मेरा नाम संगीता है. मेरी अभी आगे 57 यियर्ज़ है. लेकिन आज भी मेरा फिगर ऐसा है की किसी भी जवान लड़के में वासना जगा दे. ये बात तब की ये जब मैं 36 की हो गयी थी. मैं तब अपने भनजे कमाल और अरुण, मेरी बड़ी बेहन के दामाद परेश जी, छ्होटे भाई के दोस्त विपुल और मेरी बेहन के गाओं के सरपंच संग्राम जी से चुड चुकी थी.
मेरा फिगर अब 34-28-38 है और हाइट 5’4” है. मैं हमेशा सारी ही पहनती हू. गाँव में हम सब हार्ड वर्क करते थे, तो मेरा फिगर बहुत ही फिट है. 36 की आगे थी मेरी और 3 बच्चे थे मेरे. लेकिन मुझे देख कर कोई बोल नही सकता था की मेरी इतनी आगे होगी.
मुझे देख कर कितने मेरी चुदाई की सपने देखते थे. और अब मुझे कोई हवस भारी निगाहों से देखता तो मुझे अछा लगता था. क्यूंकी अब मुझे उसकी आदत हो गयी थी और उसमे मज़ा भी आने लगा था.
ये कहानी मेरी पिछली कहानी से जुड़ी है वो “छ्होटे भाई के दोस्त ने छूट की आग बुझाई” से आयेज है. आपने वो नही पढ़ा तो एक बार पढ़ लेना. मैने ये कहानी उसी के आयेज से शुरू कर रही हू.
विपुल तो बिल्कुल हड़बड़ा गया था. उसके चेहरे पर परेशानी सॉफ दिख रही थी. एक तरफ अमरदीप के सामने हेर ड्राइयर की बात से वो बच गया था, और उसकी जान में जान आई थी. पर दूसरी तरफ किंजल भाभी के उस नॉटी स्माइल और डबल मीनिंग बातों ने उसके होश उड़ा दिए थे. उसको समझ में ही नही आ रहा था की उसके साथ क्या हो रहा था. उसको एक के बाद एक झटके मिल रहे थे.
अमरदीप (मेरा छ्होटा भाई), वॉशरूम में था और विपुल की आँखों में दर्र और सवाल थे.
किंजल भाभी (आँख मारते हुए, धीरे से विपुल के कान में फुसफुसाया): क्या हुआ विपुल? दीदी के साथ मस्ती करने आए थे, और अब भाभी से दर्र गये?
विपुल बस अपना सिर झुका कर खड़ा था, उसके पसीने अब भी छ्छूट रहे थे. उसे यकीन नही हो रहा था की किंजल भाभी, जो हमेशा शांत और सीधी लगती थी, वो आज इतनी खुल कर बात कर रही थी.
तभी मैं (तोड़ा मुस्कुराते हुए, विपुल से): क्यूँ विपुल, क्या सोच रहे हो? हमारी भाभी को समझना इतना आसान नही है. तुम्हे लगा की तुम सिर्फ़ मेरे साथ…?
मैने अपनी बात अधूरी छ्चोढ़ दी, जिससे विपुल और भी घबरा गया.
किंजल भाभी (हल्की सी पुश देते हुए, विपुल से): चलो, अब सब ठीक है. अमरदीप को पता चलेगा तो वो तुम्हे छ्चोधेंगे नही. अभी के लिए तुम बच गये. लेकिन अगली बार अगर संगीता दीदी को कुछ भी परेशन किया तो… (उन्होने अपनी उंगली उठा कर उसे वॉर्निंग दी.)
विपुल (जल्दी से सर हिलाते हुए): नही भाभी, अब ऐसी ग़लती कभी नही होगी. मैं सॉरी बोलता हू दीदी को भी और आपको भी.
अमरदीप वॉशरूम से वापस आया.
अमरदीप (हैरानी से): क्या हो रहा है यहाँ? तुम सब इतने चुप क्यूँ हो गये?
किंजल भाभी (तुरंत सिचुयेशन संभालते हुए): कुछ नही अमरदीप, बस मैं विपुल को बता रही थी की अब उसे ये हेर ड्राइयर जल्दी ठीक करना होगा. और दीदी को भी कह रही थी की अब उसे ध्यान से उसे करे.
