सेक्स कहानी अब आयेज से-
अंदर हॉल में मम्मी और चाची सोफा पर बैठी थी. और उनके सामने सिर्फ़ महेश अंकल ही नही, बल्कि पापा के और कुछ दोस्त भी बैठे थे – सुरेश अंकल, अनिल अंकल, विनोद अंकल और राजेश अंकल.
ये सभी हमेशा घर आते-जाते रहते थे. पर अब उन सब को एक जगह देख कर मुझे समझ नही आ रहा था की ये सब यहाँ कर क्या रहे थे.
मम्मी ने आज क्रीम ऑफ-वाइट कॉटन सारी पहनी थी, जिसमे रेड और ब्लॅक मधुबनी स्टाइल का बॉर्डर था. सारी का फॅब्रिक हल्का और सॉफ्ट था, जो उनके फेर स्किन पर और भी निखरा हुआ लग रहा था. रेड पोल्का डॉट ब्लाउस डीप नेकलिन के साथ उनके भरे और हॉल सीने को और उभर रहा था.
सारी का पल्लू मम्मी ने एक-दूं नीट्ली संभाला हुआ था. लेकिन जब भी वो हल्का सा सरकता, तो उनकी पतली कमर और गोल नेवेल चमक जाती थी.
इस सारी लुक में मम्मी एक-दूं ट्रडीशनल और ग्रेस्फुल लग रही थी. पर उनके कुवर्व्स और स्माइल में एक च्छूपा हुआ सेडक्टिव चर्म था. जो नज़र हटाना मुश्किल कर रहा था.
>>>>>>>>चाची ने आज ब्राइट पिंक सारी पहनी थी, जिसका हल्का ट्रॅन्स्परेंट फॅब्रिक उनके डस्की स्किन टोने पर और भी खूबसूरत लग रहा था.
सारी के अंदर उनका ग्रीन स्लीव्ले ब्लाउस टाइट फिटिंग था, जो उनके 34-28-36 फिगर को और हाइलाइट कर रहा था. बैठते वक़्त सारी के प्लीट्स थोड़ी उपर हो गयी थी, जिसमे उनकी टोंड जांघों का कर्व हल्का सा नज़र आ गया. उस मोमेंट में उनका लुक इतना सेनुयल था की मेरी नज़र उनपे टिक कर रह गयी.
दोनो ने सिंदूर, बिंदी और चूड़ियाँ पहनी थी, बिल्कुल एक संस्कारी बहू की तरह. लेकिन उनकी सजावट देख कर मुझे कभी समझ नही आया की ये दोनो सत्संग के लिए नही, बल्कि कुछ और ही ख़ास वजह से इतनी साज-धज कर घर से निकलती थी. उनका पूरा लुक ऐसा था जैसे वो किसी मंदिर के लिए जेया रही हो, पर असल बात तो सीक्रेट महफ़िल के लिए दोनो घर से झूठ बोल कर निकली थी.
इतने में विनोद अंकल ने मम्मी की तरफ देख कर बोला,
“वाह भाभी जी… आज तो आप बिल्कुल फूल जैसी खिल रही हो, देख के मॅन मीठा हो गया.”
मम्मी शर्मा के हल्की सी मुस्कान दे दी, पर उस शरमाने में भी एक अलग ही जलवा था जो समझना मुश्किल था. तभी महेश अंकल ने चाची की तरफ देख कर हंस कर बोला, “रेखा भाभी… आज तो आपने इस सारी में बिजली गिरा दी है. संभाल के, वरना हम जैसे आदमियों को करेंट लग जाएगा.”
चाची ने पालक झुका कर बस एक शरारती सी नज़र उनकी तरफ डाली, जैसे उन्हे टीज़ कर रही हो.
मैं ये सब खिड़की से देख कर एक-दूं कन्फ्यूज़ हो गया. घर पे ये दोनो कभी ऐसे रिक्ट नही करती थी, पर यहाँ… जैसे उनका एक अलग ही रूप था.
