सेक्स कहानी अब आयेज-
कुछ दिन बाद मम्मी का बर्तडे था. मुझे आइडिया नही था की उनको क्या गिफ्ट डू. क्यूंकी मैने आज तक कभी उनको या किसी को गिफ्ट नही दिया था. पर अब मैं जॉब करता था, तो सोचा खुद के पैसों से मम्मी को कुछ अछा गिफ्ट करू.
मैने ये बात अनिरुढ़ भाई को बताई तो उनकी आँखें एक-दूं से चमक गयी. उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गयी, जैसे उसने कोई ख़ज़ाना ढूँढ लिया हो.
अनिरुढ़: उनको एक अची सारी गिफ्ट करते है (उसकी आवाज़ में एक उत्तेजना थी, जो मैने पहले कभी नोटीस नही की थी).
मैं: मुझे ये सब चीज़ का आइडिया नही है.
अनिरुढ़: मैं तेरी हेल्प करता हू.
हम दोनो एक बड़े स्टोर पर गये जहाँ खूबसूरत सरीस मिलती थी. अनिरुढ़ भाई ने एक से बढ़ कर एक सारी देखी. उसकी नज़र एक गहरे मरून रंग की मुलायम सिल्क सारी पर ठहर गयी. वो सारी देख कर ही लग रहा था की मम्मी पर कितनी जाचेगी, उनके जिस्म की हर करवट को कितनी खूबसूरती से उभरेगी. उसका फॅब्रिक इतना पतला था की अंदर का बदन सॉफ ना दिखे, पर वो भी एहसास हो. उसने वो सारी चुनी.
फिर अनिरुढ़ भाई ने टेलर से बात की. उसने मम्मी का स्लीव्ले ब्लाउस बनवाने को कहा. और यहीं पर मैं डांग रह गया. अनिरुढ़ भाई टेलर को मम्मी के ब्लाउस का हर मेषर्मेंट बता रहा था, जैसे उसने मम्मी को अपनी आँखों से ही पूरा मेषर कर लिया हो. उसने चेस्ट, कमर, शोल्डर, आर्महोल, और ब्लाउस की लंबाई तक सब का साइज़ ऐसे बताया जैसे उसने खुद मम्मी को छ्छू कर नापा हो.
मैं: भाई, मम्मी ने आज तक स्लीव्ले ब्लाउस नही पहना है (मेरी आवाज़ में हैरानी थी).
अनिरुढ़ (हल्के से मुस्कुराते हुए): तुम लोगों ने कभी उनको खुल कर जीने कहाँ दिया है? हमेशा से घर, रिश्तेदार, समाज. उनकी अपनी कोई डिज़ाइर, कोई ख्वाहिश नही? उन्हे भी तो खूबसूरत लगने का हक़ है, आराव. ये सिर्फ़ कपड़ा नही है, उनकी च्छूपी हुई खूबसूरती को बाहर लाने का एक मौका है.
उसकी बात सुन कर मैं चुप हो गया. अनिरुढ़ भाई की आँखों में एक अजीब सी चमक थी. उसकी बातों में लस्ट सॉफ झलक रहा था, पर उसके पीछे एक गहरी परवाह भी थी. उसने मम्मी को जिस नज़र से देखा था, वो अब मेरे दिमाग़ में भी घर कर गयी थी. वो चाहता था की मम्मी अपने भरे हुए जिस्म को बिना झिझक दिखाए, जैसे वो उनको आज़ाद देखना चाहता हो, और शायद उनके हर कर्व को देखना भी चाहता हो.
उसकी बातों ने मेरे अंदर एक नया ख़याल जगा दिया था. क्या सच में मम्मी ने कभी अपनी लाइफ अपने लिए नही जी थी? क्या हमने कभी उनको उस रूप में सोचा ही नही था? ये सब मेरे दिमाग़ में घुस रहा था.
बर्तडे के दिन मैं मम्मी के लिए एक बड़ा सा केक लेकर गया. मेरे साथ अनिरुढ़ भाई भी घर पर आए थे. मैने मम्मी को वो सारी गिफ्ट की जो अनिरुढ़ भाई ने सेलेक्ट की थी और कहा-
मैं: आप जाओ, रेडी हो कर आओ. हम सब के साथ केक काटेंगे.
मम्मी बहुत खुश हुई. मुझे याद नही था इस दिन से पहले कभी हमने घर पर किसी बड़े का बर्तडे सेलेब्रेट किया हो. मम्मी की आँखें थोड़ी नाम हो गयी. उन्होने मुझे थॅंक योउ कहा. फिर वो रेडी होने चली गयी.
