मेरा सपना और – भाभी की तन्हाई

बात उस समय की है जब मैं नॉएडा में बी.टेक कर रहा था। मैं बिल्कुल नया था इस शहर में और मैंने होस्टल लिया हुआ था। वहीं पर दोस्तों से कन्याओं की काम-प्रवृति के बारे में पूरी जानकारी मिली ! सारे दोस्त होस्टल को सेक्स शिक्षा केंद्र नाम से संबोधित करते थे! वहीं से मैं भी एक सुन्दर सी कन्या के सपने देखने लगा ! इसी बीच मैंने होस्टल छोड़ दिया और नॉएडा में ही एक कमरा सेक्टर 49 में ले लिया ! मैं दूसरी मंजिल पर अकेला रहता था ! नीचे एक परिवार रहता था, भाभी जी उम्र 29 साल और फिगर क्या मस्त था ! देखते ही लार टपक जाये और उनका पति और 5 साल का एक बेटा था ! उनके पति एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में आई टी मैनेजर थे और अक्सर विदेश जाया करते थे !

पहले दिन भाभी को छत देखा जब वो कपड़े सुखाने आई थी। क्या मस्त, लाजवाब सेक्सी लग रही थी, उनको देखते ही मेरा लंड फ़ुफ़कारे छोड़ने लगा और मैं पहले दिन से ही भाभी को चोदने के सपने देखने लगा !

भाभी की चूचियाँ इतनी सेक्सी थी कि देखते ही लंड में पानी आ जाता था। मैं उनको हमेशा ताड़ता रहता था और उनकी प्यारी प्यारी गोल गोल चूचियाँ निहारता रहता था और अपने लंड को समझाता था कि बेटा धैर्य रख, एक दिन जरुर मिलेगी भाभी की चूत चोदने को !

मैं भाभी से बात करने का बहाना ढूंढ रहा था पर कुछ नहीं समझ आ रहा था कि मैं क्या करूँ !! फिर मैं उनको बेटे को एक दिन चोकलेट दिलाने के बहाने बाहर ले गया और धीरे धीरे मैं उससे काफी घुलमिल गया और रोज अपने कमरे में उसे ले आता था फिर भाभी बेटे के बहाने ऊपर आती थी और उससे लेकर चली जाती !

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अब मैं भाभी से बातें करने लगा था और नीचे भी अक्सर क्रिकेट देखने के बहाने चला जाता था जब भी मैं उनके घर में टी.वी देखने जाता वो चाय जरूर पिलाती थी!

एक दिन चाय पीते पीते मैंने भाभी से पूछा- भाभी, भैया अक्सर बाहर रहते हैं तो आपका मन कैसे लगता है इतने बड़े घर में?

भाभी बोली- बस मैं और मेरा बेटा और मेरी तन्हाई !

मुझे लगा कि भाभी तो आसानी से पट सकती है बस थोड़ा सा पहल करने की जरुरत है ! अब तो मैं चुदाई के सपने दिन रात देखने लगा था !

एक दिन भाभी ने मुझे नीचे बुलाया और बोली-मुझे कुछ शॉपिंग करनी है, क्या तुम मेरे साथ चल सकते हो, क्योंकि मेरे बेटा तुमसे हिला हुआ है तो तुम उसे संभाल लोगे !

मैंने मन में कहा- भाभी संभल तो मैं तुम्हें भी लूँगा।

मैंने जल्दी से हाँ कर दी और शॉपिंग करने पास में ही एक मॉल में चले गये ! भाभी ने वहाँ पर दो पैंटी, चार ब्रा और कुछ मेकअप के सामान लिए। मैं सब देख रहा था, इतने में मेरे दिमाग में शरारत आई और मैंने भाभी से पूछा- भाभी ये आपकी ब्रा कितने नम्बर की है?

वो बोली- तुमसे क्या मतलब ? तुम्हें क्या करनी है?

मैं बोला- मुझे लगता है कि ये आपको छोटी पड़ेंगी !

भाभी तपाक से बोली- नहीं ! मेरा साइज़ 34 है और ये ब्रा भी 34 नंबर की ही हैं !

मैं मुस्कुराया और भाभी शरमा गई !

फिर हमने कुछ चाट खाई और काफी सारी मस्ती की। अब तो भाभी मेरे से मजाक भी करने लगी थी, जब भी किसी जोड़े को देखती तो कुछ न कुछ मज़ाक कर देती। मैं भी पीछे हटने वाला नहीं था, तुरंत एक चुलबुला सा जवाब दे देता और भाभी खिल-खिला कर हंस पड़ती !

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इसी बीच माल में ही उनकी एक सहेली मिल गई, वो वहीं पर एक स्टोर में जॉब कर रही थी। भाभी ने उसको घर आने को न्योता दे दिया और उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया।

उसने भाभी से पूछा- भैया कहाँ हैं और ये आपके साथ कौन हैं?

भाभी बोली- वो 15 दिनों के लिए सिंगापुर गये हैं और ये है मेरे घर में ऊपर किराये पर रहता है !

अब तो मेरे मन में एक नहीं दो-दो चूतें मारने के ख्याल आने लगे थे, मेरा लंड मॉल में ही खड़ा हो गया था !

शाम के करीब सात बज चुके थे, मैंने भाभी से बोला- भाभी, अब चलो न ! बहुत तेज़ भूख लगी है और काफी थक भी गया हूँ मैं !

फिर हमने ऑटो किया और घर आ गये।

घर में जाते ही मैं भाभी के बेड पर जाकर लेट गया और बोला- भाभी, आज तो आपने पूरी तरह ही थका दिया !

भाभी बड़े प्यार से बोली- आज तुम खाना यहीं खाना और नीचे ही सो जाना !

इतना सुनते ही मैं ख्वाबों में खो गया और आज रात की चुदाई के सपने देखने लगा !

रात के करीब दस बज चुके थे, हम सबने खाना खा लिया था, उनका बेटा पापा के लिए रो रहा था। भाभी उसे समझाने की कोशिश कर रही थी पर वो मान नहीं रहा था।

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