अमरदीप (विपुल को देखते हुए): हा विपुल, याद रखना, ये कस्टमर का है. जल्दी ठीक करके देदे. और दीदी, आप भी तोड़ा संभाल कर.
विपुल ने राहत की साँस ली और जल्दी से वहाँ से निकालने की इजाज़त माँगी.
विपुल (जाते हुए): मैं चलता हू अमरदीप. भाभी, दीदी, नमस्ते.
और वो बिना पीछे देखे वहाँ से निकल गया. जब विपुल जेया चुका था, किंजल भाभी और मैं एक-दूसरे को देख कर ज़ोर से हासणे लगे.
किंजल भाभी (हेस्ट हुए): उसके चेहरे की हालत देखी थी दीदी? बेचारा पूरा दर्र गया था.
मैं (हेस्ट हुए): और तुम्हारी बातों ने तो उसके होश ही उड़ा दिए. वो सोच रहा होगा की आख़िर किंजल भाभी को क्या हो गया.
हा, तो सुनो, अब मैं बताती हू की किंजल भाभी और मेरे बीच ऐसा क्या हुआ था जिससे वो इतनी खुल कर बात करने लगी थी. वैसे तो, जिस दिन परेश जी से हम दोनो ने एक साथ चुडवाया था, उसी दिन से हम दोनो के बीच की शरम और झिझक ख़तम हो गयी थी. एक गैर मर्द के सामने हम दोनो पूरी तरह नंगे हुए थे, और उस एक्सपीरियेन्स ने हमे एक अलग ही लेवेल पर जोड़ दिया था. उस दिन के बाद से हमारी बातों में कोई परदा नही रह गया था.
लेकिन उस दिन विपुल के जाने के बाद जब हम दोनो हेस्ट हुए बातें कर रहे थे, तब किंजल भाभी ने मुझसे एक ऐसी बात कही, जिसके बाद हमारा रिश्ता और भी गहरी दोस्ती में बदल गया.
मैं (हेस्ट हुए): और तुम्हारी बातों ने तो उसके होश ही उड़ा दिए. वो सोच रहा होगा की आख़िर किंजल भाभी को क्या हो गया.
किंजल भाभी (तोड़ा सा नॉटी स्माइल देते हुए): तो क्या? जो है वही बोला. और सच काहु तो दीदी, आप उसके साथ चुडवाई है तब से मेरा भी मॅन कर गया है.
मैं (शॉक्ड और हैरानी से): क्या? किंजल तू भी?
किंजल भाभी (मेरी आँखों में देखते हुए, शरम को अलग रखते हुए): हा दीदी. उस दिन परेश जी के साथ जो हुआ, उसके बाद से अब मैं कुछ च्छूपा नही सकती. और उसको देख कर सच में एक पल के लिए लगा की काश… काश वो हम दोनो के साथ होता.
उसकी ये बात सुन कर मैं पहले तो पूरी हैरान रह गयी. फिर एक अजीब सी हस्सी मेरे मूह से निकली. मुझे यकीन नही हो रहा था की किंजल भाभी इतनी खुल कर ये बात कह देंगी. पर फिर मैने सोचा वो बिल्कुल सही कह रही थी. जब हम दोनो ने एक ही मर्द से चुदाई करवाई थी, तो अब क्या शरम?
मैं (मुस्कुराते हुए): तू तो मुझसे भी दो कदम आयेज निकली. मैं तो सोच भी नही रही थी ये सब.
किंजल भाभी (अपनी हँसी दबाते हुए): क्या करें दीदी, इंसान की फ़ितरत है. और वैसे भी, वो विपुल कोई कम थोड़ी ना है. उसका वो गरम जिस्म, और उसका लंड…अफ. सोच कर ही…
और वो चुप हो गयी, पर उसकी आँखों में वही चमक थी. उस पल से हम दोनो के बीच हर तरह की बाउंड्री टूट चुकी थी. अब हम किसी भी टॉपिक पर बात कर सकते थे, बिना किसी शरम या संकोच के. हमारी ननद-भाभी की दोस्ती, एक अलग ही रूप ले चुकी थी.
