मम्मी ने खेली लंड की पिचकारी वाली होली

हेलो दोस्तो, मई राहुल. आज मई मेरी कहानी “मम्मी की छूट और पड़ोसी का लंड” का अगला पार्ट लेके आ गया हू, आप सभी की रिक्वेस्ट पर. जिन्होने मेरी स्टोरी के पिछले पार्ट्स नही पढ़े, वो पहले पार्ट्स पढ़ कर इसे पढ़े, ताकि आपको ठीक से मज़ा आए.

पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा था, की कैसे मेरी मा शीला और मौसी सीमा को मेरे ही सामने सलीम, असलम, अब्दुल और करीम ने मिल के छोड़ा और फिर मैने भी मों को अपने लंड का पानी पिलाया.

इस पार्ट मे आपको बतौँगा, की कैसे मैने मेरे दोस्तो से मा को चुडवाया होली के दिन और वो भी मेरे घर के पास वाले बगीचे मे.

तो दोस्तो बात ये है, की मेरी मा और मौसी की चुदाई के बाद, असलम जो की मेरा दोस्त है, सलीम दर्जी के वाहा जो काम करता है, उसने मेरे और दो दोस्तो को बता दिया था.

उनमे से एक दोस्त का नाम साक़िब है और वो असलम के घर के पास रहता है और दूसरे का नाम साहिल है. हम बचपन के दोस्त है और एक साथ स्कूल मे थे.

एक दिन जब मई उन लोगो के साथ शाम को तफ़री मे गया था, तभी मुझे साहिल और साक़िब ने पूछा-

साक़िब और साहिल: भाई ये जो असलम ने बोला है. वो बात सच है क्या?

मई : कों सी बात भाई?

साहिल: अर्रे भाई, यही की तेरी मा मस्त चुड़वाती है असलम से और कुछ मर्दो से. और तूने भी अपनी मा को लंड चुस्वाया है.

मई पहले घबरा गया तोड़ा, उनसे ये सब सुन कर. फिर मैने सोचा, की कोई बात नही, वो लोग भी तो मेरे दोस्त ही है.

मई : अर्रे यार, असलम तुझे माना किया था किसी को बताने को.

असलम: आबे तो ये लोग तो दोस्त है ना यार, तो ग़लती से बोल दिया उस दिन दारू के नशे मे.

साक़िब : क्या हुआ यार? राहुल तू ऐसा क्यू बोल रहा है? क्या हम तेरे दोस्त नही है?

मई : दोस्त हो यार, पर ऐसी बाते ज़्यादा लोगो को पता नही होनी चाहिए ना.

साहिल : अर्रे यार, हम किसी को नही बताएँगे.

मई: ओक यार, बताना भी मत.

साक़िब : पर हा, मुझे भी तेरी मा की लेनी है यार. क्या मस्त माल है तेरी मा. साला कितने सालो से उसके नाम का मूठ मारते है हम. क्यू साहिल बोल ना.

साहिल: हा यार राहुल, दिलवा दे यार. भूत दीनो की प्यास है और वैसे भी अब तेरी मा भी प्यासी है.

मई सोचने लगता हू. फिर मुझे लगता है, की हा यार मा तो चुड़क्कड़ हो गयी है. पर वैसे डाइरेक्ट जेया के बोला, तो वो ना बोलेगी. तो कुछ प्लान करके इनसे चुड़वता हू मई मा को.

मई : हा, पर ऐसे नही. कुछ प्लॅनिंग करनी होगी. डाइरेक्ट बोलूँगा तो माना कर देगी वो.

असलम : हा सही कहा तूने. कुछ सोचना पड़ेगा.

साक़िब: सुनो मेरे पास एक प्लान है. क्यू ना तेरी मा को कल होली के दिन हम छोड़े?

मई : कैसे छोड़ेगा?

साक़िब : तू बस उन्हे होली खेलने के बहाने हमारे बगीचे मे ले आना. आयेज का प्लान मई और साहिल आंड असलम कर लेंगे. तू बस उन्हे ले आना हमारे पास और मस्त चुदाई एंजाय करना.

मई : ओक यार, ले अवँगा.

मई मॅन ही मॅन खुश हो रहा था, की अभी मेरी मा को दोस्तो से चड़वौनगा
और अगले दिन का इंतेज़ार कर रहा था. अगले दिन सुबा मुझे साक़िब ने फोन किया 6 बजे-

मई: क्या हुआ भाई? सुबा-सुबा फोन काहे किए हो?

साक़िब: अर्रे भाई भूल गया क्या, आज होली है. सेयेल आज तेरी मा को लेके आना है तुझे बगीचे मे.

मई: अर्रे हा यार, मई नींद मे था ना इसलिए. रूको मई लेके आता हू 10 बजे तक ओक.

