चूत सहलाती टीचर को स्टूडेंट ने चोदा

हेलो दोस्तों मेरा नाम ऋतु है, और ये मेरी चुदाई कहानी है. मैं अभी 28 साल की हू. मेरा रंग गोरा और फिगर 34-28-34 है. मैं दिखने में बहुत ही ज़्यादा सुंदर हू. मैं एक प्राइवेट कॉलेज में टीचर हू. इसी कॉलेज में मेरे पापा पहले टीचर हुआ करते थे. उनकी ही जगह पर मुझे पढ़ने का मौका मिला है.

हम लोग देल्ही में रहते है. मेरी अभी शादी नही हुई है. मैं अभी शादी करना भी नही चाहती हू. मैं 1स्ट्रीट एअर के बच्चो को पढ़ती हू. उसमे काफ़ी बच्चे होनहार भी है, और कुछ बच्चे बहुत ही बदमाश भी है. उनमे से एक बच्चा था शशांक. वो अमीर घर का लड़का था, और बहुत ही ज़्यादा शैतान था.

उसे कभी भी पढ़ाई में आचे मार्क्स नही आते थे. मैं हमेशा उसे दांता करती थी, पर वो था की सुधारने का नाम ही नही लेता था. मुझे दो पीरियड्स पढ़ने होते थे. उसके बाद मैं उस कॉलेज में लाइब्ररी में जेया कर अपनी कुछ किताबे पढ़ा करती थी.

पढ़ाई में मैं इतनी बिज़ी रहती थी की कब लंच होता था, मुझे पता भी नही चलता था. लाइब्ररी में मेरे अलावा और कोई नही होता था. मैं अकेले ही लाइब्ररी में पढ़ती थी, और जब भी मेरा मूड तोड़ा चेंज होता तो मैं एक सेक्सी कहानियों की किताब निकाल कर पढ़ने लगती थी.

कहानी को पढ़ते हुए मैं गरम हो जाती थी, तो अपनी छूट में उंगली घुसा कर रगड़ने लगती थी. मैं एक कोने में बैठ कर पढ़ा करती थी, ताकि कोई मुझे देख ना सके. यहीं मेरी डेली की रुटीन थी.

पढ़ने वाले बच्चो के लिए अलग लाइब्ररी थी, जिसमे वो लोग डिस्कशन्स किया करते थे. ये लाइब्ररी टीचर्स के लिए थी, पर टीचर्स को पढ़ने में बहुत ज़्यादा इंटेरेस्ट था नही, तो वो लोग स्टाफ रूम में ही रहते थे. मैं ही केवल इस लाइब्ररी में आती थी.

इसमे उपन्यास और अलग-अलग डॉक्टोवरेट की किताबे हुआ करती थी, जिसे पढ़ने में किसी की कोई भी उम्मीद नही थी. रोज़ की तरह मैं अपना पीरियड ख़तम करके लाइब्ररी में जेया कर उपन्यास पढ़ रही थी, की उसमे मुझे कुछ कांवासना की कहानी पढ़ने पर थोड़ी गर्मी महसूस हुई.

फिर मैने उपन्यास बंद करके सेक्सी कहानी की किताब निकली और चुदाई की कहानियों को पढ़ने लगी. पढ़ते-पढ़ते ना जाने कब मैं अपनी छूट को रगड़ने लगी, और उस कहानी में खो गयी.

तभी किसी ने पीछे से सहसा आ कर मुझे अपनी बाहों में भर लिया. मैं पूरी तरीके से दर्र गयी की कौन था. मुझे पीछे पलटने की हिम्मत नही हो रही थी. वो अपने हाथ को मेरे हाथ से होते हुए मेरी छूट पर ले गया, और एक उंगली को अंदर घुसने लगा. मैं दर्र के मारे काँप रही थी, और वो मेरी गर्दन पर अपने होंठ चला रहा था.

मैं गर्मी महसूस कर ही रही थी. उसे हटाने की मुझे हिम्मत नही हो रही थी, और ना ही देखने की की कौन था. फिर उसने बड़े ही कामुक स्वर में मेरे कान के पास बोला: मेडम आप बहुत ही खूबसूरत हो. मैं आपकी इस खूबसूरती को बड़े दिन से निहार रहा था. पर आज मौका मिला है इस खूबसूरती को भोगने का. बस आप मेरा साथ दे दो.

