नखरीली मौसी की चुदाई शादी में-2

अभी तक आपने पढ़ा कि मैं मौसी को पटाने की कोशिश कर रहा था और शादी में जगह की कमी के कारण मौसी को मेरी बगल में ही सोना पड़ा. मैं इस मौके को भुनाना चाहता था.

अब आगे:

मैंने अपना हाथ मौसी के ऊपर रख तो दिया, पर अन्दर से डर भी लग रहा था कि कहीं मौसी फिर से मेरा हाथ और पैर हटा ना दें. पर थोड़ी देर तक मौसी ने कुछ नहीं किया, जिससे मुझे लगने लगा कि शायद मेरा काम आज बन जाएगा, पर ये भी ख्याल आया कि कहीं मौसी सो तो नहीं गयी हैं. अगर मौसी सच में सो गई होंगी. तो मेहनत बेकार चली जाएगी.

मैं अभी इन्हीं ख्यालों में खोया ही था, इतने में मौसी ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. मुझे लगा कि अब मौसी फिर से मेरा हाथ हटा देंगी. पर ऐसा हुआ नहीं. मौसी ने मेरा हाथ हटाया नहीं बल्कि धीरे धीरे मेरे हाथ को सहलाने लगीं. पहले तो मुझे समझ में ही नहीं आया कि क्या ये सच में मेरे साथ हो रहा है या मैं सपना देख रहा हूँ.

कन्फर्म करने के लिए मैंने अपना हाथ थोड़ा अपनी तरफ खींच लिया, जिससे मेरा हाथ ठीक मौसी के चुचे पर आ गया. मैंने आंखें तो बंद की ही थीं. पर मुझे ऐसा लगा जैसे मौसी ने मेरी तरफ देखा. अब मैं कन्फर्म हो गया था कि मौसी जाग ही रही थीं.

मैंने फिर से अपना हाथ आगे पीछे किया. मेरे हाथ पर मौसी का हाथ होने की वजह से मेरे हाथ का दबाव उनके चुचे पर पड़ रहा था.

अचानक मौसी मेरे हाथ को अपने चुचे पर दबाने लगीं. थोड़ी ही देर में मौसी के निप्पल कड़क हो गए, तब लगा कि यही मौसी की वासना जगाने का सही वक्त है.

यह कहानी भी पड़े  पापा ने रात भर रेप किया

मैं अपनी एक उंगली मौसी के चुचे के निप्पल के चारों तरफ घुमाने लगा. मेरी इस हरकत से मौसी ने अपना हाथ हटा लिया और मेरी तरफ देखा. मैं उनकी तरफ देख कर मुस्कुरा दिया. मौसी ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया. मौसी को भी समझ में आ गया कि मैं जाग रहा हूँ. मौसी ने चेहरा भले ही दूसरी तरफ कर लिया, पर मेरा हाथ अपने चुचे पर से हटाया नहीं था, जो कि मेरे लिए आगे बढ़ने का संकेत था.

मैं तो कब से इसी संकेत के इंतजार में था कि कब मौका मिले और आज जब ये मौका मिला है तो मैं चूकता कैसे?

अब मैंने अपनी मुट्ठी में मौसी के चुचे को पूरा भर लिया. मौसी के चुचे बड़े थे, जो मेरी मुट्ठी में समा नहीं रहा था, फिर भी जितना ज्यादा हो सकता था. मैं उनके चुचे को पकड़ कर दबाने और मसलने लगा. कुछ देर तक तो मौसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और मैं उनके चूचों पर लगा रहा और बारी बारी से दोनों चूचों को और जोर से दबाने और मसलने लगा.

मेरे इस रवैये से मौसी ने एक बार फिर मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुरा दीं. जवाब में मैं भी मुस्कुरा दिया. उसके बाद मैं अपना हाथ उनके ब्लाउज में डालने की कोशिश करने लगा, पर ब्लाउज के बटन बंद होने के कारण मेरा हाथ अन्दर नहीं जा पा रहा था. एक दो बार मैंने कोशिश की, पर सफलता नहीं मिली. मैं खीझ कर मौसी के मम्मे को और जोर से मसलने और दबाने लगा जिससे शायद मौसी को दर्द होने लगा. मौसी ने मेरे हाथ पर हल्की सी चपत लगाते हुए मेरा हाथ हटा दिया. फिर खुद ही अपने ब्लाउज के बटन्स खोलने लगीं और जल्दी ही 2-3 बटन्स खोल कर अपना हाथ हटा लिया.

यह कहानी भी पड़े  भाई बहन की दोस्ती या वासना--2

अब मेरी बारी थी.
मैंने अपना हाथ मौसी के ब्लाउज में डाल कर उनके चूची को मुट्ठी में भर लिया और उससे खेलने लगा, कभी चूची को दबा देता तो कभी मसल देता और बीच बीच में निप्पल को भी मसल देता. अब धीरे धीरे मौसी सिसकारी लेने लगीं. मौसी के निप्पल कड़क होने लगे. इसी बीच मैंने अपने घुटने को, जो मौसी के चूत के ठीक ऊपर था, उनकी चूत पर घिसने लगा.

मैं मौसी के दोनों चुचियों पर बारी बारी से लगा रहा, जिस वजह मौसी की सिसकारियां धीरे धीरे बढ़ने लगीं. सच कहूँ, तो मैं तो यही चाहता था. पर डर भी लग रहा था कि कहीं कोई जाग न जाए. अब जो भी हो, हिम्मत तो करनी ही थी मुझे, यही सोच कर मैं लगा रहा.

थोड़ी देर तक मौसी को चुचियों को दबाने और मसलने के बाद मैंने अपना हाथ मौसी के चूत के पर रख दिया और साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत सहलाने लगा.

फिर मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर उनकी साड़ी ऊपर करना चाहा, तो मौसी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी तरफ देखकर इंकार में अपना सर हिलाया. मैंने भी अपना हाथ ढीला छोड़ दिया. मौसी ने मेरा हाथ अपने पेट पर रख दिया, मैं भी मौसी का इशारा समझ गया. थोड़ी देर मौसी का पेट सहलाने के बाद मैंने अपना हाथ नीचे की तरफ सरकाया, मौसी ने भी अपनी सांसें खींच कर पेट दबा लिया, जिससे मेरा हाथ आसानी से मौसी की चूत पर पहुंच गया.

Pages: 1 2 3 4

Dont Post any No. in Comments Section

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!