इतने में सुरेश अंकल हाथ में दारू की बॉटल लेकर आ गये. सब एक्सपेक्ट कर रहे थे की कोई अंकल बॉटल खोलेंगे, पर मेरी मम्मी ने खुद बॉटल ली और अपने नरम हाथो से उसकी सील तोड़ दी. उसके बाद चाची ने बड़े ही आराम से सब के लिए पेग बनाने स्टार्ट कर दिए.
मुझे अपनी आँखों पर विश्वास ही नही हुआ — जो मा और चाची घर पे पूजा-पाठ और व्रत करती थी, आज वो दोनो खुद शराब सर्व कर रही थी.
पहला पेग सब ने आराम से पिया. थोड़ी ही देर में सब अंकल्स तोड़ा खुलने लगे, हँसी–मज़ाक और थोड़ी नॉटी बातें शुरू हो गयी.
विनोद अंकल मम्मी को देख कर बोले, “भाभी जी, आपने तो दारू में भी अपनी मिठास घोला है… एक सीप लेने से लगता है जैसे आप ही के होंठ चूम लिए हो.”
मम्मी ने सिर झुका लिया, पर उसकी आँखों की हल्की सी शरारत भारी चमक मुझे डोर से भी नज़र आई. चाची पहले तोड़ा मुस्कुराइ, फिर झुक कर अपने ग्लास से चुस्की ली और महेश अंकल की तरफ नज़र मिलाई. मा और चाची जो घर पर संस्कार की मूर्ति बनती थी, अब उनका ये रूप अंकल्स के सामने एक-दूं अलग ही खेल दिखाने वाला था.
सभी अंकल के दो-दो पेग हो चुके थे. हँसी–मज़ाक और शरारत भारी बातें अब थोड़ी नॉटी लाइन लेने लगी थी. विनोद अंकल मम्मी के पास आ कर उनका ग्लास भरते हुए बोले, “अर्रे भाभी जी, ज़रा सीधा करके ग्लास पकड़िए… वरना आपके हाथ की नर्मी में पूरा शराब बह जाएगा.”
उनकी उंगली मम्मी के हाथ को हल्की सी ब्रश कर गयी. मम्मी ने तोड़ा साँस लेते हुए मुस्कान दी और आँख झुका ली.
>सुरेश अंकल तब चाची की तरफ बढ़े, उनके ग्लास में पेग डालते हुए बोल पड़े, “भाभी, आप तो पेग बनाते-बनाते हमे भी पी लेने पर मजबूर कर देती हो.”
चाची हँसी दबा गयी, और अपना पल्लू तोड़ा सीने पर अड्जस्ट करते हुए उनका ग्लास वापस पकड़ा दिया. इतने में महेश अंकल ने अपने ग्लास में एक छ्होटी सी टॅबलेट डाली. वो टॅबलेट फ़ीज़्ज़्ज़्ज़्ज़ करके घुल गयी. उन्होने सीधा चाची की तरफ देख कर आँख मारी. चाची पहले तो तोड़ा आक्ट करते हुए पलके झुका गयी, फिर हल्की सी मुस्कान दे दी.
मेरा दिल ज़ोर–ज़ोर से धड़क रहा था. “ये वही वियाग्रा की गोली थी जो मेडिकल स्टोर वाले कह रहे थे…”
ये देख कर मेरा कन्फ्यूषन अब शक में, और शक अब पूरी तरह यक़ीन में बदल गया.
अब मुझे पूरी तरह यकीन हो गया की यहाँ कुछ और ही खेल चल रहा है.
सभी अंकल अब मम्मी–चाची की ब्यूटी और अदाओं की ओपन्ली तारीफ कर रहे थे.
“भाभी जी, आपकी आँखों में डूबने का मॅन करता है.”
“अर्रे, इनकी मुस्कान में ही नशा है यार.”
“क्या फिगर बनाया है भगवान ने, सारी भी तुमसे ही रोशन हो गयी है.”
मम्मी और चाची दोनो पहले शर्मीला आक्ट कर रही थी, लेकिन उनकी आँखों में एक अलग चमक थी, जैसे उन्हे ये सब सुनना भी पसंद आ रहा था.
मैं खिड़की के पीछे खड़ा, हर एक बात सुन रहा था. मेरा दिमाग़ कहता था की भाग जेया. लेकिन मेरा दिल चाहता था की और देखु, और समझू की आयेज क्या होने वाला था.
मम्मी ने तोड़ा नखरे वेल, लेकिन नॉटी अंदाज़ में कहा, “अब बस भी कीजिए, कितनी दारू पिएँगे आप लोग? आप लोगों का हॅंगओवर भी तो हमे ही संभालना पड़ेगा ना.”
उनका डाइलॉग सुन कर सब अंकल एक-दूं ज़ोरदार हँसी में फूट पड़े. अनिल अंकल मम्मी की तरफ देखते हुए बोले, “अर्रे भाभी जी, आप संभाल लो तो फिर तो हम चाहे जितना मर्ज़ी पिए. हमे तो कोई टेन्षन ही नही रहेगी.”
उनकी बात में एक-डबल मीनिंग था, और मम्मी ने शरमाते हुए पल्लू से मूह च्छूपा लिया. तभी राजेश अंकल चाची की तरफ झुक कर बोले, “वैसे भाभी, आप तो सिर्फ़ पेग ही नही, आदमी का दिल भी बना देती हो. आपके हाथ का पेग पी कर लगता है जैसे शराब के साथ तोड़ा प्यार भी मिल रहा हो.”
चाची ने उनकी बात पे हल्की सी सुलझी हुई हँसी छ्चोढी और उनका ग्लास दोबारा भर दिया. उनकी उंगली राजेश अंकल के हाथ को बस हल्की सी टच कर गयी, और दोनो की आँखों ने एक-दूसरे को समझने वाला इशारा कर लिया.
माहौल अब पुर शराबी–मस्ती से आयेज बढ़ कर तोड़ा इंटिमेट लगने लगा था. सब अंकल की आँखें मम्मी और चाची के हॉट फिगर पर घूम रही थी. सारी के पल्लू और चूड़ियाँ अब उनके बहू वाले रूप के साथ एक च्छूपा हुआ अट्रॅक्षन भी दिखाने लगी थी.
मैने खिड़की से देखा, मम्मी अपना पेग उठा कर सीधा लिप्स से सीप कर रही थी. उनकी लिपस्टिक का निशान ग्लास पर लग गया था, जिसे देख कर अनिल अंकल ने बोला, “बस, अब तो मेरा मॅन कर रहा है उसी जगह से पी लू जहाँ आपके होंठो का निशान है.”
मम्मी ने आँखों से उन्हे घूर कर देखा, लेकिन उनकी आँखों में भी एक मस्ती चमक रही थी.
मम्मी ने अब अनिल अंकल का हाथ पकड़ कर बेडरूम की तरफ कदम बढ़ाए, पुर हॉल में एक-दूं सन्नाटा सा च्छा गया. सिर्फ़ अंकल लोग एक-दूसरे की तरफ स्मर्क करते हुए देखने लगे.
चाची ने पीछे से मुस्कुराते हुए बोला, “एंजाय करना भाभी.”
उनकी आवाज़ में जो छेड़खानी और ताना था उसने मेरी साँसें तेज़ कर दी. मेरा दिमाग़ अभी भी शॉक में था की मम्मी ऐसे ओपन्ली अनिल अंकल के साथ बेडरूम जेया रही है.
फिर महेश अंकल ने चाची की तरफ देख कर बोल्ड अंदाज़ में कहा, “तो क्या… अब हम भी चले जानेमन?”
और उन्होने अपना हाथ आयेज बढ़ाया. चाची पहले तोड़ा नखरे दिखाते हुए मुस्कुराइ. फिर सिंदूर से सजे हुए सर के पल्लू को तोड़ा संभालती हुई उनका हाथ पकड़ लिया. फिर बिना कुछ कहे वो भी बेडरूम की तरफ चली गयी.
इसके आयेज क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पता चलेगा. स्टोरी अची लगी हो तो मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे.