नशे का दिखावा करके पापा का लंड चूसा

मेरा नाम प्रांजल है. मैं कर्नल की रहने वाली हू. मेरी उमर 22 साल है और मैं कॉलेज में फाइनल एअर की स्टूडेंट हू.

अपने फिगर के बारे में बात करू, तो काफ़ी अट्रॅक्टिव बॉडी है. रंग मेरा बहुत ज़्यादा तो नही, लेकिन गोरा है. नैन-नक्श मेरे मदहोश करने वाले है.

मेरी फॅमिली में मम्मी-पापा, और एक छ्होटी बेहन है. मेरी छ्होटी बेहन बोरडिंग स्कूल में है, और वहीं हॉस्टिल में रहती है. बात उस रात की है, जिस दिन मैने अपने एक फ्रेंड के बर्तडे पर दारू पी ली थी. और फिर मेरे पापा ने मुझे छोड़ दिया. चलिए विस्तार में बताती हू की क्या हुआ था.

उस दिन मेरे क्लास फ्रेंड का बर्तडे था. उसने एक क्लब में पार्टी दी थी. पार्टी का टाइम शाम 7 से 10 बजे तक का था. कुछ दिन पहले जब मैने मम्मी से पर्मिशन माँगी तो उन्होने तो पर्मिशन दे दी, लेकिन पापा से पूछना अभी बाकी था.

मेरी एंगेज्मेंट 2न्ड एअर के दौरान ही चुकी थी, पापा के एक फ्रेंड के बेटे से. मैने उससे जब पूछा तो उसने भी ओक कर दिया. वैसे मुझे उससे पूछने की ज़रूरत नही थी, लेकिन मुझे उसकी एस को पापा की एस के लिए इस्तेमाल करना था.

फिर जब मैने पापा से पूछा, तो उन्होने माना कर दिया. तब मैने उनको कहा-

मैं: पापा वरुण (मेरा मंगेतर) ने भी मुझे पर्मिशन दे दी है. अब आपको क्या प्राब्लम है?

ये सुन कर पापा ने भी मुझे जाने की मंज़ूरी दे दी. फिर दिन आया, जिस दिन शाम को पार्टी पर जाना था. मैने वाइट टॉप और ब्लू जीन्स पहनी थी. मेरी टॉप टाइट थी, जिसमे मेरे बूब्स की पूरी शेप दिख रही थी. साथ में क्लीवेज भी अची ख़ासी दिख रही थी.

शाम 7 बजे मैने टॅक्सी बुक की और जाने लगी. तभी पापा बोले-

पापा: रात को टॅक्सी में आने की कोई ज़रूरत नही है. मैं 10 बजे से 15 मिनिट पहले वहाँ आ जौंगा तुम्हे लेने.

मैने ओक कहा और चली गयी. पार्टी पर मैने अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती की. हमने खूब खाया-पिया. फिर बर्तडे बॉय ने मुझे उनके साथ ड्रिंक करने को कहा. मैने उसको माना नही किया, और पीने लगी.

2-3 पेग लगाने के बाद मैं मदहोश होने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, तो मैने 2-3 पेग और खींच लिए. अब मैं पुर नशे में थी. फिर मैं एक साइड पर जाके बैठ गयी. मैं बहुत हॉर्नी फील कर रही थी, और मेरा सेक्स करने का मॅन करने लगा.

मैं और वरुण अक्सर घूमने जाते थे घर वालो की पर्मिशन लेके. वहाँ हम दोनो में अची-ख़ासी चुम्मा-छाती होती थी. शरीफ बनने के लिए मैं उसको चुदाई से माना कर देती थी, लेकिन घर आ कर फिंगरिंग करके अपना पानी निकालती थी.

उस दिन शायद दारू के नशे की वजह से मुझे चुदाई की तगड़ी चुल लग रही थी. तब तक 9:50 हो चुके थे. मुझे पापा का फोन आया की वो बाहर आ चुके थे. मैने उनको कहा की मैं आ रही हू.

फिर मैं बाहर चली आई. पापा मेरी वेट कर रहे थे गाड़ी में बैठ कर. मैने दरवाज़ा खोला, और अंदर बैठ गयी. पापा समझ गये थे की मैने दारू पी रखी थी. वो मुझे डाँटने लगे तो मैने कहा की दोस्तों ने ज़बरदस्ती पीला दी.

