना होगा, और उसका बिस्तर गरम करना होगा. क्या तूने कभी चुडवाया है?

मैने कहा: नही, मेरे मॅन में कभी ये ख़याल नही आया. पर पहले मैने अपनी गांद में खीरा गाजर जैसी चीज़े डालने की कोशिश की थी. पर बहुत दर्द होता था.

उसने कहा: कोई बात नही रंडी. आज से मैं तुझे अपनी रखैल बनौँगा.

तभी मेरा दिमाग़ हिला, और मैने कहा: मैं ऐसा बिल्कुल नही करूँगा. वो भी तुम जैसे के साथ, ची!

तभी अब्दुल मेरे पास में आया और मेरे बाल पकड़े. फिर उसने अपना फोन निकाला, और मुझे मेरी पिक्स दिखाई जो की मेरी नंगी क्रॉस-ड्रेस करने की थी.

तभी उसने बोला: रंडी अगर तू मेरी रखैल नही बनी, तो कही मूह नही दिखा पाएगी.

मैने कहा: प्लीज़ डेलीट कर दो ना ये. मैं जो तुम कहोगे वो करूँगा.

उसने एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा. फिर जब मैने पूछा की क्यूँ मार रहे हो मुझे, तो उसने कहा-

अब्दुल: मदारचोड़, मुझे आप कहके बुला. वरना तेरी चाँदी उढेढ़ दूँगा रांड़. और मैं आज से तेरा मलिक हू, और तू मेरी रखैल. चल अब यहा आ रॅंड, और मेरी पंत उतार कर लोड्‍ा बाहर निकाल.

मैने वैसा ही किया जैसा उन्होने कहा. फिर जैसे ही मैने उनकी पंत नीचे की, मैने देखा की एक काले नाग की तरह मोटा-लंबा लोड्‍ा सीधा मेरे चेहरे से टकराया. मैं दर्र गया, क्यूंकी मेरा लंड सॉरी लुल्ली तो सिर्फ़ 3 इंच की ही थी. और वो 10 इंच लंबा बड़ा और 3 इंच मोटा था. उसका उपरी हिस्सा फूला हुआ था.

मैने डरते हुए पूछा: ये क्या है मलिक?

उन्होने कहा: हमारा ख़तना होता है, जिसमे लोड के उपर की स्किन काट दी जाती है बचपन में. उसकी वजह से ही हमारा टोपा खुला और बड़ा होता है. तुम्हारी लुल्ली की तरह नही हाहहहा.

ये सुनते ही मुझे मेरे शरीर में करेंट सा लगा, और मैं झाड़ गया. वो भी बिना अपनी लुल्ली को हाथ लगाए. उस दिन मेरा सबसे ज़्यादा वीर्या निकला था. अब ये देख के अब्दुल मलिक हासणे लगे और कहा-

अब्दुल: बेहन की लोदी, तू तो इतने में ही झाड़ गयी.

अब उन्होने मेरे बाल पकड़े, और अपना बड़ा मोटा लोड्‍ा चुसवाने लगे. मैने इससे पहले कभी नही चूसा था. तो उनको मेरे दाँत लग गये. फिर उन्होने मेरे बाल ज़ोर से खींचे, और उपर उठा कर मुझे ज़ोरदार थप्पड़ लगाए.

उन्होने कहा: साली मदरजात, ठीक से चूसना नही आता क्या छिनाल? तेरी रंडी मा ने तुझे इतना भी नही सिखाया की लंड कैसे चूस्टे है? अगली बार अगर तेरा दाँत लगा साली, तो पुर दाँत तोड़ दूँगा.

फिर मैं बड़े ध्यान से लोड्‍ा चूसने लगा. 10 मिनिट बाद वो मेरा मूह और पास ले गये, और पूरा लोड्‍ा गले तक तूस दिया. फिर ज़ोर-ज़ोर से मेरे मूह की चुदाई करने लगे. 5 मिनिट बाद पूरा वीर्या मेरे मूह में निकाल दिया.

वो बहुत गरम और गाढ़ा था. मैने थूकने की कोशिश की, पर उनका विशाल लोड्‍ा अभी भी मेरे मूह में था और उन्होने उपर से मेरी नाक बंद कर दी. मुझे वो मजबूरन पीना पड़ा. फिर पूरा पीने के बाद उन्होने मूह से लंड निकाला, और तब मुझे चैन की साँस आई.

अब मेरे बिस्तर पर वो लेट गये, और मुझे अपने बड़े काले टटटे चाटने को बोले, जो की बहुत बड़े थे, काले और बदबूदार थे. वाहा काफ़ी बाल थे पर मैं चुप-छाप चाटने लगा.

अब रात बहुत हो चुकी थी, और सुबा मुझे ऑफीस भी जाना था. तो मैने उन्हे कहा-

मैं: अब मुझे सोने दीजिए मलिक. कल ऑफीस के लिए निकलना है.

तो उन्होने कहा: भोंसड़ी के, अब से तू म मेरा गुलाम, मेरा कुत्ता है. आज से तू नीचे फ्लोर पर सोएगा, और मैं तेरे बेडरूम पर. समझी रंडी?

मैं बिना आवाज़ किए वही नीचे सो गया.

तो दोस्तों ये मेरी कहानी का पहला पार्ट है. अगर आपको अछा लगा तो कॉमेंट्स में बताए, और अगले पार्ट में मैं बतौँगा की कैसे अब्दुल ने मेरी गांद मारी और सारे घर के काम करवाए.

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