वो जब रेडी हो कर आई, तो उनको देख कर मैं डांग रह गया. उस गहरे मरून रंग की सारी और स्लीव्ले ब्लाउस में वो इतनी कमाल लग रही थी की मेरे होश उडद गये. उनका भरा हुआ जिस्म सारी में और भी नज़र आने लगा था. ब्लाउस उनके बड़े, गोल बूब्स पर एक-दूं कस कर बैठा था, जैसे उसके लिए ही बना हो, उनके उभरे हुए बूब्स और पतली, चिकनी कमर को और भी सेक्सी बना रहा था.
उनकी गोल, भारी गांद सारी में अलग से ही उभर कर दिख रही थी, और उनकी चाल में एक अजीब सी लचक आ गयी थी जो हर कदम पर उनके चुततादों को हिला रही थी. आज तक मैने मम्मी को ऐसा कभी नही देखा था, और ना ही उनको कभी इस तरह से सोचा था. उनका ये लुक मेरे लिए बिल्कुल नया था.
अनिरुढ़ भाई की आँखें भी मम्मी को देखते ही खुली की खुली रह गयी. उसकी प्यासी नज़रें मम्मी के जिस्म के हर हिस्से पर घूम रही थी – उनके चमकते चेहरे, उनके रसीले होंठो, उनके उभरे हुए बूब्स, पतली कमर और गोल चुततादों पर. वो अपनी नज़र मम्मी से हटा ही नही पा रहा था. उसका चेहरा हवस से भर गया था, पर वो सबसे नज़रें चुरा रहा था.
मम्मी भी अनिरुढ़ भाई की नज़रों को फील कर रही थी. वो हल्के से शर्मा रही थी, उनके गाल गुलाबी हो रहे थे. वो बार-बार सबसे नज़र मिलने की कोशिश कर रही थी, पर अनिरुढ़ भाई की तीखी नज़रें उनको अंदर तक महसूस हो रही थी, और मम्मी अंदर से गरम हो रही थी.
मम्मी ने वो सारी रात तक नही उतरी. जब मैं उनके कमरे की तरफ गया, तो वो अपने आप को आईने में देख रही थी, और हल्के से मुस्कुरा रही थी. फिर उन्होने अपना पल्लू एक हाथ में पकड़ा और अपने ब्लाउस को गौर से देख रही थी. मम्मी के उभरे हुए बूब्स की क्लीवेज बहुत मस्त दिख रही थी.
स्लीव्ले ब्लाउस की वजह से उनकी गोरी चिकनी अंडरआर्म सॉफ नज़र आ रही थी. उनकी पतली गोरी कमर पर मेरी नज़रें ठहर गयी. उनका जिस्म सारी में एक-दूं कासिला और भरा हुआ लग रहा था.
मम्मी अकेली थी तो मैं उनके कमरे में गया. मम्मी ने मुझे देख कर हल्का मुस्कुराया.
मैं: कैसा लगा मेरा गिफ्ट?
मम्मी: बेटा, तेरी पसंद बहुत अची है (उनकी आँखों में एक चमक थी).
मैं: मम्मी, ये मैने नही, अनिरुढ़ भाई ने आपके लिए पसंद किया था.
वो तोड़ा शर्मा गयी. उनके गाल हल्के गुलाबी हो गये. फिर उन्होने पूछा: ये ब्लाउस रेडी-मेड लिया है?
मैं: नही, ये टेलर से रेडी करवाया है.
मम्मी (अपने ब्लाउस को छ्छूते हुए): इतना सही नाप तो आज तक मेरे टेलर ने नही दिया है.
मैं: ये अनिरुढ़ भाई ने अपने हिसाब से टेलर को नाप दिया था.
मम्मी ये सुन कर थोड़ी शॉक्ड हुई. उनकी आँखों में एक अजीब सा सवाल था. वो कुछ सोचती हुई अपने ही ख़यालों में चली गयी. उनका चेहरा एक-दूं से गरम हो गया था, और उनके होंठो पर एक च्छूपी हुई मुस्कान थी.
उस दिन के बाद मम्मी मुझे घर में किसी को पता ना चले ऐसे, अनिरुढ़ भाई के लिए कुछ ना कुछ खाने को देती रहती. कभी उनके लिए ख़ास मिठाई, कभी कोई नया पकवान. वो सब चुपके से मेरे बाग में रख देती. जब मैं अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर जाता, तो वो भी मुझे मम्मी के बारे में घुमा-वोआ कर पूछते रहते. उनकी हर बात मम्मी पर ही आकर ख़तम होती. उनकी आँखों में वो प्यास सॉफ दिखती थी.