साबिक : हा भाई जल्दी ला उसको. कब से तड़प रहे है हम.

मैं : हा सेयेल अब फोन रख. मई लता हू.

मई उठ के फ्रेश होके नीचे गया. तो मों ने सफेद सारी और वाइट स्लीव-लेस ब्लाउस, जो की डीप कट वाला था और जिसमे मों की क्लीवेज आचे से दिख रही थी, पहना हुआ था.

मों ने मुझे कलर लगाया गालो पे और हापी होली बोला. मैने भी मों को कलर लगा कर हापी होली विश की.

मों: बेटा जल्दी चल, कॉलोनी के सारे लोग होली खेलने लगे है.

मई : मों आप जाओ, मई आता हू. वैसे भी आज आपको एक स्पेशल जगह ले जौंगा होली खेलने के लिए, इसके बाद.

मों: कहा बेटा, कोंसि जगह?

मई : अर्रे मों, वो दोस्तो ने पार्टी रखी है होली के लिए. सारी फॅमिलीस जेया रही है वाहा, तो हम भी चलेंगे.

मों: श अछा? कहा जाना है?

मई : वो जाने के बाद ही पता चलेगा ना. मों अभी आप जाओ, आपकी सहेलिया वेट कर रही है.

मों: ओक बेटा.

उसके बाद मों होली खेलने चली गयी. मई भी उनके बाद चला गया. फिर मैने कॉलोनी की भाभियो के साथ, डॅन्स की होली खेली और मस्त मज़े किए. मों ने भी खूब मज़े किए.

सारे मर्द तो मों के बूब्स को घूरे जेया रहे थे. कुछ ने तो मों की गांद को भी सहला दिया था, जिससे उनकी गांद पे हाथ का निशान बन गये थे.

कॉलोनी की होली ख़तम होने के बाद, मैने मों को बोला: मों चलते है वाहा, पार्टी शुरू हो गयी होगी.

मों: ओक बेटा, रुक मई तोड़ा पानी पी कर आती हू घर से.

मों घर मे गयी. तभी मैने साक़िब को फोन किया.

मई : हेलो, सेयेल सब रेडी है ना? मई मों को लेके आ रहा हू.

साक़िब: आजा यार, कब से वेट कर रहे है. सब रेडी है. तू बस शीला को लेके आजा.

इतने मे मों आ गयी और हम बिके पे बैठ कर बगीचे की और जाने लगे. वाहा मेरे दोस्त साक़िब, साहिल और असलम ड्ज लगा के मस्त नाच रहे थे. जब मई पहुँचा, तब असलम ने ड्ज बंद किया और सब कलर लेके हमारी और आने लगे.

मों: अर्रे बेटा, कोई और दिख नही रहा. फॅमिली पार्टी थी ना ये?

मई : शायद चले गये है सब होली खेल कर.

मों: हा हमे लाते हो गया शायद.

तभी मेरे दोस्त लोग आके मुझे कलर लगा देते है और हमे होली विश करते है. फिर मों को असलम ने रंग लगाया और विश किया.

असलम(आँख मारते हुए): हापी होली आंटी जी.

मों(मुस्कुरा कर) हापी होली बेटा.

अब साक़िब की बारी थी कलर लगाने की, तभी साक़िब ने कुछ इशारा किया साहिल को, तो जब साक़िब मों को कलर लगा रहा था, तो साहिल ने उसे धक्का दे दिया, जिसकी वजह से मों और साक़िब साइड मे किए गये कीचड़ के गढ़े मे गिर गये.

साक़िब: सॉरी आंटी, वो धक्का लग गया, तो गिर गया आपके उपर. आप तो कीचड़ से लत-पाठ हो गयी, सॉरी.

मों: कोई बात नही बेटा, होता है.

साहिल: आंटी आप आओ, मई पानी से सॉफ कर देता हू आपको.

मों: हा बेटा ज़रा पानी लाओ.

साहिल: अर्रे आंटी मई पीपे से पानी मारता हू, आप सॉफ कार्लो खुद को.

मों: ओक बेटा लाओ.

अब साहिल पीपे से पानी मा के बदन पे मारने लगा, जिससे मा के बदन से कीचड़ धूल रहा था और साथ ही साथ उनकी सफेद सारी भीग रही थी. इससे उनका जिस्म सॉफ दिखने लगा था.

मों की सारी छिपकने लगी, जिससे उनकी उभरी हुई 42″ की गांद मस्त गड्राई हुई दिखाई दे रही थी और फिर पीपे का पानी मों के चूचो के बीच से जेया के गिर रहा था, जिससे उनका पल्लू गिरा गया था.