और ये कहते हुए उसने मेरे गाल को और गर्दन को चूम लिया. उउफफफ्फ़… मैं इस आवाज़ को पहचान गयी. वो बदमाश शशांक था. मैं उसे पीछे धकेलते हुए अपनी सलवार को उपर चढ़ा कर नाडे को बाँधी. फिर सलवार सूट को ठीक करके उसे डाँटने लगी और बोली-

मैं: शशांक तुम्हे शरम नही आती? तुम अपने टीचर के साथ ये सब करना चाहते हो? मैं तुमसे बड़ी हू, और तुम अभी बच्चे हो. तुम जाओ अपनी क्लास में जेया कर पढ़ाई करो.

शशांक बड़ी ही बेशर्मी से हेस्ट हुए मेरे पास आया और मुझे कस्स के बाहों में भर लिया.

फिर बड़े ही कामुक स्वर में बोला: मेडम आप अकेली ये सब करते हुए अची नही लगती. आपको किसी के साथ की ज़रूरत है, और मैं पूरी तरीके से तैयार हू आपका साथ देने के लिए. बस आप एक मौका दे दो.

ये कहते हुए वो मेरे कान के पास मुझे चूम दिया, और मैं मदहोश होने लगी. मेरे मूह से आवाज़ नही निकल रही थी. मैं बहुत ही धीमे स्वर में शशांक से बोली-

मैं: देखो शशांक, ये सब ठीक नही है. कोई देख लेगा तो अनर्थ हो जाएगा. तुम चले जाओ.

शशांक मुझे बाहों में भरे हुए मेरे गाल को चूमते हुए बोला: माँ आप चिंता मत करो, इस लाइब्ररी में कोई नही आएगा. वैसे भी काई दीनो से मैं अकेले ही आपको छूट सहलाते हुए देख रहा था. आज जब मौका पाया तो आपके पास आया हू. आज आपकी सारी ख्वाहिशे मैं पूरी कर दूँगा.

ये कहते हुए शशांक मेरी गर्दन को पकड़ कर मेरे होंठो पर अपने होंठ लगा दिया, और हल्के-हल्के उसे चूसने लगा. मैं भी उसकी मदहोशी में खोने लगी और उसका साथ देने लगी. वो मेरे होंठो को चूम रहा था, और मैं उसके बालों को सहला रही थी.

वो मुझे अपने बाहों में जाकड़ कर रखा हुआ था, और मेरी चुचियाँ उसके सीने से चिपकी हुई थी. हम दोनो की साँसे एक-दूसरे से टकरा रही थी, और एक-दूसरे के होंठ का रस्स एक-दूसरे को रस्स-पॅयन करा रही थी.

शशांक ने मेरे होंठो और गले को चूमने के बाद देर ना की, और मेरा नाडा खोल दिया. नाडा खोल कर मेरी सलवार और पनटी दोनो को नीचे सरका दिया. फिर मुझे बेंच पर बिता दिया, और पैर को फैला कर अपना लंड बाहर निकाला. वो लंड मेरी छूट पर रगड़ने लगा.

मेरी छूट उसके बाहों में जकड़ने की वजह से गीली हो चुकी थी. अब वो मेरी छूट पर रग़ाद कर अपने लंड को मेरी छूट के रस्स से गीला कर रहा था. मेरे होंठो को चूमते हुए मेरे कपड़े के उपर से ही दोनो चुचियों को मसल रहा था.

उसका लंड अब मेरी छूट के रस्स से गीला हो चुका था. उसने मेरी छूट को हल्के से फैलाया, और अपने लंड का धक्का ज़ोर से लगा कर धीरे-धीरे अपने पुर लंड को मेरी छूट में उतार दिया. मैं उसके लंड को अंदर गहराई तक महसूस कर रही थी. उसे अपनी बाहों में जाकड़ कर उसके होंठो को चूस रही थी, और वो मुझे छोड़ रहा था.

