मेरी बीवी की चूत की पहली चुदाई

दोस्तो, आज मैं आपके सामने मेरी बीवी का एक सच बताने जा रहा हूँ, जो उसने मुझे शादी के कुछ साल बाद बताया.

हुआ ऐसा था कि जब मैं मेरी बीवी की ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था, तभी उसके मुँह से किसी महेश नाम के आदमी का नाम निकला, तो मैं अचानक से चौंक गया और चुदाई को भूल कर मैं उसके बारे में पूछने लगा.

उसने बड़ी देर बाद मुझे बताया कि महेश उसके मायके का एक लड़का है, जो आज उसे याद आ गया. फिर मेरे ज़ोर देने पर उसने बताया कि उसकी चुत की पहली चुदाई उसी ने की थी.

यह सच्ची कहानी आज उसी की जुबानी बताई हुई थी, जो मैं उसकी तरफ से लिख रहा हूँ.

बात उस दिनों की है, जब मैं 10वीं क्लास में पढ़ती थी और महेश 12वीं में था. हालांकि हम दोनों की उम्र 18 साल थी, मैं किसी कारण से दो क्लास पीछे रह गई थी.
मैं पूरी जवान हो चुकी थी. मेरे मम्मे मेरी जवानी को उभार कर दिखाने लगे थे. चलते वक्त मेरी गांड भी इतनी जबरदस्त मटकती थी कि स्कूल के नई उम्र के लौंडे तो लंड सहलाने ही लगते थे. बल्कि कुछ सीनियर टीचर भी मुझे करीब से महसूस करना चाहते थे. वे सब मुझे ‘बेटा बेटा..’ करके मेरे कंधे पर अपना हाथ रख कर मुझे स्पर्श करके सुख ले लेते थे. मैं इस बात को समझती थी कि इस टीचर की ठरक मुझे सहलाने पर मजबूर कर रही है.

खैर मैं उस लड़के महेश की बात कर रही हूँ, जो मेरे साथ स्कूल में ही पढ़ता था. हमारा घर भी आमने सामने ही था और मुझे पढ़ाई में कोई हेल्प चाहिए होती थी तो मैं बेहिचक उससे हेल्प ले लेती थी. वो भी मुझे हेल्प करता था. इस वजह से ज़्यादातर हम लोग दोपहर में अकेले ही होते थे. शायद वो मुझे पसंद करता था लेकिन उसने मुझसे कभी इस बारे में कुछ नहीं कहा था. मैं भी महेश से बहुत प्रभावित रहती थी और शायद मैं भी मन ही मन उसे पसंद करती थी. लेकिन कोई भी भारतीय लड़की अपनी लाज शर्म के चलते अपने दिल की बात किसी लड़के से नहीं कह पाती है. अपवाद की बात अलग है कि कोई बहुत ही मॉडर्न लड़की हो और वो अपनी मुहब्बत का इजहार पहले ही कर दे.

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खैर.. मेरी और महेश की दोस्ती बहुत पक्की हो गई थी. मेरे घर वाले भी उसके साथ मिलने में मुझ पर कोई पाबंदी नहीं लगाते थे.

एक दिन वो स्कूल नहीं आया तो मैं भी हाफ टाइम में घर आ गई और फिर उसके घर उस से मिलने गई तो वो कंबल डाल कर सो रहा था. उस वक्त उसके घर पर कोई नहीं था. वो सो रहा था, मैंने उसे जगाया और पूछा कि इस वक्त सो क्यों रहे हो?
मेरे पूछने पर उसने बताया कि सब खेत में गए हैं और उसको बुखार था, इसलिए आज वो स्कूल नहीं आ पाया और वो दवाई पी कर सो गया था.
उसने मुझे उत्तर देते हुए मुझसे ही पूछ लिया कि मैं इस वक़्त यहां क्या कर रही हूँ?

तब मैंने उसे बताया कि आज तुम्हें स्कूल में नहीं देखा, तो जी नहीं लग रहा था, इसलिए हाफ टाइम में छुट्टी लेकर घर आ गई.
उसने मुझे थैंक्स कहा और फिर मुझसे एक कंबल और माँगने लगा.
मैंने समझा उसे ठंड लग रही होगी तो मैंने उसे कंबल दे दिया और उसके सिर में मालिश करने लगी.

तभी उसने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा और कहने लगा- मुझे बहुत ठंड लग रही है, प्लीज़ मेरे से चिपक जाओ.. मेरी ठंड दूर कर दो.
पता नहीं मुझे क्या हुआ और मैं भी उसकी बाँहों में समाती चली गई.

फिर उसने भी मुझे कब अपने कंबल में ले लिया.. या कब मैं उसके कंबल में चली गयी.. कुछ पता ही ना चला. मुझे उसका स्पर्श बड़ा ही सुखद लग रहा था, साथ ही मेरे मन में उसके बुखार की चिंता भी थी.

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फिर वो धीरे से मेरे गाल पर हाथ घुमाने लगा और मैं उसकी प्यारी सी गुड़िया बन कर उसकी बाँहों में खेलने लगी. फिर उसने मुझे किस किया और मैं जैसे कहीं खो गयी हूँ.. ऐसा अहसास हुआ. शायद ये पहली बार किसी लड़के के स्पर्श का अहसास था. फिर वो धीरे धीरे मेरी गर्दन से होकर मेरी चूची की तरफ बढ़ रहा था, मैं उसे रोकना चाहती थी.. पर ना जाने मैं किस बंधन में खुद को बाँध चुकी थी. मैं कुछ कर ही नहीं पाई.

उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम मुझे पसंद करती हो?
तो मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं आज मेरे मन की बात उसने मुझसे पूछ ली थी, तब भी मैंने शर्म के चलते कुछ नहीं कहा और खुद को उसकी बांहों में ढीला छोड़ दिया.

वो शायद मेरी मूक सहमति को समझ गया था, इसलिए वो मेरे होंठों को अपने होंठों से चिपका कर चूसने लगा. मेरे बदन में जैसे आग लग गई हो.. मैं तड़प रही थी. इसी बीच वो मेरे ऊपर आ चुका था और उसने मेरी कमीज़ को भी उठा कर मुझे आधी नंगी कर दिया था. फिर उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और मैं भी उसका लंड हिलाने लगी. उसने मेरी चूची को चूसना शुरू कर दिया.

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