अब मों एक-दूं मस्त माल लग रही थी. उनका सारा जिस्म अब सॉफ दिखने लगा था, जिससे देख कर हम सब के लोड ने पंत मे तंबू बना लिया था.

तभी मई समझा, की सालो ने क्यू धक्का मारा था मों को कीचड़ मे. उधर सेयेल सब लंड सहलाने लगे थे, मों के भीगे हुए कामुक बदन को देख कर.
तभी असलम ने जेया कर मों की गांद मे एक थप्पड़ लगा दिया. क्या मस्त माल लग रही थी यार, मा इस वाइट सारी मे भीग के.

मों: ये क्या बदतमीज़ी है असलम?

असलम: आबे चुप साली रांड़, यहा सबको पता है, की तू कितनी बड़ी चुड़क्कड़ है और हा कोई पार्टी नही है यहा मेरी जान. आज तेरी चुदाई होगी यहा हमसे.

मों: ये क्या बोल रहा है असलम, राहुल?

मई : हा मा, ये सच बोल रहा है. इन दोनो को भी पता है आपके बारे मे.

मों: मैने माना किया था ना बताने को.

असलम: अर्रे जान, तेरे बेटे के दोस्त ही तो है. क्या जाता है तेरा, इनसे चूड़ेगी तो. वैसे भी तुझे भी मज़ा आएगा और हा मैने बताया उन्हे, वो भी शराब के नशे मे ग़लती से.

मों: ओक कोई बात नही, पर यहा नही. अंदर चलो सब.

ये बोल के मों कातिलाना स्माइल देके अंदर एक रूम मे चली गयी. मों की हा सुन कर हम सब खुश हो गये और साक़िब और साहिल खुशी से पागल हो रहे थे.

हम सब मों के पीछे-पीछे गये और रूम का डोर लॉक कर दिया. फिर मों को साक़िब ने पकड़ लिया और दीवार मे सता कर किस करने लगा. मों भी उसका पूरा साथ देते हुए, उसका सिर पकड़ के उसे चूमने लगी.

साक़िब: शीला जान, कब से तेरी ये जिस्म की भूख थी मुझे. आज जाके तू मेरे हाथ लगी है.

मा: अछा बेटा, ये बात है तो आज जी भर के खा लेना मुझे.

साहिल उधर अपना लोड्‍ा हिला रहा था. मों ने उसको इशारा करके पास बुलाया और असलम को भी बुलाया. मई मस्त बैठा लंड निकाल कर हिला रहा था.

मों ने फिर साहिल और असलम के लोड को पकड़ा और सहलाने लगी और साक़िब मों को किस कर रहा था.

साहिल: शीला जी आज इसी पिचकारी से आपको हम सफेद मलाई से रंग देंगे.

मों: हा मेरी जान, भर देना मलाई से मेरा मूह.

असलम: साली रांड़, तू तो दिन-बा-दिन और प्यासी होती जेया रही है.

मों: क्या करू असलम, ऐसा मस्त लोड्‍ा मिले तो किसी भी औरत की प्यास बढ़ेगी ना जान.

साक़िब : आओ जान, अपने इन मुलायम होंठो से हमारी लोड को मालिश करदो.

मों घुटनो के बाल बैठ गयी और तीनो का लंड बारी-बारी पकड़ के मुहे लेने लगी, बिल्कुल एक प्रोफेशनल पोर्नस्तर की तरह. मों उनके लोड को चूसने लगी, जिससे उनका लोड्‍ा थूक से साना हुआ चमकने लगा था.

करीब 5 मिनिट बाद, साहिल ने मों के सारे कपड़े निकाल के फेंक डाले और साहिल मा की छूट के नीचे लेट गया और उनकी छूट चाटने लगा, जिससे मों गरम हो गयी और सिसकारिया लेने लगी थी.

मों : आहह.. साहिल बेटा उफफफ्फ़…. क्या मस्त चूस रहे हो तुम अनह…

साक़िब और असलम ने एक साथ मों के मूह मे अपना लोड्‍ा दे मारा.

साक़िब: चूस मेरी जान शीला. मेरी रांड़, साली छिनाल, क्या मस्त माल है रे तू. हरामी, साली भाडवी, रांड़, अपने बेटे के सामने कैसे लंड खा रही है तू उफफफ्फ़…

असलम: अर्रे भाई, ये सबसे बड़ी रांड़ है साली मस्त मज़े देती है हरामी साली.

मों: आनह.. जान तुम लोगो का लोड्‍ा ही इतना मस्त है, की मई भला क्या करू. बिना चूज़ रह ना पौ मई.

5 मिनिट के बाद, मों को घोड़ी बना दिया और साक़िब ने गांद मे लोड्‍ा दे दिया. असलम ने मों के नीचे उनकी छूट मे और साहिल ने मूह मई लोड्‍ा देके मों के तीनो छेड़ो मे चुदाई करने लगे, जिससे चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी पुर कमरे मे.

मों: आअहह… हाए.. मा.. कामीनो मेरे सारे छेड़ भर दिए उग्गघह… अनह.. एसस्स… और ज़ोर से पेलो मुझे अनह..

साक़िब: साली की क्या मस्त गांद है. असलम यार मस्त मज़ा आ रहा है मुझे, इसकी लेने मे.

असलम: हा यार, ये ससली जन्नत के मज़े देती हक. इसलिए तो इसकी लेने मे मज़ा आता है.

साहिल: हा यार क्या मस्त बदन है साली का. क्या मस्त चूस रही है. ये देखो मेरी रांड़ उंह.. अँह.. साली ऐसे ही पुर हलाक तक लेके चूस्टी रह रांड़.

मों: आह… मेरे जान तुम लोगो के लंड की मेहनत की वजह से ही आज ये शीला, इतनी बड़ी रांड़ हो पाई है अनह.. उफ़फ्फ़..

ऐसे छोड़ने के बाद, उन्होने अपनी जगह बदली. साहिल गांद मार रहा था. असलम लंड चुस्वा रहा था और साक़िब छूट के मज़े ले रहा था और ज़ोरदार चुदाई करने लगे तीनो. कुछ देर ऐसे छोड़ने के बाद, असलम भी पीछ आ गया और उसने भी मा की छूट मे भर दिया अपना लोड्‍ा.

मा: अनह.. असलम कमीने अनह.. सेयेल मॅर जौंगी मई उफ़फ्फ़… मेरी छूट फटत गयी अनह..

असलम ने तभी मुझे इशारा किया. मई समझ गया और लोड्‍ा लेके मा के मूह मे तूस दिया और मा के बाल पकड़ कर एक छाँटा मारा गाल पे और मूह छोड़ने लगा ज़ोर से.

मा: आनह.. बेटा मॅर जौंगी मई. रहम कर कमीने.

मई : चुप साली, पराए मर्द से मज़े से चुड्ती है. अब हमसे चुड चुप-छाप.

मा की आनकों से आँसू आने लगे थे. इतने भयानक और ज़ोरदार तरीके से छोड़े जेया रहे थे हम चारो मा को.
कुछ देर बाद, मा भी मज़े से चूड़ने लगी और खुद मेरे लंड पकड़ के चूसने लगी थी, कुटिया की तरह.

मई: आअनह.. मा क्या मस्त चूस्टी हो तुम अनह.. उगफफफ्फ़..

मा: हा मेरे मादरचोड़ बेटे.

कुछ देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद, वो तीनो मा के सामने आ गये और मई मा की गांद मारने लगा और वो मा को लंड चुस्वा रहे थे. करीब 5 मिनिट बाद, मई भी झड़ने वाला था और वो लोग भी झड़ने वाले थे. तभी साहिल ने बोला-

साहिल: शीला जान बैठ जेया. आज सब की पिचकारी से तुझे नहला के होली खेलेंगे.

मा हेस्ट हुआ बैठ गयी अपने बूब्स को पकड़ कर जीभ निकाल के एक भूखी कुटिया की तरह बोली-

मा: आअनह.. मारो मलाई मेरे मूह मे.

फिर हम सब ने मा के मूह मे मलाई छोढ़ दी, जिससे उसका मूह भीग गया था पूरा और सारी मलाई गतक गयी थी मा. फिर मा हम लोगो की लोड को चाट के सॉफ करने लगी.

मों: थॅंक्स बेटा, आज की इसी मज़ेदार होली के लिए. भूत मज़ा आया मुझे तुम लोगो के साथ.

मई: आपके लिए कुछ भी मों.

असलम: थॅंक्स तो हमे कहना चाहिए जान. तूने जो मज़े दिए है हमे.

साहिल ने थॅंक्स जान बोल कर मों को किस कर लिया और उसकी गांद दबा दी. मों ने अब कपड़े पहन लिए और सब को हग आंड किस की. उसके बाद हम वाहा से चले आए.

अब से मेरे दोस्त भी रोज़ आने लगे मेरे घर, मेरी मा की चुदाई करने. मों भी खुश थी, क्यूकी उसे रोज़ नये लोड का स्वाद मिलता है.

तो दोस्तो आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मैल करके बताए और किसी को मेरी या अपनी मा के बारे मे कुछ बाते करनी है, तो भी मुझे मैल करके ज़रूर बताए. और अगर कोई सजेशन देना चाहते हो, तो भी मैल कर सकते हो मुझे. तब तक के लिए मई आपके ए-मैल का इंतेज़ार करूँगा.

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