फिर मैं चुप-छाप बैठ गयी, और वो ड्राइव करने लगे. मेरी आँख लग गयी, और सपने में मुझे वरुण नज़र आने लगा. जब मेरी नींद थोड़ी टूटी, तो मुझे लगा वरुण गाड़ी ड्राइव कर रहा था. तो मैने पापा को वरुण समझ कर अपना हाथ पापा के लंड पर रख दिया.

तभी पापा बोले: ये क्या कर रही हो प्रांजल?

जब उन्होने मेरा नाम लिया, तो मुझे होश आया की वो पापा थे. मैने एक-दूं से अपना हाथ लंड से हटा लिया. तभी मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया. मैने सोचा की नशे में तो मैं थी ही, और पापा के लंड पर हाथ भी डाल चुकी थी. तो क्यूँ ना नशे में होने का फ़ायदा लिया जाए, और पापा से अपनी छूट की प्यास बुझेयवई जाए.

ये सोच कर मैने फिर से अपना हाथ पापा के लंड पर रख दिया. वो फिर बोले-

पापा: प्रांजल! ये क्या कर रही हो?

मैं बोली (नशे में होने का ड्रामा करते हुए): वरुण तुम चिल्ला क्यूँ रहे हो. आयेज तो तुम खुद कहते हो मुझे ये सब करने के लिए. आज जब मैं कर रही हू, तो तुम चिल्ला रहे हो. अब चुप बैठो.

मेरी बात सुन कर पापा चुप हो गये. फिर मैने पापा की पंत की ज़िप खोली, और अंदर हाथ डाल लिया. मेरा हाथ पापा के अंडरवेर के उपर से सीधे उनके लंड पर पड़ा. पापा का लंड सख़्त हो रहा था, और वो वरुण के लंड से बड़ा लग रहा था. मैं तो उसको छ्छूते ही एग्ज़ाइटेड हो गयी.

फिर पापा बोले: बेटी में वरुण नही…

अभी वो बोल ही रहे थे की मैने कहा: मैने बोला ना मूह बंद रखो.

और वो चुप हो गये. फिर मैं उनके लंड को उपर-नीचे करके हिलने लगी. पापा के मूह से आ आ की हल्की आवाज़ वाली सिसकियाँ निकालने लगी. मैं समझ गयी की वो भी गरम हो रहे थे. फिर मैं आयेज झुकी, और उनकी पंत खोल कर अंडरवेर में से लंड बाहर निकाल लिया.

उनका लंड देख कर एक बार तो मेरी आँखें पूरी खुल गयी. उनका लंड वरुण के लंड से ज़्यादा लंबा और ज़्यादा मोटा था. मैं और एग्ज़ाइटेड होने लगी. फिर मैने अपने होंठो से लंड के टोपे पर किस की. इससे पापा की सिसकी निकल गयी.

उसके बाद मैने मूह खोला, और उनके लंड को अपने मूह में डाल लिया. क्या गरम, मोटा और नमकीन लंड था उनका. मेरे लंड को मूह में डालते ही एक बार फिर उनके मूह से आ निकली.

अब मैं अपने पापा के लंड को चूसने लगी. मैं लंड को चूस रही थी, और बोल रही थी-

मैं: आहह वरुण, क्या मस्त लंड है तुम्हारा. बहुत टेस्टी है. मज़ा आ रहा है.

दरअसल मैं चाहती थी की पापा मेरा रणदीपना देखे, और मुझे छोड़ने के टाइम पर कोई तमाशा ना करे, और ना ही माना करे. इसलिए मैं ऐसी बातें कर रही थी, जैसे मैं कोई लंड की पुजारन हू.

ऐसे ही करते-करते मैं ज़ोर-ज़ोर से पापा का लंड चूस्टी रही. उनका लंड लोहे की रोड जैसा सख़्त हो चुका था. फिर वो आ आ करने लगे, और उनके लंड ने अपना माल मेरे मूह में छ्चोढ़ दिया. इसके आयेज क्या हुआ, आपको कहानी के नेक्स्ट पार्ट में पता चलेगा.

यहाँ तक की कहानी कैसी लगी औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर फीडबॅक दे.

error: Content is protected !!