उसकी चुदाई से मैं मदमस्त हो गयी थी. वो मेरे सूट के उपर से चुचियों को निकाल कर अपने मूह में लेकर चूस रहा था, और लंड के धक्के को मेरी छूट में मार कर चुदाई कर रहा था. मैं उसके बाल और पीठ को सहला रही थी, और उसके लंड को अपनी छूट में महसूस कर रही थी.

उूुउउफफफफ्फ़ आआहह शशांक सिर्फ़ 1स्ट्रीट एअर में था. पर उसका लंड 7 इंच का था, और बहुत ही ज़्यादा मोटा भी. मेरी छूट में बहुत ही मुश्किल से आ रहा था. मेरी इतनी मस्त चुदाई कर रहा था, की मैं पागल हो रही थी. मैं उसके बालों को सहलाती और अपनी चुचियों को उसके सर को दबा-दबा कर चुस्वा रही थी.

वो अपनी चुदाई का रफ़्तार तेज़ कर दिया, और मेरी छूट में ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगा. मेरी छूट पानी छ्चोढ़ चुकी थी, जिसकी वजह से अब छूट से छाप-छाप की आवाज़ आने लगी थी. साथ ही वो धक्के इतनी तेज़ लगा रहा था, की मेरा पैर से पायल की हल्की-हल्की आवाज़ आने लगी थी.

वो मेरे कोमल होंठो को चूस्टे हुए मुझे छोड़ रहा था. मुझे दर्र भी लग रहा था, की कहीं कोई आ ना जाए. मेरा ही स्टूडेंट आज मेरी छूट को छोड़ कर धान्या कर रहा था. इसी तरह वो मुझे ज़ोर-ज़ोर से छोड़ते हुए मेरे छूट के अंदर अपने गरम माल को छ्चोढ़ दिया. फिर वो मुझसे लिपट गया.

मेरे गर्दन को चूमते हुए मेरे अंदर अपने लंड का पानी छ्चोढ़ रहा था. मैं उसे अपनी बाहों में जकड़ी हुई थी, और उसका पानी लगातार मेरी छूट में गिर रहा था. थोड़ी देर बाद हम दोनो अलग हुए, और मेरी छूट से ढेर सारा पानी निकालने लगा. मैं अपनी पनटी से अपनी छूट को सॉफ की, और पनटी निकाल कर अपनी सलवार को पहन ली बिना पैंटी के ही.

तभी शशांक ने मेरी पनटी को ले लिया और बोला: आपकी ये पनटी अब मेरे पास रहेगी.

मैं मुस्कुराते हुए उसके गाल पर एक चुम्मा दे दी, और बोली: कोई बात नही, तुम रख लो.

और मैं वहाँ से निकल गयी. मैं जब लाइब्ररी से बाहर निकल रही थी, तब लाइब्ररी के गाते पर शशांक के दोस्त खड़े हुए थे. शायद वो दोनो पहरेदारी कर रहे थे. वो दोनो मुझे देखते ही मुस्कुराए. मैं अपना सर नीचे करके वहाँ से अपने स्टाफ रूम में चली गयी.

दूसरे दिन जब मैं क्लास ले रही थी, तब शशांक मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था, और उसके दोनो दोस्त भी साथ ही मुझे देख कर मुस्कुरा रहे थे. पर मैं उन दोनो को इग्नोर करके अपने पढ़ने पर ध्यान दी, और उसके बाद अपना पीरियड ख़तम करके फिर से वहीं लाइब्ररी में जेया कर पढ़ाई करने लगी.

लंच में आज फिर से शशांक मेरे पास आया था. पर मैं उसे माना करने लगी, की कल की चुदाई से मेरी छूट में दर्द था, और रोज़ ये चुदाई संभव नही थी.

शशांक मेरी बात को समझ गया, और वो जब पूरी तरीके से किसी दिन निश्चिंत हो जाता, की लाइब्ररी में कोई नही आ सकता, तब वो मेरे पास आता, और अपने दोनो दोस्तों को लाइब्ररी के गाते पर खड़ा करके मेरी चुदाई कर देता.

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