किंजल भाभी का नया आइडिया-
किंजल भाभी की इस बात ने मेरे दिमाग़ में एक नया ख़याल भर दिया. विपुल तो बेचारा दर्र के भाग गया था, लेकिन उसकी यादें तो अभी भी ताज़ी थी. और किंजल भाभी की बातों ने उस आग को और बढ़ा दिया था. हम दोनो चुप हो गये, एक-दूसरे को देख रहे थे, जैसे एक ही बात सोच रहे हो.
किंजल भाभी (थोड़ी देर बाद, मेरे पास आते हुए): दीदी, एक बात काहु?
मैं (उन्हे देखते हुए): बोल, क्या बात है? अब तो कुछ भी च्छूपा नही है हम दोनो के बीच.
किंजल भाभी (धीमे से, मेरे कान के पास आकर): अगर विपुल से वो सब हो ही गया था, तो उसको पूरा मज़ा क्यूँ नही दिया जाए? और इस बार हम दोनो?
मैं (आँखें बड़ी करते हुए): तू पागल हो गयी है किंजल? उसने तो कल ही मेरे साथ और तू चाहती है…
किंजल भाभी (मेरी बात काट-ते हुए): हा, तब तो उसने दीदी को अकेला देखा. अब तो हम दोनो हैं. और हमे पता है की उसको क्या पसंद है. सोचो, अगर हम दोनो उसे…
मेरी साँसें तेज़ हो गयी. किंजल भाभी की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक लालच, जो मेरे अंदर भी उतार रही थी. परेश जी के साथ जो हुआ था, वो एक अलग बात थी, वो हमारे दामाद थे. पर विपुल वो तो हमारे भाई का दोस्त था. मगर, उसका जिस्म और उसका लंड, जिसने कल मुझे इतना सुख दिया था, वो बार-बार मेरी आँखों के सामने आ रहा था.
मैं (तोड़ा सोचते हुए): भाभी परेश जी की बात अलग थी और विपुल के साथ मुझे सही नही लग रहा. आयेज चल कर ये हमारे लिए मुश्किल बन सकता है.
किंजल भाभी: वो कैसे?
मैं: ये बहुत पुराने ज़माने का है.
किंजल भाभी (सोचते हुए): अछा.
मैं: हा कल मैने उसका लंड चूसा तो बोल रहा था ऐसा काम तो बाज़ारु औरतें करती है. अब आप ही बताओ ऐसी सोच रखने वेल से रिश्ता बनाना ठीक है क्या?
किंजल भाभी (सोचते हुए): दीदी, ऐसा है तो रहने देते है. दुनिया में मर्दों की कमी थोड़ी है. ये नही तो कोई और सही.
किंजल भाभी की बात में दूं था.
मैं (थोड़ी सहमी हुई, पर अंदर से उत्सुक): तो क्या करना है?
किंजल भाभी (मेरे गाल पर हल्का सा हाथ फेरते हुए): बस, अब इंतेज़ार करना है. कोई मिला तो उसको तोड़ा तड़पाना है. और जब कोई आएगा, तब हम उसे ऐसा मज़ा देंगे, जिससे वो ज़िंदगी भर नही भूल पाएगा.
मेरी बॉडी में एक झुरजुरी सी दौड़ गयी. किंजल भाभी की आँखों में वो शैतानी चमक और उनकी आवाज़ में वो उत्तेजना मुझे और भी एग्ज़ाइट कर रही थी.
किंजल भाभी से उस बात-चीत के बाद मेरे दिमाग़ में एक नया जुनून सा छ्छा गया था. मुझे पता था की मेरी नीड्स और डिज़ाइर्स अब एक नये लेवेल पर पहुँच चुकी थे. पर इसका मतलब ये नही था की मैं किसी के भी साथ कुछ भी कर लू.
हमे अपनी इज़्ज़त की भी पड़ी थी. घर-परिवार में कल को कोई बात हो गयी तो क्या होगा? और वैसे भी, विपुल जैसा कोई मिल गया जो हमे रंडी समझे, तो उससे तो मैं खुद ही दो हाथ करती.
परेश जी का किस्सा अलग था. वो रिश्ते में दामाद थे, एक फॅमिली मॅटर था. लेकिन अब जब मैं जान-बूझ कर किसी नये मर्द को अपनी ज़िंदगी में लाने की सोच रही थी. तो हर कदम फूँक-फूँक कर रखना ज़रूरी था. मैं सिर्फ़ जिस्म की भूख मिटाना नही चाहती थी, मुझे रेस्पेक्ट और एंजाय्मेंट दोनो चाहिए थे.
अगर आप मेरी इस कहानी से जुड़े है तो आपको पता होगा मैं एक बार मेरे जेठ जी के ख़ास दोस्त सुरेश भैया से एक होटेल पर पहली बार चूड़ी थी. अगर आपको नही पता तो वो मेरी स्टोरी “जेठ जी के दोस्त से चुदाई” पढ़ लेना.
वहाँ का जो होटेल मलिक था, वो मुझे घूर रहा था और उसने मुझे अपना विज़िटिंग कार्ड दिया था. मुझे वो अछा लगा तो मैने उसको मेरे पर्स में संभाल कर रखा था.
मैने उस दिन ये फ़ैसला किया की मैं जल्दबाज़ी नही करूँगी. मेरे पास एक ऑप्षन था, होटेल मलिक का. पर मैं उसको पूरी तरह से परखने के बाद ही आयेज बढ़ूंगी. मेरी इज़्ज़त मेरे लिए सबसे उपर थी, और मैं कोई ऐसा रिश्ता नही चाहती थी जिसमें मुझे सिर्फ़ जिस्म की चीज़ समझा जाए.
मैने अपने पर्स से उनका विज़िटिंग कार्ड निकाला. उस पर उनका नाम लिखा था लाला. मैने फिर सोचा फोन करना सही नही है. अगर सीधा फोन किया तो वो ऐसा समझेंगे की मैं सामने से उनसे छुड़वाने आई हू. तो मैने सोचा उनका होटेल पास में था, कुछ 15 केयेम दूरी पर, तो क्यूँ ना वहाँ खुद चली जौ कस्टमर बन कर. जिससे उनको शक भी नही होगा.
मैने मम्मी से झूठ बोला की स्कूल टाइम की एक दोस्त है उसके घर जेया रही हू. शाम तक आ जौंगी. बच्चो का ख़याल रखना.
आज मैं पूरी तैयारी में थी. अलमारी खोल कर मैने अपनी सबसे ख़ास सारी निकली. एक डीप रेड कलर की शिफ्फॉन सारी, जो मेरे जिस्म को पूरी तरह एमब्रेस करती थी. मेरी 5’4″ हाइट और 34-28-38 फिगर को ये सारी और भी निखारती थी. उसके साथ एक मॅचिंग डिज़ाइनर ब्लाउस पहना, जिसका गला तोड़ा गहरा था और पीठ पर एक स्टाइलिश कट था.
जब मैं तैयार हुई, तो आईने में खुद को देख कर मुझे भी यकीन नही हुआ. मेरे भरपूर बूब्स, पतली कमर और गोल गंद, सारी में और भी उभर कर आ रही थी. बाल खुले रखे, हल्के से वेवी, और आँखों में काजल और एक छ्होटी सी बिंदी. होंठो पर हल्की लिपस्टिक.
मुझे देख कर किंजल भाभी ने आँखों को तोड़ा सा सिकोड कर और अपनी आइब्राउस उपर उठा कर पूछा, जैसे कह रही हो, “कहा चले दीदी, इतनी तैयार होकर?”
मैने भी अपनी आँखें हल्की सी बड़ी करके और पालक झपक कर इशारा किया, जैसे कह रही हू, “आ कर बताती हू, अभी मत पूछो.”
वो समझ गयी और मुझे नॉटी स्माइल से देखने लगी. उसकी आँखों में एक सवाल था, और उसके साथ एक एग्ज़ाइट्मेंट भी. मैं बस मुस्कुरा दी और घर से निकल गयी. होटेल की तरफ जाते हुए मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी. मैं नही जानती थी की आयेज क्या होने वाला है, पर एक अजीब सी उत्तेजना थी जो मुझे खींचे लिए जेया रही थी.