नखरीली मौसी की चुदाई शादी में-3

कहानी के पिछले भाग में अभी तक आपने पढ़ा कि मैं अपनी मौसी को चोदना चाहता था, पर मौसी का बर्ताव काफी अजीब होने की वजह से मेरे लिए ये थोड़ा मुश्किल काम हो गया था. एक रिश्तेदार के यहां शादी में मुझे मौका मिल गया और उस रात मौसी की वासना भी जाग उठी. मौसी ने मुझे पास के एक कमरे में बुलाया और जल्दी जल्दी चुदाई का काम ख़त्म करने को बोलने लगीं.

अब आगे:

पैंट और चड्डी नीचे करते ही मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया, लंड की हालत देखकर लग रहा था जैसे कि वो एकदम गुस्से से लाल हो गया है. और होगा भी क्यों नहीं … कब से बेचारा पैंट में पड़े पड़े अकड़ रहा था.

लंड की तरफ से ध्यान हटा, तो मेरी नज़र मौसी की तरफ गयी. मौसी भी मेरी ओर बड़ी हसरत भरी निगाहों से देख रही थी. हसरत होगी भी क्यों नहीं, बेचारी पिछले 10-12 साल से लंड के लिए तरसी जो थीं.

इसी समय दिमाग में थोड़ा मस्ती करने को सूझा … सोचा ज्यादा तो नहीं, पर थोड़ी देर के लिए मस्ती तो कर ही सकता हूँ. लंड को हिलाते हुए मौसी से बोला- मौसी, इसे थोड़ा गीला कर दो.
मौसी जितना जल्दी करने को बोल रही थीं, मैं उतना ही लेट कर रहा था. इस वजह से मौसी को थोड़ा गुस्सा आ गया. मौसी गुस्से से बोलीं- गीला करना है तो खुद ही थूक से गीला कर ले और अगर तुझे टाइम पास करना है, तो मैं जा रही हूं, हाथ से हिला कर अपना काम कर लेना.
इतना बोल कर मौसी मेज़ से उतरने लगीं.

मैंने मौसी के कंधे को पकड़ कर उन्हें रोका- अरे नहीं मौसी, मुझे टाइम पास नहीं करना है, मैं सोच रहा था कि अगर आप मेरे लंड को गीला कर देतीं, तो ये आपकी चूत में आराम से चला जायेगा … आपको दर्द भी नहीं होगा.
पहली बार मैंने मौसी के सामने लंड और चूत जैसे शब्दों का प्रयोग किया और इस वजह से मौसी मुझे बड़े ही आश्चर्य से देखते हुए बोलीं- क्या क्या बोल रहा है तू … और कहां से सीखा ये सब?
मैं- इसमें सीखने का क्या है मौसी, दुनिया में तो सिर्फ दो ही जाति के इंसान होते हैं … औरत और मर्द. औरत के पास चूत होती है और मर्द के पास लंड. और इतना तो पता ही है मुझे!

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मौसी- अच्छा ठीक है, तू अपना ये प्रवचन बाद में मुझे सुनाना, अभी मैं जा रही हूं.
मैं- रुको न मौसी, इतना क्या जल्दी कर रही हो आप?
मौसी ने खीजते हुए कहा- तू समझ नहीं रहा है, अगर कोई आ गया तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो जाएगी, इसलिए जल्दी कर रही हूं, बाद में फिर कभी आराम से करना.
मैं- ठीक है मौसी, पर लंड को गीला तो कर दो आप.

मौसी ने एक बार फिर मेरी तरफ गुस्से से देखा और छी करते हुए मेरे लंड की तरफ झुक गईं और मेरे लंड को पकड़ कर सुपारे पर थूक दिया. अपने हाथ के अंगूठे से थूक को मेरे लंड के सुपारे पर फैलाकर उसे गीला कर दिया.

मैं अपने लंड को इस तरह तो गीला नहीं करवाना चाहता था, पर उस टाइम ज्यादा जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकता था.
मैंने मौसी के साड़ी को और पीछे की ओर किया और अपने हाथ पर जितना ज्यादा थूक निकाल सकता था, निकाला और मौसी की चूत की फांकों को अलग करके उनकी चूत पर मल दिया. फिर अपने लंड को उनकी चूत से सटाकर चूत के फांकों में अपना लंड ऊपर नीचे करने लगा.

लंड का स्पर्श चूत पर पड़ते ही मौसी की सिसकारी निकल गयी.

थूक की वजह से मौसी की चूत गीली हो चुकी थी, जिस वजह से लंड को फांकों में रगड़ना आसान हो गया. जैसे जैसे मैं लंड को ऊपर नीचे करता गया, वैसे वैसे मौसी की सिसकारी बढ़ती गयी और मौसी की चूत फिर से पानी छोड़ने लगी. थोड़ी ही देर में उनकी चूत फिर से पूरी गीली हो गयी.

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मैं भी मौसी को पूरी तरह तड़पाना चाहता था, इसलिए बीच बीच में लंड को चूत के छेद पर रखता और धीरे से धक्का देता और फिर पीछे करके फांकों में ऊपर नीचे करने लगता. एक दो बार ऐसा किया ही था कि मौसी ने मेरे हाथ को हटाकर अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और अपनी चूत के छेद पर लगा कर आगे की तरफ सरक गईं. मौसी जैसे ही आगे की तरफ सरकीं, मैं भी उसी टाइम थोड़ा पीछे की तरफ सरक गया.

मेरा ऐसा करना मौसी को पसंद नहीं आया और मौसी गुस्से से गर्म होने लगीं.
मौसी- साले तुझे मज़ाक सूझ रहा है?
मौसी की हालत मैं समझ रहा था और उनके गुस्सा करने की वजह को भी.

मैं- मैं कोई मज़ाक नहीं कर रहा मौसी.
मौसी- अच्छा.
मैं- हां.
मौसी- फिर टाइम पास क्यों कर रहा है? जल्दी कर ना.
मैं- क्या करूं मौसी?

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