मेरी दीदी का जनम-दिन गिफ्ट

उस दिन मैं मेरी राशि दीदी का बर्तडे गिफ्ट लाना भूल गया था. और जब शाम को मैं ऑफीस से लौटा, तब राशि दीदी लाल रंग की चमकदार सारी में किसी अप्सरा जैसी लग रही थी.

वो दौड़ कर मुझसे लिपट गयी. और उसके सुंदर नुकीले बूब्स मेरे सीने पर दबने लगे. मेरा लंड खड़ा हो गया, पर मम्मी-पापा सब वही थे. मैने खुद को कंट्रोल कर लिया और राशि को बताया की मैं गिफ्ट लाना भूल गया था. साथ ही ये वचन भी दिया की इसके बदले वो अभी मुझसे जो चाहे माँग सकती थी. और मैं उसको किसी भी गिफ्ट के लिए माना नही करूँगा.

अगले दिन मौसा जी के निधन का समाचार मिला, और मम्मी-पापा वाराणसी के लिए रवाना हो गये. घर में मैं और राशि दीदी ही रह गये थे. राशि दीदी हमेशा मम्मी के साथ उनके बेड पर सोती थी. मगर आज वो अकेली कमरे में सोने वाली थी.

रात का डिन्नर लेने के बाद मैं अपने बिस्तर पर जेया कर लेट गया. कुछ ही देर में राशि दीदी मेरे कमरे में आई और बोली-

राशि: भैया मुझे मम्मी के बगैर दर्र लगता है. अगर तुम बुरा ना मानो तो मैं आज तुम्हारे पास सो सकती हू?

कुछ सोच कर मैने हा कह दिया. राशि दीदी रेड कलर के कुरती सलवार में सो रही थी. और कुछ ही देर में वो सो गयी. इसके बाद कुछ देर के बाद मुझे भी नींद आ गयी.

करीब रात के दो बजे मेरी आँख खुल गयी, और मुझे अजीब सा एहसास हुआ. मेरी राशि दीदी मेरे बिल्कुल करीब लेती हुई थी. और मेरी पंत की क्लिप और चैन दोनो खुले हुए थे. मैं खामोशी से आँखें बंद किए सोता रहा. मैं राशि दीदी को पता नही चलने देना चाहता था, की मैं जाग गया था.

मैने देखा की राशि दीदी का मुलायम खूबसूरत एक हाथ मेरे लंड को सहला रहा था. और दूसरे हाथ से वो अपने बूब्स को और अपनी छूट को दबाती जेया रही थी. अब उसके मूह से सिसकियों की धीमी आवाज़ भी सुनाई दे रही थी.

मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे. अब दीदी ज़रा नीचे उतरी, और मेरे लंड को प्यार से चूमा. ओह! उसके नरम होंठो के लगते ही मेरे लंड को झटका लगा, और दीदी ने अब मेरे लंड को अपने मूह में समा लिया.

अब मेरे शरीर में एक रोमांच की लेहायर सी दौड़ गयी. मेरे लंड को दीदी ने चूसना शुरू कर दिया. मैं अपने लंड पर मेरी बेहन के मूह का उसकी ज़ुबान का, और पुर मूह का स्पर्श महसूस करते हुए लेता रहा.

कुछ देर में दीदी ने मेरे लंड को ज़ोर लगा कर चूसना शुरू कर दिया, जैसे मेरा लंड कोई आइस कॅंडी हो. और ऐसा लगता था, की मेरी बेहन मेरे लंड से कोई रस्स खींच रही हो. कुछ ही देर में मेरे लंड से गरम वीर्या निकल कर मेरी दीदी के मूह में भर गया.

लेकिन मेरी दीदी तो उसको शरबत की तरह पीने लगी. वो मेरे लंड से निकल रहे वीर्या को खींच-खींच कर पीटी जेया रही थी, और अपने दूसरे हाथ से अपनी छूट सहला रही थी. उसी वक़्त मैं दीदी के सर पर हाथ फेरते हुए बोला-

मैं: दीदी, क्या अकेले ही सारे मज़े लॉगी? मुझे भी तो अपनी छूट का रस्स पीने दो.

ये सुनते ही राशि दीदी दीवानो की तरह मुझसे लिपट गयी, और मेरे होंठ, मेरे गाल, मेरा सीना, मेरा लंड चूमने और चूसने लगी. मानो दीदी को स्वर्ग मिल गया हो. अब मैने मेरी दीदी की कुरती उतार दी, और उसके सुंदर बूब्स को देखते ही मेरा दिल थिरक उठा.

मैने उसकी ब्रा भी निकाल दी, और दीदी के बूब्स को बारी-बारी चूसने लगा. उसके सुंदर होंठो को चूसने चूमने के साथ अब मैने अपनी बड़ी बेहन की सलवार का नाडा खोल दिया, और सलवार खुलते ही एक अजीब सी मीठी महक मुझे मदहोश कर गयी.

मैने मेरी बड़ी बेहन की सलवार उतार दी, और उसकी पनटी पर नज़र पड़ते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गये. मेरी दीदी की छूट बहुत ही सुंदर नज़र आ रही थी. फिर मैने दीदी की पनटी भी निकाल दी.

ओह! क्या खूबसूरत छूट थी. मैं मॅन ही मॅन बोल उठा. और इस वक़्त मेरी बेहन बिल्कुल नंगी मेरे सामने लेती हुई थी. मैं उसके दोनो पैरों के बीच उसकी सुंदर छूट को देख रहा था.

ऐसा लगता था जैसे गुलाब की दो पंखुड़ीयान दिख रही हो. मुझसे अब बर्दाश्त नही हो रहा था. मैने अपने होंठो को दीदी की छूट पर रख दिया, और अपनी दीदी की छूट को चूसने और चाटने लगा. मुझे ये भी पता चल गया था, की मेरी दीदी अभी तक बिल्कुल कुवारि थी.

अब मेरा लंड फूल कर और भी मोटा और लोहे जैसा टाइट हो गया था. साथ ही दीदी की “आहह भैया, बस करो श” जैसी आवाज़े और सिसकियाँ बढ़ती जेया रही थी.

दीदी कुछ ही देर में मुझे अपनी चूत से डोर करने की कोशिश करते हुए बोली-

दीदी: भैया अपना मूह हटा लो जल्दी.

लेकिन मैने दीदी की छूट से मूह नही हटाया. बल्कि छूट को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा. और तभी मेरी बेहन की छूट से एक नमकीन मीठा रस्स मेरे मूह में आया और मेरा मूह मेरी बेहन की छूट के रस्स से भर गया.

अब मेरा लंड बर्दाश्त नही कर पा रहा था. मैने अपने लंड पर दीदी की छूट का रस्स लगाया, और दीदी की छूट के बीच अपने लंड का सूपड़ा रख कर लंड को छूट के अंदर धकेला. लेकिन दीदी की टाइट छूट से मेरा लंड फिसल गया.

मैने दूसरी बार मेरे लंड को दीदी की छूट की दोनो पंखुड़ियों के बीच रख कर ज़ोर से दबा दिया, और दीदी की चीख नकल गयी-

दीदी: आहह भैया! बस करो. मुझे कुछ नही करना प्लीज़!

मैने अपनी जवान बड़ी बेहन की छूट की सील तोड़ दी थी. अब कुछ पल रुक कर मैने फिरसे अपना लंड दीदी की छूट में धकेला. लेकिन अब दीदी रो पड़ी. उसकी आँखों में आँसू आ रहे थे. मेरी बेहन जिसको मैने कभी रोने नही दिया था.

दीदी: भैया, प्लीज़ इसे बाहर निकाल लो प्लीज़.

दीदी रोते हुए बोली. लेकिन अब मेरा लंड दीदी की छूट के अंदर आधा घुस चुका था. मैं ज़रा देर रुक गया, और दीदी से कहा-

मैं: दीदी बस ज़रा सा बर्दाश्त कर लो. फिर तुम्हे भी मज़ा आने लगेगा.

मैने देखा की मेरे लंड पर दीदी की छूट से निकला हुआ खून लगा था, और कुछ कतरे बिस्तर पर भी गिरे थे. मैने एक और धक्के के साथ मेरा पूरा लंड मेरी बेहन की छूट में समा दिया. दीदी की मुत्ठिया भींच गयी थी. आँखों से आँसू आ रहे थे, और वो करहने लगी थी.

दीदी: ऑश मा, बस कर दो भैया.

लेकिन कुछ ही देर में मैने धक्के मारना शुरू कर दिया, और अब दीदी भी शांत हो गयी थी. ये पल मैं कुछ देर महसूस करता रहा, जब मेरी बेहन बिल्कुल नंगी मेरे नीचे लेती हुई थी, और मेरा पूरा लंड मेरी साग्गी बड़ी बेहन की छूट के अंदर समाया हुआ था. एक अलग ही रोमांच था.

कुछ देर के बाद मेरे धक्कों की स्पीड बढ़ गयी, और दीदी मुझे और अपने से लिपटने लगी. मेरा हाथ कभी दीदी के बूब्स को मसलता, तो कभी उसके सुंदर कुल्हों को सहलाता, और मूह से मैं अपनी बेहन के बूब्स को चूस्टा जेया रहा था.

दीदी को भी बहुत मज़ा आने लगा था. आख़िर मुझे मेरे लंड पर दीदी की छूट से निकला गरम पानी का फावरा महसूस हुआ. दीदी अब झाड़ चुकी थी, और कुछ ही पल के बाद मुझे मेरी बेहन पर इतना प्यार आने लगा, की जैसे मेरी दीदी ही मेरे लिए सब कुछ हो.

कभी मैं उसके होंठो को चूस्टा, तो कभी उसको अपनी तरफ ज़ोर से दबा लेता. और तभी मेरे लंड से मेरे वीर्या की एक तेज़ धार मेरी बेहन की छूट में छ्छूती. और मेरी साग्गी बड़ी बेहन की छूट मेरे वीर्या से भर गयी.

मैने मेरी दीदी को ज़ोर से अपनी बाहों में लिपटा लिया, और मेरा लंड पूरा दीदी की छूट के अंदर जेया कर वीर्या की धार पर धार छ्चोढता रहा. आख़िर हम दोनो ही तक गये और कुछ देर मैं दीदी की छूट में अपना लंड रख कर सुंदर एहसास करता रहा.

फिर जब मैने मेरा लंड मेरी बेहन की छूट से बाहर निकाला, तब देखा की मेरी साग्गी बड़ी बेहन की छूट से मेरा वीर्या रिस कर बाहर आने लगा था. (दूसरा हिस्सा बेहन का अनोखा प्यार ) -चंद्रा सागर.

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