सेक्स कहानी अब आयेज-
अब हॉल में बचे थे राजेश अंकल और विनोद अंकल. दोनो ने एक-दूसरे की तरफ देखा और हस्स रहे थे.
राजेश अंकल बोले: “अर्रे वाह… आज तो असली मज़ा आने वाला है यार. दोनो भाभी अपने-अपने पति छ्चोढ़ उनके दोस्तों के साथ बेडरूम में चुदाई करवा रही है.”
विनोद अंकल ने सिगरेट जलाते हुए कहा: “साली दोनो पटाखा है… अशोक (पापा) वाली मस्त मलाई और एक सतीश (चाचा) वाली फुल टाइट आइटम. अब देखना कौन पहले तक कर बाहर आता है, अनिल या महेश.”
फिर दोनो एक साथ हस्स पड़े.
राजेश अंकल ने नॉटी टोने में बोला: “बस यार… हम लोगों के लिए भी तोड़ा चान्स बचा के रखे. नही तो सारा मज़ा ये दो दोस्त ही ले जाएँगे.”
विनोद अंकल ने अपने ग्लास का सीप लेते हुए कहा: “अर्रे टेन्षन मत ले… साम तक टाइम है. जब दोनो गरम हो चुकी होंगी ना… तब हुमको भी बुलाएँगी. तब असली मज़ा शुरू होगा.”
और दोनो एक-दूं हेस्ट हुए बेडरूम्स की तरफ देखने लगे, जैसे अब बस अपनी बारी का इंतेज़ार कर रहे हो. मुझे अब भी यकीन नही हो रहा था की मम्मी और चाची पापा के दोस्तों के साथ ऐसे चुदाई करवा सकती है. मेरा दिल और दिमाग़ दोनो इस बात को आक्सेप्ट नही कर पा रहे थे.
मैं धीरे-धीरे खिड़की के पास गया. खिड़की थोड़ी सी खुली थी, और अंदर की आवाज़े मुझे क्लियर्ली सुनाई दे रही थी. मैने धीरे से देखा… और मेरी साँसें रुक सी गयी.
अनिल अंकल मम्मी के होंठ ज़ोर से चूस रहे थे, जैसे उनकी सारी प्यास वहीं से बुझ रही हो. मम्मी ने भी आँखें बंद करके उनके लिप्स को अपने लिप्स से पकड़ लिया, बेचैनी से उन्हे वापस चूसने लगी. हर किस के साथ मम्मी के होंठ से हल्की सी “म्म्मह…आहह” की आवाज़ निकल रही थी.
सारी के पल्लू को अंकल ने एक झटके में खींचा. अंकल के हाथ धीरे-धीरे मम्मी के ब्लाउस पर घूमने लगे. एक पल बाद उनके उंगलियों ने मम्मी के बूब्स को दबाया. मम्मी झटके से हिल गयी, लेकिन अगले ही पल उन्होने खुद अपना बदन उनकी तरफ और झुका दिया.
धीरे-धीरे मम्मी का ब्लाउस का हुक खुल गया. सफेद ब्रा के अंदर से उनके गोल-गोल बूब्स उभर आए. अंकल ने बिना देरी किए अपना मूह वहाँ रख दिया, और मम्मी ज़ोर से आहें भरने लगी-
“आहह अनिल… रूको तोड़ा… कहीं भागी नही जेया रही…”
लेकिन उनकी आवाज़ में ना तो रुकावट थी, ना माना करने का इरादा — सिर्फ़ बेचैनी और सुकून मिला कर रखने वाली ख्वाहिश थी.
अंकल ने मम्मी के बूब्स को दोनो हाथो में दबा लिया और उन पर अपनी जीभ घूमने लगे.
मम्मी के मूह से निकला: “हाआह… बस करो अनिल… तुम तो मुझे पागल बना दोगे…”
उनके सुरीली आहों ने पूरा कमरा मदहोश कर दिया था. मम्मी की सारी और ब्लाउस नीचे गिरा हुआ था, अब वो सिर्फ़ पेटिकोट में थी. अंकल ने उनके होंठ वापस पकड़ कर किस किया, इस बार और भी गहरा और लंबा. मम्मी ने भी उनकी गर्दन कस्स के पकड़ ली और किस में खो गयी.
फिर अंकल नीचे झुक गये और मम्मी का पेटिकोट उठा कर उनकी नंगी जांघों को चूमने लगे. मम्मी का बदन काँप उठा. उनके मूह से निकला-
“हाआहह… बस करो… तुम्हे तो हमेशा जल्दी रहती है…”
लेकिन उसी वक़्त मम्मी ने खुद ही अपना पेटिकोट नीचे कर दिया, जैसे उनके अंदर का रोका हुआ जुनून अब बाहर आना चाह रहा हो. अंकल ने मम्मी की पनटी एक झटके में खींच कर निकाल दिया और अपनी जीभ उनकी छूट पर रख दी और मम्मी की साँसें तेज़ हो गयी. वो अपनी कमर हिला-हिला कर और भी ज़्यादा फील लेने लगी.
मम्मी की आवाज़ निकल रही थी: हाआह… और… तोड़ा और… वा… कितना मज़ा आ रहा है…”
कुछ देर बाद मम्मी ने ही अंकल का सिर अपने पैरों के बीच दबा लिया. और कुछ समय बाद मम्मी का जिस्म काँपने लगा और मम्मी ने एक झटके से अनिल अंकल का सर अपनी छूट से डोर कर दिया और मुस्कुराने लगी.
अंकल ने अपना पंत खोला और अपना मोटा लंड बाहर निकाला. मम्मी की आँखों में चमक आ गयी, वो झुक कर उससे अपने होंठो में ले गयी. एक एक बार वो पूरा अंदर तक ले रही थी, फिर छ्चोढ़ कर गंदी सी आवाज़ के साथ वापस चूस रही थी.
मम्मी ने उनकी तरफ देखते हुए कहा: “कॉंडम लगाओ… आज मैं तुम्हे पूरी तरह से चूड़ना चाहती हू…”
अंकल ने तुरंत कॉंडम खोला और लंड पे चढ़ा लिया. मम्मी बिस्तर पर पलट गयी, अपनी छूट को टायर कर के खोल दिया. और अगले ही पल अंकल ने एक झटके में अपना लंड मम्मी की छूट में घुसा दिया.
“आआआआह्ह्ह्ह्ह… अनिल्ल्ल…,” मम्मी ज़ोर से चिल्लाई.
अंकल ने मम्मी के अंदर घुसते ही एक झटके से स्टार्ट लिया. मम्मी के होंठ खुले, और उनकी आहें हर एक धक्के के साथ तेज़ हो गयी. “हाआह… अनिल… बस… और…” उनके मूह से निकलता जेया रहा था.
अंकल तेज़-तेज़ लंड घुसा रहा था और मम्मी अपनी कमर हिला रही थी, और कहती थी “पूरा अंदर… मुझे ज़ोर से छोड़ो… हाआहह…”
अंकल ने एक हाथ से उनके बूब्स को दबाया और उनके होंठ चूमे. मम्मी के होंठ से हल्की सी चीख निकली, और उनके सीने की हिलती आडया हर आंगल से अंकल के लिए इर्रेसिस्टिबल थी.
मम्मी ने अपने हाथ से अंकल का सिर पकड़ कर और ज़ोर से घुमाया, और उनकी आँखों में जो चमक थी, वो पुर लस्ट और कंट्रोल का मिक्स था. हर धक्के के साथ उनकी छूट टाइट और माय्स्ट फील कर रही थी.
अंकल ने एक तेज़ झटका दिया और पूरा लंड मम्मी की छूट में घुस गया, मम्मी की आहें और तेज़ हो गयी. “आह… अनिल… मज़ा आ रहा है और… पूरा अंदर तक…”
अंकल के होंठ उनके सीने से नीचे गये और उनकी निपल्स को चूमा और काटा, हर चुंबन और टच के साथ उनकी बॉडी और भी गरम होती गयी. उनकी मोन्स अब लाउड और अनकंट्रोल्ड हो गयी थी.
हर धक्के के साथ मम्मी की गांद और कमर का कर्व अंकल के लिए और ज़्यादा टेंप्टिंग लग रहा था. मम्मी की आँखें बंद थी, सिर झुका हुआ, और मोन्स के साथ उनके चेहरे पर एक बोल्ड और लस्टी एक्सप्रेशन था.
“हाआहह… और… और…,” मम्मी के मूह से निकला. अंकल ने उनका बॉडी होल्ड किया और तेज़-तेज़ धक्के मारे. मम्मी के पैर भी हिलते हुए उनके कमर के आस-पास लपेट गये, जैसे उनका कंट्रोल भी ग्रॅजुयली फैल हो रहा हो.
मम्मी की आहें और तेज़ हो गयी थी. “हाआहह… और… और… पूरा अंदर तक…” वो अपने होंठ चबा रही थी और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी.
उन्होने अनिल अंकल की पीठ को ज़ोर से खुरचा. अंकल भी अब पूरी स्पीड में धक्के लगा रहे थे. बेडरूम में “ठप, ठप, ठप” की आवाज़ गूँज रही थी. मम्मी के मूह से निकल रहा था, “आह… अनिल… श… मैं… जेया… रही… हू…” उनका जिस्म काँपने लगा और वो एक ज़ोरदार सिसकारी के साथ झाड़ गयी.
अनिल अंकल ने भी उनकी छूट में और दो-टीन तेज़ धक्के मारे और ज़ोर से “आह!” करके मम्मी के अंदर ही झाड़ गये. दोनो हानफते हुए एक-दूसरे पर गिर गये. अनिल अंकल ने अपना लंड मम्मी की छूट से बाहर निकाला और मम्मी की बगल में लेट गये. मम्मी उनकी बाहों में सिमट गयी.
मम्मी ने आँखें खोल कर उनकी तरफ देखा और उनके होंठो पर एक गीली सी मुस्कान थी. उन्होने अनिल अंकल के बालों को सहलाया और उनके सीने पर सिर रख कर लेट गयी. दोनो के नंगे जिस्म एक-दूसरे से चिपक कर बेड पर लेट गये. उनकी साँसें अब भी तेज़ थी.
अनिल अंकल ने आराम से मम्मी की कमर पर हाथ रखा और उन्हे अपनी तरफ खींचा. “वाह सुनीता,” उन्होने धीमी आवाज़ में कहा. “तुम्हे तो बस आज पूरा निचोढ़ ही डाला.”
मम्मी शर्मा कर हस्सी, “अनिल, तुम भी… हमेशा इतनी जल्दी रहती है तुम्हे.”
“जल्दी नही, सुनीता,” अनिल अंकल ने उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा, “ये तो तुम्हारा असर है जो मुझे इतना बेचैन कर देता है.”
मम्मी ने उनके होंठो पर एक हल्का सा किस किया. “बस अब हो गया है तो बाहर जाओ, आपके और दोस्त मुझे छोड़ने के लिए बेचैन होंगे.”
अनिल अंकल ने उनकी बात सुनी और थोड़ी ही देर में मम्मी की बाहों में सोते हुए उनके होंठ चूम लिए. मैं उन्हे ऐसी हालत में देख कर हैरान था. जिस मा को मैं मंदिर की देवी मानता था, वो आज पापा के एक दोस्त से छुड़वाने के बाद दूसरे के लिए तड़प रही थी. मेरा दिमाग़ घूम गया.
मैं खिड़की से ये सब देख कर वहाँ से हट गया. मैं बिल्कुल पागल हो गया था. मेरे दिमाग़ में ढेर सारे सवाल घूम रहे थे. मैं सीधा बाजू वाले कमरे की खिड़की के पास गया, जहाँ मुझे चाची और महेश अंकल को चुदाई देखना था.
मैने धीरे से अंदर झाँका… और जो मैने देखा, चाची बिल्कुल नंगी हो कर बिस्तर पर लेती थी और महेश अंकल उनके उपर झुके थे. महेश अंकल ने उनके पेट पर अपना लंड रखा था और उनकी गांद को सहला रहे थे. महेश अंकल के चेहरे पर एक नॉटी स्माइल थी, और उनके होंठ चाची की गर्दन पर चल रहे थे. चाची की आँखें बंद थी और वो धीमी आवाज़ में आ…आह कर रही थी, जैसे उन्हे बहुत मज़ा आ रहा हो.
महेश अंकल ने चाची की गांद पर हाथ रख कर उसे ज़ोर से दबाया, “चल मेरी रानी, अब बारी तेरी है,” वो धीरे से बोले. “खोल अपनी टाँगें, मैं तुझे और तड़पाना नही चाहता.”
चाची ने भी धीरे से अपनी टाँगें फैला दी. महेश अंकल ने अपना लंड उनकी छूट पर रखा और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया. चाची ज़ोर से चीख उठी, “अहह… महेस… भैया.. हह…”
महेश अंकल ने अब तेज़ धक्के लगाना शुरू कर दिया. चाची भी अपनी गांद उठा-उठा कर उनका साथ दे रही थी. दोनो के जिस्म से “ठप ठप ठप” की आवाज़ आ रही थी. चाची की आँखों में अब दर्द नही, बल्कि एक अलग ही हवस की चमक थी. वो अपने होंठ चबा रही थी, “और… श आराम से!”
चाची उनको धीरे से करने को बोल रही थी पर महेश अंकल उनकी हार्ड चुदाई कर रहे थे. कुछ देर बाद, महेश अंकल ने अपना लंड चाची की छूट से बाहर निकाला और चाची को डॉगी स्टाइल में होने के लिए कहा. चाची भी खुशी से तैयार हो गयी. वो घोड़ी की तरह हो गयी, और महेश अंकल ने उनके पीछे आ कर उनकी गांद को सहलाना शुरू कर दिया.
“अब तेरी गांद की बारी है, मेरी रानी,” वो बोले. “मैं आज तेरी गांद का भोसड़ा बना दूँगा.”
चाची ने बस एक तिरछी स्माइल दी. महेश अंकल ने अपना थूक उनकी गांद पर लगाया, और धीरे-धीरे अपना लंड उनकी गांद में घुसना शुरू कर दिया. चाची ज़ोर से चीखी, “आह… भैया… आराम से… दर्द हो रहा है.”
“दर्द नही, मेरी रानी,” महेश अंकल ने हस्स कर कहा. “ये तो सज़ा है.”
महेश अंकल ने एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया. महेश अंकल ने चाची की गांद में धक्के लगाना शुरू कर दिया. चाची की आँखों से आँसू निकल गये, लेकिन उनके चेहरे पर अब भी एक अजीब सी खुशी थी. महेश अंकल ने अब तेज़ धक्के लगाना शुरू कर दिया. चाची भी अब ज़ोर-ज़ोर से “आह, आह” कर रही थी.
उन्होने महेश अंकल से हानफते हुए पूछा, “आज आपको क्या शौंक हुआ गोली खा कर चुदाई करने का?”
महेश अंकल ने एक तेज़ धक्का मारा और हस्स कर कहा, “पिछली बार मेरा जल्दी निकल गया था ना, तो तू मुझे ताना मार रही थी. रंडी, आज मैं तेरी सारी गर्मी निकल दूँगा.”
महेश अंकल के मूह से चाची के लिए “रंडी” शब्द सुनना मुझे अजीब लगा. वो चाची की गांद में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे. चाची अब दर्द से नही, बल्कि मज़े से चीख रही थी, “आहह… महएस्स्स… आअहह… और तेज़… मुझे और दर्द दो…”
महेश अंकल ने उनकी गांद को दोनो हाथो से पकड़ कर और भी तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए. चाची की सिसकारियाँ पुर कमरे में गूँज रही थी. उनकी गांद पर अब लाल निशान पद गये थे. “आ… महएस्स्स… मैं… झाड़… रही… हू,” चाची ने कहा और उनका जिस्म काँपने लगा. महेश अंकल ने भी दो-टीन तेज़ धक्के मारे और चाची की गांद में ही झाड़ गये.
इसके आयेज क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पढ़िएगा.