मेरी पत्नी यही तो चाहती थी

मैंने देखा कि दीप की गाण्ड का छेद खुल गया था.. तो फिर मैंने उसे कुतिया बनाया और फिर लण्ड को गाण्ड के छेद पर टिका दिया।

थोड़ा सा अन्दर घुसेड़ने के बाद पूरी ताकत के साथ बाकी का हिस्सा अन्दर तक डाल दिया। मैं इतनी तेजी और बेरहमी के साथ धक्के लगा रहा था कि वो सह नहीं पा रही थी।

बस 8-10 धक्कों के बाद ही वो संतुलन खो बैठी और और फिर गिर गई। लेकिन मैंने उसे फिर से कुतिया बनाया और लगातार धक्के मारने में लगा रहा।
वो जितना चीखती चिल्लाती.. मुझे उतना ही आनन्द आता।

हर 3-4 झटकों के बाद स्केल से उसके चूतड़ पर मारता रहा.. स्केल से मारने उसकी चीख और बढ़ जाती.. तो मेरा भी जोश और बढ़ जाता।

काफी देर बाद जब मैं झड़ने को आया.. तो मैं उठ खड़ा हुआ और फिर उसको थप्पड़ मार कर मुँह चोदने लगा।

फिर मैंने उसे सीधा लेटाया और 3-4 बार उसकी चूत पर भी हाथ से तेजी से मारे। इसके बाद मैं उसकी दोनों टांगों को उसके कंधे पर ले गया और फिर गाण्ड को मारने लगा।
वो बस दर्द से ‘ऊह्ह्ह्ह्ह.. आआईई.. आह्ह्ह..’ की आवाज निकाल रही थी।

उसे इस पोज़ में चोदने के बाद जब मैं कगार पर पहुँच गया.. तब उसकी दोनों टांगें कंधे पर रख लीं और उसकी गाण्ड मारने लगा।

शायद दीप को भी अंदाज लग गया था.. तो उसने भी कस कर चादर को पकड़ लिया। लगभग 50 धक्कों के बाद मेरा वीर्य निकल गया और सारा रस उसकी गाण्ड में छोड़ दिया।

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पूरा वीर्य निकल जाने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर लेट गया। वो भी चादर छोड़कर मुझसे लिपट गई और और टांगों से मेरी कमर को जकड़ लिया।

वो भी तकलीफ़देह सेक्स चाहती थी
दीप दर्द और आनन्द भरी सिसकारियाँ ले रही थी।

कुछ मिनट बाद उसके ऊपर पड़े रहने के बाद मैं उसका दूध पीने लगा। थोड़ी देर बाद मैं सूसू करने चला गया और आकर देखा कि वो अब तक नंगी ही बिस्तर पर पड़ी हुई थी।

मैं उसे किस करने लगा.. वो भी मेरा साथ देने लगी।

मैं इतना व्यस्त हो गया कि पता ही चला मेरा हाथ कब फिर से उसकी चूत और मम्मों पर पहुँच गया और मेरा मन फिर से एक बार और उसे चोदने को हुआ.. तो उसने फिर से रोक दिया।

मैंने फिर उसे गाल पर एक थप्पड़ मारा और बोला- कैसे नहीं चुदेगी।
लेकिन वो नहीं मानी।

हम फिर किस करने लगे और मैं एक हाथ से उसकी चूत को मसलने लगा। उसने रोकने की कोशिश भी लेकिन सफल नहीं हो पाई।

किस करते हुए मैं उसके निप्पल को भी मसल रहा था। वो फिर से गर्म होने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी।

मैंने उसकी चूत चाटी और सारा रस पी गया.. वही प्रक्रिया दोहराई भी.. लेकिन इस बार मैंने स्केल के साथ-साथ बेल्ट से भी उसके चूतड़ की पिटाई करते-करते.. गाण्ड मारी।

मैंने सिर्फ चूतड़ ही नहीं मम्मों पर भी हल्के-हल्के बेल्ट चलाये थे। उसके चूतड़ पर शायद ही कोई जगह बची हो जहाँ पर स्केल या बेल्ट के निशान नहीं बने हों।

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इस बार जब मैं झड़ा.. तो वो बिल्कुल पस्त हो चुकी थी.. दर्द से बहुत जोर से कराह रही थी।
वो फिर सूसू करने चली गई।

मेरा मन एक बार और उसे चोदने का हो रहा था.. लेकिन वो बिल्कुल भी इस हालात में नहीं रही। जब वो आई तो उसके बाद मैं भी सूसू करने चला गया।

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