जब मैं घर पर अकेला होता, तो मम्मी अनिरुढ़ भाई के बारे में पूछती थी. उनकी आवाज़ में एक अलग ही नर्माई होती थी जब वो अनिरुढ़ भाई का ज़िक्र करती. मम्मी की बातों में एक च्छूपी हुई चाहत थी, और अनिरुढ़ भाई की बातों में सॉफ हवस. ये सब कुछ मेरे दिमाग़ में एक भयंकर खेल खेल रहा था.
एक दिन मेरे दोस्त के घर पर शादी थी. उसका और मेरा पहले से फॅमिली रीलेशन था, तो घर पर भी इन्विटेशन था. मुझे तो बारात में जाना ही था, और घर में से भी 5-6 लोगों को आने को कहा गया था.
घर पर मैं, मेरे चाचा, उनकी छ्होटी बेटी और दादी – इतने लोग तो आने वाले ही थे. पर दादी के साथ कोई और लेडी तैयार नही हो रही थी. सब के अपने-अपने बहाने थे. मम्मी ने तो सॉफ माना कर दिया था, वो बोले की रात को बारात है, उन्हे नींद आती है.
उस दोस्त का इन्विटेशन अनिरुढ़ भाई को भी था, क्यूंकी वो हमेशा दोस्त रोशन की दुकान पर हमारे साथ उठता-बैठता था. मुझे अनिरुढ़ भाई रास्ते में मिल गये तो पूछा: आप चल रहे हो क्या?
अनिरुढ़: नही यार, मेरा मूड नही है, मैं नही जेया पौँगा.
मैं: ठीक है, मैं तो जेया रहा हू. वैसे भी घर से सब आने वेल है.
अनिरुढ़ (थोड़ी देर रुक कर, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आई): कौन-कौन आने वाला है घर से?
मैने बताया: मैं, चाचा, छ्होटी सिस्टर और दादी. (फिर मैने तोड़ा सोच कर, अनिरुढ़ भाई की आँखों में देखते हुए कहा) और हा, मम्मी भी आने वाली है.
मेरी आवाज़ में एक अजीब सी शरारत थी, जैसे मैं उसकी रिक्षन देखना चाहता था. मम्मी का नाम सुन कर अनिरुढ़ भाई के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गयी. उसने एक पल के लिए अपनी नज़र मुझ पर से हटा कर हवा में घुमाई, जैसे मम्मी को इमॅजिन कर रहा हो. उसकी आँखों में अब पहले से ज़्यादा चमक थी, और एक नया सा इरादा दिख रहा था.
अनिरुढ़ (अपनी एग्ज़ाइट्मेंट च्चिपते हुए): अछा? बारात में तो मज़ा आएगा. तुम लोगों की तरफ बारात कैसे होती है? यहाँ तो ढोल-नागरे और नाच-गाना बहुत होता है.
मैं: हा, यहाँ भी वैसे ही होती है, फुल धमाल.
अनिरुढ़: कौन से टाइम की है बारात?
मैं: अभी टाइम कन्फर्म नही है, बस रात को ही होगी.
अनिरुढ़: और तुम लोग कैसे जाओगे?
मैं: हम तो कार से जेया रहे है, चाचा के साथ.
अनिरुढ़: ह्म. मैं तो सोच रहा था दोस्तों के साथ बस से ही चला जौ, अकेले जाने का मूड नही था.
मैं: तो चल, अब चलेगा क्या? जब सब जेया रहे है.
अनिरुढ़ (उसकी आवाज़ में अब पक्का इरादा था, उसकी एग्ज़ाइट्मेंट सॉफ थी): हा, ठीक है. मैं भी पक्का आ रहा हू. फाइनल टाइम कन्फर्म करना, ठीक है?
मैं: ठीक है, मैं तुझे टाइम कन्फर्म करता हू.
मैं जब घर पर आया तो चाचा से पूछा: आप लोग कैसे जेया रहे हो?
चाचा: हम तो कार से जेया रहे है.
मैं: ठीक है, मैं तो बस में आ रहा हू. सब दोस्तों के साथ, और (मम्मी की तरफ देखते हुए) अनिरुढ़ भाई भी आ रहे है तो उनको कंपनी देने के लिए बस में ही जाना पड़ेगा.
मेरी बात सुन कर, मम्मी की आँखें चमक गयी. उन्होने सब के सामने तोड़ा ड्रामा किया: कोई नही जेया रहा, तो मैं जेया रही हू. हम किसी के यहाँ नही जाएँगे तो वो हमारे यहाँ कौन आएगा?
मम्मी की इस बात से मैं कनफॉर्म हो गया की अनिरुढ़ भाई के लिए वो जेया रही है. दोनो के अंदर एक-दूसरे के लिए कुछ तो चल रहा था. मम्मी का वो बहाना, और अनिरुढ़ भाई की मम्मी के नाम पर वो चमक और उनका बदला हुआ टोने, सब कुछ क्लियर हो रहा था.
बारात जाने का टाइम हो गया था. चाचा, दादी , मम्मी और उनकी बेटी कार में निकालने वाले थे. जब मम्मी अपने कमरे से बाहर आई, उनको देख कर एक पल के लिए साँस थम सी गयी. उन्होने गहरे रानी पिंक कलर की मुलायम जोर्जेट सारी पहनी थी. पतला फॅब्रिक उनके भरे हुए जिस्म पर चिपक रहा था, उनके उभरे हुए बूब्स और गोल चुततादों का हर कर्व सॉफ दिखा रहा था.
ब्लाउस उनका डीप नेक का था, जिसमे उनकी मस्त क्लीवेज झाँक रही थी. कमर पर हल्का सा घग्रा कट सारी को और भी सेक्सी बना रहा था, उनकी पतली कमर को एक्सपोज़ कर रहा था. उनकी गोरी, चिकनी स्किन सारी के ट्रॅन्स्ल्यूसेंट फॅब्रिक से और भी चमकती हुई लग रही थी.
उन्होने हल्का मेकप किया था, आँखों में काजल और होंठो पर लाइट लिपस्टिक. उनके बालों का जुड़ा बना हुआ था, जिसमे दो-टीन गजरे के फूल लगे हुए थे, जो उनकी नज़ाकत को और बढ़ा रहे थे. कानो में छ्होटे-छ्होटे इयररिंग्स और गले में पतला सा सोने का हार उनके लुक को कंप्लीट कर रहा था.
मम्मी उस मौसम में भी एक-दूं फ्रेश लग रही थी. उनकी हर आडया में एक च्छूपी हुई सेक्सी अपील थी, जो शायद पहले मैने कभी नोटीस नही की थी. आज वो बिल्कुल अलग लग रही थी – हॉट और डिज़ाइरबल. उनको देख कर लग रहा था जैसे वो किसी को ख़ास कर अट्रॅक्ट करने के लिए रेडी हुई है.
मैं, अनिरुढ़ भाई, और बाकी के सब दोस्त बस से बारात में जेया रहे थे. रास्ते में अनिरुढ़ भाई मुझसे पूछने लगे-
अनिरुढ़ भाई: घर से कौन-कौन आने वाला है?
मैं: चाचा, छ्होटी सिस और दादी का तो कन्फर्म्ड है. पर मम्मी का फिक्स नही था. शायद वो नही आएँगी तो दादी के साथ कोई और लेडी आएँगी.
मेरी बात सुन कर अनिरुढ़ भाई के होश उडद गये. उसका चेहरा एक-दूं उतार गया. उसकी आँखों में जो चमक थी, वो पल भर में गायब हो गयी. वो एक-दूं चुप हो गया, जैसे उसने कुछ ग़लत सुन लिया हो. मैं जान-बूझ कर उससे मस्ती कर रहा था. उसको इस तरह निराश देख कर मुझे थोड़ी हस्सी भी आ रही थी.
जब बारात पहुँची, हम सब बस से नीचे उतरे. मेरी नज़र मम्मी को ढूँढ रही थी. थोड़ी देर में, मम्मी कार से उतार रही थी.
अनिरुढ़ भाई की नज़र भी मम्मी पर पड़ी. उनको देखते ही उसका उतार गया चेहरा एक-दूं से खिल उठा. उसकी आँखों में वही पुरानी प्यास और चमक वापस आ गयी. उसने उस दिन एक नीट्ली टेलयर्ड डार्क ब्लू सूट पहना हुआ था, जो उस पर बहुत अछा लग रहा था. अनिरुढ़ भाई मम्मी को एक तक देखता रहा, उसकी नज़रें उनके हर कर्व पर ठहर रही थी. उसकी आँखों में मम्मी को देख कर ऐसी हवस थी, जैसे वो उनको यही छोड़ना चाहते हो.
अब आयेज क्या हुआ वो मैं आपको अगले पार्ट में बतौँगा. आपको स्टोरी अची लगी हो तो मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे.